Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

[09/06, 5:34 pm] +91 81713 93886: जीभ का रस

अगर इंसान अपनी जीभ पर नियंत्रण न रखे तो जीभ का रस न सिर्फ उसका तिरस्कार करवाता है बल्कि हंसी भी उड़वाता है।

☝एक बूढ़ा राहगीर थक कर कहीं टिकने का स्थान खोजने लगा। एक महिला ने उसे अपने बाड़े में ठहरने का स्थान बता दिया। बूढ़ा वहीं चैन से सो गया। सुबह उठने पर उसने आगे चलने से पूर्व सोचा कि यह अच्छी जगह है, यहीं पर खिचड़ी पका ली जाए और फिर उसे खाकर आगे का सफर किया जाए। बूढ़े ने वहीं पड़ी सूखी लकड़ियां इकठ्ठा कीं और ईंटों का चूल्हा बनाकर खिचड़ी पकाने लगा। बटलोई उसने उसी महिला से मांग ली।

बूढ़े राहगीर ने महिला का ध्यान बंटाते हुए कहा, ‘एक बात कहूं.? बाड़े का दरवाजा कम चौड़ा है। अगर सामने वाली मोटी भैंस मर जाए तो फिर उसे उठाकर बाहर कैसे ले जाया जाएगा.?’ महिला को इस व्यर्थ की कड़वी बात का बुरा तो लगा, पर वह यह सोचकर चुप रह गई कि बुजुर्ग है और फिर कुछ देर बाद जाने ही वाला है, इसके मुंह क्यों लगा जाए।

उधर चूल्हे पर चढ़ी खिचड़ी आधी ही पक पाई थी कि वह महिला किसी काम से बाड़े से होकर गुजरी। इस बार बूढ़ा फिर उससे बोला: ‘तुम्हारे हाथों का चूड़ा बहुत कीमती लगता है। यदि तुम विधवा हो गईं तो इसे तोड़ना पड़ेगा। ऐसे तो बहुत नुकसान हो जाएगा.?’

इस बार महिला से सहा न गया। वह भागती हुई आई और उसने बुड्ढे के गमछे में अधपकी खिचड़ी उलट दी। चूल्हे की आग पर पानी डाल दिया। अपनी बटलोई छीन ली और बुड्ढे को धक्के देकर निकाल दिया।

तब बुड्ढे को अपनी भूल का एहसास हुआ। उसने माफी मांगी और आगे बढ़ गया। उसके गमछे से अधपकी खिचड़ी का पानी टपकता रहा और सारे कपड़े उससे खराब होते रहे। रास्ते में लोगों ने पूछा, ‘यह सब क्या है.?’ बूढ़े ने कहा, ‘यह मेरी जीभ का रस टपका है, जिसने पहले तिरस्कार कराया और अब हंसी उड़वा रहा है।’

तात्पर्य यह है के पहले तोलें फिर बोलें

चाहे कम बोलें मगर जितना भी बोलेन मधुर बोलें और सोच समझ कर बोलें।
[09/06, 5:34 pm] +91 81713 93886: —– स्वावलम्बन —–

“मॉम मेरे नए लेपटॉप का क्या हुआ?” आदित्य ने विभा से पूछा।

“पैसे आते ही खरीद देंगे बेटा।” विभा ने धीरे से जवाब दिया।

“क्या मतलब है पैसे आते ही? आपको पता भी है मेरी पढ़ाई, मेरे प्रोजेक्ट्स का कितना नुकसान हो रहा है। रिजल्ट खराब आया तो मुझे कुछ मत कहना” आदित्य गुस्से से भुनभुनाया।

“पर बेटा तुझे जो मॉडल चाहिए वो बहुत महंगा है। पापा अभी इतने पैसे कहाँ से लाएँगे। अभी तो तेरे ट्यूशन वाले सर को भी पूरे साल भर की फीस….” विभा कहते हुए चुप हो गई।

“तो ये सब मुझे इंजीनियरिंग में दाखिल करवाने से पहले ही सोचना चाहिए था। पैसा नहीं था तो…”

बेटे की बात विभा को अंदर तक चुभ गयी। हर साल कॉलेज की फीस, हर विषय की ट्यूशन फीस अलग से, आने-जाने के लिए मोटरसाइकिल भी ले दी कि बस में समय खराब न हो। फिर भी जैसे -तैसे ही पास होता है। और अब ये इतने महंगे लेपटॉप का खर्च, एक मध्यमवर्गीय पिता कितना करे। उस पर अभी भी दो साल बचे हैं, फिर बेटे का एहसान भी सर पर की आपके सपने पूरे करने के लिए ही तो पढ़ रहा हूँ।

विभा बाहर आँगन में आकर खड़ी हो गई। मन बुझा सा हो रहा था बेटे के व्यवहार से। एक लड़का पडौसी की गाड़ी धो रहा था। आदित्य का ही हमउम्र था। विभा के मन में सहज करुणा हो आयी। पढ़ाई करने की जगह बेचारा मेहनत करके परिवार के लिए पैसे जोड़ता है।

“कहाँ तक पढ़े हो बेटा।” अचानक ही विभा के मुँह से सवाल निकल गया।

लड़के ने ऊपर देखा और मुस्कुरा कर कहा “इंजीनियरिंग के तीसरे साल में हूँ आँटी।”

“क्या?” विभा चौंक गयी। “तुम तो काम करते हो। फिर पढ़ते कब हो?”

