Posted in यत्र ना्यरस्तुपूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:

बौद्ध धर्म और महिला :-

1-स्त्री पुरुष को विचलित करती है-

स्त्रियां पुरुष का मन विचलित करती हैं।स्त्री का गंध,आवाज,स्पर्श विचलित करता है। स्त्री मोह में डालती है।
(अंगुत्तरनिकाय एककनिपात रुपादिवर्ग १)

2-स्त्रियां बुद्ध नहीं बन सकतीं-

स्त्री बुद्ध नहीं बन सकती। केवल तभी बन सकती है जब पुरुष का जन्म ले ले। स्त्री चक्रवर्ती सम्राट भी नहीं बन सकती । केवल पुरुष ही राजा बन सकता है। केवल पुरुष ही शक्र,मार,ब्रह्मा बन सकता है।
(अंगुत्तरनिकाय, एककनिपात,असंभव वग्गो,द्वितीय वर्ग, १/१५/१)

3-स्त्री की तुलना काले सांप से : उसके पांच दुर्गुण:

“भिक्षुओं! काले सांप में पांच दुर्गुण हैं। अस्वच्छता,दुर्गंध,बहुत सोने वाला,भयकारक और मित्रद्रोही(विश्वासघाती)। ये सारे दुर्गुण स्त्रियों में भी हैं। वे अस्वच्छ,दुर्गंधयुत,बहुत सोने वाली,भय देने वाली और विश्वासघाती है।”
(अंगु.पांचवा निपात,दीघचारिका वग्गो,पठण्हसुत्त ५/२३/९)

4-स्त्री के दुर्गुण:नारी नरकगामी:-

अधिकतर स्त्रियों को मैंने नरक में देखा है। उसके तीन कारण हैं जिससे स्त्रियां नरकगामी बनती हैं:-
-वो पूर्वाह्न काल में, सुबह, कृपण और मलिन चित्त की होती है।
-दोपहर में मत्सर युक्त होती हैं।
-रात को लोभ और काम युक्त चित्त की होती है।
(संयुक्त निकाय,मातुगामसंयुत्त,पेयाल्लवग्गो , तीहिधम्मोसुत्त ३५/१/४)


इस्लाम और महिला : –

1-औरत को खेती की तरह जोतो :-

“औरतें तुम्हारे लिए खेती के समान है ,तो खेती में जैसे चाहो हल चलाओ “
(कुरान -2 :223)

2-.पति का दर्जा पत्नी से ऊँचा :-

“हाँ परुषों को स्त्रियों पर एक दर्जा प्राप्त है “
(‘कुरान -2:228)

3- पुरुषो के लिए चार पत्नियां :-

तुम चाहो तो दो – दो ,तीन-तीन , और चार पत्नियां रख सकते हो “
(कुरान- 4:3)

4-पत्नी को जब चाहो पीटो :-

यदि तुम्हारी औरतें बात नहीं माने ,तो उनको मारो और पीटो ,ताकि वह तुम्हारी बातें मानने लगें “
(कुरान- 4:34)


ईसाई धर्म और नारी :-

1-माहवारी के समय औरतों से दूर रहो :-
बाइबिल -“जब कोई स्त्री ऋतुमती हो ,तो वह सात दिनों तक अशुद्ध मानी जाये .और जो कोई भी उसे छुए वह भी अशुद्ध माना जाये “
(लैव्यव्यवस्था -15 :19)

2-औरतें खुद को छुपा कर रखें :-

बाइबिल -यदि स्त्री ओढ़नी न ओढ़े, तो बाल भी कटा ले; यदि स्त्री के लिये बाल कटाना या मुण्डाना लज्ज़ा की बात है, तो ओढ़नी ओढ़े।”
(1 कुरिन्थियों 11 :6)

3-स्त्रियों को पुरुषों के अधीन रहना चाहिए

स्त्री को चुपचाप पूरी आधीनता में सीखना चाहिए और मैं (परमेश्वर) कहता हूं, कि स्त्री न उपदेश करे, और न पुरूष पर आज्ञा चलाए, परन्तु चुपचाप रहे।
(1 तीमुथियुस – अध्याय 2:11-12)

4–महिला को अपने बलात्कारी से शादी करनी चाहिए

यदि किसी पुरूष को कोई कुंवारी कन्या मिले और वह उसे पकड़ कर उसके साथ कुकर्म करे, और वे पकड़े जाएं, तो पुरुष पीड़ित लड़की के पिता को 50 शेकेल दे और उससे विवाह कर ले
(व्यवस्थाविवरण-22:28-29)


हिन्दू धर्म और महिला : –

1-स्त्री और पुरुष दोनों को शासक चुने जाने का समान अधिकार है
(यजुर्वेद 20/9 )

2-बह्मचर्य सूक्त -इसमें कन्याओं को बह्मचर्य और विद्याग्रहण के पश्चात् ही विवाह के लिए कहा गया है
(अथर्ववेद – 11/5/18)

3-जिस समाज या परिवार में स्त्रियों पूजा होती है , वहां देवता और सुख़- समृद्धि निवास करते हैं और जहां इनका सम्मान नहीं होता, वहां अनादर करने वालों के सभी काम निष्फल हो जाते हैं।
(मनुस्मृति 3/56)

4- वेदों के सभी भागों का अध्ययन और चार वेदों की पढ़ाने वाली महिला सभी मनुष्यों के लिए प्रगति लाती है .
(ॠग्वेद-1/164/41)

5-शासकों की स्त्रियां अन्यों को राजनीति की शिक्षा दें | जैसे राजा, लोगों का न्याय करते हैं वैसे ही रानी भी न्याय करने वाली हों |
(यजुर्वेद 10/26 )

6-पुरुष और स्त्री एक-दूसरे के बिना अपूर्ण हैं, अत: साधारण से साधारण धर्मकार्य का अनुष्ठान भी पति-पत्नी दोनों को मिलकर करना चाहिए।
-(मनुस्मृति 9/96)


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