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बहुत पुराने समय की बात है। ण्क बडें राज्य में एक अदभूत कुशल कारागीर लोहार था। उसकी कुशलता की ख्याती दुर दुर के राज्यों तक थी। उसका बनाया सामान, उसकी लोहे की चीजें दूर दूर तक जाती थी। दूर दूर के यात्री उससे लोहे का सामान बनवाने आते थे।

फिर उस राज्य पर जिस राज्य का वह लोहार निवासी था, आक्रमण हुआ। राजधानी पराजित हुई। सबको पकडा गया। उस लोहार को भी पकडा गया। वह लोहार बहुत धनी था। उसे पकडकर, लोहें की जंजीरे बांधकर एक गढढे मे पटक दिया।

लोहार तब भी शांत था। वह मुस्कराया। उसे विश्वास था कि वह लोहे का इतना बडा कारागिर है, कि कैसी ही जंजीरे हो वह उन्हे खोल लेगा। दुश्मन यह सोच कर कि वह अपने आप ही मर जाऐगा, चले गए। जैसे ही उस लोहार ने जंजीर कि कडियां पकडी और सोंचा खोज लू कि सबसे कमजोर कडी कौन सी है ताकि मै उसे उखाड संकू। एक कडी पर आकर वह एकदम से घबरा गया, आंखो से एकदम आंसू आ गए। वह चिल्लाया कि हे परमात्मा अब क्या होगा। उसने देखा कि उस कडी में अपने दस्तखत है। उसकी आदत थी जो भी चीज वह बनाता उसपर अपने दस्तखत कर देता था। और अब वह जानता था की यह कडी उसकी ही बनाई हुई है। इसमें कोई कमजोर कडी नही है। और मैंने अपने हाथो ही खुद को फसां लिया है।
लेकीन उसके भीतर से आवाज कि घबडाने की क्या बात है। अगर कडी तेरी बनाई हुइै है। और अगर तु इतनी मजबूत कडीया बनाने मै कुशल है तो क्या उतनी ही मजबूत कडीया तोडने में कुशल नही होगा?
जो जितनी दुर तक बनाने में कुशल होता है, वह उतनी दुर तक मिटानें मे भी कुशल होता है।

और यह हम सबकी कहानी है।

Osho

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घास और बाँस


घास और बाँस🌾

ये कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो एक व्यापारी था लेकिन उसका व्यापार डूब गया और वो पूरी तरह निराश हो गया। अपनी जिंदगी से बुरी तरह थक चुका था। अपनी जिंदगी से तंग आ चुका था।एक दिन परेशान होकर वो जंगल में गया और जंगल में काफी देर अकेले बैठा रहा। कुछ सोचकर भगवान से बोला – मैं हार चुका हूँ, मुझे कोई एक वजह बताइये कि मैं क्यों ना हताश होऊं, मेरा सब कुछ खत्म हो चुका है।मैं क्यों ना व्यथित होऊं?”भगवान मेरी सहायता किजिए”?? भगवान का जवाब….तुम जंगल में इस घास और बांस के पेड़ को देखो- जब मैंने घास और इस बांस के बीज को लगाया। मैंने इन दोनों की ही बहुत अच्छे से देखभाल की। इनको बराबर पानी दिया, बराबर रोशनी दी।घास बहुत जल्दी बड़ी होने लगी और इसने धरती को हरा भरा कर दिया लेकिन बांस का बीज बड़ा नहीं हुआ। लेकिन मैंने बांस के लिए अपनी हिम्मत नहीं हारी।दूसरी साल, घास और घनी हो गयी उसपर झाड़ियाँ भी आने लगी लेकिन बांस के बीज में कोई वृद्धि नहीं हुई। लेकिन मैंने फिर भी बांस के बीज के लिए हिम्मत नहीं हारी।तीसरी साल भी बांस के बीज में कोई वृद्धि नहीं हुई, लेकिन मित्र मैंने फिर भी हिम्मत नहीं हारी।चौथे साल भी बांस के बीज में कोई वृद्धि नहीं हुई लेकिन मैं फिर भी लगा रहा।पांच साल बाद, उस बांस के बीज से एक छोटा सा पौधा अंकुरित हुआ……….. घास की तुलना में ये बहुत छोटा था और कमजोर था लेकिन केवल 6 महीने बाद ये छोटा सा पौधा 100 फ़ीट लम्बा हो गया। मैंने इस बांस की जड़ को वृद्धि करने के लिए पांच साल का समय लगाया। इन पांच सालों में इसकी जड़ इतनी मजबूत हो गयी कि 100 फिट से ऊँचे बांस को संभाल सके।जब भी तुम्हें जिंदगी में संघर्ष करना पड़े तो समझिए कि आपकी जड़ मजबूत हो रही है। आपका संघर्ष आपको मजबूत बना रहा है जिससे कि आप आने वाले कल को सबसे बेहतरीन बना सको।मैंने बांस पर हार नहीं मानी, मैं तुम पर भी हार नहीं मानूंगा, किसी दूसरे से अपनी तुलना मत करो घास और बांस दोनों के बड़े होने का समय अलग-अलग है दोनों का उद्देश्य अलग अलग है।तुम्हारा भी समय आएगा। तुम भी एक दिन बांस के पेड़ की तरह आसमान छुओगे। मैंने हिम्मत नहीं हारी, तुम भी मत हारो !अपनी जिंदगी में संघर्ष से मत घबराओ, यही संघर्ष हमारी सफलता की जड़ों को मजबूत करेगा।तो लगे रहिये, आज नहीं तो कल आपका भी दिन आएगा।

