Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

“माँ मुझे थोडा आराम करना है..”

स्कूल, क्लास, पढ़ाई से थक कर बेटी ने माँ से कहा।

“अरी बिटिया अच्छी पढ़ाई कर, बाद मे आराम ही तो करना है ..”

बिटिया उठी , पढ़ने बैठी और फिर आराम करनातो रह ही गया। ..*

“माँ मुझे थोडा समय दो.. दो घडी आराम कर लू” ऑफिस से थक कर आयी बिटिया ने कहा..” मैं थक गई हू”….

अरी शादी कर ले और सेटल हो जा.. फिर आराम ही करना है ..

बिटिया शादी के लिए तैयार हो गई और.. आराम करना तो रह हीगया.*

“अरे इतनी क्या जल्दी है.. एकाध साल रुकते है ना..”

“अरी समय के साथ बच्चे हो जाए तो टेंशन नहीं , फिर आराम ही आराम है …”

बिटिया माँ बन गई और आराम करना तो रह हीगया..*

“तुम माँ हो.. तुम्हें ही बच्चे के साथ जागना पड़ेगा.. मुझे सुबह ऑफिस जाना है ..बस थोडे दिन.. बच्चे बड़े हो जाए फिर आराम ही आराम है…..

वो बच्चों के लिए कई रातें जागी और आराम करनातो रह ही गया..*

“सुनो जी.. बच्चे अब स्कूल जाने लगे है.. अब तो दो घडी बैठने दो आराम से..

“बच्चों की तरफ ध्यान दो , उनको पढ़ा लो फिर आराम ही आराम है”।

बच्चों का प्रोजेक्ट बनाने बैठी.. और आराम करनातो रह ही गया..*

” बच्चे पढ़ लिख कर अपने पैरों पर खड़े हो गए ,अब कुछ आराम कर लू .”

“अब बच्चों की शादी करनी है.. ये जिम्मेवारी पार पडे के फिर आराम ही आराम है .”

उसने हिम्मत जुटाई.. बच्चों की शादी का काम निपटाया.. और फिर आराम करना तो रह हीगया..* .

“बच्चों का अपना संसार चलने लगा ,अब मैं ज़रा आराम कर लू ..”

“अरी अब अपनी बिटिया माँ बनने वाली है , पहला बच्चा मायके मे होगा ना.. चलो तैयारी करे .”

हमारी बिटिया की डिलीवरी हो गई और आराम करना रह ही गया..

“चलो, ये जिम्मेदारी भी पूरी हुई , अब आराम “

“माँ जी, मुझे नोकरी पर वापस जाना होगा ..तो आप आरव को सम्भाल लेंगी ना ?”

नाती के पीछे दौड़ते दौड़ते थक गई और आराम करना रह ही गया ..

“चलो नाती भी बड़ा हो गया अब.. सारी जिम्मेदारियाँ खत्म… अब मैं आराम करूंगी..”

“अरी सुनती हो , गुठने दुख रहे है मेरे , मुझसे उठा नही जा रहा ..Bp भी बढ़ गया है शायद , डायबिटीस है सो अलग ..डॉकटर ने परहेज़ करने को कहा है ..”

पति की सेवा मे बचा-खुचा जीवन गुज़र गया ..और.. आराम करना तो रह ही गया ..

एक दिन भगवान खुद धरती पर आए और कहा..” आराम करना है ना तुझे ? उसने हाथ जोड़े और भगवान उसे ले गए ..आखिरकार उसे आराम मिल ही गया ,
हमेशा के लिए ..!!!

सभी स्त्रियों को समर्पित।

किसने लिखा है ये तो पता नहीं …पर मुझे अच्छा लगा इसलिए भेज दिया 🙏🏼
..

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”आप जमा करेंगे वही आपको
आखरी समय काम आयेगा”
🔴_

1 दिन एक राजा ने अपने 3 मन्त्रियो को दरबार में बुलाया, और तीनो को आदेश दिया के एक एक थैला ले कर बगीचे में जाएं और वहां से अच्छे अच्छे फल जमा करें .

