Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

स्वभाव की आजादी

भयंकर ठंड की एक शाम वृक्ष पर बैठे हंस ने नीचे देखा चुहो का परिवार ठंड में बुरी तरह ठिठुर रहा है। उनके बिलों में पानी भर गया है। हंस को दया आ गई।
उसने जाकर उन प अपने धवल, नर्म, गरम पंख फैला दिए और ठंड से उनकी रक्षा की। चुहों का परिवार बच गया।

सुबह हंस जब उड़ने लगा तो देखा कि……….. यह क्या..? उसके तो पंख ही कुतरे जा चुके थे। अब वह उड़े भी तो कैसे..? हंस कातर भाव से रोने लगा… चिल्लाने लगा…!

आस पास के सारे पशु पक्षी इकट्ठे हुए और वास्तविकता जानकर चुहों के परिवार को धिक्कारने और कोसने लगे।

यह सुन कर चुहों ने कहा –

“कुतरना हमारा स्वभाव है, हमारी पहचान है। हमने क्या गलत किया…? हमारी आइडेंटिटी के साथ जीना हमारा हक है। हमारी आइडेंटिटी की रक्षा होनी चाहिए। हम तो वर्षों से यही करते आए हैं। अब यदि हमारी प्रकृति आप लोगों की समझ में नहीं आ रही हो, तो इसमें हम चुहे क्या करें। हमारी आदत, हमारे स्वभाव को गलत कहना अमानवीय है, अलोकतांत्रिक है। गलती हंस की है।”

सेक्युलरिज्म को सादर समर्पित

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