Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

“डाइटिंग”


“आज तो खाना लाजवाब बनाया है जानेमन तुमने”
रवि ने संतुष्टि भरी डकार के साथ नाद करते हुए बोला।
सुनीता ने तुरंत रिवर्स बाण छोड़ा
“हां हां रोज तो जैसे तो मैं भूखा मार रही हूं ,सारा दिन किचन में लगे रहो और यह सुनने को यह मिले और हां अभी मम्मी जी बना कर देंगे तो यह कह दोगे कि बहुत दिनों बाद पेट भरा, मतलब हर तरफ पत्नी भी पिसे वैसे भी हर मां को बच्चा भूखा और पतला ही लगता है ,हमसे पूछो उनका छोटा मोनू 90 किलो का मोटा मोनू हो गया है, हर सीजन मैं अदरक की तरह बढ़ रहे है जनाब, झेलते तो हमे हैं, हर फंक्शन में तो हम साथ जाते हैं XL से जनाब XXL हो गए हैं ,पेट पर शर्ट के बटन कैसे बांधे जाते, जैसे बेल्ट बंधी हो, और बेचारा पेट सांस लेने की जगह ढूंढ रहा हो।
प्रभु कब इस आदमी की कान पर जूँ रेगेंगी ,हे भगवान मैं तुम्हारी पूजा इनकी लंबी उम्र के लिए करती हो ना कि मोटी तोंद के लिए ,कुछ तो कृपा करो ।”
इधर रवि सोच रहा था उनकी उसने तारीफ करके तो घोर अनर्थ कर दिया ।
उधर बच्चे ताली बजा कर हंस रहे थे
“मोटे पापा मोटे पापा कह के “
रवि ने तभी भीष्म प्रतिज्ञा की अपना रूटीन सेट किया ,बाबा रामदेव को साक्षी मानकर मॉर्निंग वॉक ,योगासन, गाय भैंस की तरह पत्ती चबानी शुरू की, नीम गिलोय, एलोवेरा ग्रीन टी और तो और डाइटिंग के लिए अपने पुराने कांटेक्ट में से MLM के कीड़े दोस्त को कॉल किया जो 4000-5000 की चूनी भूसी के माफिक पाउडर बेच गया, बाबूजी घनघोर डाइटिंग की कोशिश में लग गए 5 दिन हो गए थे,
इंद्रियों पर संयम रखते हुए।
इधर सुनीता भी भगवान कृष्ण की तरह दृष्टा बनकर देख रही थी फिर उसने ब्रह्मास्त्र छोड़ा रवि को तेज सुना कर
” चलो बच्चों आज कढ़ाई पनीर मिक्स वेज पुदीना और मीठे में रसगुल्ले बनाए और पापा ओटस खाएंगे उनके लिए तो कुछ है ही नहीं”
रवि लैपटॉप पर काम कर रहा था उसने सुन तो लिया था लेकिन अपने मन को मना लिया कि झूठ बोल रही होगी चढ़ाने के लिए ,तभी सुनीता ने मेज पर खाना रखा और सब्जियों के ढक्कन खोले बर्तन के ,जो की सुगंध रवि के नासिका को हिलाते मस्तिष्क तक पहुंची तो वह एक भंवरे की माफी खुशबू सूंघता हुआ डाइनिंग टेबल तक पहुंचा ,लेकिन सुनिता के चंचल नैनो ने वहां लक्ष्मण रेखा खींच रखी थी ,रवि वहां गरीब भूखे बच्चे की तरह खाने को निहार दृष्टि और खुशबू से ही रसपान कर रहा था, सुनीता की नजर बचते ही उसने रसगुल्ले पर बंदर की तरह झपट्टा मारा और अपने कमरे में भाग गया।
बच्चों ने शोर मचाना शुरू कर दिया और सुनीता मुस्कुराती हुई उसके कमरे मे पहुँची और मुस्कुराते हुए बोली
“पतिदेव कहां गई तुम्हारी डाइटिंग “
रवि बोला “हमसे ना हो पाएगा”
सुनीता बोली “हमें पता था पतिदेव आप जैसे हो ठीक हो ,हां थोड़ा गुस्सा हो जाती हूँ, मुझे झेल लिया करो लेकिन ज्यादा सीरियसली ना लिया करो “
इससे पहले सुनीता और कुछ कहती रवि रोकते हुए बोला
“अरे जानेमन तुमने सही कहा जो कहा लेकिन हम क्षमा चाहते हैं ,हम अपने शरीर को भगवान पर छोड़ते हैं उसे कम करना होगा तो हो जाएंगे वरना हम तो पेल के खाएंगे”
यह सुनकर दोनों खिलखिला कर हंस पड़े और अब रवि भैया भगवान की कृपा से सेंचुरी मार लिए हैं अर्थात 100 किलो की बोरी।
-अनुज सारस्वत की कलम से
(स्वरचित एवं मौलिक)

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