Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक, भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

अशोक कुमार शुक्ल सनातनधर्मी जी की पोस्ट से….. तूफानों पर नजर रखो, शैलाबों पर वार करो,
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर कर दरिया पार करो।

काश्मीरी हिन्दू अगर काश्मीर वापस जाएँगे तो वहाँ कैसे रहेंगे?
98% जनसँख्या जो आपके अस्तित्व से घृणा करती हो, उसके बीच में आप कैसे रहेंगे.
एक फिनोमिनल उदाहरण याद आता है…जैसे यहूदी फिलिस्तीन में अरबों के बीच जीवित रहे, लड़े और अपने लिए एक इस्राएल बनाया.
फिर ले दे कर बात इसपर आती है कि हम यहूदियों जैसे नहीं हैं…

पर यहूदी हमेशा ऐसे नहीं थे जैसे आज हैं. यहूदी 1500 सालों तक फिलिस्तीनियों से मार खाकर भागे रहे. अपना एक मुल्क नहीं था. यहूदी पूरी दुनिया में फैला रहा, उसे सिर्फ अपने पैसे कमाने से मतलब रहा. दुनिया की सबसे पढ़ी-लिखी और संपन्न कौम होने के बावजूद यहूदी पूरी दुनिया की घृणा और वितृष्णा का पात्र रहा. और यहूदी भी तब तक नहीं जागे जब तक उनका अस्तित्व खतरे में नहीं आ गया. हिटलर अकेला उन्हें नहीं मार रहा था, पूरा यूरोप उनके मार खाने पर खुश था.
इंग्लैंड की विदेश नीति में द्वितीय विश्व युद्ध तक यहूदियों के लिए कोई सहानुभूति नहीं थी. आपने अगर लॉरेंस ऑफ़ अरबिया फिल्म देखी हो तो याद होगा…पहले विश्वयुद्ध में अंग्रेजों और अरबों में बहुत याराना था. यह दूसरे विश्वयुद्ध तक चला, और जब दुनिया भर के यहूदी फिलिस्तीन में छुप कर सर्वाइव करने का प्रयास कर रहे थे तब भी सरकारी ब्रिटिश नीति अरबों के पक्ष में थी. उस समय एक अँगरेज़ फौजी अफसर फिलिस्तीन में इंटेलिजेंस ऑफिसर बन कर आया. नाम था कैप्टेन ऑर्ड विनगेट. विनगेट एक अजीब सी, पर असाधारण शख्सियत था. वह एक इन्फेंट्री जीनियस था. व्यक्तिगत रूप से उसे यहूदियों से बहुत सहानुभूति थी. और सरकारी ब्रिटिश नीति के विरुद्ध जाकर उसने यहूदियों को एकत्र करना और उन्हें लड़ाई के लिए तैयार करना शुरू किया. बेन गुरिएन, ज़्वी ब्रेनर और मोशे दयान जैसे भविष्य के इसरायली मिलिट्री लीडर उसके शिष्य बने. विनगेट ने इस्राएलियों को उनकी यह आक्रामक नीति दी...उसके पहले इसरायली कैम्पों में बैठे रक्षात्मक मोर्चे लिए रहते थे. अरब गैंग आते और उनपर हमले करके चले जाते, इसरायली सिर्फ जरूरत भर रक्षात्मक कार्रवाई करते थे. एक दिन विनगेट ने ज़्वी ब्रेनर से बात करते हुए पूछा - तुम्हें पता है, इन पहाड़ियों के पार जो अरब हैं, वे तुम्हारे खून के प्यासे हैं...एक दिन ये आएंगे और तुम्हारा अस्तित्व मिटा देंगे? ब्रेनर ने कहा - वे यह आसानी से नहीं कर पाएंगे...हम बहादुरी से उनका मुकाबला करेंगे...

विनगेट ब्रेनर पर बरस पड़ा – तुम यहूदी भी ना, masochist (आत्मपीड़क) हो…तुम कहते हो – आओ, मुझे मारो…जब तक वह तुम्हारे भाई का क़त्ल नहीं कर दे, तुम्हारी बहन का रेप नहीं कर दे, तुम्हारे माँ-बाप को नाले में नहीं फेंक दे, तुम हाथ नहीं उठाओगे…
तुम लड़ कर जीत सकते हो, पर मैं तुम्हें सिखाऊंगा कि लड़ना कैसे है…
फिर विनगेट ने यहूदियों की टुकड़ियों का कई सैनिक अभियानों में नेतृत्व किया. वह अरब ठिकानों का पता लगाता, उनपर घात लगा कर हमला करता, उन्हें बेरहमी से मार डालता और कई बार अरबों की लाशें लॉरी में लादकर फिलिस्तीनी पुलिस स्टेशन के सामने फेंक आता…
विनगेट ने यहूदियों की मिलिट्री स्ट्रेटेजी ही नहीं, उनकी मानसिक अवस्था बदल दी. उन्हें रक्षात्मक से आक्रामक बनाया…इजराइल को मोशे दयान जैसे जनरल तैयार करके दिए…विनगेट अकेला एक ऐसा गैर-यहूदी है जिसकी मूर्ति इजराइल में लगाई गई है… आप भेड़ियों के बीच में भेड़ बनकर नहीं जी सकते. जान पर बनती है तो भेंड़ बना यहूदियों का झुण्ड इजराइल बन कर शेर की तरह रहना सीख लेता है...तो हम तो वह फिनोमिनल भरत वंशी हैं जिनका बचपन ही सिंह शावकों के साथ बीता था...।

पूनम सोनी माँ

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

“सरप्राइज टेस्ट…..

