Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🌺विश्वास में अद्भुत शक्ति🌺
– श्रीरामकृष्ण परमहंसजी
एक आदमी समुद्र पार करना चाहता था।
एक साधु ने उसे एक ताबीज देकर कहा, इसके बल पर तुम समुद्र पार कर जाओगे।
उस ताबीज को ले आदमी पानी पर से चलते हुए आगे बढ़ने लगा।
बीचोबीच जाकर उसके मन मे कुतुहल हुआ की भला देखूँ, तो इस ताबीज के भीतर क्या चीज है, जिसके बल पर समुद्र पार किया जा सकता है।
उसने ताबीज को खोलकर देखा, उसमें एक कागज का टुकड़ा था, जिसपर केवल राम लिखा हुआ था।
वह उपेक्षा के साथ बोल उठा, बस यही है और कुछ नहीं।
जैसे ही यह संशय का भाव आया, वैसे ही वह डुब गया।
भगवान के नाम पर विस्वास हो, तो असंभव भी संभव हो सकता है।
विस्वास ही जीवन है और अविस्वास मृत्यु।
पत्थर हजारों साल तक पानी में पड़ा रहे, तो भी उसके भीतर एक बूँद भी पानी नहीं घुसता है, पर मिट्टी के ढेले में वह लगते ही घुल जाता है।
जिसके हृदय में विस्वास का बल है, वह हजारों बाधा- विघ्न की परीक्षा में से गुजर कर हताश नहीं होता, परन्तु अविस्वासी व्यक्ति छोटी- सी बात से ही विचलित हो जाता है।
एक शिष्य को गुरु पर इतना विस्वास था कि वह गुरु-गुरु कहते हुए विस्वास के बल पर नदी पार हो गया।
यह देखकर गुरु ने सोचा, सचमुच ही मुझमें इतनी शक्ति है, मुझे तो अबतक यह पता ही नहीं था।
दूसरे दिन गुरु मैं-मैं कहते हुए नदी पार होने गए; परन्तु पानी मे पैर रखते ही गिर पड़े औऱ अपने सम्भाल न पाकर डूब मरे।
विस्वास का परिणाम अद्भुत होता है।
परन्तु अहंकार से विनाश ही होता है।
स्वयं रामचंद्रजी को समुद्र पार करने के लिए सेतु बांधना पड़ा, परन्तु हनुमानजी केवल ‘जय श्री- राम’ कहकर एक ही छलांग में अनायास समुद्र लाँघ गए।
विश्वास में कितनी सामर्थ्य है।
कंटीली झाड़ियों से भरे मैदान पर से नंगे पैर नहीं चला जाता।
उस पर से चलने के लिए या तो पूरे मैदान को चमड़े से ढ ढँक देना होगा या तो अपने पैर में चमड़े के जूते चढ़ाने होंगे।
सचमुच मैदान को चमड़े से मढ़ना असंभव है, अतः पैरों में जुते पहनना ही उपयुक्त है।
इस तरह इस वासनापूर्ण संसार में असंख्य कामना -वासनाओं की पीड़ा से छुटकारा पाना हो, तो सभी वासनाओं की पूर्ति हो जानी चाहिए।
या फिर सभी का त्याग हो जाना चाहिए।
परन्तु वासनाओं का पूर्ति होना कभी सम्भव नहीं; क्योंकि एक वासना पूर्ति करने जाओ,तो दूसरी वासना आ खड़ी होती है।
इसलिए ज्ञान विचार सन्तोष के द्वारा वासनाओं का त्याग करना ही उपयुक्त है।
एक प्रकार की जहरीली मकड़ी होती है, वह यदि काट ले,तो कोइ दवा लगाने से पहले मंत्र के सहारे हल्दी का धुँआ देते हुए उसका विष उतारना पड़ता है।
उनके बाद ही दूसरी दवाओं का असर हो पाता है,अन्यथा नहीं।
इसी प्रकार जीव को कामिनी- काँचनरूपी जहरीली मकड़ी काट ले, तो पहले त्यागरुपी मंत्र से उनका जहर उतारना पड़ता है, तभी साधन भजन सफल हो पाता है।
जहाज में कंपास का काँटा सदा उत्तर की ओर रहता है, इसलिए जहाज की दिशा में भूल नहीं होती।
इसी प्रकार यदि मनुष्य का मन भी सदा ईश्वर की ओर रहे, तो उसे संसार सागर में दिशा चुकने का भय नहीं रहता।◾

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