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🌳🦚आज का प्रेरक प्रसंग🦚🌳

💐भगवान की दयालुता💐💐* एक राजा का एक विशाल फलों का बगीचा था।

उसमें तरह-तरह के फल लगते थे।
उस बगीचे की सारी देख-रेख एक किसान‌‌ अपने परिवार के साथ करता था।
और वो किसान हर दिन बगीचे के ताजे फल लेकर राजा‌ के राजमहल में जाता था।

एक दिन किसान ने पेड़ों पर देखा,
कि नारियल, अनार, अमरूद और अंगूर आदि पक कर‌‌ तैयार हो रहे हैं।
फिर वो किसान सोचने लगा- कि आज कौन सा फल‌ राजा को अर्पित करूं?
और उसे लगा कि आज राजा को अंगूर अर्पित करने चाहिएं,
क्योंकि वो बिल्कुल पक कर तैयार हैं।
फिर उसने अंगूरों की टोकरी भर ली और राजा को देने चल पड़ा।

किसान जब राजमहल में पहुंचा, तो राजा किसी दूसरे ख्याल में खोया हुआ था और थोड़ी सा नाराज भी लग रहा था। किसान ने रोज की तरह मीठे रसीले अंगूरों की टोकरी राजा के सामने रख दी,
और थोड़ी दूरी पर बैठ गया।

अब राजा उसी ख्यालों में टोकरी में से अंगूर उठाता,
एक खाता और एक खींचकर किसान के माथे पर निशाना साधकर फेंक देता।

राजा का अंगूर जब भी किसान के माथे या शरीर पर लगता था, तो किसान कहता- ईश्वर बड़ा ही दयालु है।
राजा फिर और जोर से अंगूर फेंकता था,
और किसान फिर वही कहता- ईश्वर बड़ा ही दयालु है।
थोड़ी देर बाद जब राजा को एहसास हुआ,
कि वो क्या कर रहा है और प्रत्युत्तर क्या आ रहा है,
तो वो संभलकर बैठ गया और फिर किसान से कहा- मैं तुम्हें बार-बार अंगूर मार रहा हूं, और ये अंगूर तुम्हें लग भी रहे हैं, पर फिर भी तुम बार-बार यही क्यों कह रहे हो- ईश्वर बड़ा ही दयालु है।

किसान बड़ी ही नम्रता से बोला- राजा जी! बागान में आज नारियल, अनार, अमरुद और अंगूर आदि फल तैयार थे, पर मुझे भान हुआ कि क्यों न मैं आज आपके लिए अंगूर ले चलूं। अब लाने को तो मैं नारियल, अनार और अमरुद भी ला सकता था,
पर मैं अंगूर लाया। यदि अंगूर की जगह नारियल, अनार या अमरुद रखे होते,
तो आज मेरा हाल क्या होता?

इसीलिए मैं कह रहा था-
ईश्वर बड़ा ही दयालु है।

तात्पर्य——

इसी प्रकार ईश्वर भी हमारी कई मुसीबतों को बहुत ही हल्का करके हमें उबार लेता है।
पर ये तो हम ही नाशुकरे हैं जो शुक्र न करते हुए, उल्टा उसे ही गुनहगार ठहरा देते हैं।
मेरे साथ ही ऐसा क्यूं हुआ? मेरा क्या कसूर था ?इस लिए कहा है कि भगवान जी जो करते हैं वो अच्छा करते हैं। पर हमे लगना चाहिए कि इस मे भी

अच्छाई देखनी चाहिए

सदैव प्रसन्न रहिये!!
जो प्राप्त है-पर्याप्त है!!
🙏🙏🙏🙏🙏🌳🌳🙏🙏🙏🙏

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🏦❤️🎉समय बैंक 🎉❤️🏦

स्विट्जरलैंड में पढ़ने वाली एक छात्रा ने बताया –

स्विट्जरलैंड में पढ़ाई के दौरान, मैंने अपने स्कूल के पास एक मकान किराए पर लिया था। मकान मालकिन क्रिस्टीना एक 67 वर्षीय एकलौती बूढ़ी महिला थी, जो सेवानिवृत्त होने से पहले एक माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक के रूप में काम कर चुकी थी। स्विट्जरलैंड की पेंशन बहुत अच्छी है, उसे बाद के वर्षों में भोजन और आश्रय के बारे में चिंता नहीं करने के लिए पर्याप्त है। एक दिन मुझे पता चला कि उसने एक 87 वर्षीय एकल बूढ़े व्यक्ति की देखभाल करने का काम पाया है। मैंने उस महिला से पूछा कि क्या वह पैसे के लिए काम कर रही है। उसके जवाब ने मुझे चौंका दिया: “मैं पैसे के लिए काम नहीं कर रही, बल्कि मैं अपना समय ‘समय बैंक’ में रख रही हूँ, और जब मैं अपने बुढ़ापे में चल नहीं सकूंगी, तो मैं इसे वापस ले सकती हूँ।”