एक प्रोफ़ेसर अपनी क्लास में आते ही बोले -चलिए, आज आप सभी का सरप्राइज टेस्ट हो जाए….
ये सुनते ही विधार्थियों में घबराहट फैल गई…..
कुछ किताबों के पन्ने पलटने लगे तो कुछ सर के दिए नोट्स पढ़ने लगे…..

ये सब कुछ काम नहीं आएगा …प्रोफेसर साहब मुस्कुराते हुए बोले…..मे प्रश्न पत्र रख रहा हूं आपके सामने,
ध्यान रहे….जब सारे पेपर बट जाएं तभी आप उसे पलट कर देखें…..

सभी विधार्थियों को पेपर बाँट दिये गए….
ठीक है….अब आप पेपर देख सकते है …अगले ही क्षण सभी प्रश्नपत्र को निहार रहे थे….

लेकिन … यह क्या….
कोई प्रश्न था ही नहीं उस पेपर में…..था तो केवल सफेद पेपर पर बीचों बीच केवल एक काला धब्बा….

यह क्या सर…. इसमें तो …प्रश्न पत्र है ही नही….
एक छात्र खड़ा होकर बोला…..

भाई…..जो भी है आपके सामने है.
आपको बस इसी को एक्सप्लेन करना है….
लेकिन … ध्यान रहे…..
इसके लिए आपके पास केवल 10 मिनट ही हैं….
और आपका समय शुरू होता है…..
अब….चुटकी बजाते …मुस्कुराते हुए बोले प्रोफेसर

कोई चारा न था …उन हैरान विधार्थियों के पास….
सो वे जुट गए उस अजीब से प्रश्न का
उत्तर लिखने में…..

10 मिनट बीतते ही प्रोफेसर साहब ने
फिर से चुटकी बजाई
और….समय समाप्त……
और लगे …उत्तर पुस्तिका एकत्रित करने…..
सभी विधार्थी अभी भी हैरान परेशान थे….

प्रोफेसर साहब ने सभी उत्तर पुस्तिका चैक करी
सभी ने ▪️काले धब्बे ▪️ को
अपनी तरह से समझाने की कोशिश की थी, लेकिन …
किसी ने भी उस धब्बे के चारों ओर मौजूद
सफेद पेपर के बारे में लिखने की कोशिश ही नही की….

अब प्रोफ़ेसर साहब गंभीर होते हुए बोले
इस परीक्षा का आपके Academics से
कोई लेना-देना नहीं है… ना ही मैं ..इसके कोई मार्क्स देने वाला हूँ….इस टेस्ट के पीछे …
मेरा एक ही मकसद है….
मैं आपको जीवन की एक अद्भुत सच्चाई
बताना चाहता हूँ….

देखिये …
यह पेपर 99% सफेद’ है…..
लेकिन आप में से किसी ने भी इसके बारे में नहीं लिखा, और अपना 100% उत्तर केवल उस एक चीज को बताने में लगा दिया जो मात्र 1% है….

यही बात हमारी जिंदगी में भी देखने को मिलती है.
समस्याएं हमारे जीवन का एक छोटा सा हिस्सा होती हैं

