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प्रेरणादायक दंड

*अमेरिका में एक पंद्रह साल का लड़का था, स्टोर से चोरी करता हुआ पकड़ा गया। पकड़े जाने पर गार्ड की गिरफ्त से भागने की कोशिश में स्टोर का एक शेल्फ भी टूट गया।
जज ने जुर्म सुना और लड़के से पूछा, *”तुमने क्या सचमुच कुछ चुराया था ब्रैड और पनीर का पैकेट”?*
लड़के ने नीचे नज़रें कर के जवाब दिया। ;- हाँ’
जज,:- ‘क्यों ?’
लड़का,:- मुझे ज़रूरत थी।
जज:- ‘खरीद लेते।
लड़का:- ‘पैसे नहीं थे।’
जज:- घर वालों से ले लेते।’ लड़का:- ‘घर में सिर्फ मां है। बीमार और बेरोज़गार है, ब्रैड और पनीर भी उसी के लिए चुराई थी
जज:- तुम कुछ काम नहीं करते ?
लड़का:- करता था एक कार वाश में। मां की देखभाल के लिए एक दिन की छुट्टी की थी, तो मुझे निकाल दिया गया।’
जज:- तुम किसी से मदद मांग लेते?
लड़का:- सुबह से घर से निकला था, तकरीबन पचास लोगों के पास गया, बिल्कुल आख़िर में ये क़दम उठाया।

जिरह ख़त्म हुई, जज ने फैसला सुनाना शुरू किया, चोरी और ख़ुसूसन ब्रैड की चोरी बहुत शर्मनाक जुर्म है और इस जुर्म के हम सब ज़िम्मेदार हैं। ‘अदालत में मौजूद हर शख़्स मुझ सहित सब मुजरिम हैं, इसलिए यहाँ मौजूद हर शख़्स पर दस-दस डालर का जुर्माना लगाया जाता है। दस डालर दिए बग़ैर कोई भी यहां से बाहर नहीं निकल सकेगा।’

ये कह कर जज ने दस डालर अपनी जेब से बाहर निकाल कर रख दिए और फिर पेन उठाया लिखना शुरू किया:- इसके अलावा मैं स्टोर पर एक हज़ार डालर का जुर्माना करता हूं कि उसने एक भूखे बच्चे से ग़ैर इंसानी सुलूक करते हुए पुलिस के हवाले किया।
अगर चौबीस घंटे में जुर्माना जमा नहीं किया तो कोर्ट स्टोर सील करने का हुक्म दे देगी।’
जुर्माने की पूर्ण राशि इस लड़के को देकर कोर्ट उस लड़के से माफी तलब करती है।

फैसला सुनने के बाद कोर्ट में मौजूद लोगों के आंखों से आंसू तो बरस ही रहे थे, उस लड़के के भी हिचकियां बंध गईं। वह लड़का बार बार जज को देख रहा था जो अपने आंसू छिपाते हुए बाहर निकल गये।

क्या हमारा समाज, सिस्टम और अदालत इस तरह के निर्णय के लिए तैयार हैं?

चाणक्य ने कहा है कि यदि कोई भूखा व्यक्ति रोटी चोरी करता पकड़ा जाए तो उस देश के लोगों को शर्म आनी चाहिए

यह रचना दिल को छू गई।
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जय हिन्द 🙏

