Posted in हास्यमेव जयते

पति-पत्नी दोनों सरकारी अधिकारी थे, पत्नी एक रैंक छोटी अधिकारी थी ।

एक बार उनमें ऐसी खटपट हो गई की बोलचाल भी बन्द…😇

घर में तीसरा कोई नहीं था तो बड़ी तकलीफ हो गई।

खैर, चूँकि दोनों सरकारी सेवक थे सो इस चुप्पी का भी हल निकाल लिया ।

नोट शीट के माध्यम से लिखा-पढ़ी करके बातचीत होने लगी ।

एक शाम जब पति महोदय घर आये तो पत्नी ने नोट शीट पेश कर दी- “थके हुए लगते हैं, क्या चाय लेना चाहेंगे?”

पति ने लिखा- “यथा प्रस्तावित”
😀

पत्नी ने आगे भी लिखा- “आदेश हो तो साथ में बिस्किट भी संलग्न किये जावे..”

पति ने लिखा- “अनुमोदित, किन्तु मात्र 2 ही स्वीकृत”

इसी प्रकार नोट शीट पर लिख-लिख कर चाय-पानी, खाना पीना वगैरह चलने लगा..
किन्तु बातचीत बन्द ही थी😥

अचानक एक दिन पत्नी ने नोट शीट प्रस्तुत की- “मेरी माताजी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, चार दिनों के लिए मायके जाना चाहती हूँ, कृपया अवकाश स्वीकृत कर रिलीव करें।”😦

पति ने लिखा- “स्वीकृत, किन्तु “वैकल्पिक व्यवस्था” सुनिश्चित करने के पश्चात् ही अवकाश पर जावें….”

इसके बाद पानीपत का चौथा युद्ध प्रारंभ हुआ

👊🏻👊🏻👊🏻👊🏻👊🏻
अब पति मेडिकल लीव पर है……😝

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

सच्चा_ज्ञानी……..।.

एक राज्य में एक पंडितजी रहा करते थे. वे अपनी बुद्धिमत्ता के लिए प्रसिद्ध थे. उनकी बुद्धिमत्ता के चर्चे दूर-दूर तक हुआ करते थे.

एक दिन उस राज्य के राजा ने पंडितजी को अपने दरबार में आमंत्रित किया. पंडित जी दरबार में पहुँचे. राजा ने उनसे कई विषयों पर गहन चर्चा की. चर्चा समाप्त होने के पश्चात् जब पंडितजी प्रस्थान करने लगे, तो राजा ने उनसे कहा, “पंडितजी! आप आज्ञा दें, तो मैं एक बात आपसे पूछना चाहता हूँ.”

पंडित ने कहा, “पूछिए राजन.”

“आप इतने बुद्धिमान है पंडितजी, किंतु आपका पुत्र इतना मूर्ख क्यों हैं?” राजा ने पूछा.

राजा का प्रश्न सुनकर पंडितजी को बुरा लगा. उन्होंने पूछा, “आप ऐसा क्यों कह रहे हैं राजन?”

“पंडितजी, आपके पुत्र को ये नहीं पता कि सोने और चाँदी में अधिक मूल्यवान क्या है.” राजा बोला.

ये सुनकर सारे दरबारी हँसने लगे.

सबको यूं हँसता देख पंडितजी ने स्वयं को बहुत अपमानित महसूस किया. किंतु वे बिना कुछ कहे अपने घर लौट आये.

घर पहुँचने पर उनका पुत्र उनके लिए जल लेकर आया और बोला, “पिताश्री, जल ग्रहण करें.”

उस समय भी सारे दरबारियों की हँसी पंडितजी के दिमाग में गूंज रही थी. वे अत्यंत क्रोध में थे. उन्होंने जल लेने से मना कर दिया और बोले, “पुत्र, जल तो मैं तब ग्रहण करूंगा, जब तुम मेरे इस प्रश्न का उत्तर दोगे.”

“पूछिये पिताश्री.” पुत्र बोला.

“ये बताओ कि सोने और चाँदी में अधिक मूल्यवान क्या है?” पंडितजी ने पूछा.

“सोना अधिक मूल्यवान है.” पुत्र के तपाक से उत्तर दिया,

पुत्र का उत्तर सुनने के बाद पंडितजी ने पूछा, “तुमने इस प्रश्न का सही उत्तर दिया है. फिर राजा तुम्हें मूर्ख क्यों कहते हैं? वे कहते हैं कि तुम्हें सोने और चाँदी के मूल्य का ज्ञान नहीं है.

