Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

लालचकीदुनिया 🌿🌿🌿

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एक दिन गाँव की एक बहू सफाई कर रही थी मुँह में सुपारी थी पीक आया तो उसने गलती से यज्ञवेदी में थूक दिया।
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उसे आश्चर्य तब हुआ जब उसका थूक स्वर्ण में बदल गया।
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अब तो वह प्रतिदिन जान बूझकर वेदी में थूकने लगी और उसके पास धीरे-धीरे स्वर्ण बढ़ने लगा।
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महिलाओं में बात तेजी से फैलती है इसलिऐ कई और महिलाएं भी अपने-अपने घर में बनी यज्ञवेदी में थूक-थूक कर सोना उत्पादन करने लगीं।
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धीरे-धीरे पूरे गाँव में यह सामान्य चलन हो गया।
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सिवाय एक महिला के, उस महिला को भी अनेक दूसरी महिलाओं ने उकसाया, समझाया, अरी ! तू क्यों नहीं थूकती ?
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जी, बात यह है कि मैं अपने पति की अनुमति बिना यह कार्य हर्गिज नहीं करूँगी और जहाँ तक मुझे ज्ञात है वह अनुमति नहीं देंगे।
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किन्तु ग्रामीण महिलाओं ने ऐसा वातावरण बनाया कि आखिर उसने एक रात डरते-डरते अपने पति को पूछ ही लिया।
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खबरदार जो ऐसा किया तो, यज्ञवेदी क्या थूकने की चीज़ है ?
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पति की गरजदार चेतावनी के आगे बेबस वह महिला चुप हो गई पर जैसा वातावरण था और जो चर्चाएँ होती थी, उनसे वह साध्वी स्त्री बहुत व्यथित रहने लगी।
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खास कर उसके सूने गले को लक्ष्य कर अन्य स्त्रियाँ अपने नए-नए कण्ठ-हार दिखाती तो वह अन्तर्द्वन्द में घुलने लगी।
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पति की व्यस्तता और स्त्रियों के उलाहने उसे धर्मसंकट में डाल देते।
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यह शायद मेरा दुर्भाग्य है, अथवा कोई पूर्वजन्म का पाप कि एक सती स्त्री होते हुए भी मुझे एक रत्ती सोने के लिए भी तरसना पड़ रहा है,
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शायद यह मेरे पति का कोई गलत निर्णय है, ओह ! इस धर्माचरण ने मुझे दिया ही क्या है ?
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जिस नियम के पालन से दिल कष्ट पाता रहे उसका पालन क्यों करूँ ? और हुआ यह कि वह बीमार रहने लगी।
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पतिदेव इस रोग को ताड़ गए और उन्होंने एक दिन ब्रह्म मुहूर्त में ही सपरिवार ग्राम त्यागने का निश्चय किया।
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गाड़ी में सारा सामान डालकर वे रवाना हो गए। सूर्योदय से पहले-पहले ही वे बहुत दूर निकल जाना चाहते थे।
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किन्तु ! अरे ! यह क्या ? ज्यों ही वे गाँव की कांकड़ (सीमा) से बाहर निकले ! पीछे भयानक विस्फोट हुआ।
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पूरा गांव धू-धू कर जल रहा था। सज्जन दम्पत्ति अवाक् रह गए।
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अब उस स्त्री को अपने पति का महत्त्व समझ आ गया।
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वास्तव में, इतने दिन गाँव बचा रहा, तो केवल इस कारण, कि उसका परिवार गाँव की परिधि में था।
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धर्मांचरण करते रहें, कुछ पाने के लालच में इंसान बहुत कुछ खो बैठता है। इसलिए लालच से बचें, भजन सिमरण करते रहें।

जय श्री हरि…
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