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एक राजा था,,😘😂😁😉,
उसने एक सर्वे करने का सोचा
कि
मेरे राज्य के लोगों की
घर गृहस्थी
पति से चलती है
या
पत्नी से…?
उसने एक ईनाम रखा कि ” जिसके घर में पति का हुक्म चलता हो,
उसे मनपसंद घोडा़ ईनाम में मिलेगा
और
जिसके घर में पत्नी की चलती है
वह एक सेब ले जाए..
🐴🍎
एक के बाद एक सभी नगरवासी
🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎🍎
सेब उठाकर जाने लगे ।
राजा को चिंता होने लगी..
क्या मेरे राज्य में सभी घरों में
पत्नी का हुक्म चलता है,,🤔🤔
इतने में एक लम्बी लम्बी मुछों वाला,
मोटा तगडा़ और लाल लाल आखोंवाला जवान आया और बोला…..
” राजा जी मेरे घर में मेरा ही हुक्म चलता है .. घोडा़ मुझे दीजिए ..”🐴
राजा खुश हो गए और कहा जा अपना मनपसंद घोडा़ ले जाओ..
चलो कोई एक घर तो मिला
जहाँ पर आदमी की चलती है 😀😀
जवान काला घोडा़ 🐴लेकर रवाना हो गया ।
घर गया और फिर थोडी़ देर में घोडा 🐴लेकर दरबार में वापिस लौट आया।
राजा: “क्या हुआ…? वापिस क्यों आ गये..??”
जवान : ” महाराज,मेरी घरवाली कह रही है काला रंग अशुभ होता है, सफेद रंग शांति का प्रतिक होता है आप सफेद रंग वाला 🦄घोडा लेकर आओ…
इसलिए आप मुझे सफेद रंग का घोडा़ 🦄दीजिए।
राजा: अच्छा… “घोडा़ रख🐴…..और सेब 🍎लेकर चलता बन,,,
इसी तरह रात हो गई …दरबार खाली हो गया,, लोग सेब 🍎🍎🍎🍎🍎लेकर चले गए।
आधी रात को महामंत्री ने दरवाजा खटखटाया,,,
राजा : “बोलो महामंत्री कैसे आना हुआ…???”
महामंत्री : ” महाराज आपने सेब 🍎और घोडा़ 🐴ईनाम में रखा है,
इसकी जगह
अगर एक मण अनाज या सोना वगेरह रखा होता तो लोग कुछ दिन खा सकते या जेवर बना सकते थे,,,
राजा : “मैं भी ईनाम में यही रखना चाह रहा था लेकिन महारानी 👸🏻ने कहा कि सेब 🍎और घोडा़🐴 ही ठीक है इसलिए वही रखा,,,,
महामंत्री : ” महाराज आपके लिए सेब 🍎काट दूँ..!!!😊
राजा को हँसी आ गई और पूछा यह सवाल तुम दरबार में या कल सुबह भी पूछ सकते थे आप आधी रात को ही क्यों आये.. ???
महामंत्री: “महाराज,मेरी धर्मपत्नी ने कहा अभी जाओ और अभी पूछ के आओ,,,सच्ची घटना का पता तो चले।
राजा ( बात काटकर ): “महामंत्री जी, सेब 🍎आप खुद ले लोगे या घर भेज दिया जाए ।”
समाज चाहे जितना भी पुरुष प्रधान हो लेकिन
संसार स्त्री प्रधान ही है..!!
मुझे पत्नी ने कहा अभी ये कहानी इस ग्रुप में भेजो। मैं सेब खाते हुए आप सब को भेज रहा हूँ। ….
दोस्तो आप सेब यहीं खाओगे या घर ले जाओगे
😊😊😁

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🌹🙏कहानियाँ जो जिंदगी बदल दे 🌹🦚🙏 ""मदद""

उस दिन सबेरे आठ बजे मैं अपने शहर से दूसरे शहर जाने के लिए निकला । मैं रेलवे स्टेशन पँहुचा , पर देरी से पँहुचने के कारण मेरी ट्रेन निकल चुकी थी । मेरे पास दोपहर की ट्रेन के अलावा कोई चारा नही था । मैंने सोचा कही नाश्ता कर लिया जाए ।

बहुत जोर की भूख लगी थी । मैं होटल की ओर जा रहा था । अचानक रास्ते में मेरी नजर फुटपाथ पर बैठे दो बच्चों पर पड़ी । दोनों लगभग 10-12 साल के रहे होंगे .।बच्चों की हालत बहुत खराब थी ।

कमजोरी के कारण अस्थि पिंजर साफ दिखाई दे रहे थे ।वे भूखे लग रहे थे । छोटा बच्चा बड़े को खाने के बारे में कह रहा था और बड़ा उसे चुप कराने की कोशिश कर रहा था । मैं अचानक रुक गया ।दौड़ती भागती जिंदगी में पैर ठहर से गये ।

जीवन को देख मेरा मन भर आया । सोचा इन्हें कुछ पैसे दे दिए जाएँ । मैं उन्हें दस रु. देकर आगे बढ़ गया तुरंत मेरे मन में एक विचार आया कितना कंजूस हूँ मैं ! दस रु. का क्या मिलेगा ? चाय तक ढंग से न मिलेगी ! स्वयं पर शर्म आयी फिर वापस लौटा । मैंने बच्चों से कहा – कुछ खाओगे ?