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

“गरीब की बेटी “

नेहा पग फेरा में मैके आई तो नेहा की माँ ने देखा, नयी दुल्हन के चेहरे पर जो रौनक रहती है वह नेहा के चेहरे में कहीं नहीं दिख रही है…
जो लड़की दिन भर बक-बक करती थी, एक रात मे कैसे चुप हो सकती है…
जरुर.. कुछ न कुछ तो बात है….
माँँ का दिल अनजान आंशका से घिरने लगा था वह चाह रही थी, जल्दी से बात करे…
पर, पास पडो़स के लोग जो नेहा को देखने आये थे हट नहीं रहे थे। जब पड़ोस के लोग चले गये तब मां ने धड़कते दिल से ससुराल का हाल पुछा….
नेहा ने सबकी तारीफ की बस पति के नाम पर चुप रह गई तब माँ ने दुबारा पुछा,
“..दामाद जी कितने बजे लेने आयेंगे…
नेहा चुप रही तब माँ ने नेहा का हाथ पकडा़ और बोली,
“बेटा शेखर कैसे है…नेहा की आँखें भर आई..
“क्या बात है…. मुझे बता! मैं तेरी माँ हूं! कुछ दिक्कत है तो मुझे बोल बेटा…. नेहा तब भी चुप रही अब माँ को पक्का यकीन हो गया कि कुछ न कुछ तो गड़बड़ है वह एकदम शातं स्वर में बोली,
” नेहा माँ बाप से कोई बात छुपानी नहीं चाहिए …
तब नेहा ने रोते हुये बताया कि शेखर ने विवशता में शादी की है वह किसी और से प्यार करता है। मैने कहा कि आपने उससे शादी क्यों नहीं की… तो बोले करुंगा! बहन की शादी हो जाने के बाद! और तुमको क्या तकलीफ है कहां थी और कहां आ गई! पैसों के ढेर में बैठी हो। देखो, यह आलमारी है कपडों और गहनों से भरा है। तुम्हारे लिए एक गाडी़ डाईवर के साथ खड़ा रहेगा। लो! यह कार्ड है! एक लाख महीना खर्चे कर सकती हो। जहां मन हो जब मन हो जाओ कोई रोक-टोक नहीं। बस घर की इज्जत का ध्यान रखना। मुझसे तुम्हारा कोई संबंध नहीं। दुनियां की नजर में बस तुम मेरी पत्नि हो। किसी को शक न हो इसलिए मैं बीच बीच में आता रहूंगा!”
उन लोगों ने जान कर मुझे चुना। गरीब घर की लड़की लायेगें तो वह हर बात सहेगी। इतना कह कर नेहा रोने लगी। नेहा की माँ ने कहा,
“बेटा! हम गरीब जरुर हैं!पर अपनी बेटी गिरवी नहीं रखते! तुझे ड़रने की जरुरत नहीं है! पति नहीं, तो ऐसी शादी का अर्थ क्या….
वो क्या तुझे छोड़ेगा! तुझे अब वहां जाने की जरुरत नहीं है! मेरी बेटी गरीब ही सही मेरे घर की शान है!”
नेहा पहली बार अपनी माँ का ऐसा रुप देख रही थी..

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

“#मांकेकंगन “

पंकज जी अपनी पत्नी अनुराधा के साथ सुबह 5 बजे पटना से से बनारस की बस में सवार हो गए..

दोनों सालों के बीच अभी हाल ही में उनकी सास के गुजर जाने के बाद बँटवारा हुआ था ..

अनुराधा अपनी माँ के गुजर जाने के बाद पहली बार मायके जा रही थी ..
कुछ घंटों के सफ़र के बाद बस बनारस पहुंची।
अनुराधा को मायके में यूँ अनायास देखकर दोनों भाभियाँ चौकन्नी हो गई..

शाम को भोजन करके जब छोटी भाभी के पास बैठी तो अनुराधा ने बंटवारे की बात पर चर्चा शुरू कर दी!

छोटी भाभी बड़े संभलकर अपने कष्टों का रोना रोकर बंटवारे में मिले धन का बचाव करने का प्रयास करने लगी
अनुराधा ने छोटी भाभी से पूछा की उसकी माँ के कंगन किसके पास है..
वो किसको बंटवारे में मिले है..

छोटी भाभी ने सुकून की साँस लेते हुए कहा-अनुराधा दीदी कंगन तो जेठानीजी को मिले है…
सरला फुर्ती से बड़ी भाभी के कमरे में गई..

बडी भाभी पहले से ही खतरे की आहट पाकर मुस्तैद थी वो कुछ कहती उससे पहले ही अनुराधा ने कहा –

भाभी बुरा मत मानियेगा पर जो माँ के कंगन आपको बंटवारे में मिले हैं मैं वो आपसे खरीदना चाहती हूँ जो भी बाजार भाव हो उससे 10000 रु ज्यादा ले लीजिये पर वो कंगन मुझे बेच दीजिये
आप उन पैसों से दूसरे कंगन ..नए कंगन बनवा लेना…

बड़ी भाभी के मन में यह सुनते ही चासनी सी घुल गयी !
वो खुद इन पुराने डिजाईन के कंगनों को बेचकर नए लेने का सोच रही थी और यहाँ तो इतना अच्छा सौदा खुद सामने से आ गया था…

कुछ देर में पैसे चुकाकर अनुराधा ने वो माँ के कंगन जैसे ही अपने हाथ में लिए तो एसा लगा जेसे माँ की कलाई हाथ में आ गयी हो..

उसने उन कंगनों को सीने से लगा लिया और सारी रात उनको चपेटे हुए रोटी रही ….

सुबह की बस से वापस रवानगी में रास्ते में पंकज जी ने सरला से पूछा -अब तो खुश हो श्रीमती जी…
वैसे ऐसा क्या है इन कंगनों में…
बाजार से नए फेशन के खरीदती तो कितना अच्छा रहता..
अनुराधा ने खिड़की से बाहर झांकते हुए कहा …
“ जैसे प्यासे के लिए पानी की , चिड़िया के लिए पंखों की और अंधे के लिए रोशनी की कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती एसे ही एक बेटी के लिए उसकी स्वर्गवासी माँ के कंगनों की कोई कीमत नहीं आंकी जा सकती…

जब भी इन कंगनों को छूती हूँ तो लगता है माँ यहीं है मेरे पास .. मेरे साथ …

अनुराधा को इतना तृप्त देखकर पंकज जी समझ गए की क्यूँ हर माँ एक बेटी जरुर चाहती है…

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

આજકાલ આપણી આસપાસ જે ઘટનાઓ ઘટી રહી છે એના અનુસંધાને મારી પોતાની અગાઉ કહેલી એક અંગત વાત આપ સૌની સાથે શેર કરી રહ્યો છું. કોઈને અગત્યનો નિર્ણય લેવામાં મદદ મળે એવા શુભ હેતુથી જ આ વાત કરી રહ્યો છું. આ માત્ર મારા એકનો નહીં મારા જેવા ઘણા મિત્રોનો અનુભવ હશે.