पहली बार जब मैंने “समय बैंक” की इस अवधारणा के बारे में सुना, तो मैं बहुत उत्सुक हुई और मकान मालकिन से और पूछा। “समय बैंक” की अवधारणा स्विस फेडरल सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय द्वारा विकसित एक वृद्धावस्था पेंशन कार्यक्रम है। लोगों ने बुजुर्गों की देखभाल करने के लिए ‘समय’ बचा लिया और जब वे बूढ़े हो गए, या बीमार या आवश्यक देखभाल के लिए जब जरुरत हुई वे इसे वापस ले सकते हैं। आवेदक स्वस्थ होना चाहिए, संवाद करने में अच्छा और प्यार से भरा होना चाहिए। रोज उन्हें बुजुर्गों की देखभाल करनी होती है, जिन्हें मदद की ज़रूरत होती है। उनके सेवा घंटों को सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के व्यक्तिगत ‘समय’ खातों में जमा किया जाता है। वह सप्ताह में दो बार काम पर जाती थीं, हर बार दो घंटे बिताती थीं, बुजुर्गों की मदद करती थीं, खरीदारी करती थीं, उनके कमरे की सफाई करती थीं, उन्हें धूप सेंकने के लिए ले जाती थीं, उनसे बातें करती थीं।

नियमानुसार सेवा के एक वर्ष के बाद, “समय बैंक” सेवा देने वाले व्यक्ति के काम के घंटे की गणना करता है और उसे एक “समय बैंक कार्ड” जारी करता है। जब उसे अपनी देखभाल करने के लिए किसी की आवश्यकता होती है, तो वह “समय और ब्याज” को वापस लेने के लिए अपने “समय बैंक कार्ड” का उपयोग कर सकती है। सूचना सत्यापन के बाद, “समय बैंक” अस्पताल या उसके घर पर उसकी देखभाल करने के लिए स्वयंसेवकों को नियुक्त करता है।

एक दिन, मैं स्कूल में थी और मकान मालकिन ने फोन किया और कहा कि वह खिड़की से पोंछा लगा रही थी और वह स्टूल से गिर गई। मैंने जल्दी से छुट्टी ली और उसे इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया। मकान मालकिन का टखना टूट गया था और उसे थोड़ी देर बिस्तर पर रहने की जरूरत पड़ी। जब मैं उसकी देखभाल के लिए अपने स्कूल से छुट्टी के लिए आवेदन करने की तैयारी कर रही थी, तो मकान मालकिन ने मुझसे कहा कि मुझे उसकी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उसने पहले ही “समय बैंक” को एक निकासी अनुरोध प्रस्तुत कर दिया है। दो घंटे से भी कम समय में “समय बैंक” ने एक नर्सिंग कर्मी को मकान मालकिन की देखभाल के लिए भेज दिया।

अगले एक महीने तक, देखभाल नर्सिंग कर्मी ने मकान मालकिन की रोज़ देखभाल की, उसके साथ बातचीत की और उसके लिए स्वादिष्ट भोजन बनाया। देखभालकर्ता की सावधानीपूर्वक देखभाल के तहत, मकान मालकिन ने जल्द ही अपना स्वास्थ्य ठीक कर लिया। ठीक होने के बाद, मकान मालकिन “काम” पर वापस चली गई। उसने कहा कि वह “समय बैंक” में अधिक समय बचाने का इरादा रखती है, क्योंकि वह अभी भी स्वस्थ है।

आज, स्विट्जरलैंड में, बुढ़ापे का समर्थन करने के लिए “समय बैंकों” का उपयोग एक आम बात बन गई है। यह न केवल देश के पेंशन खर्च को बचाता है, बल्कि अन्य सामाजिक समस्याओं को भी हल करता है। कई स्विस नागरिक इस तरह के वृद्धावस्था पेंशन के बहुत समर्थक हैं।

स्विस पेंशन संगठन द्वारा किए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि स्विस के आधे से अधिक लोग भी इस प्रकार की वृद्धावस्था देखभाल सेवा में भाग लेना चाहते हैं। स्विस सरकार ने “समय बैंक” पेंशन योजना का समर्थन करने के लिए कानून भी पारित किया। वर्तमान में एशियाई देशों में “घरों में अकेले रहने वाले बूढ़े लोगों” की संख्या बढ़ रही है और यह धीरे-धीरे एक सामाजिक समस्या बन गई है। स्विट्जरलैंड शैली “समय बैंक” पेंशन हमारे लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

कृपया इस अवधारणा को अधिक से अधिक साझा करें, ताकि भारत सरकार भी इस तरह की योजना को शीघ्र लागू करे। कृपया इसे अधिकतम शेयर करे ताकि देश की जनता और सरकार में इस संबंद्ध में कोई नियोजित योजना के बारे में जागृति हो सके।