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वो लड़की

माही अपने पति रोहन का मॉल में इंतजार कर रही थी। रोहन अब तक अाया नहीं तो वो कपड़े देखने एक दुकान मे चली गयी। शॉपिंग करते हुए अचानक वो एक लड़की से टकरा गई। दोनों ने एक दूसरे से माफी मांगी, इतने में रोहन अपनी बीवी को किसी अंजान औरत के साथ बात करता हुआ देख चौक गया क्योंकि वो औरत अंजान तो माही के लिए थी रोहन के लिए नहीं। रोहन एक दीवार की आड़ में छुप गया और उसे याद आई ५ साल पहले वाली वो शाम

५ साल पहले:

रोहन अपने दो दोस्तों के साथ गोवा घूमने गया था। खूब मजे किए थे सब ने, उस टाइम गोवा में कार्निवल चल रहा था। देश विदेश से कई पर्यटक आए थे कार्निवल में भाग लेने। रोहन और उसके दोस्त भीड़ में बिछड़ गए, रोहन उन्हें ढूंढते ढूंढते समंदर किनारे पहुंच गया। वहां एक लड़की जिसने सफेद शर्ट अौर शॉटस पहन रखी थी, हाथ में एक बोतल लिए समंदर की तरफ जा रही थी।

रोहन ने पीछे से बहुत आवाज लगाई “एक्सक्यूज मी, रुको। कहां जा रही हो? रुको”
पर वो लड़की बिना पलटे आगे बढ़ी जा रही थी। रोहन भागकर गया और उस लड़की का हाथ पकड़कर रोका। वो लड़की रोहन को सवालिया अौर गुस्से कि नजर से देख रही थी। देखने में सुंदर दुबली पतली सी थी, आंखों को देख कर लग रहा था बहुत देर से रो रही थी। हाथ में जो बोतल थी वो भी भरी हुई थी और वो लड़की भी होश में दिख रही थी।

रोहन में पूछा “मरने का इरादा है क्या?”
वो लड़की अपने आंसू पोछते हुए गुस्से में बोली “तुम से मतलब?”
रोहन को उस लड़की को वहां अकेले छोड़ना ठीक नहीं लगा, वो उसे बाहर की तरफ खींचने लगा। लड़की अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी। रोहन ने झट से उस लड़की को गोद में उठा लिया, लड़की छोड़ने के लिए चिल्ला रही थी पर ना ही रोहन सुनने वाला था अौर ना ही कार्निवल की मस्ती में मस्त लोग। रोहन ने उसे समंदर से बाहर लाकर रेत पर पटका और खुद वहां हांफ्ता हुआ बैठ गया। उस लड़की के हाथ से बोतल ली अौर पीने लगा।
लड़की चिल्लाई “ये मेरी बीयर की बोतल है।”

रोहन बोला “तो तुम तो वैसे भी मरने जाने वाली थी, तब ध्यान नहीं आया आपने बियर का?”

लड़की ने बोतल छीनी और उठ कर जाने लगी, रोहन ने उसका पीछा किया कहीं ये फिर मरने ना चली जाए ये सोचकर। वो लड़की भी उसी होटल मे ठहरी थी जहाँ रोहन अौर उसके दोस्त। उस लड़की ने भी रोहन को उसके कमरे मे जाते देख लिया। कुछ देर बाद वो लड़की रोहन के कमरे में आई, तब वो अपने होश में नहीं थी। दरवाजा खुलते ही वो अंदर आई अौर रोहन के गले लग गई। रोहन को कुछ समझ नहीं आया और उसने किसी के देखने से पहले दरवाजा बंद कर दिया। लड़की का खुद पर काबू नहीं था, वो रोहन के शर्ट की बटन खोलने लगी, रोहन की धड़कन बढ़ने लगी थी। एसी भी १६° पर चल‌ रहा था पर रोहन को पसीना आ रहा था। रोहन को कुछ सूझ नहीं रहा था, उसने पास पड़ा पानी का जग उठाया और उस लड़की के सर पर पूरा पानी डाल दिया। लड़की को होश आया और वो सर झुकाये बिना कुछ बोले वहां से चली गई।

रोहन के दोस्तों ने लड़की को कमरे से बाहर निकलता देख लिया था। रोहन ने बहुत समझाया पर वो लोग नहीं माने कि दोनों के बीच कुछ नहीं हुआ। उनके हिसाब से लड़की जिस हालत में कमरे से बाहर निकली थी वो कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही थी।

आज का दिन:

रोहन को माही ने देख लिया, वो उस लड़की के साथ रोहन के पास आई। रोहन दोनों को साथ देखकर चौंक गया। माही ने दोनों को मिलवाया, तीनों ने फिर वहीं मॉल मे कॉफी पी। वो लड़की जाते हुए माही कि नजरों से छिपकर एक कागज़ रोहन के हाथ में थमा गई। रोहन ने जब वो कागज़ पढ़ा उसके चहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गई। उसमें लिखा था “शुक्रिया उस रात मुझे रोकने के लिए, मरने से और बेहकने से”
फिर वो माही के गले लगकर, दोनों को बाय कहकर चली गई। रोहन के मन मे अब डर कि जगह एक ‌मिठी मुलाकात कि याद ने ले ली थी।

