Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

” शाप “
जिज्जी जबसे गोलोक वासी हुई थी उनका तन्हा मकान भुतहा सा लगने लगा था ।बरसी के बाद तो सारा ही धूल धूसरित हो रहा था पता नही बहन प्रेम ने भाई की बुद्धि फेर दी थी या भाई ने ही भुला दिया उस छोटे से घर का ढेर सारा प्यार । बहनोई जी के जाने के बाद जिज्जी बस हमीं से दुःख सुख बांटा करती बेटा तो सीधा सादा पर बुद्धि जाने किसने फेरी कि जबसे अमेरिका जाकर बस गया कभी कभार साल में आकर एक बार अपने कर्तव्य की इतिश्री कर जाता उसके बाद से माँ की कोई चिंता नही थी …..हाँ मरने से एक महीना पहले आकर पास रह गया यही बहुत है शायद जिज्जी की आत्मा तो तृप्त हो गई होगी ।
बेटियाँ चाहे जान भी दे दे ,पर माँ बाप पुत्र मोह में ही फंसे रहते है।मुझे याद है
कभी कभी मेरे सामने जिज्जी को बहनोई जी कहा करते थे… “क्यों इन बन्धनो में बंधी है…. क्यो इतना समान जोड़ रही है… देख ना सब सड़ेगा कोई नही लेगा तेरा समान” ….. जाने किस बेला में मुंह पर सुरसती जी ने बैठकर ऐसी वाणी निकाली जो सच हो रही थी….
जबकि सारी उमर साधु सा जीवन जीने वाले जीजा बेटे का मोह ना त्याग सके…. उसी के लियें तड़पते रहे थे मरते दम तक …..
वो तो दामाद इतने अच्छे मिले थे कि ग्यारह साल तक छः महीने बड़ी छः महीने छोटी,दोनों बेटियाँ (जिज्जी) माँ को आकर ले जाते और उनका ध्यान रखते थे मैने तो हमेशा लड़कियो को ही करते देखा था ।ये छोटा सा आशियाना भी तो कभी छोटी कभी बड़ी ने ही सजाया ,तो फिर मरते दम जिज्जी ने अपनी छोटी सी कुटिया भी करोड़पति लड़के के नाम क्यूँ लिख दी । जबकि हरदम यही कहने वाली जिज्जी कि चाहे कुछ हो जायें मै अपनी दोनों बिटिया और दामाद को भी अपना कुछ हिस्सा दूंगी .. जाने कितनी यादें इस घर से जुड़ी थी छोटी की…
बेटी के जापे से ले कर पिता के अन्तिम समय तक वही तो साथ रही बेटा बहु तो मेहमान की तरह आये और चले गये बरसी के दिन छोटी फूट फूट कर रो पड़ी थी…. जब बरसी में आये भाई ने मां बाप के छोटे से घर का सौदा कर लिया अमेरिका मे ग्रीन कार्ड होल्डर भाई जिसकी तीन या चार महीने की तन्ख्वाह में वो घर बिक रहा था वो मासूम भाई अपनी छोटी बहन का मन ना समझ
सका बेटियों की यादोँ से भरा घर….
लाक डाउन की वजह से बीच में ही रह गया सौदा ,ना वो अमेरिका से जल्दी आ पायेगा…..।
जाने कब ये घर शाप से मुक्त होगा ।
अपर्णा गुप्ता लखनऊ

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