Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

✨✨✨ रात्रि कहानी✨✨✨ 🛕 अंतिम महल 🛕 ==============

🔷 एक राजा 🤴 बहुत ही महत्त्वाकांक्षी था और उसे महल 🛕 बनाने की बड़ी महत्त्वाकांक्षा रहती थी उसने अनेक महलों का निर्माण करवाया!

🔶 रानी 👸 उनकी इस इच्छा से बड़ी व्यथित रहती थी की पता नही क्या करेंगे इतने महल बनवाकर!🧐

🔷 एक दिन राजा नदी के उस पार एक महात्मा जी के आश्रम के वहाँ से गुजर रहे थे तो वहाँ एक संत की समाधी थी और सैनिकों से राजा को सूचना मिली की संत के पास कोई अनमोल खजाना था और उसकी सूचना उन्होंने किसी को न दी पर अंतिम समय मे उसकी जानकारी एक पत्थर पर खुदवाकर अपने साथ ज़मीन मे गढ़वा दिया और कहा की जिसे भी वो खजाना चाहिये उसे अपने स्वयं के हाथों से अकेले ही इस समाधी से चोरासी हाथ नीचे सूचना पड़ी है निकाल ले और अनमोल सूचना प्राप्त कर लेंवे और ध्यान रखे उसे बिना कुछ खाये पिये खोदना है और बिना किसी की सहायता के खोदना है अन्यथा सारी मेहनत व्यर्थ चली जायेगी !

🔶 राजा अगले दिन अकेले ही आया और अपने हाथों से खोदने लगा और बड़ी मेहनत के बाद उसे वो शिलालेख मिला और उन शब्दों को जब राजा ने पढ़ा तो उसके होश उड़ गये 😱और सारी अकल ठिकाने आ गई!

🔷 उस पर लिखा था हॆ राहगीर संसार के सबसे भूखे प्राणी शायद तुम ही हो और आज मुझे तुम्हारी इस दशा पर बड़ी हँसी आ रही है तुम कितने भी महल बना लो पर तुम्हारा अंतिम महल यही है एक दिन तुम्हे इसी मिट्टी मे मिलना है!

🔶 सावधान राहगीर, जब तक तुम मिट्टी के ऊपर हो तब तक आगे की यात्रा के लिये तुम कुछ जतन कर लेना

क्योंकि जब मिट्टी तुम्हारे ऊपर आयेगी तो फिर तुम कुछ भी न कर पाओगे यदि तुमने आगे की यात्रा के लिये कुछ जतन न किया तो अच्छी तरह से ध्यान रखना की जैसै ये चोरासी हाथ का कुआं तुमने अकेले खोदा है बस वैसे ही आगे की चोरासी लाख योनियों मे तुम्हे अकेले ही भटकना है और हॆ राहगीर ये कभी न भूलना की “मुझे भी एक दिन इसी मिट्टी मे मिलना है बस तरीका अलग अलग है”

🔷 फिर राजा जैसै तैसे कर के उस कुएँ से बाहर आया और अपने राजमहल गया पर उस शिलालेख के उन शब्दों ने उसे झकझोर के रख दिया और सारे महल जनता को दे दिये और “अंतिम घर” की तैयारियों मे जुट गया!

🔶 हमें एक बात हमेशा याद रखना की इस मिट्टी ने जब रावण जैसै सत्ताधारियों को नही बक्सा तो फिर साधारण मानव क्या चीज है इसलिये ये हमेशा याद रखना की मुझे भी एक दिन इसी मिट्टी मे मिलना है क्योंकि ये मिट्टी किसी को नही छोड़ने वाली है!