बच्चे थोड़े असमंजस में पड़ गए ! जी । मैंने कहा बेटा ! मैं नाश्ता करने जा रहा हूँ , तुम भी कर लो ! वे दोनों भूख के कारण तैयार हो गए । मेरे पीछे पीछे वे होटल में आ गए । उनके कपड़े गंदे होने से होटल वाले ने डांट दिया और भगाने लगा ।

मैंने कहा भाई साहब ! उन्हें जो खाना है वो उन्हें दो , पैसे मैं दूँगा ।होटल वाले ने आश्चर्य से मेरी ओर देखा..! उसकी आँखों में उसके बर्ताव के लिए शर्म साफ दिखाई दी ।

बच्चों ने नाश्ता मिठाई व लस्सी माँगी । सेल्फ सर्विस के कारण मैंने नाश्ता बच्चों को लेकर दिया । बच्चे जब खाने लगे , उनके चेहरे की ख़ुशी कुछ निराली ही थी । मैंने भी एक अजीब आत्म संतोष महसूस किया । मैंने बच्चों को कहा बेटा ! अब जो मैंने तुम्हे पैसे दिए हैं उसमें एक रु. का शैम्पू ले कर हैण्ड पम्प के पास नहा लेना ।

और फिर दोपहर शाम का खाना पास के मन्दिर में चलने वाले लंगर में खा लेना ।मैं नाश्ते के पैसे चुका कर फिर अपनी दौड़ती दिनचर्या की ओर बढ़ निकला ।

वहाँ आसपास के लोग बड़े सम्मान के साथ देख रहे थे । होटल वाले के शब्द आदर में परिवर्तित हो चुके थे । मैं स्टेशन की ओर निकला , थोडा मन भारी लग रहा था । मन थोडा उनके बारे में सोच कर दु:खी हो रहा था ।

रास्ते में मंदिर आया । मैंने मंदिर की ओर देखा और कहा – हे भगवान ! आप कहाँ हो ? इन बच्चों की ये हालत ! ये भूख आप कैसे चुप बैठ सकते हैं !

दूसरे ही क्षण मेरे मन में विचार आया , अभी तक जो उन्हें नाश्ता दे रहा था वो कौन था ? क्या तुम्हें लगता है तुमने वह सब अपनी सोच से किया ? मैं स्तब्ध हो गया ! मेरे सारे प्रश्न समाप्त हो गए ।

ऐसा लगा जैसे मैंने ईश्वर से बात की हो ! मुझे समझ आ चुका था हम निमित्त मात्र हैं । उसके कार्य कलाप वो ही जानता है , इसीलिए वो महान है !

भगवान हमें किसी की मदद करने तब ही भेजता है , जब वह हमें उस काम के लायक समझता है ।यह उसी की प्रेरणा होती है । किसी मदद को मना करना वैसा ही है जैसे भगवान के काम को मना करना ।

खुद में ईश्वर को देखना ध्यान है ! दूसरों में ईश्वर को देखना प्रेम है ! ईश्वर को सब में और सब में ईश्वर को देखना ज्ञान है….!!✍️

👏👏👏

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🦚🙏🌹🙏🌹🙏🦚🙏🦚🦚🌹🙏🦚🙏

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मीरा बाईसा के आखिरी पल❤️
द्वारिकाधीश की मंगला आरती हो चुकी थी और पुजारी जी द्वार के पास खड़े थे। दर्शनार्थी दर्शन करते हुये आ जा रहे थे ।राणावतों और मेड़तियों के साथ मीरा मंदिर के परिसर में पहुँची ।मीरा ने प्रभु को प्रणाम किया ।

