Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

खून_TheCharacter

“सुनो! आज बाज़ार में अमित मिला था। नई गाड़ी ले ली है उसने,” रमित ने बताया।
“हम्म… कुछ कह रहा था क्या?” सुनिधी के चेहरे पर कोई भाव नहीं था।
“कहेगा क्या, वो बेईमान और कपटी? कैसे मेरा पत्ता काट कर पापा से दुकान अपने नाम करवा ली, और फिर उनकी देखभाल भी न की! तभी तो इतनी जल्दी गुज़र गए, बिना किसी बीमारी के। ताऊ जी को देखो! पापा से 7 वर्ष बड़े और कितने बीमार हैं, मगर फिर भी ज़िंदा तो हैं”।
“पापा का यूँ चले जाना वाकई हैरत में डाल देता है। काश उन्होंने हमें अलग न किया होता, मैं उनकी खूब सेवा करती!” सुनिधी को भीतर तक अफ़सोस हुआ।
“मेरा तो उसकी शक्ल देखने का भी जी नहीं करता। भगवान भी कुछ देखता नहीं। अपने से ज्यादा ध्यान रखा अमित का! वह उस बीमारी से मर ही जाता, अगर हमने ध्यान न रखा होता!” रमित की आँखों में अफ़सोस झलका।
“पापा ने इतने वर्षों तक परिवार को संभाले रखने की मेरी मेहनत का ये सिला दिया! आपने दो बहनों की शादी में हर मदद की और फिर; छोटी बहू के आते ही हमें ही अलग कर दिया! मुझे अफसोस है मैं शालू की चालें न समझ सकी, और आप अमित के प्रति अपने स्नेह के चलते उस पर अंधविश्वास करते रहे!” रमित के रोके आँसू, सुनिधी की आँखों में बाढ़ ले आए।
“अब कहीं दिखा भी, तो मुँह फेर लूँगा मैं,” रमित भी जैसे दु:ख से रो पड़ा।
तभी फोन की घंटी बजी। रमित ने फोन उठा कर देखा—
“अमित के साले की कॉल है!” उसे घोर आश्चर्य हुआ। साल भर पहले नम्बर लिया था, और आज पहली बार कॉल! कहीं कोई नया षडयंत्र तो नहीं अमित का, सोचते हुए उसने कॉल ले ली!
“जीजा जी का एक्सीडेंट हो गया है, भाई साहब। हम मोदीपुरम के लाइफलाइन अस्पताल में हैं,” कह कर साले ने फोन रख दिया।
“उफ्फ! मुझे तुरंत निकलना होगा, रमित दो मिनट में पहले की सारी बातें भूल गया।
सुनिधी ने भी आँखें पौंछी और जाने के लिए सेफ से रुपये निकालने लगी।
—Dr💦Ashokalra
Meerut

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