ये चैनल आपकी जिंदगी बदल रहा है जुड़े रहना हमेशा यू ही सदा। ☺️

शुभ रात्रि 💥

💱💱💱💱💱💱💱💱💱💱

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एक गाय घास चरने के लिए एक जंगल में चली गई । शाम ढलने के करीब थी । उसने देखा कि एक बाघ उसकी तरफ दबे पाँव बढ़ रहा है । वह डर के मारे इधर-उधर भागने लगी । वह बाघ भी उसके पीछे दौड़ने लगा । भागते हुए गाय को सामने एक तालाब दिखाई दिया । घबराई हुई गाय उस तालाब में घुस गई । वह बाघ भी उसका पीछा करते हुए तालाब में घुस गया । तालाब बहुत गहरा नहीं था । उसमें पानी कम था और वह कीचड़ से भरा हुआ था । उन दोनों के बीच काफी कम दूरी रह गयी थी । लेकिन अब वे कुछ नहीं कर पा रहे थे । वह गाय कीचड़ के अंदर धीरे-धीरे धँसने लगी । वह बाघ भी उसके पास होते हुए भी उसे पकड़ नहीं सका । वह भी धीरे-धीरे कीचड़ के अंदर धँसने लगा । दोनों ही करीब-करीब गले तक उस कीचड़ के अंदर धँस गए । दोनों हिल भी नहीं पा रहे थे । गाय के करीब होने के बावजूद वह बाघ उसे पकड़ नहीं पा रहा था । थोड़ी देर बाद गाय ने उस बाघ से पूछा - तुम्हारा कोई गुरु या मालिक है ? बाघ ने गुर्राते हुए कहा - मैं तो जंगल का राजा हूँ । मेरा कोई मालिक नहीं । मैं खुद ही जंगल का मालिक हूँ । गाय ने कहा - लेकिन तुम्हारी उस शक्ति का यहाँ पर क्या उपयोग है ? उस बाघ ने कहा - तुम भी तो फँस गई हो और मरने के करीब हो । तुम्हारी भी तो हालत मेरे जैसी ही है । गाय ने मुस्कुराते हुए कहा - बिलकुल नहीं । मेरा मालिक जब शाम को घर आएगा और मुझे वहाँ नहीं पाएगा , तो वह मुझे ढूँढ़ते हुए यहाँ जरूर आएगा और मुझे इस कीचड़ से निकालकर अपने घर ले जाएगा । ... पर तुम्हें कौन ले जाएगा , तुम तो अहंकार से भरे हो ? थोड़ी ही देर में सच में ही एक आदमी वहाँ पर आया और गाय को कीचड़ से निकालकर अपने घर ले गया । जाते समय गाय और उसका मालिक दोनों एक दूसरे की तरफ कृतज्ञता पूर्वक देख रहे थे । वे चाहते हुए भी उस बाघ को कीचड़ से नहीं निकाल सकते थे , क्योंकि उनकी जान के लिए वह खतरा था ।

गाय – समर्पित हृदय का प्रतीक है ।
बाघ – अहंकारी मन है ।
मालिक – गुरु या ईश्वर का प्रतीक है ।
कीचड़ – यह संसार है ।
संघर्ष – अस्तित्व की लड़ाई है । किसी पर निर्भर न रहना अच्छी बात है , लेकिन मैं ही सब कुछ हूँ , मुझे किसी के सहयोग की आवश्यकता नहीं है ; यह भाव अहंकार है और यहीं से विनाश का बीजारोपण हो जाता है । ईश्वर से बड़ा इस दुनिया में सच्चा हितैषी कोई नहीं होता , क्योंकि वही अनेक रूपों में हमारी रक्षा करता है ।

🙏🏻🙏🏻🙏🏻
शंकर शाण्डिल्य जी

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🕉️ श्री हरि नारायण शिव लहेरी प्रणाम👏🏽

