Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

दुर्बलता

दुर्बलता का संबंध शरीर से नहीं, मन से होता है। इस संबंध में श्री गुरुजी ने अपने जीवन का यह प्रसंग एक बार सुनाया था।
छात्र-जीवन में माधवराव अपने एक मित्र के साथ घूमने गये। एक सिनेमाघर के बाहर बहुत भीड़ देखकर वे रुक गये। पूछने पर पता लगा कि फिल्म तो समाप्त हो गयी है; पर महिलाओं वाले दरवाजे पर दो अंग्रेज खड़े हैं। उन्होंने शराब भी पी रखी है। वहाँ पुलिस भी थी और सिनेमा का प्रबन्धक भी; पर सब उनसे भयभीत थे।
यह देखकर माधवराव ने अपने मित्र से कहा – चलो, हम चलकर उन्हें हटाते हैं। पर वह मित्र भी डर गया। अब माधवराव ने अकेले वहाँ जाकर पहले तो उन्हें अंग्रेजी में डाँटा; पर जब वे नहीं हटे, तो उन्होंने एक का गला पकड़कर जोर से चाँटा जड़ दिया। चाँटा लगते ही उनका नशा उतर गया और वे वहाँ से भाग गये।
श्री गुरुजी कहते थे कि जब मेरे जैसा दुबला-पतला आदमी उनसे भिड़ सकता है, तो क्या इतना बड़ा भारत अंग्रेजों से नहीं लड़ सकता ? वस्तुत: हमारा शरीर नहीं, मन दुर्बल है। अत: पहले उसकी दुर्बलता दूर करना आवश्यक है।

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