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एक सास अपने पति के साथ तीर्थ यात्रा पर गयी


एक दन्त कथा है एक सास अपने पति के साथ तीर्थ यात्रा पर गयी और उसका पुरे सफर में अपने घर की चिंता खाये रही हाये मेरी बहु मेरे पीछे दुगुना घी खा रही होगी लड्डू , पेडे मिठाईयो के गुलछरे उडाती होगी ।
मै यहां आई हुं तो उसे बोलने वाला कोई नही होगा यह सोचते सोचते ही पुरी यात्रा हुयी यात्रा वापसी पर जब अन्तिम तीर्थ गंगा स्नान करने गयी तो वो नहाते हुये भी यही सोच रही थी तभी उसके ऊंगली की अगूंठी निकल कर गंगा मे बह गयी और वो अपनी बहु को गालियां देने लगी कि उसके ध्यान में अगूंठी खो गयी ।
उधर उसकी बहु पुरे सफर में अपनी सास के हित के बारे में सोचती रहती उनके लिये घी इक्कठा कर रखा था उसे लगा कि सास तीर्थ मे सही से खाना नही पाते होगे आयेंगे तो मै उनके लिये लड्डू बनाऊंगी उनको आराम कराऊंगी उनकी सेवा करूंगी ।
जब सास गंगा स्नान कर रही थी तो बहु घर पर बर्तन धो रही थी तो वो अंगूठी गंगा में बही और उस बहु के बर्तन मे मिली ।
इसलिये कहावत है मन चंगा तो कसोटी में गंगा ।
*जीवन के उतार चढाव में हमे मन खराब नही करना चाहिये समय खराब भी हो तो समय आने पर सही हो जायेगा ।

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क बार, दो बहुमंजिली इमारतों के बीच,


. विश्वास (believe) तथा विश्वास (trust) में अंतर

एक बार, दो बहुमंजिली इमारतों के बीच, बंधी हुई एक तार पर लंबा सा बाँस पकड़े, एक नट चल रहा था । उसने अपने कन्धे पर अपना बेटा बैठा रखा था ।

सैंकड़ों, हज़ारों लोग दम साधे देख रहे थे। सधे कदमों से, तेज हवा से जूझते हुए, अपनी और अपने बेटे की ज़िंदगी दाँव पर लगाकर, उस कलाकार ने दूरी पूरी कर ली ।

भीड़ आह्लाद से उछल पड़ी, तालियाँ, सीटियाँ बजने लगी ।।

लोग उस कलाकार की फोटो खींच रहे थे, उसके साथ सेल्फी ले रहे थे। उससे हाथ मिला रहे थे । वो कलाकार माइक पर आया, भीड़ को बोला, “क्या आपको विश्वास है कि मैं यह दोबारा भी कर सकता हूँ ??”

भीड़ चिल्लाई, “हाँ हाँ, तुम कर सकते हो ।”

*उसने पूछा, क्या आपको विश्वास है,भीड़ चिल्लाई हाँ पूरा विश्वास है, हम तो शर्त भी लगा सकते हैं कि तुम सफलता पूर्वक इसे दोहरा भी सकते हो।

कलाकार बोला, पूरा पूरा विश्वास है ना!

भीड़ बोली, हाँ हाँ!

कलाकार बोला, “ठीक है, कोई मुझे अपना बच्चा दे दे, मैं उसे अपने कंधे पर बैठा कर रस्सी पर चलूँगा ।”

खामोशी, शांति, चुप्पी फैल गयी।

कलाकार बोला, “डर गए…!” अभी तो आपको विश्वास था कि मैं कर सकता हूँ। असल मे आप का यह विश्वास (believe) है, मुझमेँ विश्वास (trust) नहीं है।दोनों विश्वासों में फर्क है साहेब!

यही कहना है, “ईश्वर हैं !” ये तो विश्वास है! परन्तु ईश्वर में सम्पूर्ण विश्वास नहीं है ।

👉🏻 You believe in GOD, but you don’t, trust him.

👉🏻 अगर ईश्वर में पूर्ण विश्वास है तो :-
चिंता, क्रोध, तनाव क्यों ???

जय जय श्री राधे कृष्ण जी