Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️

👉 निंदा का फल 🏵️
🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅

एक बार की बात है की किसी राजा ने यह फैसला लिया के वह प्रतिदिन 100 अंधे लोगों को खीर खिलाया करेगा।

एक दिन खीर वाले दूध में सांप ने मुंह डाला और दूध में विष डाल दी और ज़हरीली खीर को खाकर 100 के 100 अंधे व्यक्ति मर गए।

राजा बहुत परेशान हुआ कि मुझे 100 आदमियों की हत्या का पाप लगेगा।

राजा परेशानी की हालत में अपने राज्य को छोड़कर जंगलों में भक्ति करने के लिए चल पड़ा, ताकि इस पाप की माफी मिल सके।

रास्ते में एक गांव आया। राजा ने चौपाल में बैठे लोगों से पूछा की क्या इस गांव में कोई भक्ति भाव वाला परिवार है ? ताकि उसके घर रात काटी जा सके।

चौपाल में बैठे लोगों ने बताया कि इस गांव में दो बहन भाई रहते हैं जो खूब बंदगी करते हैं। राजा उनके घर रात ठहर गया।

सुबह जब राजा उठा तो लड़की सिमरन पर बैठी हुई थी। इससे पहले लड़की का रूटीन था की वह दिन निकलने से पहले ही सिमरन से उठ जाती थी और नाश्ता तैयार करती थी।

लेकिन उस दिन वह लड़की बहुत देर तक सिमरन पर बैठी रही।

जब लड़की सिमरन से उठी तो उसके भाई ने कहा की बहन तू इतना लेट उठी है ,अपने घर मुसाफिर आया हुआ है।

इसने नाश्ता करके दूर जाना है। तुझे सिमरन से जल्दी उठना चाहिए था।

तो लड़की ने जवाब दिया कि भैया ऊपर एक ऐसा मामला उलझा हुआ था।

धर्मराज को किसी उलझन भरी स्थिति पर कोई फैसला लेना था और मैं वो फैसला सुनने के लिए रुक गयी थी, इस लिए देर तक बैठी रही सिमरन पर।

उसके भाई ने पूछा ऐसी क्या बात थी। तो लड़की ने बताया कि फलां राज्य का राजा अंधे व्यक्तियों को खीर खिलाया करता था।

लेकिन सांप के दूध में विष डालने से 100 अंधे व्यक्ति मर गए।

अब धर्मराज को समझ नहीं आ रही कि अंधे व्यक्तियों की मौत का पाप राजा को लगे, सांप को लगे या दूध नंगा छोड़ने वाले रसोईए को लगे।

राजा भी सुन रहा था। राजा को अपने से संबंधित बात सुन कर दिलचस्पी हो गई और उसने लड़की से पूछा कि फिर क्या फैसला हुआ ?

लड़की ने बताया कि अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया था।

राजा ने पूछा कि क्या मैं आपके घर एक रात के लिए और रुक सकता हूं ?

दोनों बहन भाइयों ने खुशी से उसको हां कर दी।

राजा अगले दिन के लिए रुक गया, लेकिन चौपाल में बैठे लोग दिन भर यही चर्चा करते रहे कि..

कल जो व्यक्ति हमारे गांव में एक रात रुकने के लिए आया था और कोई भक्ति भाव वाला घर पूछ रहा था।

उस की भक्ति का नाटक तो सामने आ गया है। रात काटने के बाद वो इस लिए नही गया क्योंकि जवान लड़की को देखकर उस व्यक्ति की नियत खोटी हो गई।

इसलिए वह उस सुन्दर और जवान लड़की के घर पक्के तौर पर ही ठहरेगा या फिर लड़की को लेकर भागेगा।

दिनभर चौपाल में उस राजा की निंदा होती रही।

अगली सुबह लड़की फिर सिमरन पर बैठी और रूटीन के टाइम अनुसार सिमरन से उठ गई।

राजा ने पूछा.. “बेटी अंधे व्यक्तियों की हत्या का पाप किसको लगा ?”

