Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

मेरा हिसाब कर दो*


मेरा हिसाब कर दो*

एक महिला भागी भागी डाक्टर के क्लिनिक पर गईं,वो थोड़ी घबराई और सहमी हुई थी।

डाक्टर साहब की नज़र उस खूबसूरत महिला पर पड़ी तो उसे नंबर से पहले बुलवा लिया।

“जी, क्या problem है आपकी?” डाक्टर ने पूछा। (डॉक्टर थोड़े दिलफेंक किस्म के थे)

महिला: “जी मुझे कोई problem नहीं है.. Problem मेरे husband की है मुझे लगता है कि वो मानसिक रोगी होते जा रहे हैं।”

डाक्टर: “अच्छा, क्या करते हैं? आप पर हाथ उठाते हैं या आपके साथ misbehave करते हैं?”

महिला: “नहीं नहीं, धमकियां देते हैं और ये भी कहते हैं कि “मेरा हिसाब कर दो”.. “मेरा हिसाब कर दो।”

डाक्टर: “आप परेशान न हों, कहां हैं आपके husband. साथ नहीं लाए आप उनको?”

महिला: “डाक्टर साहब, मैं उनको साथ नहीं ला सकती थी, वो घर पर हैं”।

डाक्टर: “जी, मैं समझ सकता हूँ।”
डाक्टर साहब हर खूबसूरत औरत के साथ गहरा रिश्ता बना लेते थे।

महिला: अगर आप अपनी गाड़ी और ड्राइवर मेरे साथ भिजवा दें तो मैं अपने husband को आसानी से ले आऊंगी।”

डाक्टर ने अपने ड्राइवर को आदेश दिया कि मैडम के साथ जाओ.. अब महिला क्लिनिक से निकलकर गाड़ी में बैठ गईं और ड्राइवर से कहा कि फलां ज्वैलरी शाॅप ले चलो।

ज्वैलरी शाॅप आते ही महिला काफी नाज़ो अंदाज से उतरीं और शाॅप में चली गईं.. एक बहुत ही महंगा सा सेट पसंद किया पैक करवाया और जब पेमेंट की बारी आई तो…
महिला बोलींः “मैं फलां डाक्टर की वाइफ हूँ अभी मुझे ये सेट लेना बहुत जरूरी था इसलिये जल्दी में आ गई मेरे पास पूरे पैसे भी नहीं हैं और न ही कार्ड है.. आप मेरे साथ अपने शाॅप के किसी आदमी को भेज दीजिये और डाक्टर साहब पेमेंट दे देंगे।”

ज्वैलरी शाॅप के मालिक ने सोचा कि बड़ा amount है इसलिए मुझे खुद ही जाना चाहिए इस बहाने घूम भी लूंगा और वो जाकर गाड़ी में बैठ गये..पर महिला गाड़ी में नहीं बैठीं और ड्राइवर से कहा कि इनको डाक्टर साहब के पास ले जाओ..

ड्राइवर ज्वेलरी शाॅप के मालिक को लेकर क्लिनिक पहुंचा और डाक्टर से बोला कि “मैडम नहीं आईं मगर उन्होंने इन साहब को भेजा है।”
डाक्टर साहब ने धीरज रखते हुए ड्राइवर के साथ आए सज्जन को देखा और इंतज़ार करने को कहा .. जब उनकी बारी आई तो डाक्टर साहब बड़े नरम लहजे में बोलेः “हां तो बताइये जनाब, कैसे हैं आप?

ज्वेलरी शाॅप के मालिक ने जवाब दियाः “जी डाक्टर साहब, मैं ठीक हूँ।”

डाक्टर साहबः “तो क्या परेशानी और तकलीफ है आपको?”

ज्वेलरी शाॅप का मालिक: “डाक्टर साहब”तकलीफ कुछ नहीं।

“बस मेरा हिसाब कर दीजिये।”…😎😜..

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गधा पेड़ से बंधा था।
शैतान आया और उसे खोल गया।

गधा मस्त होकर खेतों की ओर भाग निकला और खड़ी फसल को खराब करने लगा।

किसान की पत्नी ने यह देखा तो गुस्से में गधे को मार डाला।

गधे की लाश देखकर गधे के मालिक को बहुत गुस्सा आया और उसने किसान की पत्नी को गोली मार दी।

किसान पत्नी की मौत से इतना गुस्से में आ गया कि उसने गधे के मालिक को गोली मार दी।

गधे के मालिक की पत्नी ने जब पति की मौत की खबर सुनी तो गुस्से में बेटों को किसान का घर जलाने का आदेश दिया।

बेटे शाम में गए और मां का आदेश खुशी-खुशी पूरा कर आए। उन्होंने मान लिया कि किसान भी घर के साथ जल गया होगा।

लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किसान वापस आया और उसने गधे के मालिक की पत्नी और बेटों, तीनों की हत्या कर दी।

इसके बाद उसे पछतावा हुआ और उसने शैतान से पूछा कि यह सब नहीं होना चाहिए था। ऐसा क्यों हुआ?

