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लघु कथा
हाउस वाइफ
माँ को बहू के रूप में कामकाजी लड़की पसंद थी ,सो मैंने एक सुंदर सी मैनेजर लड़की से शादी करने का निर्णय ले लिया । शादी के एक महीने बाद भी जब दीप्ति ने नौकरी ज्वाइन नहीं की तो घरवालों को शक हुआ कि कहीं बहू की नौकरी तो नहीं छूट गई । इसलिए मैंने कहा ,” डार्लिंग ,अब आप भी अपनी जाॅब ज्वाइन कर लीजिए ,इतनी छुट्टियाँ हो गई हैं ।”
” डार्लिंग , मेरा तो हाउस वाइफ बनने का सपना था सो मैं तो इस्तीफा दे आई थी ।अब आप बाहर सँभालिए और मैं घर । दोनों बाहर रहेंगे घर बिखर जाएगा ।
वैसे भी आपके मम्मी – पापाजी को भी तो सुख मिलना चाहिए । जिंदगी भर बाहर – भीतर पिसते रहे । ना शुद्ध खाने का सुख ना बच्चों को प्यार दुलार दे सके ।”
” दीप्ति ! तुम्हारे मम्मी-पापा ने तुम्हें पढ़ा लिखा कर कामयाब किया । और तुम अपने सुनहरे भविष्य को छोड़कर चूल्हा – चौका सँभालने पर क्यों तुली हो , मैं नहीं चाहता आज़ाद पंछी को क़ैद करना । “
” और मैं नहीं चाहती कि मेरे बच्चे मेरी तरह बिना लाड़ प्यार के तीन – तीन दिन की बासी सब्जी गर्म कर- कर खाते रहें , अपने दिल की बातों को भी अकेले में बड़बड़ाएँ । बड़े से बड़े कष्टों को भी डायरी या काॅपी के अंतिम पन्नों पर लिखते हुए आँसुओं से भिगोएँ । मुझे अधिक पैसा नहीं प्यार चाहिए सबको बाँटने के लिए भी और खुद के लिए भी ।”
” दीप्ति ! घर में कामवाली है ,अब खाना बनाने वाली भी है , फिर बासी सब्जियाँ नहीं , मनपसंद खाना बनवा लेना । प्लीज़ नौकरी मत छेड़िए । मै हाउस वाइफ बनाकर नहीं रख सकता ।”
” बिल्कुल सही कहा बेटा ! लेकिन दीप्ति शागवान हाउस की मैनेजर बनाई जा सकती है । ये लो , इस घर और लाकर्स की चाबियाँ । मम्मी जी ने कमरे के अंदर आते हुए कहा ।
नरेश तोमर

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आप मेरी दादी हो!


“अरे वाह दादी, आपने तो मुझे घर की याद दिला दी!” प्रणय ने खुशी से दादी को गोद में उठा लिया।

छोटे से शहर कानपुर का रहने वाला प्रणय मुंबई आया था एम.बी.ए. करने। साथ में तीन सहपाठी और थे। होस्टल न मिलने पर उन्होंने दो कमरे का एक मकान किराए पर लिया था। प्लान यही था कि खाना खुद ही बनाएँगे पर व्यस्त दिनचर्या की थकान के वजह से वे खाना अक्सर बाहर ही खाते या आर्डर कर के घर पर ही मंगवा लेते थे।

बाजार में वे अक्सर चाट खाने जाते। चाट के ठेल के बराबर फूटपाथ पर ही बैठ कर एक वृद्धा फल बेचा करती थी। पास में बैठा एक तीन-चार साल का लड़का कभी प्लास्टिक के कुछ टुकड़ों से तो कभी ईंट पत्थरों से खेला करता।

पता नहीं क्यों प्रणय का ध्यान बार बार उन पर चला जाता। कभी कभार एक-दो गोलगप्पे वह उस बच्चे को खिला देता था।

“क्यों दादी, आप यहाँ रोज़ इस बच्चे को लेकर आती हो। घर पर कोई नहीं है क्या?”
“नहीं बेटा, इसके माँ बापू तो ऊँची बिल्डिंग की दीवार ढहने से खतम हो गए। हम बिहार से आए थे रोजी रोटी की तलास में। अब तो हम ही दोनों हैं।”
“आपका घर खर्च निकल आता है इससे?”