स्वरचित
©लावण्या नायडू

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मासूम चुन्नी

एक दिन 10 वर्षीय चुन्नी ने रोते-रोते अपनी मां से कहा “अम्मा..अब मैं सेठ के घर काम पर नहीं जाऊंगी।”
चुन्नी की बात सुनकर उसकी विधवा मां ने आंखें तरेर कर कहा “काम पर नहीं जाएगी तो खाएगी क्या? तेरे दो दो छोटे छोटे भाई बहन हैं उनको क्या खिलाऊंगी? तू जो कमाकर लाती है उसी से तो गुजारा होता है। भाई बहन छोटे-छोटे हैं, मैं भी तो काम पर नहीं जा पाती। तुझे तो काम पर जाना ही पड़ेगा। पर तू क्यों नहीं जाना चाहती? तेरा बापू नासपिटा तो तीन-तीन बच्चे पैदा करके, शराब पी पी कर मर गया। अब मुसीबत मेरे सर पर आ पड़ी है।” चुन्नी की मां कमली बाई भुनभुना रही थी।
“तुम कुछ भी कहो अम्मा.. मैं काम पर नहीं जाऊंगी!” रो-रो कर चुन्नी कह रही थी।
चुनने की बात सुनकर कमली ने उसे एक थप्पड़ मारते हुए कहा “नासपीटी.. बाप की तरह आलसी है। काम पर नहीं जाएगी तो खाएगी क्या और तेरे भाई बहनों को क्या खिलाऊंगी? अच्छा पैसा तो देते हैं सेठ जी फिर क्यों मना कर रही है?”
“अम्मा.. बहुत काम कराती हैं सेठानी। जब खाना मांगती हूं तो बहुत गाली देती है, उसके बाद बासी सूखी रोटी और प्याज खाने को देती है। बहुत थक जाती हूं मैं। अगर थोड़ी देर भी बैठ जाती हूं तो बहुत गालियां देती है। कभी-कभी थप्पड़ भी मार देती है। मालिक देख देख कर हंसते हैं अपनी बीवी को कुछ नहीं कहते। जब मैं रोती हूं तो मुझे बुलाकर अपने पास बिठा लेता है और मेरे शरीर पर हाथ फेरता रहता है, मुझे अच्छा नहीं लगता।”
“अरे बावली.. तू छोटी है, प्यार से पास बिठाकर तुझे सांत्वना देते हैं.. इसलिए पीठ पर हाथ फेरते हैं.. इसमें क्या हो गया? सेठ जी बड़े अच्छे है.. दयालु है.. तभी तो तुझे काम पर रखा है!” कमली ने बेटी को समझाते हुए कहा।
“नहीं अम्मा.. सेठ जी बहुत गंदे हैं।” डरते डरते चुन्नी ने कहा।
“सेठ जी के कारण ही तो हम सब जिंदा है। तुझे काम नहीं मिलता तो भूखे मर जाते और तू कह रही है सेठ जी गंदे हैं। ठीक अपने बाबू की तरह आलसी है!” कमली गुस्से में दांत पीस रही थी।
मां का गुस्सा देखकर भी आज चुन्नी ने ठान लिया मां को सच बता कर ही रहेगी इसलिए उसने फिर कहा “अम्मा.. सेठ जी मुझे बुलाकर एक कमरे में ले जाते हैं और मेरे सारे कपड़े उतार देते हैं और मेरे साथ गंदी हरकत करते हैं। मुझसे यह सब बर्दाश्त नहीं होता। अब मैं काम पर नहीं जाऊंगी, भले ही मैं भूखी मर जाऊंगी।” बुरी तरह रो रही थी चुन्नी।
चुन्नी की बातें सुनकर कमली की जुबान बंद हो गई। आंखें फटी की फटी रह गई। वह दौड़ कर चुन्नी को अपनी बाहों में भर लिया और रोते हुए कहा “मेरी चुन्नी.. मेरी चुन्नी.. तुझे अब कभी काम पर जाने नहीं दूंगी मैं, उस गंदे सेठ के घर। हम भले ही भूखे मर जाएंगे मगर तुझे काम पर नहीं भेजूंगी। तू घर में बैठकर अपनी भाई बहनों को संभालना.. मैं जाऊंगी काम पर! लोगों की खेत में मजदूरी करूंगी, मगर सेठ के घर में कभी काम नहीं करूंगी।”
मां का प्यार भरा स्पर्श पाकर और बातें सुनकर मासूम चुन्नी के होठों पर मुस्कान खिल उठी “सच कह रही हो अम्मा.. मेरी अच्छी अम्मा..!” उसने मां के सीने में अपना मुंह छुपा लिया.. उसे जैसे स्वर्ग मिल गया हो!

ज्योत्सना पाॅल
स्वरचित मौलिक।