“उधारी तो चुकानी पड़ती है ,ये प्रकृति का नियम है”
एक सेठ जी बहुत ही दयालु थे । धर्म-कर्म में यकीन करते थे। उनके पास जो भी व्यक्ति रुपये उधार मांगने आता, वे उसे मना नहीं करते थे।
सेठ जी मुनीम को बुलाते और जो उधार मांगने वाला व्यक्ति होता उससे पूछते कि ~ “भाई, तुम उधार कब लौटाओगे..??
इस जन्म में या फिर अगले जन्म में..??”
जो लोग ईमानदार होते वो कहते ~ “सेठ जी। हम तो इसी जन्म में आपका कर्ज़ चुकता कर देंगे।” और कुछ लोग जो ज्यादा चालक व बेईमान होते वे कहते ~ “सेठ जी। हम आपका कर्ज़ अगले जन्म में उतारेंगे और अपनी चालाकी पर वे मन ही मन खुश होते कि ~ “क्या मूर्ख सेठ है।”
अगले जन्म में उधार वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है।”
ऐसे लोग मुनीम से पहले ही कह देते कि वो अपना कर्ज़ अगले जन्म में लौटाएंगे और मुनीम भी कभी किसी से कुछ पूछता नहीं था।
जो जैसा कह देता.. मुनीम वैसा ही बही में लिख लेता।
एक दिन एक चोर भी सेठ जी के पास उधार मांगने पहुँचा।
उसे भी मालूम था कि सेठ अगले जन्म तक के लिए रकम उधार दे देता है।
हालांकि उसका उद्देश्य उधार लेने से अधिक सेठ की तिजोरी को देखना (रेकी) था।
चोर ने सेठ से कुछ रुपये उधार मांगे, सेठ ने मुनीम को बुलाकर उधार देने को कहा।
मुनीम ने चोर से पूछा – “भाई। इस जन्म में लौटाओगे या अगले जन्म में..??”
चोर ने कहा ~ “मुनीम जी ! मैं यह रकम अगले जन्म में लौटाऊँगा ।”
मुनीम ने तिजोरी खोलकर पैसे उसे दे दिए। चोर ने भी तिजोरी देख ली और तय कर लिया कि इस मूर्ख सेठ की तिजोरी आज रात में ही उड़ा दूँगा।
वो रात में ही सेठ के घर पहुँच गया और वहीं भैंसों के तबेले में छिपकर सेठ के सोने का इन्तजार करने लगा।
अचानक चोर ने सुना कि भैंसे आपस में बातें कर रही हैं और वह चोर भैंसों की भाषा ठीक से समझ पा रहा है।
एक भैंस ने दूसरी से पूछा ~ “तुम तो आज ही आई हो न, बहन।”
उस भैंस ने जवाब दिया ~ “हाँ, आज ही सेठ के तबेले में आई हूँ, सेठ जी का पिछले जन्म का कर्ज़ उतारना है और तुम कब से यहाँ हो..??”
उस भैंस ने पलटकर पूछा तो पहले वाली भैंस ने बताया – “मुझे तो तीन साल हो गए हैं.. बहन ! मैंने सेठ जी से कर्ज़ लिया था यह कहकर कि अगले जन्म में लौटाऊँगी।
सेठ से उधार लेने के बाद जब मेरी मृत्यु हो गई तो मैं भैंस बन गई और सेठ के तबेले में चली आयी और अब दूध देकर उसका कर्ज़ उतार रही हूँ।
जब तक कर्ज़ की रकम पूरी नहीं हो जाती, तब तक यहीं रहना होगा ।”
चोर ने जब उन भैंसों की बातें सुनी तो होश उड़ गए और वहाँ बंधी भैंसों की ओर देखने लगा।
वो समझ गया कि उधार चुकाना ही पड़ता है, चाहे इस जन्म में या फिर अगले जन्म में.. उसे चुकाना ही होगा ।
वह उल्टे पाँव सेठ के घर की ओर भागा और जो कर्ज़ उसने लिया था.. उसे फटाफट मुनीम को लौटाकर रजिस्टर से अपना नाम कटवा लिया।
हम सब इस दुनिया में इसलिए आते हैं।
क्योंकि, हमें किसी से लेना होता है तो किसी का देना होता है।
इस तरह से प्रत्येक को कुछ न कुछ लेने देने के हिसाब चुकाने होते हैं।
इस कर्ज़ का हिसाब चुकता करने के लिए इस दुनिया में कोई बेटा बनकर आता है ~ तो कोई बेटी बनकर आती है, कोई पिता बनकर आता है, तो कोई माँ बनकर आती है, कोई पति बनकर आता है, तो कोई पत्नी बनकर आती है, कोई प्रेमी बनकर आता है, तो कोई प्रेमिका बनकर आती है, कोई मित्र बनकर आता है, तो कोई शत्रु बनकर आता है, कोई पडौसी बनकर आता है.. तो कोई रिश्तेदार बनकर आता है।
चाहे दुःख हो या सुख हिसाब तो सबको देना ही पड़ता हैं और
ये ही प्रकृति का नियम है।

