Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

विषय – समय के काले बिंदु
लघुकथा
निष्कर्ष
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“ मैडम जी ! “
“ हाँ क्या है रामधन ? “
“ आज 5 तारीख़ है न ? बस इस महीने के आख़ीर तक ही हम काम करेगा । आप किसी और को ढूँढ लो तब तक ।”
सुन कर सन्न रह गई कनु । सिर घूम गया उसका । इस नए शहर में कामवाली बाइयों का वैसे ही अकाल है । अभी एक बरस ही हुआ है यहाँ आए , इस -शहर दफ़्तर को समझे । दोनों बच्चों की बढ़िया स्कूलों में एडमिशन कराते -कराते नाक में दम आ गया दोनों पति -पत्नी का । वैभव 8वीं में और मेधावी 5वीं में थी ।
“ क्या हुआ ? क्यों छोड़ना चाहते हो काम ? “ थोड़ा सम्भलते , पानी का घूँट गटकते पूछा कनु ने ।
कनु को अच्छी तरह पता है मतलब , रामधन के चले जाने का । बड़ी मुश्किल से अपनी दफ़्तरी सहेलियों की कोशिशों से मिला है यह ।
लेकिन रामधन ने बताया कुछ नहीं , रसोई के बर्तनों में ही लगा रहा ।
“ रामधन , मैं कुछ पूछ रही हूँ तुमसे ? “ कनु ने कहा ।
“ हमारे इहाँ बच्चे फूलों से पाले जावें हैं , जिनावर की तरयों नहीं ।हमसे नहीं देखा जात जे सब । “ कहते -कहते हाथों में पकड़े साबुन लगे गिलास पर पानी की जगह उसके आंसुओं की बूँदें टपाटप टपकती चलीं गईं ।
रात बड़ी भारी गुजरी थी । वैभव को पढ़ाते -पढ़ाते , थोड़ी सी गलती पर मासूम वैभव को बुरी तरह धुन डाला था शतदल ने । अक्सर वह दोनों बच्चों पर , उनकी ज़रा -ज़रा सी भूल पर इस बुरी तरह चिल्लाता या हाथ उठाता । घर भर का सारा वातावरण बोझिल हो उठता । पूरा घर ही भय से सहम जाता ।
“ मैडम जी , छिमा करना , ग़ुस्से वाला आदमी क्या पता कब्ब हम पर भी हाथ उठा दे ? रात -रात भर सो न पाएँ हम । जिस घर में सांति न हो वहाँ काम ना होवे हम ते । “
कनु हैरान -परेशान हो गई सब सुन कर । जिस गृहस्थी की मूल ज़रूरी बात का इस 16 साल के रामधन को ज्ञान है , उसी बात से शतदल जैसा पढ़ा -लिखा , सरकारी अधिकारी अनभिज्ञ क्यों ?
रामधन से तो कुछ न कहा कनु ने । मौन रही ।
मन ही मन यह साफ़ हो गया उसके सामने कि दोनों मासूमों का भला तभी हो सकेगा जब सबसे पहले उसके पति , शतदल की क्रोध प्रवृत्ति का शमन हो ।
समय के काले बिंदु वह समझ तो पहले से रही थी , पर अब रामधन नें उनकी कालिमा को और अधिक गहरा कर दिया था ।
कनु के चेहरे पर एक दृड निश्चय आन ठहरा । पक्की बात करके रहेगी वह शतदल से ।
क्योंकि यह तो तय है कि शतदल का क्रोध जब तक घर से बाहर न होगा , तब तक वह रामधन को घर के भीतर टिका न पाएगी ।
यह भी कि रामधन न टिका तो उसकी नौकरी भी न टिकेगी ।

डॉ आदर्श /उधमपुर

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