Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️

*👉🏿अपूर्व सुनो मधुर व्यवहार मौत का रास्ता बदल सकता है 🏵️
🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅
एक राजा था । उसने एक सपना देखा । सपने में उससे एक परोपकारी साधु कह रहा था कि , बेटा ! कल रात को तुम्हें एक विषैला सांप काटेगा और उसके काटने से तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी । वह सर्प अमुक पेड़ की जड़ में रहता है । वह तुमसे पूर्व जन्म की शत्रुता का बदला लेना चाहता है । सुबह हुई । राजा सोकर उठा । और सपने की बात अपनी आत्मरक्षा के लिए क्या उपाय करना चाहिए ? इसे लेकर विचार करने लगा । सोचते – सोचते राजा इस निर्णय पर पहुंचा कि *मधुर व्यवहार से बढ़कर शत्रु को जीतने वाला और कोई हथियार इस पृथ्वी पर नही है ।* उसने सर्प के साथ मधुर व्यवहार करके उसका मन बदल देने का निश्चय किया । शाम होते ही राजा ने उस पेड़ की जड़ से लेकर अपनी शय्या तक फूलों का बिछौना बिछवा दिया ,
सुगन्धित जलों का छिड़काव करवाया , मीठे दूध के कटोरे जगह जगह रखवा दिये और सेवकों से कह दिया कि रात को जब सर्प निकले तो कोई उसे किसी प्रकार कष्ट पहुंचाने की कोशिश न करें । रात को सांप अपनी बांबी में से बाहर निकला और राजा के महल की तरफ चल दिया । वह जैसे आगे बढ़ता गया , अपने लिए की गई स्वागत व्यवस्था को देख देखकर आनन्दित होता गया । कोमल बिछौने पर लेटता हुआ मनभावनी सुगन्ध का रसास्वादन करता हुआ , जगह – जगह पर मीठा दूध पीता हुआ आगे बढ़ता था । इस तरह क्रोध के स्थान पर सन्तोष और प्रसन्नता के भाव उसमें बढ़ने लगे । जैसे – जैसे वह आगे चलता गया , वैसे ही वैसे उसका क्रोध कम होता गया । राजमहल में जब वह प्रवेश करने लगा तो देखा कि प्रहरी और द्वारपाल सशस्त्र खड़े हैं , परन्तु उसे जरा भी हानि पहुंचाने की चेष्टा नही करते । यह असाधारण सी लगने वाले दृश्य देखकर सांप के मन में स्नेह उमड़ आया । सद्व्यवहार , नम्रता , मधुरता के जादू ने उसे मंत्रमुग्ध कर लिया था । कहां वह राजा को काटने चला था , परन्तु अब उसके लिए अपना कार्य असंभव हो गया । हानि पहुंचाने के लिए आने वाले शत्रु के साथ जिसका ऐसा मधुर व्यवहार है , उस धर्मात्मा राजा को काटूं तो किस प्रकार काटूं ? यह प्रश्न के चलते वह दुविधा में पड़ गया । राजा के पलंग तक जाने तक सांप का निश्चय पूरी तरह से बदल गया । उधर समय से कुछ देर बाद सांप राजा के शयन कक्ष में पहुंचा । सांप ने राजा से कहा , राजन ! मैं तुम्हें काटकर अपने पूर्व जन्म का बदला चुकाने आया था , परन्तु तुम्हारे सौजन्य और सद्व्यवहार ने मुझे परास्त कर दिया । अब मैं तुम्हारा शत्रु नही मित्र हूं । मित्रता के उपहार स्वरूप अपनी बहुमूल्य मणि मैं तुम्हें दे रहा हूं । लो इसे अपने पास रखो । इतना कहकर और मणि राजा के सामने रखकर सांप चला गया ।

सारांश:- यह महज कहानी नही जीवन की सच्चाई है । अच्छा व्यवहार कठिन से कठिन कार्यो को सरल बनाने का माद्दा रखता है । यदि व्यक्ति व्यवहार कुशल है तो वो सब कुछ पा सकता है जो पाने की वो हार्दिक इच्छा रखता है । इसलिए दोस्तो चाहे दोस्त हो चाहे दुश्मन, अपने हो या पराये सब के साथ प्रैमपूर्वक और सरल व्यवहार करिए और अपने आप को अच्छा साबित कीजिए।।

🔹🔸🔹♦️🔵♦️🔹🔸🔹

Author:

Buy, sell, exchange books

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s