1999માં હું જ્યારે લગ્ન માટે છોકરી જોવા ગયો ત્યારે મારી પાસે કંઈ જ નહોતું. હું ગામડે નળિયાવાળા મકાનમાં રહેતો. કોઈ સરકારી નોકરી પણ નહોતી. એમ.કોમ.નો અભ્યાસ પૂરો કરીને ટ્યુશન કરાવતો. સવારથી મોડી રાત સુધી મહેનત કરતો ત્યારે મહિને 7000 કમાતો. મારા પિતાજી કડીયાકામ કરતા આથી એમની પાસે પણ કોઈ બીજી મિલકત કે મોટી જમીન નહોતી. બીજા શબ્દોમાં કહું તો એક પટેલના દીકરાનો સંબંધ કરવા માટે જે હોવું જોઈએ એ મારી પાસે કશું જ નહોતું.

સામાં પક્ષે જે છોકરી જોવા ગયો એના પિતાજીને 200 વિધા જમીન અને સંપત્તિ પણ બહુ મોટી. ગામનું આબરૂદાર અને સંપતિવાન ખોરડું. મોટી બંને દીકરીઓને સમૃદ્ધ પરિવારમાં પરણાવેલી. ચંદ્રિકા સૌથી નાની દીકરી, સૌથી વધારે ભણેલી(M.A.with Gujarati), અને સૌથી વધારે સ્વરૂપવાન હતી આમ છતાં એની દીકરી માટે એણે મારી પસંદગી કરી. એના સગા-સંબંધી કહેતા કે તમે શું જોઈને દીકરી આપી ? ત્યારે મારા સસરાજી એમને જવાબ આપતા કે મેં છોકરાની કે એના પરિવારની સંપત્તિ જોઈને નહિ પણ છોકરાની ક્ષમતાઓ જોઈને દિકરી આપી છે.

હું જ્યારે મારા ધર્મપત્ની ચંદ્રિકાને જોવા ગયો અને એની સાથે વાતો કરી ત્યારે મેં મારી આર્થિક સ્થિતિની બધી જ વાતો કરી હતી. મેં એમને એ પણ સ્પષ્ટતા કરી હતી કે હું ગામડે રહીને ટ્યુશન કરાવું છું. તું મોટા ઘરમાં રહી છો અને નાની હોવાથી સૌની લાડકી છો. અમારા પરિવારમાં અનુકુળ આવશે કે કેમ એ બરોબર વિચારી લેજે. ચંદ્રિકાએ બધી વાત જાણ્યા પછી પણ મારી સાથે જ લગ્ન કરવાનો નિર્ણય કર્યો અને કહેલું કે મારે ભલે નળિયાવાળા મકાનમાં ગામડે રહેવું પડે પણ મારે એ જ ઘરે જવું છે.’

લગ્ન પછી જ મને સરકારી નોકરી મળી. જીપીએસસીની પરીક્ષા આપીને સીધો જ ક્લાસ-૨ અધિકારી તરીકે સિલેક્ટ થયો. મારું પોસ્ટિંગ રાજકોટ હતું પરંતુ રાજકોટ રહેવાની હજુ હેસિયત નહોતી એટલે હું ગામડે જ રહેતો આમ છતાં એણે ક્યારેય એવું નથી કહ્યું કે આપણે શહેરમાં રહેવા જઈએ. આજકાલ લગ્ન પહેલા જ શરત મુકવામાં આવે કે હું ગામડે રહીશ નહિ એના બદલે અહીંયા તો શહેરમાં નોકરી છતાં ગામડે રહેવાનું હતું પણ એને આ બાબતે ક્યારેય કોઈ ફરિયાદ કરી નથી.

એ જ્યારે એના પિયરમાં હતી ત્યારે એણે ખેતીનું કોઈ કામ કર્યું નહોતું. બહાર હોસ્ટેલમાં રહીને ભણતી એટલે એના દાદા અને પપ્પા બંનેની લાડકી હતી પરંતુ મારે ત્યાં કાંધુ વીણવાનું કે એવા બીજા કોઈ કામ ઘરે કરવાના થતા તો એ ઉત્સાહ સાથે કામ કરતી. અમારે ત્યાં પાણીની ખુબ ખેંચ રહેતી એટલે બીજાના ઘરે પાણી ભરવા માટે જવું પડે. મોટા જમીનદારની ભણેલી દીકરી હોવા છતાં એણે બીજાના ઘરે પાણી ભરવા જવામાં પણ કોઈ સંકોચ રાખ્યો નથી. એના સહયોગનાં પરિણામે આજે મારી પાસે બધું જ છે.

