Posted in कविता - Kavita - કવિતા

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तू अपनी खूबियाँ ढूंढ,
कमियाँ निकालने के लिये
लोग हैं..अगर रखना है कदम, तो आगे रख, पीछे खींचने के लिये *लोग हैं...* सपने देखने हैं तो ऊँचे देख, नीचा दिखाने के लिये *लोग हैं...* अपने अंदर जुनून की चिंगारी भड़का, जलने के लिये *लोग हैं...* अगर बनानी है तो यादें बना, बातें बनाने के लिये *लोग हैं...* प्यार करना है तो खुद से कर, दुश्मनी करने के लिये *लोग हैं...* रहना है तो बच्चा बनकर रह, समझदार बनाने के लिये *लोग हैं...* भरोसा रखना है तो खुद पर रख, शक करने के लिये *लोग हैं...* तू बस सँवार ले खुद को, आईना दिखाने के लिये *लोग हैं...* खुद की अलग पहचान बना, भीड़ में चलने के लिये *लोग हैं...* तू कुछ करके दिखा दुनियाँ को, तालियाँ बजाने के लिये *लोग हैं*...

अरुण सुक्ला

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