।।जय जय श्री राम।।
।।हर हर महादेव।।

🌻 Uday Raj 🌻

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. न्यायधीश का दंड

अमेरिका में एक पंद्रह साल का लड़का था, स्टोर से चोरी करता हुआ पकड़ा गया। पकड़े जाने पर गार्ड की गिरफ्त से भागने की कोशिश में स्टोर का एक शेल्फ भी टूट गया।
जज ने जुर्म सुना और लड़के से पूछा, “तुमने क्या सचमुच कुछ चुराया था ब्रैड और पनीर का पैकेट”?
लड़के ने नीचे नज़रें कर के जवाब दिया। ;- हाँ’
जज,:- ‘क्यों ?’
लड़का,:- मुझे ज़रूरत थी।
जज:- ‘खरीद लेते।
लड़का:- ‘पैसे नहीं थे।’
जज:- घर वालों से ले लेते।’ लड़का:- ‘घर में सिर्फ मां है। बीमार और बेरोज़गार है, ब्रैड और पनीर भी उसी के लिए चुराई थी
जज:- तुम कुछ काम नहीं करते ?
लड़का:- करता था एक कार वाश में। मां की देखभाल के लिए एक दिन की छुट्टी की थी, तो मुझे निकाल दिया गया।’
जज:- तुम किसी से मदद मांग लेते?
लड़का:- सुबह से घर से निकला था, तकरीबन पचास लोगों के पास गया, बिल्कुल आख़िर में ये क़दम उठाया।

जिरह ख़त्म हुई, जज ने फैसला सुनाना शुरू किया, चोरी और ख़ुसूसन ब्रैड की चोरी बहुत शर्मनाक जुर्म है और इस जुर्म के हम सब ज़िम्मेदार हैं। ‘अदालत में मौजूद हर शख़्स मुझ सहित सब मुजरिम हैं, इसलिए यहाँ मौजूद हर शख़्स पर दस-दस डालर का जुर्माना लगाया जाता है। दस डालर दिए बग़ैर कोई भी यहां से बाहर नहीं निकल सकेगा।’

ये कह कर जज ने दस डालर अपनी जेब से बाहर निकाल कर रख दिए और फिर पेन उठाया लिखना शुरू किया:- इसके अलावा मैं स्टोर पर एक हज़ार डालर का जुर्माना करता हूं कि उसने एक भूखे बच्चे से ग़ैर इंसानी सुलूक करते हुए पुलिस के हवाले किया।
अगर चौबीस घंटे में जुर्माना जमा नहीं किया तो कोर्ट स्टोर सील करने का हुक्म दे देगी।’
जुर्माने की पूर्ण राशि इस लड़के को देकर कोर्ट उस लड़के से माफी तलब करती है।

फैसला सुनने के बाद कोर्ट में मौजूद लोगों के आंखों से आंसू तो बरस ही रहे थे, उस लड़के के भी हिचकियां बंध गईं। वह लड़का बार बार जज को देख रहा था जो अपने आंसू छिपाते हुए बाहर निकल गये।

क्या हमारा समाज, सिस्टम और अदालत इस तरह के निर्णय के लिए तैयार हैं?

चाणक्य ने कहा है कि यदि कोई भूखा व्यक्ति रोटी चोरी करता पकड़ा जाए तो उस देश के लोगों को शर्म आनी चाहिए

यह रचना बहुत ही प्यारी है दिल को छू गयी तो सोचा आप से भी शेयर कर लूं 🙏🏻

Posted in खान्ग्रेस

श्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय, एक मशहूर कम्पनी, एनरॉन नें, महाराष्ट्र के दाभोल में कारखाना लगाने की प्लानिंग की ..!!

लेकिन, यह स्थानीय लोगों के प्रतिरोध के कारण, हो न सका ..।।

फलस्वरूप, बदलती विषम परिस्थितियों से नाराज एनरॉन नें, भारत सरकार पर ₹38,000 करोड़ के नुकसान की भरपाई का मुकदमा दायर कर दिया ..।।

वाजपेयी सरकार ने हरीश सालवे (जिन्हें आप सभी जानते है ..!! सालवेजी नें, कुलभूषण जाधव का मुकदमा इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में लड़ कर जीता ..) को भारत सरकार का वकील नियुक्त किया ..।।