जो भी फल सस्ता मिलता, वह खरीद लाती व थोड़े से मुनाफा में बेच देती।
“चल जाता है बाबू, सौ-दो सौ मिल जाते हैं रोज। रोटी की चिंता नहीं है बाबू, मेरे न रहने पर इस बेचारे का क्या होगा इसी से परेसान रहते हैं हम।”

एक दिन शाम को वृद्धा दिखी नहीं तो उसने चाट वाले से पूछा।
“उसकी गली की सारी झोपड़ियों को मुन्सिपल्टी ने तोड़ दिया है। सामान सब उठाकर फेंक दिया है। कहते हैं सरकारी जमीन कब्जाए हैं उलोग। वहीं बैठी बिसूर रही होगी बुढ़िया।”

प्रणय को धक्का-सा लगा। वह पता लगा कर वहाँ पहुँच गया। एक गठरी और एक टीन का बक्सा लेकर बैठी दादी आँसू बहाए जा रही थी। बगल में बैठा पोता जोर जोर से रो रहा था।

उसे देख चौंक गई वह।
“यहाँ कैसे बबुआ?”
“अब क्या करोगी दादी? कहाँ जाओगी? कोई ठिकाना हो तो बताओ, मैं पहुँचा दूँगा।”
“हम तो बेटा ऊपर ही जाना चाहत हैं पर इस निगोड़े का क्या करें?”
अपनी बात होता देख बच्चा और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा।

प्रणय के मन में कोई आईडिया आया तो वह फोन पर बात करने लगा। उसने अपने दोस्तों से बात की, फिर मम्मी-पापा से और निश्चय कर लिया।
“उठो दादी, अपने नए घर में चलो।”

आश्चर्यचकित सी दादी उसके पीछे-पीछे चल दी। उन्हें लेकर प्रणय अपने घर आ गया।

“ये लो दादी, आज से यही तुम्हारा घर है।” अपने किराए के घर के खाली पड़े स्टोररूम में उसने उनका सामान जमा दिया।
“अब तुम यहाँ रहना, सुबह-शाम हम सब के लिए खाना बना देना और दिन में बाजार में फल बेच लेना। छोटे लाल का हम स्कूल में नाम लिखा देंगे।”
“पर मुझे तो गरीब का खाना ही बनाना आता है। आप लोग तो…”
“काफी है दादी। बाकी हम सिखा देंगे।”

धीरे-धीरे दादी घर के एडजस्ट होती गई व उनके पसन्द का खाना भी बनाने लगी। उसके लिए सबसे खुशी की बात यह थी कि उसके आँखों का तारा, पिंटू, स्कूल जाने लगा था। उसके तनख्वाह के पैसे वह उसके नाम से खोले गए बैंक एकाउंट में जमा कर देते थे।

आज प्रणय का जन्मदिन था। सुबह से ही घर की याद में जबतब आँखें नम हुई जा रही थीं। अपने घर से बाहर उसका ये पहला जन्मदिन था।
जब वह कॉलेज से वापस लौटा तो घर में कुछ ज़्यादा ही रौनक थी।
‘अच्छा! इनलोगों ने जन्मदिन मनाने की पूरी तैयारी कर रखी है!’
पर तैयारी तो दादी ने कर रखी थी! अंदर आते ही पहले उन्होंने सजी हुई थाल से उसकी आरती उतारी व टीका लगाया। प्रणय ने भावविह्वल हो दादी के पैर छू लिए। माँ की याद आ गई थी।

खाने में भी दादी ने वही सब बनाया था जो माँ बनाती थी.. खीर-पूरी, दम आलू व पनीर की सब्जी! तो घर की याद तो आनी ही थी!
“अरे बेटा, नीचे उतार न! गिर जाएँगे हम!” न जाने कितनी देर से दादी को हवा में उठा रखा था उसने!
“न गिरने दूँगा, न कहीं जाने दूँगा। आप मेरी दादी हो!” कहते हुए प्रणय ने उनके माथे को चूम लिया।

स्वरचित
प्रीति आनंद अस्थाना

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तो सुप्रीम कोर्ट के मुक़द्दमे मे कसाईयो द्वारा गाय काटने के लिए वही सारे कुतर्क रखे गए जो कभी शरद पवार द्वारा बोले गए या इस देश के ज्यादा पढ़ें लिखे लोगो द्वारा बोले जाते है या देश के पहले प्रधान मंत्री नेहरू द्वारा कहे गए !