આ પોસ્ટ દ્વારા મારે મારા કે મારા ધર્મપત્નીના વખાણ નથી કરવા પણ દીકરીના પરિવારજનો અને દીકરીને એક મહત્વનો સંદેશો આપવો છે કે જીવનસાથીની પસંદગી વખતે માત્ર સંપતિ જોવાને બદલે છોકરાની સંપતિ કમાવાની ક્ષમતા અને સંસ્કાર પણ જો જો. છોકરા પાસે અત્યારે ભલે કાઈ ન હોય પણ જો એનું ભણતર, ક્ષમતા અને સંસ્કાર હશે તો બધું આવશે બાકી એના વગર જે હશે એ પણ જતું રહેશે. સુખ અને શાંતિને સંપતિ કરતા પણ સમજણ સાથે વધુ ગાઢ સંબંધ છે. એકવાત ખાસ યાદ રાખજો કે બીજા સાથેની દેખાદેખી તમારી પાસે જે હશે એનો આનંદ પણ નહિ લેવા દે.

નિલેશ સાગપરિયા

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🕉️🎇🌠शुभ रात्रि🌠🎇 *माँ और बेटी*

एक सौदागर राजा के महल में दो गायों को लेकर आया – दोनों ही स्वस्थ, सुंदर व दिखने में लगभग एक जैसी थीं।

सौदागर ने राजा से कहा “महाराज – ये गायें माँ – बेटी हैं परन्तु मुझे यह नहीं पता कि माँ कौन है व बेटी कौन – क्योंकि दोनों में खास अंतर नहीं है।

मैंने अनेक जगह पर लोगों से यह पूछा किंतु कोई भी इन दोनों में माँ – बेटी की पहचान नहीं कर पाया

बाद में मुझे किसी ने यह कहा कि आपका बुजुर्ग मंत्री बेहद कुशाग्र बुद्धि का है और यहाँ पर मुझे अवश्य मेरे प्रश्न का उत्तर मिल जाएगा…

इसलिए मैं यहाँ पर चला आया – कृपया मेरी समस्या का समाधान किया जाए।”

यह सुनकर सभी दरबारी मंत्री की ओर देखने लगे मंत्री अपने स्थान से उठकर गायों की तरफ गया।

उसने दोनों का बारीकी से निरीक्षण किया किंतु वह भी नहीं पहचान पाया कि वास्तव में कौन मां है और कौन बेटी ?

अब मंत्री बड़ी दुविधा में फंस गया, उसने सौदागर से एक दिन की मोहलत मांगी।

घर आने पर वह बेहद परेशान रहा – उसकी पत्नी इस बात को समझ गई। उसने जब मंत्री से परेशानी का कारण पूछा तो उसने सौदागर की बात बता दी।

यह सुनकर पत्नी हुए बोली ‘अरे ! बस इतनी सी बात है – यह तो मैं भी बता सकती हूँ ।’

अगले दिन मंत्री अपनी पत्नी को वहाँ ले गया जहाँ गायें बंधी थीं।

मंत्री की पत्नी ने दोनों गायों के आगे अच्छा भोजन रखा – कुछ ही देर बाद उसने माँ व बेटी में अंतर बता दिया – लोग चकित रह गए।

मंत्री की पत्नी बोली “पहली गाय जल्दी – जल्दी खाने के बाद दूसरी गाय के भोजन में मुंह मारने लगी और दूसरी वाली ने पहली वाली के लिए अपना भोजन छोड़ दिया, ऐसा केवल एक मां ही कर सकती है – यानि दूसरी वाली माँ है।

माँ ही बच्चे के लिए भूखी रह सकती है – माँ में ही त्याग, करुणा, वात्सल्य, ममत्व के गुण विद्यमान होते है……

दोस्तों इस दुनियाँ मे माँ से महान कोई नही है माँ के चरणों मे भगवान कॊ भी झुकना पड़ता है..

माँ ममता का सागर नहीं..पर महासागर है…

Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

🌹 सफेद दाग 🌹

🌷 रात ताँबे के गिलास में पानी रखिये,सुबह तुलसी रस 5 ml मिलाकर पीजिए। ठंड में थोड़ा गुनगुना कर लें।

आधे घण्टे बाद

🌷 सर्वकल्प क्वाथ 1 चम्मच पतजंलि का रोज सुबह शाम उबालकर, छानकर, इसमे 10 gm बाकुची चूर्ण मिलाए,पियें। इस काढ़े को पीने के पहले या बाद में
कायाकल्प वटि 1 पतजंलि , पुनरनवा मन्डूर 1 गोली भी खायें।

ऊपर के दोनों उपाय खाली पेट करने हैं। अर्थात सुबह सबसे पहले उठकर फिर शाम 4-5 बजे । इसको लेने के बाद डेढ़ घण्टे तक कुछ नही खाना,पीना है।

🌷रात भोजन के 2 घण्टे बाद गहरे लाल गुड़हल 5 ताजे या सूखे फूलों को गर्म दूध में मसलकर,मिश्री मिलाकर पिएं।

🌷बाकुची तेल को सफेद दागों पर लगाइये। अगर जलन करे तो 1चम्मच तेल को 1 चमच्च देशी गाय के घी में मिलाकर गर्म करिये,उतारिये,गुनगुना ही लगाइये।