पुजारी जी मीरा को पहचानते थे और उन्हें यह विदित था कि इन्हें लिवाने के लिए मेवाड़ के बड़े बड़े सामन्तों सहित राजपुरोहित आयें है ।चरणामृत और तुलसी देते हुये उन्होंने पूछा -” क्या निश्चित किया ? क्या जाने का निश्चय कर लिया है ? आपके बिना द्वारिका सूनी हो जायेगी ।” 🙏

” हाँजी महाराज ! वही निश्चित नहीं कर पा रही !! अगर आप आज्ञा दें तो भीतर जाकर प्रभु से ही पूछ लूँ !!!” ❤️

” हाँ हाँ !! पधारो बा !! आपके लिए मन्दिर के भीतर जाने में कोई भी बाधा नहीं !!!”-पुजारी जी ने अतिशय सम्मान से कहा।

🌿पुजारी जी की आज्ञा ले मीरा मन्दिर के गर्भगृह में गई ।ह्रदय से प्रभु को प्रणाम कर मीरा इकतारा हाथ में ले वह गाने लगी……..

मीरा को प्रभु साँची दासी बनाओ।
झूठे धंधों से मेरा फंदा छुड़ाओ॥

लूटे ही लेत विवेक का डेरा।
बुधि बल यदपि करूं बहुतेरा॥

हाय!हाय! नहिं कछु बस मेरा।
मरत हूं बिबस प्रभु धाओ सवेरा॥

धर्म उपदेश नितप्रति सुनती हूं।
मन कुचाल से भी डरती हूं॥

सदा साधु-सेवा करती हूं।
सुमिरण ध्यान में चित धरती हूं॥

भक्ति-मारग दासी को दिखलाओ।
मीरा को प्रभु सांची दासी बनाओ॥

अंतिम पंक्ति गाने से पूर्व मीरा ने इकतारा मंगला के हाथ में थमाया और गाती हुईं धीमें पदों से गर्भ गृह के भीतर वह ठाकुर जी के समक्ष जा खड़ी हुईं। वह एकटक द्वारिकाधीश को निहारती बार बार गा रही थी -” मिल बिछुरन मत कीजे ।” 😪

❤️एकाएक मीरा ने देखा कि उसके समक्ष विग्रह नहीं ब्लकि स्वयं द्वारिकाधीश वर के वेश में खड़े मुस्कुरा रहे है। मीरा अपने प्राणप्रियतम के चरण स्पर्श के लिए जैसे ही झुकी , दुष्टों का नाश , भक्तों को दुलार , शरणागतों को अभय और ब्रह्माण्ड का पालन करने वाली सशक्त भुजाओं ने आर्त ,विह्वल और शरण माँगती हुई अपनी प्रिया को बन्धन में समेट लिया ❤️🌺❤️

❤️जय-जय मीरा गोपाल ❤️

क्षण मात्र के लिए एक अभूतपूर्व प्रकाश प्रकट हुआ , मानों सूर्य -चन्द्र एक साथ अपने पूरे तेज़ के साथ उदित होकर अस्त हो गये हों ।

❤️इसी प्रकाश में प्रेमदीवानी मीरा समा गई ❤️

❤️जय-जय मीरा गोपाल ❤️

उसी समय मंदिर के सारे घंटे -घड़ियाल और शंख स्वयं ज़ोर ज़ोर से एक साथ बज उठे। कई क्षण तक वहाँ पर खड़े लोगों की समझ में नहीं आया कि क्या हुआ ।

एकाएक चमेली ” बाईसा हुकम ” पुकारती मंदिर के गर्भ गृह की ओर दौड़ी। पुजारी जी ने सचेत होकर हाथ के संकेत से उसे रोका और स्वयं गर्भ गृह में गये ।उनकी दृष्टि चारों ओर मीरा को ढूँढ रही थी ।अचानक प्रभु के पाशर्व में लटकता भगवा -वस्त्र खंड दिखाई दिया। वह मीरा की ओढ़नी का छोर था। लपक कर उन्होंने उसे हाथ में लिया ।पर मीरा कहीं भी मन्दिर में दिखाई नहीं दी ।निराशा के भाव से भावित हुए पुजारी ने गर्भ गृह से बाहर आकर न करते हुए सिर हिला दिया। उनका संकेत समझ सब हतोत्साहित एवं निराश हो गये ।

” यह कैसे सम्भव है ? 😩अभी तो हमारे सामने उन्होंने गाते हुये गर्भ गृह में प्रवेश किया है ।भीतर नहीं हैं तो फिर कहाँ है ? हम मेवाड़ जाकर क्या उत्तर देंगें। “- वीर सामन्त बोल उठे ।

” मैं भी तो आपके साथ ही बाहर था ।मैं कैसे बताऊँ कि वह कहाँ गई ?

