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किस्सा दुलीचंद वल्द सोमचन्द का!!

एक गाय ने अपने सींग एक दीवार की खुली खिड़की में कुछ इस तरह फंसाए कि बहुत कोशिश के बाद भी वह उसे निकाल नही पा रही थी।
भीड़ इकट्ठी हो गई, लोग गाय को निकालने के लिए तरह तरह के सुझाव देने लगे। चिन्ता इसी बात की थी कि गाय को कोई कष्ट ना हो।
तभी एक व्यक्ति आया और आते ही बोला कि गाय के सींग काट दो।
सब उसे घूरने लगे, भीड़ में सन्नाटा छा गया।
खैर गृहस्वामी ने दीवार को गिराकर गाय को सुरक्षित निकाल लिया।
गौ माता के सुरक्षित निकल आने पर सभी प्रसन्न हुए, किन्तु गौ के सींग काटने की बात महाराजा रणजीत सिंह तक पहुंची।
महाराजा ने उस व्यक्ति को बुलाकर पूछताछ की।
” क्या नाम है तेरा ?”
उस व्यक्ति ने अपना परिचय देते हुए नाम बताया दुलीचन्द। पिता का नाम – “सोमचंद” जो एक लड़ाई में मारा जा चुका था।

महाराजा ने उसकी अधेड़ माँ को बुलवाकर पूछा तो माँ ने भी यही सब दोहराया, किन्तु महाराजा असंतुष्ट थे।

उन्होंने जब उस महिला से सख्ती से पूछताछ करवाई तो पता चला कि उसके अवैध संबंध उसके पड़ोसी “समसुद्दीन” से हो गए थे। और ये लड़का दुलीचंद उसी समसुद्दीन की औलाद है, सोमचन्द की नहीं।
महाराजा का संदेह सही साबित हुआ।

उन्होंने अपने दरबारियों से कहा कि कोई भी शुद्ध – रक्त व्यक्ति अपनी संस्कृति, अपनी मातृ भूमि, और अपनी गौ माता के अनिष्ट ,अपमान और उसके पराभव को सहन नही कर सकता।

जब मैंने सुना कि दुलीचंद ने गाय के सींग काटने की बात कही तभी मुझे यह आभास हो गया था कि हो ना हो इसके रक्त में गड़बड़ है। सोमचन्द की औलाद ऐसा नहीं सोच सकती।
और परिणाम आपके सामने है।

सार :- आज भी हमारे समाज में सन ऑफ सोमचन्द की आड़ में बहुत से सन ऑफ xyz घुस आए हैं !

इन्ही में ऐसे स्वघोषित तथाकथित किसान नेता, राजनेता, पत्रकार एक्टिविस्ट भी शामिल हैं जिनका नाम हिन्दू है लेकिन वे अपने लालच में न सिर्फ सनातन संस्कृति का अपमान करते हैं बल्कि इसे मिटाने पर भी तुले हुए हैं। जो अपनी हिन्दू सभ्यता संस्कृति पर आघात करते हैं। और उसे देख कर खुश होते हैं….

राकेश_डकैत

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रात्रि कहानी 🌝🌝

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आम का पेड़

कुंतालपुर का राजा बड़ा ही न्याय प्रिय था| वह अपनी प्रजा के दुख-दर्द में बराबर काम आता था| प्रजा भी उसका बहुत आदर करती थी| एक दिन राजा गुप्त वेष में अपने राज्य में घूमने निकला तब रास्ते में देखता है कि एक वृद्ध एक छोटा सा पौधा रोप रहा है|

राजा कौतूहलवश उसके पास गया और बोला, ‘‘यह आप किस चीज का पौधा लगा रहे हैं ?’’ वृद्ध ने धीमें स्वर में कहा, ‘‘आम का|’’

राजा ने हिसाब लगाया कि उसके बड़े होने और उस पर फल आने में कितना समय लगेगा| हिसाब लगाकर उसने अचरज से वृद्ध की ओर देखा और कहा, ‘‘सुनो दादा इस पौधै के बड़े होने और उस पर फल आने मे कई साल लग जाएंगे, तब तक तुम क्या जीवित रहोगे?’’

वृद्ध ने राजा की ओर देखा| राजा की आँखों में मायूसी थी| उसे लग रहा था कि वह वृद्ध ऐसा काम कर रहा है, जिसका फल उसे नहीं मिलेगा|

यह देखकर वृद्ध ने कहा, ‘‘आप सोच रहें होंगे कि मैं पागलपन का काम कर रहा हूँ| जिस चीज से आदमी को फायदा नहीं पहुँचता, उस पर मेहनत करना बेकार है, लेकिन यह भी तो सोचिए कि इस बूढ़े ने दूसरों की मेहनत का कितना फायदा उठाया है ? दूसरों के लगाए पेड़ों के कितने फल अपनी जिंदगी में खाए हैं ? क्याउस कर्ज को उतारने के लिए मुझे कुछ नहीं करना चाहिए?

क्या मुझे इस भावना से पेड़ नहीं लगाने चाहिए कि उनके फल दूसरे लोग खा सकें? जो केवल अपने लाभ के लिए ही काम करता है, वह तो स्वार्थी वृत्ति का मनुष्य होता है|’’

वृद्ध की यह दलील सुनकर राजा प्रसन्न 😊हो गया , आज उसे भी कुछ बड़ा सीखने को मिला था।
😊🌹💫💥👑