कसाईयो का पहला कुतर्क !!

1) गाय जब बूढ़ी हो जाती है तो बचाने मे कोई लाभ नहीं उसे कत्ल करके बेचना ही बढ़िया है ! और हम भारत की अर्थ व्यवस्था को मजबूत बना रहे हैं क्यूंकि गाय का मांस export कर रहे हैं !!

दूसरा कुतर्क !

2) भारत मे गाय के चारे की कमी है ! भूखी मरे इससे अच्छा ये है हम उसका कत्ल करके बेचें !

तीसरा कुतर्क

3) भारत मे लोगो को रहने के लिए जमीन नहीं है गाय को कहाँ रखें ?

चौथा कुतर्क

4 ) इससे विदेशी मुद्रा मिलती है !

और सबसे खतरनाक कुतर्क जो कसाइयों की तरफ से दिया गया कि गया की ह्त्या करना हमारे धर्म इस्लाम मे लिखा हुआ है की हम गायों की ह्त्या करें !! (this is our religious right ) !
कसाई लोग कौन है आप जानते है ??मुसलमानो मे एक कुरेशी समाज है जो सबसे ज्यादा जानवरों की ह्त्या करता है ! उनकी तरफ से ये कुतर्क आयें !

पूरी post नहीं पढ़ सकते तो यहाँ click करे !
http://goo.gl/08Uaf1

राजीव भाई की तरफ से बिना क्रोध प्रकट किए बहुत ही धैर्य से इन सब कुतर्को का तर्कपूर्वक जवाब दिया !

उनका पहला कुतर्क गाय का मांस बेचते हैं तो आमदनी होती है देशो को ! तो राजीव भाई ने सारे आंकड़े सुप्रीम कोर्ट मे रखे कि एक गाय को जब काट देते हैं तो उसके शरीर मे से कितना मांस निकलता है ??? कितना खून निकलता है ?? कितनी हड्डियाँ निकलती हैं ??

एक सव्स्थय गाय का वजन 3 से साढ़े तीन कवींटल होता है उसे जब काटे तो उसमे से मात्र 70 किलो मांस निकलता है एक किलो गाय का मांस जब भारत से export होता है तो उसकी कीमत है लगभग 50 रुपए ! तो 70 किलो का 50 से गुना को ! 70 x 50 = 3500 रुपए !

खून जो निकलता है वो लगभग 25 लीटर होता है ! जिससे कुल कमाई 1500 से 2000 रुपए होती है !

फिर हड्डियाँ निकलती है वो भी 30-35 किलो हैं ! जो 1000 -1200 के लगभग बिक जाती है !!

तो कुल मिलकर एक गाय का जब कत्ल करे और मांस ,हड्डियाँ खून समेत बेचें तो सरकार को या कत्ल करने वाले कसाई को 7000 रुपए से ज्यादा नहीं मिलता !!

फिर राजीव भाई द्वारा कोर्ट के सामने उल्टी बात रखी गई यही गाय को कत्ल न करे तो क्या मिलता है ??? हमने कत्ल किया तो 7000 मिलेगा और अगर इसको जिंदा रखे तो कितना मिलेगा ??
तो उसका calculation ये है !!

एक सव्स्थ्य गाय एक दिन मे 10 किलो गोबर देती है और ढाई से 3 लीटर मूत्र देती है ! गाय के एक किलो गोबर से 33 किलो fertilizer (खाद ) बनती है !जिसे organic खाद कहते हैं तो कोर्ट के जज ने कहा how it is possible ??