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बहुत दिनो से *Pleasure*


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गाडी का उपयोग नही होने से

बहुत दिनो से *Pleasure* 🛵 गाडी का उपयोग नही होने से, वह पडी पडी खराब होने जैसी स्थिति में पहुंच रही थी। विचार आया *Olx पे बेच दे*Add डाला किमत *Rs 30000/-*बहुत आफर आये 15 से 28 हजार तक। मुझे लगा यदि 28 मिल रहे तो, कोई 29-30 देगा भी।एक का 29 का प्रस्ताव आया। उसे भी waiting में रखा।एक सुबह काल आया, उसने कहा-*साहब नमस्कार 🙏 , आपकी गाडी का add देखा। पसंद भी आयी है। परंतु 30 जमाने का बहुत प्रयत्न किया, 24 ही इकठ्ठा कर पाया हूँ। बेटा इंजिनियरिंग के अंतिम वर्ष में है। बहुत मेहनत किया है उसने। कभी पैदल, कभी सायकल, कभी बस, कभी किसी के साथ। सोचा अंतिम वर्ष तो वह अपनी गाडी से ही जाये। आप कृपया Pleasure 🛵 मुझे ही दिजीएगा। नयी गाडी दुगनी किमत से भी ज्यादा है। मेरी हैसियत से बहुत ज्यादा है। थोडा समय दिजीए। मै पैसो का इंतजाम करता हूँ। मोबाइल बेच कर कुछ रुपये मिलेंगें। परंतु हाथ जोड़कर कर निवेदन है साहब, Pleasure मुझे ही दिजीएगा।*मैने औपचारिकता में मात्र *Ok* 👌 बोलकर फोन रख दिया।कुछ विचार मन में आये। वापस काल बैक किया और कहा *आप अपना मोबाइल मत बेचिए, कल सुबह केवल 24 हजार लेकर आईए, गाडी आप ही ले जाईए वह भी मात्र 24 में ही*मेरे पास *29* का प्रस्ताव होने पर भी 24 में किसी अपरिचित व्यक्ति को मै *Pleasure*🛵 देने जा रहा था। सोचा उस परिवार में आज कितने *Pleasure*🛵 या आनंद का निर्माण हुआ होगा। कल उनके घर *Pleasure*🛵 आएगी। और मुझे ज्यादा नुकसान भी नहीं हो रहा था।ईश्वर ने बहुत दिया है।अगली सुबह उसने कम से कम 6-7 बार फोन किया *साहब कितने बजे आऊ, आपका समय तो नही खराब होगा। पक्का लेने आऊं, बेटे को लेकर या अकेले आऊ। पर साहब *Pleasure*🛵 *गाडी किसी को और नही दिजीएगा।*वह 2000, 500, 200, 100, 50 के नोटों का संग्रह लेकर आया, साथ में बेटा भी था। ऐसा लगा, पता नही कहा कहा से निकाल कर या मांग कर या इकठ्ठा कर यह पैसे लाया है।बेटा एकदम आतुरता और कृतज्ञता से *Pleasure*🛵 को देख रहा था। मैने उसे दोनो चाबियां दी, कागज दिये। बेटा गाडी पर विनम्रतापूर्वक हाथ फेर रहा था। रुमाल निकाल कर पोछ रहा था।उसनें पैसे गिनने कहा, मैने कहा *आप गिनकर ही लाये है, कोई दिक्कत नहीं।*जब जाने लगे, तो मैने उन्हे 500 का एक नोट वापस करते कहाँ, *घर जाते मिठाई लेते जाएगा*। सोच यह थी कि कही तेल के पैसे है या नही। और यदि है तो मिठाई और तेल दोनो इसमें आ जायेंगें।आँखों में कृतज्ञता के आंसु लिये उसने हमसे विदा ली और अपनी *Pleasure*🛵 ले गया। जाते समय बहुत ही आतुरता और विनम्रता से झुककर अभिवादन किया। बार बार आभार व्यक्त किया।हम लोग सहज भाव में कहते है *it’s my pleasure*परंतु आज *Pleasure*🛵 बेचते समय ही पता चला कि वास्तव में *Pleasure* होता क्या है।जीवन में कुछ व्यवहार करते समय नफा नुकसान नहीं देखना चाहिए। अपने माध्यम से किसी को क्या सचमें कुछ आनंद प्राप्त हुआ यह देखना भी होता है।करबद्ध निवेदन है कि ईश्वर ने आपको कुछ देने लायक बनाया हो या नही,किसी एक व्यक्ति को सुख देने या खुशी देने लायक तो बनाया ही है। आज सब्जी वाली किसी बुजुर्ग महिला या पुरुष को अपनी ओर से केवल 5 या 10 रुपये अधिक देकर देखिएगा, वही *Pleasure* न आये तो कहना।*छोटी छोटी खुशियाँ