वो तीनो अलग अलग बाग़ में प्रविष्ट हो गए ,

पहले मन्त्री ने कोशिश की के राजा के लिए उसकी पसंद के अच्छे अच्छे और मज़ेदार फल जमा किए जाएँ , उस ने काफी मेहनत के बाद बढ़िया और ताज़ा फलों से थैला भर लिया ,

दूसरे मन्त्री ने सोचा राजा हर फल का परीक्षण तो करेगा नहीं , इस लिए उसने जल्दी जल्दी थैला भरने में ताज़ा , कच्चे , गले सड़े फल भी थैले में भर लिए ,

तीसरे मन्त्री ने सोचा राजा की नज़र तो सिर्फ भरे हुवे थैले की तरफ होगी वो खोल कर देखेगा भी नहीं कि इसमें क्या है , उसने समय बचाने के लिए जल्दी जल्दी इसमें घास , और पत्ते भर लिए और वक़्त बचाया .

दूसरे दिन राजा ने तीनों मन्त्रियो को उनके थैलों समेत दरबार में बुलाया और उनके थैले खोल कर भी नही देखे और आदेश दिया कि , तीनों को उनके थैलों समेत दूर स्थान के एक जेल में ३ महीने क़ैद कर दिया जाए .

अब जेल में उनके पास खाने पीने को कुछ भी नहीं था सिवाए उन थैलों के ,
तो जिस मन्त्री ने अच्छे अच्छे फल जमा किये वो तो मज़े से खाता रहा और 3 महीने गुज़र भी गए ,

फिर दूसरा मन्त्री जिसने ताज़ा , कच्चे गले सड़े फल जमा किये थे, वह कुछ दिन तो ताज़ा फल खाता रहा फिर उसे ख़राब फल खाने पड़े , जिस से वो बीमार होगया और बहुत तकलीफ उठानी पड़ी .

और तीसरा मन्त्री जिसने थैले में सिर्फ घास और पत्ते जमा किये थे वो कुछ ही दिनों में भूख से मर गया .

अब आप अपने आप से पूछिये कि आप क्या जमा कर रहे हो ??

आप इस समय जीवन के बाग़ में हैं , जहाँ चाहें तो अच्छे कर्म जमा करें ..

चाहें तो बुरे कर्म ,

मगर याद रहे जो आप जमा करेंगे वही आपको आखरी समय काम आयेगा क्योंकि दुनिया क़ा राजा आपको चारों ओर से देख रहा है

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(((((परमात्मा की संपदा)))))

एक बहुत अरबपति महिला ने एक गरीब चित्रकार से अपना चित्र बनवाया, पोट्रट बनवाया। चित्र बन गया, तो वह अमीर महिला अपना चित्र लेने आयी। वह बहुत खुश थी। चित्रकार से उसने कहा, कि क्या उसका पुरस्कार दूं?
चित्रकार गरीब आदमीथा। गरीब आदमी वासना भी करे तो कितनी बड़ी करे, मांगे भी तो कितना मांगे?हमारी मांग, सब गरीब आदमी की मांग है परमात्मा से। हम जो मांग रहे हैं, वो क्षुद्र है।* जिससे मांग रहे हैं, उससे यह बात मांगनी नहीं चाहिए।तो उसने सोचा मन में कि सौ डालर मांगूं, दो सौ डालर मांगूं, पांच सौ डालर मांगूं। फिर उसकी हिम्मत डिगने लगी। इतना देगी, नहीं देगी! फिर उसने सोचा कि बेहतर यह हो कि इसी पर छोड़ दूं, शायद ज्यादा दे। डर तो लगा मन में कि इस पर छोड़ दूं, पता नहीं दे या न दे, या कहीं कम दे और एक दफा छोड़ दिया तो फिर! तो उसने फिर भी हिम्मत की। उसने कहा कि आपकी जो मर्जी। तो उसके हाथ में जो उसका बैग था, पर्स था, उसने कहा,तो अच्छा तो यह पर्स तुम रख लो। यह बडा कीमती पर्स है।पर्स तो कीमती था, लेकिन चित्रकार की छाती बैठ गयी कि पर्स को रखकर करूंगा भी क्या? माना कि कीमती है और सुंदर है, पर इससे कुछ आता-जाता नहीं। इससे तो बेहतर था कुछ सौ डालर ही मांग लेते। तो उसने कहा, नहीं-नहीं, मैं पर्स का क्या करूंगा, आप कोई सौ डालर दे दें।उस महिला ने कहा, तुम्हारी मर्जी। उसने पर्स खोला, उसमें एक लाख डालर थे, उसने सौ डालर निकाल कर चित्रकार को दे दिये और पर्स लेकर वह चली गयी।सुना है कि चित्रकार अब तक छातीपीट रहा है और रो रहा है–मर गये, मारे गये,अपने से ही मारे गये!आदमी करीब-करीब इस हालत में है। परमात्मा ने जो दिया है, वह बंद है, छिपाहै। और हम मांगे जा रहे हैं–दो-दो पैसे, दो-दो कौड़ी की बात। और वह जीवन की जो संपदा उसने हमें दी है, उस पर्स को हमने खोल कर भी नहीं देखा है।*जो मिला है, वह जो आप मांग सकते हैं, उससे अनंत गुना ज्यादा है। लेकिन मांग से फुरसत हो, तो दिखायी पड़े, वह जो मिलाहै। भिखारी अपने घर आये, तो पता चले कि घर में क्या छिपा है। वह अपना भिक्षापात्र लिये बाजार में ही खड़ा है! वह घर धीरे-धीरे भूल ही जाता है, भिक्षा-पात्र ही हाथ में रह जाता है। इस भिक्षापात्र को लिये हुए भटकते-भटकते जन्मों-जन्मों में भी कुछ मिला नहीं। कुछ मिलेगा नहीं।-

