Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक सच्ची घटना पर
आधारित
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हंस जैन रामनगर खंडवा
9827214427
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अपनी अपनी करनी का फल सबको मिलता है_
सत्य घटना पर आधारित_

घर की बड़ी बहू जब पहली बार गर्भवती होती है तो उस परिवार में कितना ख़ुशी का माहोल होता है,
ऐसे ही हमारी एक बहन संगीता जो उस घर में तीन भाइयों में सबसे बड़े भाई की पत्नी थी, जब पहली बार गर्भवती हुई थी तो उसके पूरे घर में एक सुखद वातावरण बन था, दोनों देवर दिन में कई बार पूछते थे भाभी आपको क्या लेकर आऊं आपको क्या पसन्द है, यदि बेटा हुआ तो हम उसका नामआर्यनरखेंगे और बेटी हुई तो आर्ना_ _रखेंगे, सासु माँ भी बहुत खुश थी कई बर्षों बाद एक बार फिरसे उस घर में बच्चे की किलकारिया गूंजेंने वाली थीं, पर किस्मत को कुछ ही मंजूर था…….. अभी ढाई महीना ही हुआ था एक रात अचानक संगीता का गर्भ गिर ( मिस्करेज ) गया

घर का माहोल ऐसा हो गया जैसे अब कुछ बचा ही ना हो, उस दिन घर में खाना भी नही बना, ये कैसा पाप कर्म था जो हम कुछ नही कर पाये और….
समय बीता कुछ महीने बाद संगीता फिर से गर्भवती हुई, घर में फिरसे ख़ुशियां छाने लगी, परन्तु…. ढाई महीने बाद फिर वही घटना हुई, और सबके सपने चकनाचूर हो गए,
अब घर पर वैसा माहोल नही रहा था जो कुछ महीनो पहले हुआ करता था_

कुछ समय बाद संगीता फिर गर्भवती हुई, किसी को कानों कान खबर ना हो इसलिये घर में भी ज्यादा किसी को नही बताया, शहर की सबसे बड़ी स्त्रीरोग विशेषज्ञ की देखरेख में इलाज चल रहा था, मन्दिर में विधान दान और अन्य धार्मिक कार्य कराये… लेकिन…. ढाई महीने होने पर फिर वही बात हुई जो पहले दो बार हो चुकी थी, किसी की समझ में कुछ नही आ रहा था की क्या करें
फिर चौथी बार भी ढाई महीने का गर्भ गिरा
पाँचवीं बार भी और
_छटवीं बार भी

अब तो संगीता की शारीरिक क्षमता भी कम हो गई थी, और कमजोर भी बहुत हो गई_
कुछ सालों बाद संगीता सातवीं बार उसे पता चला की वो फिर गर्भवती हुई है, लेकिन चेहरे पर और ना मन में कोई ख़ुशी नही थी, एक रात आँखों में आंसू भरे पलंग पर लेटी थी और अपने भाग्य को कोस रही थी, सोच रही थी ऐसा क्या पाप किया होगा जो मुझे इतनी बड़ी सज़ा मिल रही है
अपने अतीत की और ध्यान दिया तो कुछ धुंधला सा याद आया……….
उसे बचपन से ही डॉक्टर बनने का शौक था, इसलिये उसने 10 वीं पास करने के बाद बायोलॉजी सब्जेक्ट लिया था, एक बार स्कूल में डिटेक्शन के लिये एक चुहिया को लेकर आये थे, और उसे बेहोश करके शिक्षिका ने संगीता से कहा ये लो चाक़ू और इसके पेट में कट लगाओ, संगीता ने डरते डरते कट लगाया तो रक्त की धार बह निकली, और थोड़ी देर बाद वो चुहिया मर गई, उसके पेट भीतर देखा तो उसके गर्भ में बच्चे पल रहे थे, लेकिन पेट चीरने के कारण उनकी मृत्य हो चुकी थी, उन बच्चों की गिनती की तो वो 7 बच्चे थे_
अब संगीता को समझ आ गया था, की ये कौनसा पाप है जो आज मुझे सज़ा दे रहा है, भले ही उस दिन के बाद संगीता ने वो विषय ( सब्जेक्ट ) छोड़कर दुसरा ले लिया था, लेकिन अनजाने में ही सही पाप तो हो गया था,
अगले दिन सुबह उसकी सासू माँ जिनकी देव शास्त्र गुरू पर अटूट श्रद्धा थी, संगीता के कमरे में आईं और बोली चिंता मत करो बेटी भगवान के घर देर है अंधेर नही इस बार सब ठीक हो जायेगा,,,
_उसने रोते हुये कहा नही मम्मी जी अभी भी ठीक नही होगा अभी सज़ा पूरी नही हुई है, फिर उसने सबको वो घटना सुनाई, तो सबकी आँखें फ़टी रह गईं, बोले हे भगवान ।
ऐसा भी होता है।
और वही हुआ सातवीं संतान भी ढाई महीने बाद चली गई ।
अपनी अपनी करनी का फल सबको मिलता है,
कर्म किसी को नही छोड़ते पापी हो या संत।

उसके बाद उस संगीता ने उस पाप का प्रायश्चित लिया और आखिरकार शादी के ९ बर्ष बाद संगीता को संतान सुख मिल ही गया,आज संगीता एक प्यारी सी बच्ची की माँ है।
आज संगीता की शादी के 19 बर्ष हो चुके लेकिन जब भी डिसेक्शन वाली घटना को सोचती है तो सिहर उठती है।

मित्रों पाप करते समय हम परिणाम नही सोचते, ये अनजाने में हुये पाप की सज़ा थी, लेकिन ऐसे कई पाप हम जानते हुये भी करते हैं, इसलिये पाप से बचो।

जो आज बोओगे वो ही कल काटोगे ।

हंस जैन 98272 14427

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