Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🙏🏻कहानी *"संगठन में ताकत"*

एक वन में बहुत बडा अजगर रहता था। वह बहुत अभिमानी और अत्यंत क्रूर था।
जब वह अपने बिल से निकलता तो सब जीव उससे डर कर भाग खडे होते।
उसका मुंह इतना विकराल था कि खरगोश तक को निगल जाता था।

एक बार अजगर शिकार की तलाश में घूम रहा था। सारे जीव तो उसे बिल से निकलते देख कर ही भाग चुके थे। उसे कुछ न मिला तो वह क्रोधित होकर फुफकारने लगा और इधर-उधर खाक छानने लगा।
वहीं निकट में एक हिरणी अपने नवजात शिशु को पत्तियों के ढेर के नीचे छिपा कर स्वयं भोजन की तलाश में दूर निकल गई थी।
अजगर की फुफकार से सूखी पत्तियां उडने लगी और हिरणी का बच्चा नजर आने लगा।
अजगर की नजर उस पर पडी हिरणी का बच्चा उस भयानक जीव को देख कर इतना डर गया कि उसके मुंह से चीख तक न निकल पाई।
अजगर ने देखते-ही-देखते नवजात हिरण के बच्चे को निगल लिया।

तब तक हिरणी भी लौट आई थी, पर वह क्या करती? आंखों में आंसू भर जड होकर दूर से अपने बच्चे को काल का ग्रास बनते देखती रही।
हिरणी के शोक का ठिकाना न रहा।
उसने किसी-न-किसी तरह अजगर से बदला लेने की ठान ली।
हिरणी की एक नेवले से दोस्ती थी।
शोक में डूबी हिरणी अपने मित्र नेवले के पास गई और रो-रोकर उसे अपनी दुख-भरी कथा सुनाई।
नेवले को भी बहुत दुख हुआ।
वह दुख-भरे स्वर में बोला ‘मित्र, मेरे बस में होता तो मैं उस नीच अजगर के सौ टुकडे कर डालता।
पर क्या करें, वह छोटा-मोटा सांप नहीं है, जिसे मैं मार सकूं वह तो एक अजगर है।
अपनी पूंछ की फटकार से ही मुझे अधमरा कर देगा। लेकिन यहां पास में ही चीटिंयों की एक बांबी हैं।
वहां की रानी मेरी मित्र हैं।
उससे सहायता मांगनी चाहिए।’

हिरणी ने निराश स्वर में विलाप किया “पर जब तुम्हारे जितना बडा जीव उस अजगर का कुछ बिगाडने में समर्थ नहीं हैं तो वह छोटी-सी चींटी क्या कर लेगी?”
नेवले ने कहा ‘ऐसा मत सोचो। उसके पास चींटियों की बहुत बडी सेना है |
संगठन में बडी शक्ति होती है |’

हिरणी को कुछ आशा की किरण नजर आई।
नेवला हिरणी को लेकर चींटी रानी के पास गया और उसे सारी कहानी सुनाई।
चींटी रानी ने सोच-विचार कर कहा ‘हम तुम्हारी सहायता करेंगे।
हमारी बांबी के पास एक संकरीला नुकीले पत्थरों भरा रास्ता है।
तुम किसी तरह उस अजगर को उस रास्ते से आने पर मजबूर करो।
बाकी काम मेरी सेना पर छोड दो।’

नेवले को अपनी मित्र चींटी रानी पर पूरा विश्वास था। इस लिए वह अपनी जान जोखिम में डालने पर तैयार हो गया।
दूसरे दिन नेवला जाकर सांप के बिल के पास अपनी बोली बोलने लगा।
अपने शत्रु की बोली सुनते ही अजगर क्रोध में भर कर अपने बिल से बाहर आया।
नेवला उसी संकरे रास्ते वाली दिशा में दौडा।
अजगर ने पीछा किया।
अजगर रुकता तो नेवला मुड कर फुफकारता और अजगर को गुस्सा दिला कर फिर पीछा करने पर मजबूर करता।
इसी प्रकार नेवले ने उसे संकरीले रास्ते से गुजरने पर मजबूर कर दिया।
नुकीले पत्थरों से उसका शरीर छिलने लगा।
जब तक अजगर उस रास्ते से बाहर आया तब तक उसका काफ़ी शरीर छिल गया था और जगह-जगह से खून टपक रहा था।

उसी समय चींटियों की सेना ने उस पर हमला कर दिया। चींटियां उसके शरीर पर चढकर छिले स्थानों के नंगे मांस को काटने लगीं।
अजगर तडप उठा।
अपना शरीर पटकने लगा जिससे और मांस छिलने लगा और चींटियों को आक्रमण के लिए नए-नए स्थान मिलने लगे।
अजगर चींटियों का क्या बिगाडता?
वे हजारों की गिनती में उस पर टूट पड रही थीं।
कुछ ही देर में क्रूर अजगर ने तडप-तडप कर दम तोड दिया।

सीख — संगठन शक्ति बड़े-बड़ों को धूल चटा देती है। *🕉️⛳राम राम जी🕉️⛳*

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