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भगवान उन्हीं लोगों की मदद करते हैं जो स्वयं की मदद करते हैं

एक बार की बात है कि किसी दूर गाँव में एक किसान रहता था। उन दिनों बारिश का समय था चारों तरफ गड्ढों में पानी भरा हुआ था। कच्ची सड़क बारिश की वजह से फिसलन भरी हो गयी थी। सुबह सुबह किसान को बैलगाड़ी लेकर कुछ धन कमाने बाजार जाना होता था लेकिन आज बारिश की वजह से बहुत दिक्कत हो रही थी। फिर भी किसान धीरे धीरे सावधानी पूर्वक बैलगाड़ी लेकर बाजार की ओर जा रहा था।

अचानक रास्ते में एक गड्ढा आया और बैलगाड़ी का पहिया गड्ढे में फंस गया। कीचड़ भरे गड्ढे से निकलना काफी मुश्किल था। बैल ने भी अपनी पूरी ताकत लगायी लेकिन सफलता नहीं मिली। अब तो किसान बुरी तरह परेशान हो उठा। उसने चारों तरफ नजर घुमाई लेकिन ख़राब मौसम में दूर दूर तक कोई नजर नहीं आया। किसान सोचने लगा कि किससे मदद माँगे कोई इंसान दिखाई ही नहीं दे रहा। किसान दुखी होकर एक तरफ बैठ गया और मन ही मन अपने भाग्य को कोसने लगा। हे भगवान! ये तूने मेरे साथ क्या किया? कोई आदमी भी दिखाई नहीं दे रहा इतना खराब नसीब मुझे क्यों दिया? किसान खुद के भाग्य को कोसे जा रहा था।

तभी वहाँ से एक सन्यासी गुजरे उन्होंने किसान को देखा तो किसान सन्यासी के पास जाकर अपनी परेशानी बताने लगा। मैं सुबह से यहाँ बैठा हूँ, मेरी गाड़ी फँस गयी है और मेरा नसीब भी इतना ख़राब है कि कोई मेरी मदद करने भी नहीं आया। भगवान ने मेरे साथ बहुत अन्याय किया है। सन्यासी उसकी सारी बात सुनकर बोले- तुम इतनी देर से यहाँ बैठे अपने भाग्य को कोस रहे हो और भगवान को बुरा भला बोल रहे हो, क्या तुमने खुद अपनी गाड़ी निकालने का प्रयास किया?