पर आप जान कर चोंक जाएंगे कि, एनरॉन के वकील पी. चिदंबरम बनें ..!! यानी, पी चिदंबरम भारत के विरुद्ध ..।।

समय बीतता चला गया ..!! बादमें ‘यूपीए’ सरकार बनी ..!! कैबिनेट मंत्री चिदंबरम, एनरॉन की तरफ से मुकदमा नहीं लड़ सकते थे ..!! पर वो कानूनी सलाहकार बने रहे और, वो मुकदमे को एनरॉन के पक्ष में करने में सक्षम थे ..।।

अगला खुलासा और चौकानें वाला है .।।

चिदंबरम ने तुरंत हरीश सालवे को एनरॉन केस से हटा दिया ..।। हरीश साल्वे की जगह, खबर कुरेशी को नियुक्त किया गया ..।।आप ठीक समझे, ये वही पाकिस्तानी वकील है जिसनें, कुलभूषण जाधव केस में, पाकिस्तान सरकार का मुकदमा लड़ा ..।।

कांग्रेस ने भारत सरकार कि तरफ से, पाकिस्तानी वकील को ₹1400/- करोड़ दिये वकील कि फीस के रुप में ..।। अंततः भारत मुकदमा हार गया और भारत सरकार को ₹38,000/- करोड़ का भारी भरकम मुआवजा देना पड़ा ..।। लेकिन, लुटीयन मिडिया ने ये खबर या तो गोल दी या सरसरी तौर पर नहीं दिखाई ..।।

अब सोचिए कि ₹38000/- करोड़ का मुकदमा लडने के लिए फीस कितनी ली होगी ..?? जो पाठक किसी क्लेम के केस मे वकील कि फीस तय करते है उन्हें पता होगा कि, वकील केस देखकर दस प्रतिशत से लेकर साठ प्रतिशत तक फीस लेता है ..।।

सोचिए इस पर कोई हंगामा नही हुआ ..??

अगर ये केस मोदी के समय मे होता, और भारत सरकार कोर्ट में हार जाती तो ..?? चमचो की छोड़िए, भक्त भी डंडा लेकर मोदी के पीछे दोड़ते ..।।

और एक मजेदार बात .. जिन कम्पनियों का एनरॉन मे निवेश करके यह प्रोजेक्ट केवल फाईल किया था उनका निवेश महज मात्र 300 मिलियन डालर .. याने उस वक्त कि डालर रुपया विनियम दर के हिसाब से, महज ₹1530/- करोड़ था, और वह भी बैठे बिठाये ..।। महज सात साल मे ₹38,000/- करोड़ का फायदा ..!! वो भी एक युनिट बिजली का संयंत्र लगाये बिना ..??

कांग्रेस हमारी सोचने की क्षमता से भी ज्यादा विनाशकारी है ..।।

(यह थी ‘विश्व प्रसिद्ध’ अर्थशास्त्री, अनुभवी और पढे लिखे लुटेरो की सरकार ..!!)

(If You don’t believe this, do check it on Google ..!!)

जन जागरण अभियान के लिए जारी किया गया। निवेदन है कि इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचायें…! सुशील कुमार सरावगी जिंदल राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच नई दिल्ली भारत🙏

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🕉️ श्री हरि नारायण शिव लहेरी प्रणाम👏🏽