स्थिति से तो यही स्पष्ट है कि मीरा बाई प्रभु में समा गई , उनके विग्रह में लीन हो गई। ” पुजारी जी ने उत्तर दिया।

पर चित्तौड़ और मेड़ता के वीरों ने पुजारी जी की आज्ञा ले स्वयं गर्भ गृह के भीतर प्रवेश किया। दोनों पुरोहितों ने मूर्ति के चारों ओर घूम कर मीरा को ढूँढने का प्रयास किया ।

सामन्तों ने दीवारों को ठोंका , फर्श को भी बजाकर देखा कि कहीं नीचे से नर्म तो नहीं !! अंत में जब निराश होकर बाहर निकलने लगे तो पुजारी ने कहा ,” ❤️आपको बा की ओढ़नी का पल्ला नहीं दिखता , अरे बा प्रभु में समा गई है। ” ❤️

दोनों पुरोहितों ने पल्ले को अच्छी तरह से देखा और खींचा भी , पर वह तनिक भी खिसका नहीं , तब वह हताश हो बाहर आ गये ।🙏🌺❤️

इस समय तक ढोल – नगारे बजने आरम्भ हो गये थे ।पुजारी जी ने भुजा उठाकर जयघोष किया -” बोल , मीरा माँ की जय ! द्वारिकाधीश की जय !!

भक्त और भगवान की जय !!! ” 🎻🎸💐

लोगों ने जयघोष दोहराया -जय-जय मीरा गोपाल

तीनों दासियों का रूदन वेग मानों बाँध तोड़कर बह पड़ा हो। अपनी आँखें पौंछते हुये दोनों पुरोहित उन्हें सान्तवना दे रहे थे ।इस प्रकार मेड़ता और चित्तौड़ की मूर्तिमंत गरिमा अपने अराध्य में जा समायी

नृत्यत नुपूर बाँधि के गावत ले करतार,
देखत ही हरि में मिली तृण सम गनि संसार ॥
मीरा को निज लीन किय नागर नन्दकिशोर ,
जग प्रतीत हित नाथ मुख रह्यो चुनरी छोर ॥

दोनों की साध पूरी हुयी, न जाने कितने जन्मों की प्रतीक्षा के बाद। आत्मा और परमात्मा का मिलन🌺

❤️दो होकर एक एक होकर दो ❤️
जय श्री मीरा माधव जी……….

राधा राधा 😭😭

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જય જલારામ બાપા
બજાર ની વર્તમાન સ્થિતિ..મમ્મી પપ્પા ની વૃદ્ધ અવસ્થા…
ઘર માં કમાનાર વ્યક્તિ ફક્ત હું…છતાં..પણ આજે….
મમ્મી…અને મારી પત્ની વચ્ચે ના ઉગ્ર મત ભેદ ..અંતે મનભેદ નું પરિણામ બન્યું…

જે મને શંકા હતી તે જ અંતે થયું…. વેકેશન માં ગયેલ પત્ની વેકેશન પુરૂ થવા છતાં પિયર થી પાછા આવવા નું નામ નહોતી લેતી….

મેં કારણ પૂછ્યું તો જવાબ મારા સાસુ..સસરા તરફથી મળ્યો…જમાઈ રાજ…તમારા માઁ બાપ થી તમે જુદા થાવ તો…મારી દીકરી ને ત્યાં મોકલું...

અચાનક …થયેલા પ્રહાર થી હું.મૂંઝાઈ ગયો..છતા પણ સ્વસ્થ થઈ… મેં સામો સવાલ કર્યો….
અને નહીં થાઉ તો…?

