Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

अगर पौराणिक कथाओं की बात करें तो एक किसी रत्नाकर नाम के डाकू की किम्वदंतियां सुनाई देती हैं। ये जंगलों में कहीं अड्डा जमाये हुए था और आने जाने वाले राहगीरों को लूटकर अपना जीवन-यापन करता था। काफी कुछ अंगुलिमाल जैसा ही किस्सा है मगर इसमें डाकू की भेंट नारद मुनि से हो जाती है। नारद खुशी-ख़ुशी उसे अपनी वीणा देने को तैयार हो जाते हैं जिससे डाकू चकित हो जाता है। इसी क्रम में अपनी बातों में सबको उलझाने के लिए जाने जाने वाले नारद मुनि डाकू से बातचीत करने लगते हैं।

बेचारे डाकू को कोई अंदाजा नहीं रहा होगा कि उसके तलवार-फरसे, चाकू-छुरे इत्यादि से कहीं घातक माने जाने वाले शब्दों के हथियार चलाने में नारद कैसे प्रवीण हैं! नारद मुनि ने उससे पूछ लिया कि परिवार में कौन कौन है? डाकू का परिवार था। फिर नारद ने पूछा कि जो तुम लूटकर ले जाते हो उसमें मेहनत तो तुम करते हो मगर भोगते तो सभी हैं। क्या कभी तुमने उनसे ये पूछा कि अगर राजा के सिपाहियों ने तुम्हे ये करते पकड़ लिया तो वो दंड भोगने में तुम्हारा हिस्सा बंटाएंगे या नहीं?

डाकू ने इस विषय में सोचा ही नहीं था। मासूम रहा होगा। तो नारद मुनि को वहीँ छोड़कर वो घर गया और पहले अपने माता-पिता से पूछा। उन्होंने कहा कि डाका डालना हमने तो तुम्हें सिखाया नहीं। अगर तुम ये करके कमाते हो तो ये तुम्हारा मामला है, दंड हम क्यों भोगेंगे? पत्नी से पूछा तो वो बोली मेरा निर्वाह करना तुम्हारा धर्म है। अनाचार से पैसे लाये थे, इससे मुझे क्या लेना? कोई दंड बाँटने को तैयार नहीं दिखा तो डाकू नारद मुनि के पास लौटा और कहने लगा कि जिनके लिए पाप किये जा रहा था, उनमें से कोई दंड भोगने को तैयार नहीं!

अब नारद ने और समझाया-बुझाया, फिर रत्नाकर डकैती छोड़कर साधू बन गया। कुछ लोग इसे पता नहीं क्यों, निराधार ही, बिना संदर्भो के ही, वाल्मीकि पर चिपका देने की कोशिश करते हैं। इस कहानी का वाल्मीकि से कोई लेना देना हो, ऐसा हमने कभी पढ़ा नहीं। हाँ, आपके पापों-अपराधों का दंड आप अकेले ही भोगेंगे, ये सिखाने के लिए इस कथा का प्रयोग जरूर हो सकता है। उदाहरण के तौर पर शराब पीने में आपका साथ देने कई लोग जरूर जुट जायेंगे, लेकिन नशे में एक्सीडेंट हुआ तो दर्द आप झेलेंगे। किसी और को गाड़ी से उड़ा दिया तो मुकदमा आपपर होगा। जो प्रतिष्ठा शराबी कहलाने के कारण जाएगी वो भी आपकी ही जायेगी। उस दिन जो लोग आपके साथ बैठे थे वो भी चटखारे लेकर आपके शराबी होने का किस्सा सुनायेंगे।

कई बार लोग ऐसी कथाएँ सुनने-पढ़ने या जानने के बाद भी इससे सीखते नहीं। दूसरे लोगों का छोड़िये हमने खुद भी अनुभव के बाद ही इस कहानी को मानना शुरू किया है। इसके बाद भी अगर पहले से पता हो तो मनुष्य थोड़ा सावधान तो रहेगा ही। अब सोचिये कि #टूलकिट मामले में धराई दिशा रवि ने क्या सोचा होगा? उसके बनाए #टूलकिट को इस्तेमाल करने वाले नामचीन लोग आपको बचा लेंगे? अगर कुछ हुआ भी तो बड़े-बड़े लोग उसमें हिस्सा बंटाने आ जायेगे? अब शायद समझ में आ रहा होगा ऐसा नहीं होता। भारत विरोधी #टूलकिट रचने में सहयोग करते समय उसे बड़े-बड़े लोगों से मिलने-परिचित होने में मजा आ रहा होगा। रत्नाकर डाकू जैसा “लूटकर लाओ, कूटकर खाओ” चल रहा होगा।

बाकी अगर अपनी पौराणिक कथाएँ सुनाई होती तो अपने कुकर्मों का दंड अकेले ही भुगतना होगा ये पता होता। “सिर्फ दो लाइन एडिट की थी जी” कहकर रोती-धोती लड़की की तस्वीरें जब घर में बच्चों को दिखें, तो उसके साथ ही ये रत्नाकर डाकू का किस्सा भी सुना दीजियेगा। कोई कुटिल कॉमरेड अगर कल को उसे बरगलाये, तो हो सकता है आपके बच्चे रत्नाकर डाकू का किस्सा याद करके रुक जाएँ! बच्चों को जेल में तो नहीं देखना चाहते ना?
@Anand Kumar

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