किसान- नहीं,

सन्यासी- तो फिर किस हक़ से तुम भगवान को दोष दे रहे हो, भगवान उन्हीं लोगों की मदद करते हैं जो स्वयं की मदद करते हैं।

अब किसान के बात समझ में आ गयी उसने तुरंत पहिया निकालने का प्रयास किया और वो सफल भी हुआ।

तो मित्रों हममें से ज्यादातर लोग उस किसान की ही तरह हैं जो खुद कुछ नहीं करना चाहते और हमेशा अपने भाग्य और दूसरे लोगों को कोसते रहते हैं। हमें लगता है कि भगवान ने हमारे साथ बहुत गलत किया है। हममें से कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई इंजिनियर , कोई कलेक्टर लेकिन जब हम अपने काम में सफल नहीं होते तो यही विचार हमारे दिमाग में आता है कि हमारा भाग्य ख़राब है और भगवान ने कुछ नहीं दिया। लेकिन शायद आप भूल रहे हैं कि भगवान ने आपको, हम सबको एक बहुत अमूल्य चीज़ दी है- ये शरीर। आपके अंदर हर सामर्थ्य है तो फिर आप भाग्य भरोसे क्यों हैं? भगवान भी उन्हीं लोगों की मदद करते हैं जो खुद की मदद करते हैं। किसी महान पुरुष का एक दोहा है –

विद्या धन उद्धम बिना, कहूँ जो पावे कौन , बिना डुलाये ना मिले, ज्यूँ पंखा की पौन

मतलब बिना कार्य किये आप कुछ नहीं पा सकते। जैसे आपके सामने पंखा रखा हो लेकिन वो जब तक आपको हवा नहीं देगा जब तक उसे अपने हाथ से झलेंगे नहीं।

तो मित्रों इस लेख का सार यही है कि आप खुद की मदद करिये तभी भगवान भी आपकी मदद करेंगे तो आओ आज मिलकर एक साथ शपथ लेते हैं कि कभी अपने भाग्य को नहीं कोसेंगे और स्वयं ही अपने कर्णधार बनेंगे।

आपके विचार हमारे लिए अमूल्य हैं कृपया कमेंट नीचे जरूर करें धन्यवाद !!

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक करोड़पति बहुत अड़चन में था। करोड़ों का घाटा लगा था, और सारी जीवन की मेहनत डूबने के करीब थी! नौका डगमगा रही थी। कभी मंदिर नहीं गया था, कभी प्रार्थना भी न की थी। फुरसत ही न मिली थी !

पूजा के लिए उसने पुजारी रख छोड़े थे, कई मंदिर भी बनवाये थे, जहां वे उसके नाम से नियमित पूजा किया करते थे लेकिन आज इस दुःख की घड़ी में कांपते हाथों वह भी मंदिर गया!

सुबह जल्दी गया, ताकि परमात्मा से पहली मुलाकात उसी की हो, पहली प्रार्थना वही कर सके। कोई दूसरा पहले ही मांग कर परमात्मा का मन खराब न कर चुका हो! बोहनी की आदत जो होती है, कमबख्त यहां भी नहीं छूटी…. सो अल्ल-सुबह पहुंचा मन्दिर।

लेकिन यह देख कर हैरान हुआ कि गांव का एक भिखारी उससे पहले से ही मन्दिर में मौजूद था। अंधेरा था, वह भी पीछे खड़ा हो गया, कि भिखारी क्या मांग रहा है? धनी आदमी सोचता है, कि मेरे पास तो मुसीबतें हैं; भिखारी के पास क्या मुसीबतें हो सकती हैं? और भिखारी सोचता है, कि मुसीबतें मेरे पास हैं। धनी आदमी के पास क्या मुसीबतें होंगी ? एक भिखारी की मुसीबत दूसरे भिखारी के लिए बहुत बड़ी न थी !

उसने सुना, कि भिखारी कह रहा है –हे परमात्मा ! अगर पांच रुपए आज न मिलें तो जीवन नष्ट हो जाएगा। आत्महत्या कर लूंगा। पत्नी बीमार है और दवा के लिए पांच रुपए होना बिलकुल आवश्यक हैं ! मेरा जीवन संकट में है !