2 साल लगातार करिये।

खट्टी चीज पूरी तरह बन्द।
तली मसालेदार कोई चीज नही खाना। सूखी सब्जी जैसे भिंडी की, तले आलू, तले करेला आदि बिल्कुल बन्द 2 साल के लिए।

बथुआ भाजी, लौकी, तोरई,परवल ,रोटी ही खायें।

उगते सूर्य के दर्शन करियेगा, सूर्य से रोगमुक्ति की प्रार्थना करिये। धूप सेंकना।

नमक कम से कम।
🌼🌻🌼🌻🌼🌻🌼🌻
वैद्यराज श्री गणेश

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक पहाड़ की ऊंची चोटी पर एक गरुड़ रहता था। उसी पहाड़ की तलहटी में एक विशाल वृक्ष था, जिस पर एक कौआ अपना घोंसला बनाकर रहता था। तलहटी में आस-पास के गांवों में रहने वाले पशु पालकों की भेड़-बकरियां चरने आया करती थीं। जब उनके साथ उनके मेमने भी होते तो गरुड़ प्राय: उन्हें अपना शिकार बना लेता था। चूंकि गरुड़ विशाल पक्षी होता है और उसकी शक्ति अधिक होती है, इसलिए वह ऐसा आसानी से कर लेता था।

कौआ प्राय: यह दृश्य देखता था कि जैसे ही कोई मेमना नजर आया कि गरुड़ अपनी चोटी से उड़ान भरता और तलहटी में जाकर मेमने को झपट्टा मारकर सहज ही उठा लेता। फिर बड़े आराम से अपने घोंसले में जाकर उसे आहार बनाता। कौआ रोज यह देखता और रोमांचित होता। रोज देख-देखकर एक दिन कौए को भी जोश आ गया। उसने सोचा कि यदि गरुड़ ऐसा पराक्रम कर सकता है तो मैं क्यों नहीं कर सकता ?

आज मैं भी ऐसा ही करूंगा। वह तलहटी पर चौकन्ना होकर निगाह रखने लगा। कुछ देर बाद कौए ने एक मेमने को तलहटी में घास खाते हुए देखा। उसने भी गरुड़ की ही तरह हवा में जोरदार उड़ान भरी और आसमान में जितना ऊपर तक जा सकता था, उड़ता चला गया। फिर तेजी से नीचे आकर गरुड़ की भांति झपट्टा मारने की कोशिश की, किंतु इतनी ऊंचाई से हवा में गोता लगाने का अभ्यास न होने के कारण वह मेमने तक पहुंचने की बजाए एक चट्टान से जा टकराया। उसका सिर फूट गया, चोंच टूट गई और कुछ ही देर में उसकी मृत्यु हो गई।

कथा का सार- अपनी स्थिति और क्षमता पर विचार किए बिना किसी की नकल करने के विपरीत परिणाम भुगतने पड़ते हैं। इसलिए सदैव अपनी मौलिकता में रहें और विवेकयुक्त अनुकरण करें।

रामचंद्र आर्य

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

क्लास रूम में प्रोफेसर ने एक सीरियस टॉपिक पर चर्चा प्रारंभ की

जैसे ही वे ब्लैकबोर्ड पर कुछ लिखने के लिए पलटे तो तभी एक शरारती छात्र ने सीटी बजाई

प्रोफेसर ने पलटकर सारी क्लास को घूरते हुए “सीटी किसने मारी” पूछा, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया

प्रोफेसर ने शांति से अपना सामान समेटा और आज की क्लास समाप्त बोलकर, बाहर की तरफ बढ़े

स्टूडेंट्स खुश हो गए कि, चलो अब फ्री हैं

अचानक प्रोफेसर रुके, वापस अपनी टेबल पर पहुँचे और बोले ” चलो, मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ, इससे हमारे बचे हुए समय का उपयोग भी हो जाएगा”

सभी स्टूडेंट्स उत्सुकता और इंटरेस्ट के साथ कहानी सुनने लगे

प्रोफेसर बोले कल रात मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैंने सोचा कि, कार में पेट्रोल भरवाकर ले आता हूँ जिससे सुबह मेरा समय बच जाएगा, पेट्रोल पम्प से टैंक फुल कराकर मैं आधी रात को सूनसान पड़ी सड़कों पर ड्राइव का आनंद लेने लगा

अचानक एक चौराहे के कार्नर पर मुझे एक बहुत खूबसूरत लड़की शानदार ड्रेस पहने हुए अकेली नजर आई

मैंने कार रोकी और उससे पूछा कि, क्या मैं उसकी कोई सहायता कर सकता हूँ तो उसने कहा कि उसे उसके घर ड्रॉप कर दें तो बड़ी मेहरबानी होगी

मैंने सोचा नींद तो वैसे भी नहीं आ रही है, चलो, इसे इसके घर छोड़ देता हूँ

वो मेरी बगल की सीट पर बैठी
रास्ते में हमने बहुत बातें कीं
वो बहुत इंटेलिजेंट थी, ढेरों टॉपिक्स पर उसका कमाण्ड था

जब कार उसके बताए एड्रेस पर पहुँची तो उतरने से पहले वो बोली कि, वो मेरे नेचर और व्यवहार से बेहद प्रभावित हुई है और मुझसे प्यार करने लगी है