लड़की ने बताया कि.. “वह पाप तो हमारे गांव के चौपाल में बैठने वाले लोग बांट के ले गए।”

निंदा करना कितना घाटे का सौदा है। निंदक हमेशा दुसरों के पाप अपने सर पर ढोता रहता है।

और दूसरों द्वारा किये गए उन पाप-कर्मों के फल को भी भोगता है। अतः हमें सदैव निंदा से बचना चाहिए।

〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

तासीर मोहम्मद रसूख वाले आदमी थे उनके मजहब में उनकी चर्चा थी……. जलसा हो या मज़लिस हर जगह उनकी धाक होती थी, पैसे वाले भी थे इकलौते बेटे का निकाह था पूरा मजमा गया था बारात में,……

नब्बे दशक की कहानी है तब बरात या तो पैदल या तो साइकिल से जाती थी! रसूख वालों की बारातें बसों में जाया करती थी…. बारात भिंड से चलकर मुरैना आई थी…. भाईजान का निकाह था बिल्कुल “अज़ीम ओ सान शहंशाह” मरहबा वाला माहौल था…. तो मुर्ग मुसल्लम सालन बड़े छोटे में कोई कमी न थी!!!

अब मियां भाई के निकाह में दही चुरा तो चलेगा नहीं दुर्भाग्यवश उस बरात में एक “पंडित” जी भी शामिल थे जनेऊधारी टीका धारी पंडित जी जो नॉनवेज खाना तो दूर उसकी महक भी नहीं लिए होंगे जीवन में कभी…

हालांकि वह बिना निमंत्रण के आए थे मजबूरी में आए थे अपनी रोजी रोटी के चक्कर में बारात आए थे उस बस के ड्राइवर थे जिस बस में नब्बे मोमिन सवार होकर बरात आए थे……

कहानी अब शुरू होती है रात को जश्न शराब और शबाब के नशे में धुत मजहब के मुजाहिदों ने पंडित जी को जबरजस्ती सालन और मांस के टुकड़े खिला दिए…..

निरीह बामन भीख दया की भीख मांगता रहा, फफकता रहा!

गरीब ब्राम्हण बड़ा खुदरंग में होता है हो भाई, वह मिट जाना पसंद करता है परंतु अगर उसने कभी वेद छुआ भी है तो अपने धर्म सिद्धांत से कभी समझौता नहीं करता।।

पंडित जी की आंखों में बदले की आग जल रही थी सुबह बरात वापसी थी पंडित जी की बस सोन नदी को पार कर रही थी और फिर उसके बाद जो हुआ वह भिंड और मुरैना के इतिहास में दर्ज है…..

पंडित बाबा फिदाईन बन गए उन बारातियों के साथ पूरी बस नदी में गिरा दी……

दुलहा बाबू भी जन्नत देखे बिना ही दुनिया से रुख़सत हो गये

और उन्होंने उस बस के कंडक्टर से पहले ही नीचे उतर जाने को कहा था उनमें से सिर्फ वही कंडक्टर बचा था जीवित। कईयों का जनाजा भी नहीं निकल पाया था क्योंकि नदी में पार्थिव शरीर भी नहीं मिली।

बाद में उस सहचालक ने पूरी कहानी बताई क्योंकि वो सहचालक ही बस का मालिक था, और पंडित ने उसका नमक खाया था! और उनका नाम था मोहम्मद ज़मील!
ज़मील ने ये पूरी वारदाद रोते रोते बताइ थी पुलिस को की रात में क्या हुआ।

अब सेक्युलर सेकुलर मन में यह सवाल उठता है कि चार पांच लफंगो की उद्दंडता के लिए इतना बड़ा अपराध सब को मौत के घाट उतार देना कहां का न्याय है!!!! तो बैठ जाइए एक गिलास पानी पीजिए और आराम से सोचिए जब रात में ये उद्दंड लोग एक सिद्धांत वादी व्यक्ति के मुंह में सालन पेल रहे थे तो बचे हुए अस्सी लोगों ने इसका विरोध क्यों नहीं किया……

सनद रहे

समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध ।।

सीता हरण एक मात्र रावण की करनी थी पर भुगता पूरा लंका!