अमीर आदमी ने यह सुना और वह भिखारी बंद ही नहीं हो रहा है; कहे जा रहा है और प्रार्थना जारी है ! तो उसने झल्लाकर अपने खीसे से पांच रुपए निकाल कर उस भिखारी को दिए और कहा – जा ये ले जा पांच रुपए, तू ले और जा जल्दी यहां से !

अब वह परमात्मा से मुखतिब हुआ और बोला — प्रभु, अब आप ध्यान मेरी तरफ दें, इस भिखारी की तो यही आदत है। दरअसल मुझे पांच करोड़ रुपए की जरूरत है !

भगवान मुस्करा उठे बोले — एक छोटे भिखारी से तो तूने मुझे छुटकारा दिला दिया, लेकिन तुझसे छुटकारा पाने के लिए तो मुझको तुमसे भी बढा भिखारी ढूंढना पड़ेगा ! तुम सब लोग यहां कुछ न कुछ मांगने ही आते हो, कभी मेरी जरूरत का भी ख्याल आया है ?

धनी आश्चर्यचकित हुआ बोला – प्रभु आपको क्या चाहिए ?

भगवान बोले – प्रेम ! मैं भाव का भूखा हूँ । मुझे निस्वार्थ प्रेम व समर्पित भक्त प्रिय है ! कभी इस भाव से मुझ तक आओ; फिर तुम्हे कुछ मांगने की आवश्यकता ही नही पड़ेगी।

रामचंद्र आर्य

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एक करोड़पति बहुत अड़चन में था। करोड़ों का घाटा लगा था, और सारी जीवन की मेहनत डूबने के करीब थी! नौका डगमगा रही थी। कभी मंदिर नहीं गया था, कभी प्रार्थना भी न की थी। फुरसत ही न मिली थी !

पूजा के लिए उसने पुजारी रख छोड़े थे, कई मंदिर भी बनवाये थे, जहां वे उसके नाम से नियमित पूजा किया करते थे लेकिन आज इस दुःख की घड़ी में कांपते हाथों वह भी मंदिर गया!

सुबह जल्दी गया, ताकि परमात्मा से पहली मुलाकात उसी की हो, पहली प्रार्थना वही कर सके। कोई दूसरा पहले ही मांग कर परमात्मा का मन खराब न कर चुका हो! बोहनी की आदत जो होती है, कमबख्त यहां भी नहीं छूटी…. सो अल्ल-सुबह पहुंचा मन्दिर।

लेकिन यह देख कर हैरान हुआ कि गांव का एक भिखारी उससे पहले से ही मन्दिर में मौजूद था। अंधेरा था, वह भी पीछे खड़ा हो गया, कि भिखारी क्या मांग रहा है? धनी आदमी सोचता है, कि मेरे पास तो मुसीबतें हैं; भिखारी के पास क्या मुसीबतें हो सकती हैं? और भिखारी सोचता है, कि मुसीबतें मेरे पास हैं। धनी आदमी के पास क्या मुसीबतें होंगी ? एक भिखारी की मुसीबत दूसरे भिखारी के लिए बहुत बड़ी न थी !

उसने सुना, कि भिखारी कह रहा है –हे परमात्मा ! अगर पांच रुपए आज न मिलें तो जीवन नष्ट हो जाएगा। आत्महत्या कर लूंगा। पत्नी बीमार है और दवा के लिए पांच रुपए होना बिलकुल आवश्यक हैं ! मेरा जीवन संकट में है !

अमीर आदमी ने यह सुना और वह भिखारी बंद ही नहीं हो रहा है; कहे जा रहा है और प्रार्थना जारी है ! तो उसने झल्लाकर अपने खीसे से पांच रुपए निकाल कर उस भिखारी को दिए और कहा – जा ये ले जा पांच रुपए, तू ले और जा जल्दी यहां से !

अब वह परमात्मा से मुखतिब हुआ और बोला — प्रभु, अब आप ध्यान मेरी तरफ दें, इस भिखारी की तो यही आदत है। दरअसल मुझे पांच करोड़ रुपए की जरूरत है !