राजीव भाई द्वारा कहा गया आप हमे समय दीजिये और स्थान दीजिये हम आपको यही सिद्ध करके बताते हैं ! तो कोर्ट ने आज्ञा दी तो राजीव भाई ने उनको पूरा करके दिखाया !! और कोर्ट से कहा की आई. आर. सी. के वैज्ञानिक को बुला लो और टेस्ट करा लो !!! तो गाय का गोबर कोर्ट ने भेजा टेस्ट करने के लिए ! तो वैज्ञानिको ने कहा की इसमें 18 micronutrients (पोषक तत्व )है !जो सभी खेत की मिट्टी को चाहिए जैसे मैगनीज है ! फोस्फोरस है ! पोटाशियम है, कैल्शियम,आयरन,कोबाल्ट, सिलिकोन ,आदि आदि | रासायनिक खाद मे मुश्किल से तीन होते हैं ! तो गाय का खाद रासायनिक खाद से 10 गुना ज्यादा ताकतवर है !तो कोर्ट ने माना !!

राजीव भाई ने कहा अगर आपके र्पोटोकोल के खिलाफ न जाता हो तो आप चलिये हमारे साथ और देखे कहाँ – कहाँ हम 1 किलो गोबर से 33 किलो खाद बना रहे हैं राजीव भाई ने कहा मेरे अपने गाँव मे मैं बनाता हूँ ! मेरे माता पिता दोनों किसान है पिछले 15 साल से हम गाय के गोबर से ही खेती करते हैं !
तो 1 किलो गोबर है तो 33 किलो खाद बनता है ! और 1 किलो खाद का जो अंराष्ट्रीय बाजार मे भाव है वो 6 रुपए है !तो रोज 10 किलो गोबर से 330 किलो खाद बनेगी ! जिसे 6 रुपए किलो के हिसाब से बेचें तो 1800 से 2000 रुपए रोज का गाय के गोबर से मिलता है !

और गाय के गोबर देने मे कोई sunday नहीं होता weekly off नहीं होता ! हर दिन मिलता है ! तो साल मे कितना ??? 1800 का 365 मे गुना कर लो !
1800 x 365 = 657000 रुपए !साल का !
और गाय की समानय उम्र 20 साल है और वो जीवन के अंतिम दिन तक गोबर देती है !
तो 1800 गुना 365 गुना 20 कर लो आप !! 1 करोड़ से ऊपर तो मिल जाएगा केवल गोबर से !

और हजारो लाखों वर्ष पहले हमारे शास्त्रो मे लिखा है की गाय के गोबर मे लक्ष्मी जी का वास है !!
और मेकोले के मानस पुत्र जो आधुनिक शिक्षा से पढ़ कर निकले हैं जिनहे अपना धर्म ,संस्कृति – सभ्यता सब पाखंड ही लगता है !हमेशा इस बात का मज़ाक उड़ाते है ! कि हाहाहाःहाहा गाय के गोबर मे लक्ष्मी !
तो ये उन सबके मुंह पर तमाचा है ! क्यूंकि ये बात आज सिद्ध होती है की गाय के गोबर से खेती कर ,अनाज उत्पादन कर धन कमाया जा सकता है और पूरे भारत का पेट भरा जा सकता है !


अब बात करते हैं मूत्र की रोज का 2 – सवा दो लीटर !! और इससे ओषधियाँ बनती है
diabetes ,की ओषधि बनती है !
arthritis,की ओषधि बनती है
bronkitis, bronchial asthma, tuberculosis, osteomyelitis ऐसे करके 48 रोगो की ओषधियाँ बनती है !! और गाय के एक लीटर मूत्र का बाजार मे दवा के रूप मे कीमत 500 रुपए है ! वो भी भारत के बाजार मे ! अंतर्राष्ट्रीय बाजार मे तो इससे भी ज्यादा है !! आपको मालूम है ?? अमेरिका मे गौ मूत्र patent हैं ! और अमरीकी सरकार हर साल भारत से गाय का मूत्र import करती है और उससे कैंसर की medicine बनाते हैं !! diabetes की दवा बनाते हैं ! और अमेरिका मे गौ मूत्र पर एक दो नहीं तीन patent है ! अमेरिकन market के हिसाब से calculate करे तो 1200 से 1300 रुपए लीटर बैठता है एक लीटर मूत्र ! तो गाय के मूत्र से लगभग रोज की 3000 की आमदनी !!!