सूरज उपाध्याय

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

Photo from Harshad Ashodiya


*सुप्रभात,श्री गणेश चतुर्थी की मंगल शुभकामनाएं 🙏🏻🙏🏻* एक राजा को जब पता चला की, उसके राज्य मे एक ऐसा व्यक्ति है, जिसका सुबह-सुबह मुंह देखने से दिन भर भोजन नहीं मिलता है। तो सच्चाई जानने की इच्छा से उस व्यक्ति को राजा ने अपने साथ सुलाया। दुसरे दिन राजा की व्यसस्ता ऐसी बढ़ी की, राजा शाम तक भोजन नही कर सका । इस बात से क्रुद्ध होकर राजा ने उस व्यक्ति को तत्काल फाॅसी की सज़ा देने का ऐलान कर दिया। आखिरी इच्छा के अंतर्गत उस व्यक्ति ने कहा “राजन ,मेरा मुँह देखने से आप को शाम तक भोजन नही मिला , किंतु आप का मुँह देखने से मुझे मौत मिलने वाली है।” इतना सुनते ही लज्जित राजा को संत वाणी याद आ गई…. बुरो जो देखण मै चल्यो , बुरो न मिल्यो कोय। जो दिल ढूढ्यो आपणो , मुझ सो बुरो न कोय ।। अगर इतिहास रचना है तो…. कमियां अपने आप में ढूंढो, दूसरों में नहीं… 🙏

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

રામદેવજી મહારાજની સાવળ મા એક કડી આવે છે
..સેન ભગતના સંશય ટાળ્યા આપ બન્યાં હરી નાઇ રે..હોજી
મિત્રો આજ સેન ભગતની વાત કરવાની છે

સેનબાપ ઘરે હતા ત્યાં તેઓને રામાપીરની જયોતનુ વાયક આવ્યું પહેલા તો વાચકમા ચોખાને કંકુ લયને વાયક દેતા જે વાચક સ્વીકારે એમને ત્યાં જરૂર જાવું પડે સેનબાપાએ વાયક સ્વીકારી પાણીયારે મુક્યું એલોકોએ જળ ગ્રહણ કરીને વિદાય લીધી આજે રાત્રે જ જવાનું છે ત્યાં જ રાજાના સિપાહી આવ્યા અને કહ્યું રાજાજીને વહેલા બહાર જવાનું હોવાથી તમારે વહેલા પાંચ વાગ્યે આવવાનું કયું છે બાપા તો ધર્મ સંકટમાં આવી ગયા શું કરવું એવા વિચારોમાં બેઠા હતા ત્યાં તેમના પત્ની સુદરા બાઈ એ આવીને પુછ્યું શું થયું કેમ આમ બેઠા છો બાપાએ કયું રામાપીરની જયોતનુ વાયક સ્વીકારીયુને રાજાનું કહેણ આવ્યું સુદરાબાઈ બોલ્યા રાજા રૂઠે તો ગામ છોડાવે
પ્રભુ રૂઠે એ નો પરવડે તમે વાયકમા જાવ તમતારે બાપાએ નક્કી કર્યું કે હું વાયકમા જાઈશ એક હાથે એક તારો ને બીજા હાથે પેટી લયને વાયકે જવા નીકળ્યા ત્યાં જયને કયું હું ચાર વાગ્યા સુધી જ રહિશ ચાર વાગ્યે મને યાદ કરાવજો હા જરૂર યાદ કરાવશુ ભજનોની રમઝટ બોલાવી બાપાએ અને એક લીંગ થઈ ગયા સમયનું ભાન રહીયુ નહિ ઓલા ભાઇઓ એ વિચાર્યું બાપા ભજનમાં મસ્ત છે કહેવું નથી ભગવાનને વિચાર્યું સેન ભગત તો મારામાં મસ્ત છે એટલે હવે મારે જ કાંઈક કરવું પડશે પેટી લયને ઉપડ્યા અને રાજાની દાઢી કરીને આખા શરીરે તેલ માલિશ કરીને પાછા આવીને પેટી મુકી દીધી બાપાને ભાન થયું જોયું તો પાંચ વાગી ગયા હતા બાપાએ પેટી લયને જલ્દી જલ્દી ભાગ્યા રાજમહેલમાં જવા બાપાને જોતા જ દરવાને પૂછ્યું ભગત શું ભુલી ગયા બાપા કહે છે મજાક શું કામ કરો છો ભાઈ એમ કહેતા બાપા અંદર જાય છે જોવે છે તો રાજાની દાઢી બનેલી છે મારે મોડું થયું એટલે બીજા ને બોલાવી લીધો છે શરમથી ઝુકી બાપા ઉભા રહીયા છે રાજાએ કહ્યું કેમ હજી ઉભા છો આજે તો સેન તારા હાથમાં જાદુ હતો મજા આવી ગઈ
તોય બાપા શાંત ચીતે ઊભા રહીયા રાજા કેમ કાંઈ કહેવું છે તારે સેન બાપુ મારે મોડું થઈ ગયું છે ક્ષમા માંગુ છું
રાજા ખડખડાટ હસવા લાગ્યા સેન શું બોલો છો તેજ તો મારી દાઢી અને તેલ માલિશ કરી છે મને આજ મજા આવી ગઈ એટલે મેં તને સોનાનો હાર આપ્યો એ પણ તારા ગળામાં છે અને તું કહે છે મોડું થઈ ગયું છે બાપાએ જોયું તો સાચે જ હાર લટકતો હતો બાપા નવાઈ પામી ગયા આશુ બાપાએ પેટી ખોલી ને જોયુ તો આંખો પહોળી થઇ ગઈ બધા ઓજારો સોનાના હતાં બાપા તરત સમજી ગયા કે મારો નાથ અહીં આવી કામ કરી ગયા રાજાને કયું બાપાએ રાજન આજથી હૂં આ નાઈનુ કામ નહિ કરૂં રાજા કેમ આમ બોલો છો હજી વધારે બક્ષીસ જોઈએ છે તો આજે એ પણ આપીશ આજ તારા પર પ્રસન્ન છું બોલ બાપાએ કયું રાજન આ તમારી જે સેવા કરી ગયા તે ખુદ ત્રીભોવનના નાથ હતા હું નહિ રાજા તો સાંભળીને ચોંકી ગયા શું વાત કરો છો સેન હા સાચી વાત છે મારા ભગવાન ને આવીને આ સેવાઓ કરાવી પડે તો મારે એ કામ જ કરવું નથી આપ બીજા નાઈ ગોતી લેજો રાજાએ બાપાના ચરણોમાં દંડવંત પ્રણામ કર્યા
રાજા અને રાણી રોજ સવારે ઊઠીને સેનબાપાના ચરણ ધોઈને જળ ગ્રહણ કરી પુજા અર્ચના કરીને પછી જ રાજ દરબારમાં જાતા બાપાએ આશ્રમ બનાવ્યો અને અન્ન ક્ષેત્ર ચાલુ કરીયુ હતું એનો સૌ ખર્ચ રાજ આપતું
.
卐સંત શુરા અને સતીઓ ગ્રુપ 卐