शैतान ने कहा, ‘मैंने कुछ नहीं किया। मैंने सिर्फ गधा खोला लेकिन तुम सबने रिऐक्ट किया, ओवर रिऐक्ट किया और अपने अंदर के शैतान को बाहर आने दिया। इसलिए अगली बार किसी का जवाब देने, प्रतिक्रिया देने, किसी से बदला लेने से पहले एक लम्हे के लिए रुकना और सोचना ज़रूर।’

ध्यान रखें। कई बार शैतान हमारे बीच सिर्फ गधा छोड़ता है और बाकी विनाश हम खुद कर देते हैं !!

और हाँ, आपको ये भी समझना है कि गधा कौन हैं?

हर रोज टीवी चैनल गधे छोड़ जाते हैं,

कोई ग्रुप में गधा छोड़ देता है।

दोस्तों के ग्रुप में और पार्टी बाजी या विचारधारा के चक्कर में आप और हम लड़ते रहते हैं।

मिल जुल कर मुस्कुरा कर खुशी से रहिये
याद रखें-

तोड़ना आसान है जुड़े रहना बहुत मुश्किल है,
लड़ाना आसान है मिलाना बहुत मुश्किल .

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एक बार एक राजा नगर भ्रमण को गया तो रास्ते में क्या देखता है कि एक छोटा बच्चा माटी के खिलौनो को कान में कुछ कहता फिर तोड कर माटी में मिला रहा है।

राजा को बडा अचरज हुआ तो उसने बच्चे से पूछा कि तुम ये सब क्या कर रहे हो?

तो बच्चे ने जवाब दिया कि मैं इन से पूछता हूं कि कभी राम नाम जपा ? और माटी को माटी में मिला रहा हूँ।

तो राजा ने सोचा इतना छोटा सा बच्चा इतनी ज्ञान की बात।

राजा ने बच्चे से पूछा, कि तुम मेरे साथ मेरे राजमहल में रहोगे?

तो बच्चे ने कहा- कि जरुर रहूंगा पर मेरी चार शर्त है।
जब मैं सोऊं तब तुम्हें जागना पड़ेगा।
मैं भोजन खाऊगा तुम्हें भूखा रहना पड़ेगा।

जब मैं कभी मुसीबत में होऊ तो तुम्हें अपने सारे काम छोड़ कर मेरे पास आना पड़ेगा।

अगर आपको ये शर्तें मंजूर हैं तो मैं आपके राजमहल में चलने को तैयार हूं।

राजा ने कहा – कि ये तो असम्भव है।
तो बच्चे ने कहा, राजन तो मैं उस परमात्मा का आसरा छोड़ कर आपके आसरे क्यूं रहूं, खुद भूखा रह कर मुझे खिलाता है, खुद जागता है और मैं निश्चिंत सोता हूँ, और जब मैं किसी मुश्किल में होता हूँ तो वो बिना बुलाए, मेरे लिए अपने सारे काम छोड़ कर दौडा आता है।

भाव केवल इतना ही है कि हम लोग सब कुछ जानते समझते हुए भी बेकार के विषय- विकारो में उलझ कर परमात्मा को भुलाए बैठे हैं, जो हमारी पल पल सम्भाल कर रहे हैं उसके नाम को भुलाए बैठे हैं।
ᖱ៩៩ᖰ♬ƙ ɉ♬ɨនɨ⩎❡Ϧ 🙏🏽
हरि_बोल 💕💕

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एक बच्चा रोज अपने दादा जी को सायंकालीन पूजा करते देखता था।बच्चा भी उनकी इस पूजा को देखकर अंदर से स्वयं इस अनुष्ठान को पूर्ण करने की इच्छा रखता था,किन्तु दादा जी की उपस्तिथि उसे अवसर नही देती थी।
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एक दिन दादा जी को शाम को आने में विलंब हुआ,इस अवसर का लाभ लेते हुए बच्चे ने समय पर पूजा प्रारम्भ कर दी।

जब दादा जी आये,तो दीवार के पीछे से बच्चे की पूजा देख रहे थे।

बच्चा बहुत सारी अगरबत्ती एवं अन्य सभी सामग्री का अनुष्ठान में यथाविधि प्रयोग करता है

और फिर अपनी प्रार्थना में कहता है,कि

भगवान जी प्रणाम

आप मेरे दादा जी को स्वस्थ रखना,और दादी के घुटनो के दर्द को ठीक कर देना

क्योकि दादा और दादी को कुछ हो गया,तो मुझे चॉकलेट कौन देगा

फिर आगे कहता है,भगवान जी मेरे सभी दोस्तों को अच्छा रखना,वरना मेरे साथ कौन खेलेगा

फिर मेरे पापा और मम्मी को ठीक रखना,घर के कुत्ते को भी ठीक रखना,क्योकि उसे कुछ हो गया,तो घर को चोरों से कौन बचाएगा

(लेकिन भगवान यदि आप बुरा न मानो तो एक बात कहू, सबका ध्यान रखना,लेकिन उससे पहले आप अपना ध्यान रखना,क्योकि आपको कुछ हो गया,तो हम सबका क्या होगा)

इस सहज प्रार्थना को सुनकर दादा की आंखों में भी आंसू आ गए,क्योकि ऐसी प्रार्थना उन्होंने न कभी की थी,और न सुनी थी।

कदाचित इसी सहजता का अभाव मनुष्य को सभी प्रकार के यथोचित ईश्वरीय अनुष्ठानोपरांत भी जन्मजन्मांतर तक ईश्वर तो क्या मानवीय मुल्यों का बोध भी नही करा पाता है।

JAI SIYA RAM ji 🌹