और एक साल का 3000 x 365 =1095000
और 20 साल का 300 x 365 x 20 = 21900000 !

इतना तो गाय के गोबर और मूत्र से हो गया !! एक साल का !


और इसी गाय के गोबर से एक गैस निकलती है जिसे मैथेन कहते हैं और मैथेन वही गैस है जिससे आप अपने रसोई घर का सिलंडर चला सकते हैं और जरूरत पड़ने पर गाड़ी भी चला सकते हैं 4 पहियो वाली गाड़ी भी !!

जैसे LPG गैस से गाड़ी चलती है वैसे मैथेन गैस से भी गाड़ी चलती है !तो न्यायधीश को विश्वास नहीं हुआ ! तो राजीव भाई ने कहा आप अगर आज्ञा दो तो आपकी कार मे मेथेन गैस का सिलंडर लगवा देते हैं !! आप चला के देख लो ! उन्होने आज्ञा दी और राजीव भाई ने लगवा दिया ! और जज साहब ने 3 महीने गाड़ी चलाई ! और उन्होने कहा its excellent ! क्यूंकि खर्चा आता है मात्र 50 से 60 पैसे किलोमीटर और डीजल से आता है 4 रुपए किलो मीटर ! मेथेन गैस से गाड़ी चले तो धुआँ बिलकुल नहीं निकलता ! डीजल गैस से चले तो धुआँ ही धुआँ !! मेथेन से चलने वाली गाड़ी मे शोर बिलकुल नहीं होता ! और डीजल से चले तो इतना शोर होता है कान फट जाएँ !! तो ये सब जज साहब की समझ मे आया !!

तो फिर हमने कहा रोज का 10 किलो गोबर एकठ्ठा करे तो एक साल मे कितनी मेथेन गैस मिलती है ?? और 20 साल मे कितनी मिलेगी और भारत मे 17 करोड़ गाय है सबका गोबर एक साथ इकठ्ठा करे और उसका ही इस्तेमाल करे तो 1 लाख 32 हजार करोड़ की बचत इस देश को होती है ! बिना डीजल ,बिना पट्रोल के हम पूरा ट्रांसपोटेशन इससे चला सकते हैं ! अरब देशो से भीख मांगने की जरूरत नहीं और पट्रोल डीजल के लिए अमेरिका से डालर खरीदने की जरूरत नहीं !!अपना रुपया भी मजबूत !

तो इतने सारे calculation जब राजीव भाई ने बंब्बाड कर दी सुप्रीम कोर्ट पर तो जज ने मान लिया गाय की ह्त्या करने से ज्यादा उसको बचाना आर्थिक रूप से लाभकारी है !


जब कोर्ट की opinion आई तो ये मुस्लिम कसाई लोग भड़क गए उनको लगा कि अब केस उनके हाथ से गया क्यूंकि उन्होने कहा था कि गाय का कत्ल करो तो 7000 हजार कि इन्कम ! और इधर राजीव भाई ने सिद्ध कर दिया कत्ल ना करो तो लाखो करोड़ो की इन्कम !!और फिर उन्होने ने अपना trump card खेला !! उन्होने कहा की गाय का कत्ल करना हमारा धार्मिक अधिकार है (this is our religious right )

तो राजीव भाई ने कोर्ट मे कहा अगर ये इनका धार्मिक अधिकार है तो इतिहास मे पता करो कि किस – किस मुस्लिम राजा ने अपने इस धार्मिक अधिकार का प्रयोग किया ?? तो कोर्ट ने कहा ठीक है एक कमीशन बैठाओ हिस्टोरीयन को बुलाओ और जीतने मुस्लिम राजा भारत मे हुए सबकी history निकालो दस्तावेज़ निकालो !और किस किस राजा ने अपने इस धार्मिक अधिकार का पालण किया ?