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक शाम चार लड़के घूमते-घामते एक लम्बे चौड़े चने के खेत में चने उखाड़ कर खा रहे थे, इतने में खेत का रखवाला आ पहुँचा, उसे गुस्सा तो आया, पर चार नौ जवानों को इकट्ठा देख उसकी हिम्मत कुछ कहने की नहीं हुई।
उसने चारों लड़कों से बारी बारी पूछा:-
रखवाला: आप का परिचय?
पहला लड़का: मैं दुर्गेश सिंह का लड़का हूँ।
रखवाला: अच्छा-अच्छा दुर्गेश मालिक के लड़के हैं आप! और चना खाना हो तो उखाड़ लीजिए।
दूसरे लड़के से: आप?
दूसरा लड़का: मैं पुजारी जी का लड़का हूँ।
रखवाला : ओहो! पंडित जी अरे आप कहे होते तो मैं खुद चने दे देता।
तीसरे लड़के से: आप?
तीसरा लड़का: मैं मोती साहू का लड़का हूँ।
रखवाला: अच्छा अच्छा मोती साहू कोई बात नहीं दो पेड़ चना खा लिया तो क्या हुआ.
चौथे से: आप का परिचय?
चौथा लड़का: मैं नाऊ हूँ.
यह सुनते ही रखवाला बोला “नाई कहीं का, बाबू साहब, पण्डित जी या साहू समझता है क्या खुद को जो तुमने भी चना उखाड़ा, यह कह उसे पीटना शुरू कर दिया। तीनों लड़के खुश थे कि चलो हमें छोड़ दिया। नाई छूटते ही भागा।
अब वह साहू की तरफ घूमा और बोला बनिया की जाति! तू क्या अपने को पण्डित या ठाकुर समझता है क्या, और उसे पिटाई कर भगा दिया।
अब वह पण्डित जी की ओर घूमा और बोला ओ भीखमंगन की जाति बाबू साहब तो मेरे मालिक हैं वे चाहे जो करें तो क्या तुम भी चना उखाड़ेगा। इतना कह कर उसे भी पीटा और भगा दिया।
अब एक पेड़ चना उखाड़ा और बाबू साहब के लड़के को दिखाते हुए बोला, हरामी की औलाद, यह खेत तेरे बाप का है क्या जो तुम लफंगों को लेकर यहाँ आया, इतना कह के उसकी भी पिटाई किया।
इस तरह चारों पिटते रहे और दूर खड़े हो कर एक दूसरे की पिटाई देखते रहे।
“बात समझ में आ रही हो तो ठीक, नहीं तो खाते रहो लात, यहीं तुम्हारी नियति है”