સસરા બોલ્યા…દીકરી અહીં અમારે ત્યાં રહેશે…

મેં કીધું….આ તમારી ધમકી સમજી લઉ ?

તે બોલ્યા… એવું સમજી લ્યો..

મેં કીધું…તો..મારી ચેતવણી પણ સાંભળી લ્યો.. આ નિર્ણય તમારો છે મારો નહીં….હવે પછીના આવનાર દરેક પરિણામો..માટે ફક્ત તમે જવાબદાર હશો….

મતલબ…સસરા બોલ્યા..

મતલબ સાફ છે..માઁ બાપ મારા છે જુદા થવું કે ન થવું ..એ મારી અંગત વાત છે..આ તમારો વિષય નથી…જેથી..તમે તમારી મર્યાદા મા રહો અંને હું મારી મર્યાદા માં રહુ ..તેમાં આપણા બંન્ને નું માન સન્માન રહેશે….એમ વાત કરી મેં મોબાઈલ ને કટ કર્યો..

મને ઘરે ચિંતા માં બેઠેલો જોઇ.. પપ્પા એ સવાલ કર્યો….બેટા કોઈ તકલીફ ?

મેં વિગતે વાત કરી….
પપ્પા ના ચહેરા ઉપર નારાજગી જણાતી હતી…પણ સાથે મક્કમતા પણ હતી…પાપા તરત જ સ્વસ્થ થઈ બોલ્યા..બેટા… આવડી નાની વાત મા દુઃખી શું કામ કામ થવું..? મારા તરફ થી લિલી ઝંડી છે તને..
તું આનંદ થી જુદો થા…બેટા

તેઓ તેમની આંખો ભીની લૂછતાં બોલ્યા…બેટા પણ અમને મળવા આવતો રહેજે….
આવા નાના કારણો ને લીધે…લગ્ન જીવન ઉપર કોઈ અસર ન થવી જોઈએ….
આટલું બોલી પપ્પા છાપું વાંચવા નો વ્યર્થ પ્રયત્ન કરવા લાગ્યા….

મને મંદિર ની અંદર બેઠેલો ભગવાન રડતો હોય તેવી લાગણી થઈ..

અગણિત ઉપકાર મારી જીંદગી ઉપર… આ માઁ બાપ ના છે.. પોતાની જરૂરિયાત ઉપર કાપ. મૂકી મારા મોજશોખ પુરા કર્યા….
જ્યારે જ્યારે હું રડતો ત્યારે ત્યારે પપ્પાએ મને હસાવવાનો પ્રયત્ન કર્યો છે …જયારે..જયારે હું મુંઝાયો છુ.. ત્યારે..ત્યારે..મારા ખભા ઉપર હાથ મૂકી…મને હિંમત આપી છે..
એ પપ્પા ની ભીની આંખો… અને હિંમત હારેલા જોઈ હું કઈ રીતે ઘર ની બહાર જઈ શકું ?
તેના માટે તો માત્ર હું જ ઘડપણ ની.લાકડી છુ…*

મારા લગ્ન જીવન ને ફક્ત ચાર વર્ષ જ થયા છે..તેમાં.. મારા સાસુ સસરા ને આવું બોલવા નો હક્ક કોણે આપી દીધો ?
તમે દીકરી આપી છે…તો મારા માઁ બાપે કમાતો દીકરો આપ્યો છે..એટલે દિકરી આપી અને મારા ઉપર તમે ઉપકાર કરતા હોય તેવું…વાણી વર્તન તો હું કદી નહીં ચલાવું …એવો મેં મન ની અંદર નિર્ણય લઈ લીધો…

સાંજે મમ્મી ..પાપા સાથે..ડાઇનિંગ ટેબલ ઉપર હું જમતો હતો..ફરીથી …સસરા નો…મોબાઈલ આવ્યો….ફરી થી એજ સવાલ…જમાઈ રાજ..શુ વિચાર્યું ?