तो पुराने दस्तावेज़ जब निकाले गए तो उससे पता चला कि भारत मे जितने भी मुस्लिम राजा हुए एक ने भी गाय का कत्ल नहीं किया ! इसके उल्टा कुछ राजाओ ने गायों के कत्ल के खिलाफ कानून बनाए ! उनमे से एक का नाम था बाबर ! बाबर ने अपनी पुस्तक बाबर नामा मे लिखवाया है कि मेरे मरने के बाद भी गाय के कत्ल का कानून जारी रहना चाहिए ! तो उसके पुत्र हुमायु ने भी उसका पालण किया और उसके बाद जितने मुगल राजा हुए सबने इस कानून का पालन किया including ओरंगजेब !!

फिर दक्षिण भारत मे एक राजा था हेदर आली !टीपू सुल्तान का बाप !! उनसे एक कानून बनवाया था कि अगर कोई गाय की ह्त्या करेगा तो हैदर उसकी गर्दन काट देगा और हैदर अली ने ऐसे सेकड़ो कासयियो की गर्दन काटी थी जिन्होने गाय को काटा था फिर हैदर अली का बेटा आया टीपू सुलतान तो उसने इस कानून को थोड़ा हल्का कर दिया तो उसने कानून बना दिया की हाथ काट देना ! तो टीपू सुलतान के समय में कोई भी अगर गाय काटता था तो उसका हाथ काट दिया जाता था |

तो ये जब दस्तावेज़ जब कोर्ट के सामने आए तो राजीव भाई ने जज साहब से कहा कि आप जरा बताइये अगर इस्लाम मे गाय को कत्ल करना धार्मिक अधिकार होता तो बाबर तो कट्टर ईस्लामी था 5 वक्त की नमाज पढ़ता था हमायु भी था ओरंगजेब तो सबसे ज्यादा कट्टर था ! तो इनहोने क्यूँ नहीं गाय का कत्ल करवाया और क्यूँ ? गाय का कत्ल रोकने के लिए कानून बनवाए ??? क्यूँ हेदर अली ने कहा कि वो गाय का कत्ल करने वाले के हाथ काट देगा ??

तो राजीव भाई ने कोर्ट से कहा कि आप हमे आज्ञा दें तो हम ये कुरान शरीफ ,हदीस,आदि जितनी भी पुस्तके है हम ये कोर्ट मे पेश करते हैं और कहाँ लिखा है गाय का कत्ल करो ये जानना चाहतें है ! और आपको पता चलेगा कि इस्लाम की कोई भी धार्मिक पुस्तक मे नहीं लिखा है की गाय का कत्ल करो !
हदीस मे तो लिखा हुआ है कि गाय की रक्षा करो क्यूंकि वो तुम्हारी रक्षा करती है ! पेगंबर मुहमद साहब का statement है की गाय अबोल जानवर है इसलिए उस पर दया करो ! और एक जगह लिखा है गाय का कत्ल करोगे तो दोझक मे भी जमीन नहीं मिलेगी !मतलब जहनुम मे भी जमीन नहीं मिलेगी !!

तो राजीव भाई ने कोर्ट से कहा अगर कुरान ये कहती है मुहम्मद साहब ये कहते हैं हदीस ये कहती है तो फिर ये गाय का कत्ल कर धार्मिक अधिकार कब से हुआ ?? पूछो इन कसाईयो से ?? तो कसाई बोखला गए ! और राजीव भाई ने कहा अगर मक्का मदीना मे भी कोई किताब हो तो ले आओ उठा के !!

अंत कोर्ट ने उनको 1 महीने का पर्मिशन दिया की जाओ और दस्तावेज़ ढूंढ के लाओ जिसमे लिखा हो गाय का कत्ल करना इस्लाम का मूल अधिकार है ! हम मान लेंगे !! और एक महीने तक भी कोई दस्तावेज़ नहीं मिला !! कोर्ट ने कहा अब हम ज्यादा समय नहीं दे सकते ! और अंत 26 अक्तूबर 2005 judgement आ गया !! और आप चाहें तो judgement की copy
www. supremecourtcaselaw . com पर जाकर download कर सकते हैं !