रामचंद्र आर्य

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

अब्राहम लिंकन का पत्र अपने बेटे के अध्यापक के नाम

आदरणीय महोदय

मैं जानता हूँ कि इस दुनिया में सारे लोग अच्छे और सच्चे नहीं हैं। यह बात मेरे बेटे को भी सीखना होगी। पर मैं चाहता हूँ कि आप उसे यह बताएँ कि हर बुरे आदमी के पास भी अच्छा हृदय होता है। हर स्वार्थी नेता के अंदर अच्छा लीडर बनने की क्षमता होती है। मैं चाहता हूँ कि आप उसे सिखाएँ कि हर दुश्मन के अंदर एक दोस्त बनने की संभावना भी होती है। ये बातें सीखने में उसे समय लगेगा, मैं जानता हूँ। पर आप उसे सिखाइए कि मेहनत से कमाया गया एक रुपया, सड़क पर मिलने वाले पाँच रुपए के नोट से ज्यादा कीमती होता है।

आप उसे बताइएगा कि दूसरों से जलन की भावना अपने मन में ना लाएँ। साथ ही यह भी कि खुलकर हँसते हुए भी शालीनता बरतना कितना जरूरी है। मुझे उम्मीद है कि आप उसे बता पाएँगे कि दूसरों को धमकाना और डराना कोई अच्‍छी बात नहीं है। यह काम करने से उसे दूर रहना चाहिए।

आप उसे किताबें पढ़ने के लिए तो कहिएगा ही, पर साथ ही उसे आकाश में उड़ते पक्षियों को धूप, धूप में हरे-भरे मैदानों में खिले-फूलों पर मँडराती तितलियों को निहारने की याद भी दिलाते रहिएगा। मैं समझता हूँ कि ये बातें उसके लिए ज्यादा काम की हैं।

मैं मानता हूँ कि स्कूल के दिनों में ही उसे यह बात भी सीखना होगी कि नकल करके पास होने से फेल होना अच्‍छा है। किसी बात पर चाहे दूसरे उसे गलत कहें, पर अपनी सच्ची बात पर कायम रहने का हुनर उसमें होना चाहिए। दयालु लोगों के साथ नम्रता से पेश आना और बुरे लोगों के साथ सख्ती से पेश आना चाहिए। दूसरों की सारी बातें सुनने के बाद उसमें से काम की चीजों का चुनाव उसे इन्हीं दिनों में सीखना होगा।

आप उसे बताना मत भूलिएगा कि उदासी को किस तरह प्रसन्नता में बदला जा सकता है। और उसे यह भी बताइएगा कि जब कभी रोने का मन करे तो रोने में शर्म बिल्कुल ना करे। मेरा सोचना है कि उसे खुद पर विश्वास होना चाहिए और दूसरों पर भी। तभी तो वह एक अच्छा इंसान बन पाएगा।

ये बातें बड़ी हैं और लंबी भी। पर आप इनमें से जितना भी उसे बता पाएँ उतना उसके लिए अच्छा होगा। फिर अभी मेरा बेटा बहुत छोटा है और बहुत प्यारा भी।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

કોઈ એક નગરમાં હોશિયારચંદ નામનો રાજા રહેતો હતો. એ એટલો હોશિયાર હતો કે નાનપણમાં તેના પેપરમાંથી જોઈ જેટલા વિદ્યાર્થીએ લખ્યું બધા નાપાસ થઈ ગયા. જ્યારે હોશિયારચંદ રાજા અતિબુદ્ધિશાળીનો પુત્ર હોવાથી પાસ થઈ ગયો.

