Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

होली


“सेब लो, अनार लो, केले ले लो”, आवाज़ लगाता बंटी सड़क पर चला जा रहा था। कोरोना वायरस के कारण बिक्री बहुत कम हो गई थी। सड़कें ज़्यादातर वीरान रहतीं।
पता नही आज भी इतना माल बिकेगा कि वह मोनू को पिचकारी और रंग दिला सके। घर के खर्च के लिए पैसे निकाल कर ही ऊपरी समान खरीदना हो पाता है। मोनू पिछले एक हफ्ते से रोज़ उसकी राह देखता है फिर मायूस हो जाता है। वह करे भी तो क्या?

“पाएँ लागूँ चाची”, फूटपाथ पर चादर बिछा कर फल बेचने की तैयारी कर रही थी पड़ोस में रहने वाली वृद्धा कांता बाई। आते जाते वह उनसे हालचाल ले लेता है। चाची का भी ये रोज़ का संघर्ष है। घर पर अपाहिज पति की देखभाल उसी के जिम्मे है। बच्चे तो दूसरे शहरों में बस गए हैं। लाचार माँ बाप को कोई रखना नहीं चाहता।

आज शायद होली पूजन के वजह से अच्छी बिक्री हो गयी। वह जल्दी से घर को चल दिया।
“आज मोनू को लेकर बाजार जाऊँगा और उसकी मनपसन्द पिचकारी व रंग दिलवाऊँगा।”
सोचता हुआ अपनी गली के नुक्कड़ पर पहुँचा तो कुछ अटपटा सा लगा। चाची की दुकान नदारद थी!
‘लगता है उनकी भी बिक्री आज जल्दी हो गई है। उनकी कोठरी में जाकर देख आऊँ!”

अंदर की हालत सही नहीं थी। चाचा शांत पड़े थे, चाची रो रही थी।
“क्या हुआ चाची?”
“रघुआ के बापू कुछ खा नहीं रहे, न बोल रहे हैं।”
“डाक्टर को दिखाया क्या?”
“नहीं बेटा, पैसे कहाँ है इतने मेरे पास! तू तो जानता है रोज़ की रोटी का जुगाड़ ही कितनी मुश्किल से हो पाता है।”
“चल चाची, ले कर चलते हैं।”
“पर बेटा……”

तब तक बंटी ने चाचा को खड़ा करके छड़ी पकड़ा दी थी। बाहर आकर उनको अपनी ठेल पर बिठाया और चल दिया।
डॉक्टर को दिखाकर व दवाई दिलवा कर उसने उन्हें घर पहुँचा दिया।

“तेरे बहुत एहसान हो गए हम पर बेटा। काफी पैसे लग गए, मैं धीरे धीरे चुका दूँगी।”
“कोई बात नहीं चाची, आप चाचा का ध्यान रखना।” कहता है वह अपने गली की तरफ मुड़ गया।

जेब तो ठन ठन गोपाल हो गया था पर मन में बहुत संतोष था। बस मोनू की चिंता थी। क्या मुँह दिखाएगा उसे? आज फिर वह निराश हो जाएगा।

“अरे, पापा आप आ गए! ये देखो मम्मी क्या लाई मेरे लिए!” उसके हाथ में एक लाल रंग की पिचकारी और थैले में रंग था।
उसने पत्नी की तरफ देखा तो वह धीरे से मुस्कुरा दी, “मंदिर पर कोई बाँट रहा था, मैं वहाँ से उसी वक़्त गुजर रही थी तो मुझे मिल गया।”

बंटी ने ऊपर आसमान को देखकर हाथ जोड़ दिए,
“प्रभु तेरी माया!”

स्वरचित
प्रीति आनंद अस्थाना
रिपोस्ट!

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