ये 66 पनने का judgement है सुप्रीम कोर्ट ने एक इतिहास बाना दिया और उन्होंने कहा की गाय को काटना सांविधानिक पाप है धार्मिक पाप है ! और सुप्रीम कोर्ट ने कहा गौ रक्षा करना,सर्वंधन करना देश के प्रत्येक नागरिक का सांविधानिक कर्त्तव्य है ! सरकार का तो है ही नागरिकों का भी सांविधानिक कर्तव्य है ! अब तक जो संविधानिक कर्तव्य थे जैसे , संविधान का पालन करना ,राष्ट्रीय ध्वज ,का सम्मान करना ,क्रांतिकारियों का समान करना ,देश की एकता , अखंडता को बनाए रखना ! आदि आदि अब इसमे गौ की रक्षा करना भी जुड़ गया है !!

सुप्रीम कोर्ट ने कहा की भारत की 34 राज्यों कीसरकार की जिमेदारी है की वो गाय का कतल आपने आपने राज्य में बंद कराये और किसी राज्य में गाय का कतल होता है तो उस राज्य के मुख्यमंत्री की जिमेदारी है राज्यपाल की जावबदारी,चीफ सेकेट्री की जिमेदारी है, वो अपना काम पूरा नहीं कर रहे है तो ये राज्यों के लिए सविधानिक जवाबदारी है और नागरिको के लिए सविधानिक कर्त्तव्य है !!

अब कानून दो सतर पर बनाये जाते हैं एक जो केद्र सरकार बना सकती है और एक 35 राज्यों की राज्य सरकार बना सकती है अपने आपने राज्यों में !! अगर केंद्र सरकार ही बना दे !! तो किसी राज्य सरकार को बनाने की जरूरत नहीं ! केंद्र सरकार का कानून पूरे देश मे लागू होगा ! तो आप सब केंद्र सरकार पर दबाव बनाये !! जब तक केंद्र सरकार नहीं बनाती तब तक आप अपने अपने राज्य की सरकारों पर दबाव बनाये ! दबाव कैसे बनाना है ???

आपको हजारो ,लाखो की संख्या मे प्रधानमंत्री ,राष्ट्रपति या राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखना है और इतना ही कहना है की 26 अक्तूबर 2005 को जो सुप्रीम कोर्ट का judgment आया है उसे लागू करो !!
आप अपने -आस पड़ोस ,गली गाँव ,मुहल्ला ,शहर मे लोगो से बात करनी शुरू करे उनको गाय का महत्व समझाये !! देश के लिए गाय का आर्थिक योगदान बताएं ! और प्रधानमंत्री ,राष्ट्रपति या राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखने का निवेदन करें ! इतना दबाव डालें की 2014 के चुनाव मे लोगो उसी सरकार को वोट दें जो इस सुप्रीम कोर्ट के गौ ह्त्या के खिलाफ judgement को पूरे देश मे लागू करें !

और अंत उस क्रांतिकारी मंगल पांडे ने इतिहास बना वो फांसी पर चढ़ गया लेकिन गाय की चर्बी के कारतूस उसने अपने मुंह से नहीं खोले ! और जिस अंग्रेज़ अधिकारी ने उसको मजबूर किया उसको मंगल पांडे ने गोली मर दी !! तो हमने कहा था कि हमारी तो आजादी का इतिहास शुरू होता है गौ रक्षा से !! इसलिए गाय की रक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी हमारी आजादी !

आपने पूरी post पढ़ीं बहुत बहुत धन्यवाद !!

यहाँ जरूर click कर देखें !!!
http://www.youtube.com/watch?v=i7xaTCfA7js

अमर बलिदानी राजीव दीक्षित जी की जय !!
वन्देमातरम , जय गौ माता !