“उधारी तो चुकानी पड़ती है ,ये प्रकृति का नियम है”
एक सेठ जी बहुत ही दयालु थे । धर्म-कर्म में यकीन करते थे। उनके पास जो भी व्यक्ति रुपये उधार मांगने आता, वे उसे मना नहीं करते थे।
सेठ जी मुनीम को बुलाते और जो उधार मांगने वाला व्यक्ति होता उससे पूछते कि ~ “भाई, तुम उधार कब लौटाओगे..??
इस जन्म में या फिर अगले जन्म में..??”
जो लोग ईमानदार होते वो कहते ~ “सेठ जी। हम तो इसी जन्म में आपका कर्ज़ चुकता कर देंगे।” और कुछ लोग जो ज्यादा चालक व बेईमान होते वे कहते ~ “सेठ जी। हम आपका कर्ज़ अगले जन्म में उतारेंगे और अपनी चालाकी पर वे मन ही मन खुश होते कि ~ “क्या मूर्ख सेठ है।”
अगले जन्म में उधार वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है।”
ऐसे लोग मुनीम से पहले ही कह देते कि वो अपना कर्ज़ अगले जन्म में लौटाएंगे और मुनीम भी कभी किसी से कुछ पूछता नहीं था।
जो जैसा कह देता.. मुनीम वैसा ही बही में लिख लेता।
एक दिन एक चोर भी सेठ जी के पास उधार मांगने पहुँचा।
उसे भी मालूम था कि सेठ अगले जन्म तक के लिए रकम उधार दे देता है।
हालांकि उसका उद्देश्य उधार लेने से अधिक सेठ की तिजोरी को देखना (रेकी) था।
चोर ने सेठ से कुछ रुपये उधार मांगे, सेठ ने मुनीम को बुलाकर उधार देने को कहा।
मुनीम ने चोर से पूछा – “भाई। इस जन्म में लौटाओगे या अगले जन्म में..??”
चोर ने कहा ~ “मुनीम जी ! मैं यह रकम अगले जन्म में लौटाऊँगा ।”
मुनीम ने तिजोरी खोलकर पैसे उसे दे दिए। चोर ने भी तिजोरी देख ली और तय कर लिया कि इस मूर्ख सेठ की तिजोरी आज रात में ही उड़ा दूँगा।
वो रात में ही सेठ के घर पहुँच गया और वहीं भैंसों के तबेले में छिपकर सेठ के सोने का इन्तजार करने लगा।
अचानक चोर ने सुना कि भैंसे आपस में बातें कर रही हैं और वह चोर भैंसों की भाषा ठीक से समझ पा रहा है।
एक भैंस ने दूसरी से पूछा ~ “तुम तो आज ही आई हो न, बहन।”
उस भैंस ने जवाब दिया ~ “हाँ, आज ही सेठ के तबेले में आई हूँ, सेठ जी का पिछले जन्म का कर्ज़ उतारना है और तुम कब से यहाँ हो..??”
उस भैंस ने पलटकर पूछा तो पहले वाली भैंस ने बताया – “मुझे तो तीन साल हो गए हैं.. बहन ! मैंने सेठ जी से कर्ज़ लिया था यह कहकर कि अगले जन्म में लौटाऊँगी।
सेठ से उधार लेने के बाद जब मेरी मृत्यु हो गई तो मैं भैंस बन गई और सेठ के तबेले में चली आयी और अब दूध देकर उसका कर्ज़ उतार रही हूँ।
जब तक कर्ज़ की रकम पूरी नहीं हो जाती, तब तक यहीं रहना होगा ।”
चोर ने जब उन भैंसों की बातें सुनी तो होश उड़ गए और वहाँ बंधी भैंसों की ओर देखने लगा।
वो समझ गया कि उधार चुकाना ही पड़ता है, चाहे इस जन्म में या फिर अगले जन्म में.. उसे चुकाना ही होगा ।
वह उल्टे पाँव सेठ के घर की ओर भागा और जो कर्ज़ उसने लिया था.. उसे फटाफट मुनीम को लौटाकर रजिस्टर से अपना नाम कटवा लिया।
हम सब इस दुनिया में इसलिए आते हैं।
क्योंकि, हमें किसी से लेना होता है तो किसी का देना होता है।
इस तरह से प्रत्येक को कुछ न कुछ लेने देने के हिसाब चुकाने होते हैं।
इस कर्ज़ का हिसाब चुकता करने के लिए इस दुनिया में कोई बेटा बनकर आता है ~ तो कोई बेटी बनकर आती है, कोई पिता बनकर आता है, तो कोई माँ बनकर आती है, कोई पति बनकर आता है, तो कोई पत्नी बनकर आती है, कोई प्रेमी बनकर आता है, तो कोई प्रेमिका बनकर आती है, कोई मित्र बनकर आता है, तो कोई शत्रु बनकर आता है, कोई पडौसी बनकर आता है.. तो कोई रिश्तेदार बनकर आता है।
चाहे दुःख हो या सुख हिसाब तो सबको देना ही पड़ता हैं और
ये ही प्रकृति का नियम है।

।।जय जय श्री राम।।
।।हर हर महादेव।।

🌻 Uday Raj 🌻