भगवान मुस्करा उठे बोले — एक छोटे भिखारी से तो तूने मुझे छुटकारा दिला दिया, लेकिन तुझसे छुटकारा पाने के लिए तो मुझको तुमसे भी बढा भिखारी ढूंढना पड़ेगा ! तुम सब लोग यहां कुछ न कुछ मांगने ही आते हो, कभी मेरी जरूरत का भी ख्याल आया है ?

धनी आश्चर्यचकित हुआ बोला – प्रभु आपको क्या चाहिए ?

भगवान बोले – प्रेम ! मैं भाव का भूखा हूँ । मुझे निस्वार्थ प्रेम व समर्पित भक्त प्रिय है ! कभी इस भाव से मुझ तक आओ; फिर तुम्हे कुछ मांगने की आवश्यकता ही नही पड़ेगी।

रामचंद्र आर्य

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

जब एक आतंकवादी , यासिर अराफात ने इजराइल के विरुद्ध फिलिस्तीन राष्ट्र की घोषणा की , तो फिलिस्तीन को सबसे पहले मान्यता देने वाला देश कौन था ?

सउदी अरब ? – जी नहीं !
पाकिस्तान ? – जी नहीं !
अफगानिस्तान- जी नहीं !
इराक ? – जी नहीं !
तुर्की ? – जी नहीं !

सोचिये , फिर किस देश ने फिलिस्तीन को सबसे पहले मान्यता दी होगी ..???
सेकुलर भारत ! जी हाँ !

इंदिरा गाँधी ने मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए , सबसे पहले फिलिस्तीन को मान्यता दी , और यासिर अराफात जैसे आतंकवादी को ” नेहरु शान्ति पुरस्कार “, और राजीव गाँधी ने उसको ” इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय शान्ति पुरस्कार ” दिए ! और तो और राजीव गाँधी ने तो उसको पूरे विश्व में घूमने के लिए बोईंग ७४७ गिफ्ट में दिया था !

अब आगे जानिए , वही खुराफात , क्षमा करें, अराफात , ने OIC ( Organisation of Islamic Countries ) में काश्मीर को “” पाकिस्तान का अभिन्न भाग “‘ बताया , और उस आतंकवादी ने बोला कि ” पाकिस्तान जब भी चाहें , तब मेरे लड़ाके काश्मीर की आज़ादी के लिए लड़ेंगे !”

जी हाँ , इतना ही नहीं , जिस शख्स को दुनिया के १०३ देश आतंकवादी घोषित किये हों , और जिसने ८ विमानों का अपहरण किया हो , और जिसने दो हज़ार निर्दोष लोगों को मार डाला हो , ऐसे आतंकवादी यासिर अराफात को सबसे पहले भारत ने किसी अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा ! इंदिरा गाँधी ने उसे ” नेहरु शान्ति पुरस्कार ” दिया , जिसमें एक करोङ रूपये नगद , और दो सौ ग्राम सोने से बना एक शील्ड होता है ! आप सोचिये , १९८३ में , यानि आज से ३७ वर्षों पहले , एक करोङ रूपये की आज वैल्यू क्या होगी ! ( डेढ़ अरब से भी ऊपर ) फिर राजीव गाँधी ने उसे ” इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय शान्ति पुरस्कार ” दिया ! फिर यही यासिर अराफात काश्मीर के मामले पर खुलकर पाकिस्तान के साथ हो गया , और इसने घूम – घूमकर पूरे इस्लामिक देशों में कहा , कि फिलिस्तीन और काश्मीर दोनों जगहों के मुसलमान गैर-मुसलमानों के हाथों मारे जा रहे हैं , इसलिए पूरे मुस्लिम जगत को इन दोनों मामलों पर एकजुट होना चाहिए !

अब , वो कांग्रेस पार्टी मोदी जी को सिखा रही है , कि ” विदेश नीति कैसे की जाती है ..!”

अब आप विचार करने के लिए स्वतंत्र हैं कि देशद्रोही कौन हैं और देशभक्त कौन ।

🚩 वंदे मातरम! जय हिन्द !! 🚩
हिन्दूध्वज वाहक