“सुबह काम करता हूँ, दस बजे कॉलेज जाता हूँ, पढ़ाई बस में आते जाते और रात में कर लेता हूँ। शाम को सेकंड, और फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स को ट्यूशन पढ़ाता हूँ। पिताजी कपड़ों पर प्रेस करने का काम करते हैं न, मेरी फीस नहीं दे सकते तो मैं खुद अपनी फीस कमाता हूँ।” सहज से उसने बताया। वो आदित्य के कॉलेज का ही छात्र था और हर साल क्लास में टॉप करता था।

“मॉम पापा को बोलो मुझे आज ही लेपटॉप चाहिए नहीं तो कल से मैं कॉलेज नहीं जाऊँगा।” विभा के कानों में थोड़ी देर पहले बोले गए आदित्य के शब्द गूँज गए और अचानक उसने एक सवाल कर दिया-

“तुम्हे गुस्सा नही आता कि तुम्हे खुद ही कमाकर पढ़ना पड़ रहा है। तुम्हारे पिताजी…कभी मन नहीं करता कि पढ़ना छोड़ दूँ?”

“कभी नहीं मैडम। मैं पढ़ रहा हूँ तो मेरा ही भविष्य सुधरेगा न। मैं कोई अपने माता-पिता पर थोड़े ही अहसान कर रहा हूँ। अपना ही जीवन बना रहा हूँ।” लड़के ने सहज भाव से उत्तर दिया।

लेपटॉप के लिए माँ के पास तकाजा करने के लिए आते हुए आदित्य के पाँव लड़के की बात सुनकर दरवाजे पर ही ठिठक गए।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक बार की बात है की किसी राजा ने यह फैसला लिया


निन्दा का फल

एक बार की बात है की किसी राजा ने यह फैसला लिया के वह प्रतिदिन 100 अंधे लोगों को खीर खिलाया करेगा। एक दिन खीर वाले दूध में सांप ने मुंह डाला और दूध में विष डाल दीऔर ज़हरीली खीर को खाकर 100 के 100 अंधे व्यक्ति मर गए ।राजा बहुत परेशान हुआ कि मुझे 100 आदमियों की हत्या का पाप लगेगा। राजा परेशानी की हालत में अपने राज्य को छोड़कर जंगलों में भक्ति करने के लिए चल पड़ा,ताकि इस पाप की माफी मिल सके। रास्ते में एक गांव आया। राजा ने चौपाल में बैठे लोगों से पूछा की क्या इस गांव में कोई भक्ति भाव वाला परिवार है ?ताकि उसके घर रात काटी जा सके। चौपाल में बैठे लोगों ने बताया कि इस गांव में दो बहन भाई रहते हैं जो खूब बंदगी करते हैं। राजा उनके घर रात ठहर गया ।सुबह जब राजा उठा तो लड़की सिमरन पर बैठी हुई थी ।इससे पहले लड़की का रूटीन था की वह दिन निकलने से पहले ही सिमरन से उठ जाती थी और नाश्ता तैयार करती थी ।लेकिन उस दिन वह लड़की बहुत देर तक सिमरन पर बैठी रही। जब लड़की सिमरन से उठी तो उसके भाई ने कहा की बहन तू इतना लेट उठी है ,अपने घर मुसाफिर आया हुआ है ।इसने नाश्ता करके दूर जाना है। तुझे सिमरन से जल्दी उठना चाहिए था ।तो लड़की ने जवाब दिया कि भैया ऊपर एक ऐसा मामला उलझा हुआ था ।धर्मराज को किसी उलझन भरी स्थिति पर कोई फैसला लेना था और मैं वो फैसला सुनने के लिए रुक गयी थी,इस लिए late तक बैठी रही सिमरन पर ।तो उसके भाई ने पूछा ऐसी क्या बात थी ।तो लड़की ने बताया कि फलां राज्य का राजा अंधे व्यक्तियों को खीर खिलाया करता था ।लेकिन सांप के दूध में विष डालने से 100 अंधे व्यक्ति मर गए ।अब धर्मराज को समझ नहीं आ रही कि अंधे व्यक्तियों की मौत का पाप राजा को लगे ,सांप को लगे या दूध नंगा छोड़ने वाले रसोईए को लगे ।राजा भी सुन रहा था। राजे को अपने से संबंधित बात सुनकर दिलचस्पी हो गई और उसने लड़की से पूछा कि फिर क्या फैसला हुआ? तो लड़की ने बताया कि अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया था ।तो राजा ने पूछा कि क्या मैं आपके घर एक रात के लिए और रुक सकता हूं? दोनों बहन भाइयों ने खुशी से उसको हां कर दी। राजा अगले दिन के लिए रुक गया, लेकिन चौपाल में बैठे लोग दिन भर यही चर्चा करते रहे कि कल जो व्यक्ति हमारे गांव में एक रात रुकने के लिए आया था और कोई भक्ति भाव वाला घर पूछ रहा था।उस की भक्ति का नाटक तो सामने आ गया है। रात काटने के बाद वो इस लिए नही गया क्योंकि जवान लड़की को देखकर उस व्यक्ति की नियत खोटी हो गई ।इसलिए वह उस सुन्दर और जवान लड़की के घर पक्के तौर पर ही ठहरेगा या फिर लड़की को लेकर भागेगा। दिनभर चौपाल में उस राजा की निंदा होती रही।अगली सुबह लड़की फिर सिमरन पर बैठी और रूटीन के टाइम अनुसार सिमरन से उठ गई ।तो राजा ने पूछा -बेटी अंधे व्यक्तियों की हत्या का पाप किसको लगा? तो लड़की ने बताया कि वह पाप तो हमारे चौपाल में बैठने वाले लोग बांट के ले गए।
कापी पेस्ट्