મેં કીધું..વિચારવા નું શુ હોય ? …મારી ટ્રાન્સફર તમારા જામનગર ગામ મા જ કરાવી લીધી છે….હું..મમ્મી પપ્પા થી જુદો થાવ છું..પણ ….હવે જામનગર માં કાયમ માટે તમારી જોડે….રહીશ

જમાઈ રાજ..ઘર ના મળે ત્યાં સુધી સાથે રહેજો..સસરા બોલ્યા…

મેં કીધુ.. ઘર કોને ગોતવું છે..મારે તો તમારા ઘરે જ તમારી દીકરી સાથે કાયમ રેહવું છે….આમે હું તમારી દીકરી ના આગ્રહ ને કારણે તમને પપ્પા..કહી નેજ બોલવું છું….
35 વર્ષ મારા બાપે મને સાચવ્યો..બાકી ના વર્ષ તમે મને સાચવો…

સસરાજી ગંભીર થઈ બોલ્યા.. એ શક્ય નથી….દીકરી અને જમાઇ કાયમ માટે અમારા ઘર માં સારા ન લાગે…

મેં કીધું….પણ મારે તમારી સાથે જ રહેવું..છે…જેથી મને અને તમને તમારી લાડકી દીકરી નું સાચા સ્વરૂપ ની ખબર પડે….

સસરા…. બોલ્યા…
*દીકરી જમાઈ.. પિયર માં સારા ન લાગે…. *સાસરા મા જ સારા લાગે.*

મેં કીધું…. મારૂ. કેહવા નું એજ છે..વડીલ…દીકરી સાસરે જ સારી..લાગે..

તમારી દીકરી છે…તો તે મારી પત્ની..પણ .છે..
જેટલી ફરજ તમારી દીકરી ને મારે સુખી રાખવાની છે.તેટલી જ ફરજ મારી મારા માઁ બાપ પ્રત્યે પણ છે ..એ કેમ તમે ભૂલી જાવ છો ?
તમારી દીકરી ને જયારે મોકલવી હોય ત્યારે 365 દિવસ અમારા ઘર ના બારણાં ખુલ્લા છે….

બાકી એક સલાહ તમને આપું ..તમે દીકરી ના ઘર મા માથું ના મારો…એ આપણા એક બીજા ના હિત માં છે…

તમારા લાડ..અને વધારે પડતા પ્રેમે તમારી છોકરી ને વધારે પડતી સ્વચ્છંદી ..અને તોછડી બનાવી દીધી છે….
આજકાલ દીકરી ના માઁ બાપ દીકરી નું યોગ્ય ઘડતર કરતા નથી…અને વગર ટ્રેનિંગે કોઈ ના ઘર માં મોકલી આપે છે..પછી..વર અને સાસુ ના વાંક કાઢવા એ આદતો બનતી ગઈ છે….

*સત્ય ..અને કડવું,
છેલ્લે મારૂ સાંભળી લ્યો..તમારી દીકરી ને એકલું એટલે રહેવું..છે..તેના સમયે ઉઠવું…કીટીપાર્ટી ઓ કરવી છે…અને સહેલીઓ સાથે રખડવું..છે…તે શક્ય નથી..

આપ છ મહિના કે વર્ષ સાચવી તેનો અનુભવ કરી જોવોલગ્ન પહેલા ની દીકરી અને સાસરે થી પાછી આવેલ દીકરી નો તફાવત ખબર તમને પડી જશે..*.
અને યાદ રાખજો…જાતે અહીં મુકવા તમે આવશો…

સોમવાર થી સ્વીટુ ની સ્કૂલ ખુલે છે…તમારી દીકરી ને મોકલવી હોય તો મોકલી આપો નહીંતર સ્વીટુ નું ત્યાં એડમિશન લઈ લેજો…..કહી મેં મોબાઈલ કટ કરી દીધો…

પપ્પા મમ્મી મારી સામે જોતા રહ્યા….પપ્પા..ભીની આખે બોલ્યા..તારા વ્યક્તીવ પ્રમાણે મેં જે આશા તારી પાસે રાખી હતી..તેજ ..તું બોલ્યો.. બેટા ગર્વ છે…મને તારા ઉપર…

સાથે તારી મમ્મી ને પણ એક સલાહ આપું છું..બીન જરૂરી
કચકચ કે તે લોકો ની વ્યક્તિગત જીંદગી ની અંદર દખલગિરી ન કરતી..નહીંતર ઘર ને તૂટતું કોઈ બચાવી નહીં શકે*…

ત્યાં થોડી વાર પછી ફરી થી મોબાઈલ ની રિંગ વાગી… સસરા નો મોબાઈલ આવ્યો
જમાઈ રાજ…કાલે બપોરે નીકળી રાત્રિ સુધી માં અમારી દીકરી ને મુકવા આવું…છું…. સાંજે આપણે સાથે જમવા નું રાખશું….