मैं खुद भी उसे पसंद करने लगा था

मैंने उसे बताया कि, ” मैं यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हूँ “

वो बहुत खुश हुई, फिर उसने मुझसे मेरा मोबाइल नंबर लिया और
अपना नंबर दिया

अंत में उसने बताया की, उसका भाई भी यूनिवर्सिटी में ही पढ़ता है और उसने मुझसे
रिक्वेस्ट की कि मैं उसके भाई का ख़याल रखूँ

मैंने कहा कि, ” तुम्हारे भाई के लिए कुछ भी करने पर मुझे बेहद खुशी होगी, क्या नाम है तुम्हारे भाई का ?? “

इस पर लड़की ने कहा कि, ” बिना नाम बताए भी आप उसे पहचान सकते हैं क्योंकि वो सीटी बहुत ज्यादा और बहुत बढ़िया बजाता है “

जैसे ही प्रोफेसर ने सीटी वाली बात की तो, तुरंत क्लास के सभी स्टूडेंट्स उस छात्र की तरफ देखने लगे, जिसने प्रोफ़ेसर की पीठ पर सीटी बजाई थी

प्रोफेसर उस लड़के की तरफ घूमे और उसे घूरते हुए बोले बेटा, मैंने अपनी पी एच डी की डिग्री, मटर छीलकर हासिल नहीं की है

कमीने निकल क्लास से बाहर

सारांश : मोदी की नजरों से चोर नामदार नहीं बच पाएंगे, कहाँ तक बच कर भागोगे बे 🏃

रामचंद्र आर्य

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक, भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

🚩गुरु गोविंद सिंह ने औरंगजेब को जो पत्र लिखा था आज भारतीयों के लिए प्रेरणादायी है

🚩गुरु गोविन्द सिंह जी एक महान योद्धा होने के साथ साथ महान विद्वान् भी थे। वह ब्रज भाषा, पंजाबी, संस्कृत और फारसी भी जानते थे और इन सभी भाषाओँ में कविता भी लिख सकते थे। जब औरंगजेब के अत्याचार सीमा से बढ़ गए तो गुरूजी ने मार्च 1705 को एक पत्र भाई दयाल सिंह के हाथों औरंगजेब को भेजा। इसमे उसे सुधरने की नसीहत दी गयी थी। यह पत्र फारसी भाषा के छंद शेरों के रूप में लिखा गया है। इसमे कुल 134 शेर हैं। इस पत्र को “ज़फरनामा” कहा जाता है।

🚩यद्यपि यह पत्र औरंगजेब के लिए था। लेकिन इसमे जो उपदेश दिए गए है वह आज हमारे लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इसमे औरंगजेब के आलावा मुसलमानों के बारे में जो लिखा गया है, वह हमारी आँखें खोलने के लिए काफी हैं। इसीलिए ज़फरनामा को धार्मिक ग्रन्थ के रूप में स्वीकार करते हुए दशम ग्रन्थ में शामिल किया गया है।

🚩जफरनामा से विषयानुसार कुछ अंश प्रस्तुत किये जा रहे हैं। ताकि लोगों को इस्लाम की हकीकत पता चल सके —

1 – शस्त्रधारी ईश्वर की वंदना —

बनामे खुदावंद तेगो तबर, खुदावंद तीरों सिनानो सिपर।
खुदावंद मर्दाने जंग आजमा, ख़ुदावंदे अस्पाने पा दर हवा। 2 -3.

🚩अर्थ : उस ईश्वर की वंदना करता हूँ, जो तलवार, छुरा, बाण, बरछा और ढाल का स्वामी है और जो युद्ध में प्रवीण वीर पुरुषों का स्वामी है, जिनके पास पवन वेग से दौड़ने वाले घोड़े हैं।

2 – औरंगजेब के कुकर्म :-

तो खाके पिदर रा बकिरादारे जिश्त, खूने बिरादर बिदादी सिरिश्त
वजा खानए खाम करदी बिना, बराए दरे दौलते खेश रा

🚩अर्थ :- तूने अपने बाप की मिट्टी को अपने भाइयों के खून से गूँधा, और उस खून से सनी मिटटी से अपने राज्य की नींव रखी। और अपना आलीशान महल तैयार किया।

3 – अल्लाह के नाम पर छल —

न दीगर गिरायम बनामे खुदात, कि दीदम खुदाओ व् कलामे खुदात
ब सौगंदे तो एतबारे न मांद, मिरा जुज ब शमशीर कारे न मांद.

अर्थ : तेरे खु-दा के नाम पर मैं धोखा नहीं खाऊंगा, क्योंकि तेरा खु-दा और उसका कलाम झूठे हैं। मुझे उनपर यकीन नहीं है। इसलिए सिवा तलवार के प्रयोग से कोई उपाय नहीं रहा।

4 – छोटे बच्चों की हत्या —

चि शुद शिगाले ब मकरो रिया, हमीं कुश्त दो बच्चये शेर रा.
चिहा शुद कि चूँ बच्च गां कुश्त चार, कि बाकी बिमादंद पेचीदा मार.