એક વખત હોશિયારચંદ જંગલમાં શિકાર કરવા જતા માર્ગ ભટકી ગયો. બે દિવસની રઝળપાટના અંતે તેને નગર તરફ જવાનો રસ્તો મળ્યો. એ ચાલતો જતો હતો ત્યાં એક રાક્ષસ તેની સામે આવી ગયો. તેણે હોશિયારચંદને કહ્યું, ‘જો તને તારો જીવ વ્હાલો હોય તો સાત દિવસની અંદર અંદર મને એક અનુવાદકનો પ્રબંધ કરી આપ, જે મારા પુસ્તકનો અનુવાદ કરી શકે. જો તું મારા માટે સારો અનુવાદક નથી શોધતો તો હું તારા નગરમાં આવી તારા કટકા કરી નાખીશ.’

રાક્ષસે રાજાને સાત દિવસનો સમય આપ્યો અને જવા દીધો. આ વાત તેણે તેના મંત્રીને કહી કે, ‘આટલા મોટા નગરમાં એક સારો અનુવાદક ક્યાંથી શોધવો?’

મંત્રીએ સોના ચાંદીથી ભરેલું ગાડુ નગરમાં સૈનિકો સાથે ઘુમાવ્યું અને ઢંઢેરો પીટ્યો કે, જે કોઈ રાક્ષસની કૃતિનો અનુવાદ કરી આપશે તેને સોના-ચાંદીથી ભરેલું આ ગાડુ આપવામાં આવશે.

એ જ નગરમાં રાજુ નામનો એક ગરીબ અનુવાદક રહેતો હતો. તેના કાને આ વાત પડી અને તે દોડીને રાજાની સમક્ષ પ્રસ્તુત થઈ ગયો. તેણે રાજાને એ તમામ પુસ્તકો બતાવ્યા જે તેણે નામ કે પ્રતિષ્ઠાની આશા રાખ્યા વિના પ્રકાશકને અનુવાદિત કરી આપ્યા હતા. પુસ્તક પર અનુવાદકનું નામ ન હોવાથી રાજા અને મંત્રી વાત માનવા તૈયાર નહોતા.

રાજુએ તેમને હકીકત કહી, ‘મહારાજા હું જ અમેરિકાપુરના મોટાભાગના લેખકોના પુસ્તકોનો અનુવાદક છું. પ્રકાશક મારું નામ પુસ્તક પર નથી છાપતો. મેં તેને મારી પ્રથમ મૌલિક કૃતિ આપેલી જે તેણે હજુ સુધી નથી છાપી અને બસ અનુવાદનકાર્ય જ કરાવ્યા કરે છે. મારો વિશ્વાસ કરો. હું તમારી મદદ કરીશ. હું એ રાક્ષસને તેના પુસ્તકનો અનુવાદ કરી આપીશ અને તમારો જીવ બચાવીશ.’

રાજા અને મંત્રીએ તેની વાત માની અને જંગલ બાજુ ચાલી નીકળ્યા. અડધે રસ્તે પહોંચ્યા ત્યાં રાક્ષસ આવી ગયો. તેણે રાજાને પુસ્તક આપ્યું રાજાએ તે પુસ્તક અનુવાદકને આપ્યું. પુસ્તકના મુખપૃષ્ઠને જોઈ અનુવાદક હસવા લાગ્યો અને પછી અંદરના પાનાં ખોલી વાંચ્યા તો રડવા લાગ્યો.

વેતાલે વાર્તા પૂર્ણ કરી અને વિક્રમને પૂછ્યું, ‘તો બોલ રાજા, અનુવાદક પહેલા હસ્યો અને પછી રડ્યો કેમ ? બોલ નહીં તો પાગલગઢના એક હજાર કવિઓ કોરસમાં કવિતાનું પઠન કરી તારા માથાના હજાર ટુકડા કરી નાખશે.’

રાજાએ કહ્યું, ‘સાંભળ વેતાલ. અનુવાદક રાજુ પુસ્તકનું મુખપૃષ્ઠ જોઈ હસ્યો એટલા માટે કે પોતે સારું સર્જન કરી શકતો હોવા છતાં આવા ભંગાર સાહિત્યનો અનુવાદ કરવા જઈ રહ્યો છે અને અંદર પાનાં ખોલી રડ્યો એટલા માટે કે આ એની જ પ્રત હતી જે પ્રકાશક વર્ષોથી સાચવીને બેઠો હતો.’ વેતાલ ઉડીને સિદ્ધવડ પર લટકી ગયો.

~ મયૂર ખાવડુ

Copied from WhatsApp.