મેં કીધું..આવો તો બેત્રણ દિવસ રોકાઈ ને જજો..ઘર જ છે…

સસરા.. બોલ્યા.. બેટા.. માફ કરજે…તારી સ્વમાની અને કડક વાત સાંભળી…મારી જવાની યાદ આવી ગઈ..મેં તારાજેવું વર્તન કર્યું હોત..આજ
મારા માઁ બાપ ના દીવાલ ઉપર લટકતા ફોટા સામે નીચે માથે ઉભો ન હોત…

uતમે શાંતિ થી સ્વમાન થી તમારા માઁ બાપ સાથે જીવો.. તેવા અમારા આશીર્વાદ છે…!
🙏🌷🙏જય જલારામ.

હશુભાઈ ઠક્કર

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🌸ज्योतिष कहता है कि मनुष्य अपने ही कर्मो का फल पाता है| कर्म कैसे फल देता है यह इस प्रसंग से समझे♦️

एक दिन एक राजा ने अपने तीन मन्त्रियो को दरबार में बुलाया, और तीनो को आदेश दिया के एक एक थैला ले कर बगीचे में जाएं और वहां से अच्छे अच्छे फल जमा करें.

तीनो अलग अलग बाग़ में प्रविष्ट हो गए ,
पहले मन्त्री ने कोशिश की के राजा के लिए उसकी पसंद के अच्छे अच्छे और मज़ेदार फल जमा किए जाएँ , उस ने काफी मेहनत के बाद बढ़िया और ताज़ा फलों से थैला भर लिया ,💐🙏

दूसरे मन्त्री ने सोचा राजा हर फल का परीक्षण तो करेगा नहीं , इस लिए उसने जल्दी जल्दी थैला भरने में ताज़ा , कच्चे , गले सड़े फल भी थैले में भर लिए ,🍏

तीसरे मन्त्री ने सोचा राजा की नज़र तो सिर्फ भरे हुवे थैले की तरफ होगी वो खोल कर देखेगा भी नहीं कि इसमें क्या है ,उसने समय बचाने के लिए जल्दी जल्दी इसमें घास , और पत्ते भर लिए और वक़्त बचाया .

दूसरे दिन राजा ने तीनों मन्त्रियो को उनके थैलों समेत दरबार में बुलाया और उनके थैले खोल कर भी नही देखे और आदेश दिया कि तीनों को उनके थैलों समेत दूर स्थान के एक जेल में 15 दिन के लिए क़ैद कर दिया जाए.

अब जेल में उनके पास खाने पीने को कुछ भी नहीं था सिवाए उन फल से भरे थैलों के ,
तो जिस मन्त्री ने अच्छे अच्छे फल जमा किये वो तो मज़े से खाता रहा और 15 दिन गुज़र भी गए ,

फिर दूसरा मन्त्री जिसने ताज़ा , कच्चे गले सड़े फल जमा किये थे, वह कुछ दिन तो ताज़ा फल खाता रहा फिर उसे ख़राब फल खाने पड़े , जिस से वो बीमार होगया और बहुत तकलीफ उठानी पड़ी .

और तीसरा मन्त्री जिसने थैले में सिर्फ घास और पत्ते जमा किये थे वो कुछ ही दिनों में भूख से मर गया .

अब आप अपने आप से पूछिये कि आप क्या जमा कर रहे हो

आप इस समय जीवन के बाग़ में हैं , जहाँ चाहें तो अच्छे कर्म जमा करें ..
चाहें तो बुरे कर्म,
मगर याद रहे जो आप जमा करेंगे वही आपको जन्मों-जन्मों तक काम आयेगा..!!

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