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सुंदर भाव कथा
मदद
❣️
रात दस बजे लगभग अचानक मुझे एलर्जी हो गई।घर पर दवाई नहीं, न ही इस समय मेरे अलावा घर में कोई और। श्रीमती जी बच्चों के पास गोवा और हम रह गए अकेले। ड्राईवर भी अपने घर जा चुका था बाहर हल्की बारिश की बूंदे सावन महीने के कारण बरस रही थी। दवा की दुकान ज्यादा दूर नहीं थी पैदल भी जा सकता था लेकिन बारिश की वज़ह से मैंने रिक्शा लेना उचित समझा। *बगल में राम मन्दिर बन रहा था*।

एक रिक्शा वाला भगवान की प्रार्थना कर रहा था। मैंने उससे पूछा चलोगे, तो उसने सहमति में सर हिलाया और बैठ गए हम रिक्शा में! रिक्शा वाला काफी़ बीमार लग रहा था और उसकी आँखों में आँसू भी थे। मैंने पूछा,"क्या हुआ भैया! रो क्यूँ रहे हो और तुम्हारी तबियत भी ठीक नहीं लग रही।" उसने बताया:-

बारिश की वजह से तीन दिन से सवारी नहीं मिली और वह भूखा है बदन दर्द भी कर रहा है,अभी भगवान से प्रार्थना कर रहा था क़ि आज मुझे भोजन दे दो, मेरे रिक्शे के लिए सवारी भेज दो
मैं बिना कुछ बोले रिक्शा रुकवाकर दवा की दुकान पर चला गया।
वहां खड़े खड़े सोच रहा था…….
“कहीं भगवान ने तो मुझे इसकी मदद के लिए नहीं भेजा।

क्योंकि यदि यही एलर्जी आधे घण्टे पहले उठती तो मैं ड्राइवर से दवा मंगाता,रात को बाहर निकलने की मुझे कोई ज़रूरत भी नहीं थी,और पानी न बरसता तो रिक्शे में भी न बैठता।”
मन ही मन भगवांन को याद किया और पूछ ही लिया भगवान से,!
मुझे बताइये क्या आपने रिक्शे वाले की मदद के लिए भेजा है?”
मन में जवाब मिला… “हाँ”…। मैंने भगवान को धन्यवाद् दिया,अपनी दवाई के साथ रिक्शेवाले के लिए भी दवा ली। *बगल के रेस्तरां से छोले भटूरे पैक करवाए और रिक्शे पर आकर बैठ गया।* *जिस मन्दिर के पास से रिक्शा लिया था वहीँ पहुंचने पर मैंने रिक्शा रोकने को कहा।*

उसके हाथ में रिक्शे के 30 रुपये दिए,
गर्म छोले भटूरे का पैकेट और दवा देकर बोला:-

“खाना खा कर यह दवा खा लेना, एक एक गोली ये दोनों अभीऔर एक एक कल सुबह नाश्ते के बाद,उसके बाद मुझे आकर फिर दिखा जाना। रोते हुए रिक्शेवाला बोला:-

“मैंने तो भगवान से दो रोटी मांगी थी मग़र भगवान ने तो मुझे छोले भटूरे दे दिए।कई महीनों से इसे खाने की इच्छा थी। आज भगवान ने मेरी प्रार्थना सुन ली।
और
जो मन्दिर के पास उसका बन्दा रहता था उसको मेरी मदद के लिए भेज दिया।” कई बातें वह बोलता रहा और मैं स्तब्ध हो सुनता रहा। घर आकर सोचा क़ि उस रेस्तरां में बहुत सारी चीज़े थीं, मैं कुछ और भी ले सकता था,

समोसा या खाने की थाली ..
पर मैंने छोले भटूरे ही क्यों लिए?
क्या सच् में भगवान ने मुझे रात को अपने भक्त की मदद के लिए ही भेजा था..? *हम जब किसी की मदद करने सही वक्त पर पहुँचते हैं तो इसका मतलब उस व्यक्ति की प्रार्थना भगवान ने सुन ली,*

और
हमें अपना प्रतिनिधि बना, देवदूत बना उसकी मदद के लिए भेज दिया।
इसलिए कहते हैं , अचानक आए परोपकार, दान और मदद के मौके को ना गवाएं ….क्या पता…. ईश्वर ने आपको मौका दिया है उनके प्रतिनिधि के रूप में….

।।जय जय श्री राम।।