अर्थ : यदि सियार शेर के बच्चों को अकेला पाकर धोखे से मार डाले तो क्या हुआ। अभी बदला लेने वाला उसका पिता कुंडली मारे विषधर की तरह बाकी है। जो तुझ से पूरा बदला चुका लेगा।

5 – मु-सलमानों पर विश्वास नहीं —

मरा एतबारे बरीं हल्फ नेस्त, कि एजद गवाहस्तो यजदां यकेस्त.
न कतरा मरा एतबारे बरूस्त, कि बख्शी ओ दीवां हम कज्ब गोस्त.
कसे कोले कुरआं कुनद ऐतबार, हमा रोजे आखिर शवद खारो जार.
अगर सद ब कुरआं बिखुर्दी कसम, मारा एतबारे न यक जर्रे दम.

अर्थ : मुझे इस बात पर यकीन नहीं कि तेरा खुदा एक है। तेरी किताब (कु-रान) और उसका लाने वाला सभी झूठे हैं। जो भी कु-रान पर विश्वास करेगा, वह आखिर में दुखी और अपमानित होगा। अगर कोई कुरान कि सौ बार भी कसम खाए, तो उस पर यकीन नहीं करना चाहिए।

6 – दुष्टों का अंजाम —

कुजा शाह इस्कंदर ओ शेरशाह, कि यक हम न मांदस्त जिन्दा बजाह.
कुजा शाह तैमूर ओ बाबर कुजास्त, हुमायूं कुजस्त शाह अकबर कुजास्त.

अर्थ : सिकंदर कहाँ है, और शेरशाह कहाँ है, सब जिन्दा नहीं रहे। कोई भी अमर नहीं हैं, तैमूर, बाबर, हुमायूँ और अकबर कहाँ गए। सब का एकसा अंजाम हुआ।

7 – गुरूजी की प्रतिज्ञा —

कि हरगिज अजां चार दीवार शूम, निशानी न मानद बरीं पाक बूम.
चूं शेरे जियां जिन्दा मानद हमें, जी तो इन्ताकामे सीतानद हमें.
चूँ कार अज हमां हीलते दर गुजश्त, हलालस्त बुर्दन ब शमशीर दस्त.

अर्थ : हम तेरे शासन की दीवारों की नींव इस पवित्र देश से उखाड़ देंगे। मेरे शेर जब तक जिन्दा रहेंगे, बदला लेते रहेंगे। जब हरेक उपाय निष्फल हो जाएँ तो हाथों में तलवार उठाना ही धर्म है।

8 – ईश्वर सत्य के साथ है —

इके यार बाशद चि दुश्मन कुनद, अगर दुश्मनी रा बसद तन कुनद.
उदू दुश्मनी गर हजार आवरद, न यक मूए ऊरा न जरा आवरद.

अर्थ : यदि ईश्वर मित्र हो, तो दुश्मन क्या क़र सकेगा, चाहे वह सौ शरीर धारण क़र ले। यदि हजारों शत्रु हों, तो भी वह बल बांका नहीं क़र सकते है। सदा ही धर्म की विजय होती है।

🚩गुरु गोविन्द सिंह ने अपनी इसी प्रकार की ओजस्वी वाणियों से लोगों को इतना निर्भय और महान योद्धा बना दिया कि अब भी शांतिप्रिय — सिखों से उलझाने से कतराते हैं। वह जानते हैं कि सिख अपना बदला लिए बिना नहीं रह सकते। इसलिए उनसे दूर ही रहो।

🚩इस लेख का एकमात्र उद्देश्य है कि आप लोग गुरु गोविन्द साहिब कि वाणी को आदर पूर्वक पढ़ें, और श्री गुरु तेगबहादुर और गुरु गोविन्द सिंह जी के बच्चों के महान बलिदानों को हमेशा स्मरण रखें। और उनको अपना आदर्श मनाकर देश धर्म की रक्षा के लिए कटिबद्ध हो जाएँ। वरना यह सेकुलर और जिहा दी एक दिन हिन्दुओं को विलुप्त प्राणी बनाकर मानेंगे।

🚩गुरु गोविन्द सिंह का बलिदान सर्वोपरि और अद्वितीय है।

सकल जगत में खालसा पंथ गाजे, बढे धर्म हिन्दू सकल भंड भागे…।
Source-Vedic Sikhism.

🚩गुरु गोविन्द सिंह के महान संकल्प से खालसा की स्थापना हुई। हिन्दू समाज अत्याचार का सामना करने हेतु संगठित हुआ। पंच प्यारों में सभी जातियों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इसका अर्थ यही था कि अत्याचार का सामना करने के लिए हिन्दू समाज को जात-पात मिटाकर संगठित होना होगा। तभी अपने से बलवान शत्रु का सामना किया जा सकेगा…

🚩खेद है की हिन्दुओं ने गुरु गोविन्द सिंह के सन्देश पर अमल नहीं किया। जात-पात के नाम पर बटें हुए हिन्दू समाज में संगठन भावना शुन्य हैं। गुरु गोविन्द सिंह ने स्पष्ट सन्देश दिया कि कायरता भूलकर, स्वबलिदान देना जब तक हम नहीं सीखेंगे तब तक देश, धर्म और जाति की सेवा नहीं कर सकेंगे।

🔺