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प्राचीनकाल में ऋषि-मुनियों ने ऐसे पेड़-पौधों को लगाने की सलाह दी थी, जिनसे वास्तुदोष का निवारण हो साथ ही पर्यावरण संतुलन भी बना रहे।
तुलसी- तुलसी को जीवनदायिनी और लक्ष्मी स्वरूपा बताया गया है। इसे घर में लगाने से और इसकी पूजा अर्चना करने से महिलाओं के सारे दु:ख दूर होते हैं, साथ ही घर में सुख शांति बनी रहती है। इसे घर के अंदर लगाने से किसी भी प्रकार की अशुभ ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
अश्वगंधा- इसके बारे में कहा गया है कि यह वास्तु दोष समाप्त करने की क्षमता रखता है और शुभता को बढ़ाकर जीवन को अधिक सक्रिय बनाता है।
आंवला- आंवले का वृक्ष घर की चहारदीवारी में पूर्व व उत्तर में लगाया जाना चाहिए, जिससे यह शुभ रहता है। साथ ही इसकी नित्य पूजा-अर्चना करने से भी सभी तरह के पापों का शमन होता है।
केला- घर की चहारदीवारी में केले का वृक्ष लगाना शुभ होता है। इसे भवन के ईशान कोण में लगाना चाहिए, क्योंकि यह बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधि वृक्ष है। केले के समीप यदि तुलसी का पेड़ भी लगा लें तो अधिक शुभकारी रहेगा।
शतावर- शतावर को एक बेल बताया गया है। इसे घर में लगाना शुभ फलदायी होता है। बशर्ते इसे घर में कुछ इस तरह लगाएं कि यह ऊपर की ओर चढ़े।
अनार- इससे वंश वृद्धि होती है। आग्नेय में अनार का पेड़ अति शुभ परिणाम देने वाला होता है।
बेल- भगवान शिव को बेल का वृक्ष अत्यंत प्रिय है, इसको लगाने से धन संपदा की देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

आपको तीन कहानियाँ सुनाऊंगा। कहानियां सुनने के बाद और इनका मर्म समझने के बाद वह ब्रह्मास्त्र इस पोस्ट को पढ़ने वालों को स्वयम ही मिल जाएगा।

पहली कहानी –

वह समय था 19th एवम 20th सेंचुरी का। अर्थात 1800 से लेकर 1999 का समय। भारत में आक्रमणकारी आतताइयों के अलावा कोई और भी था जिसने त्राहिमाम मचा रखा था। वैसे तो यह त्राहिमाम हजारो वर्षो से मचा हुआ था किंतु सिर्फ 20th सेंचुरी में 300 मिलियन अर्थात 30 करोड़ लोग इस त्राहिमाम से परलोक सिधार चुके थे। क्या था यह त्राहिमाम। यह था एक छोटा सा वायरस। नाक और गले के माध्यम से एक अदृश्य वायरस मानव के शरीर में घुस जाता था। फेफड़ों में जाकर फ्लू और बुखार जैसे लक्षण आते थे, फिर पूरा शरीर फफोलो से भर जाता था। गॉव के लोग इस महामारी को बड़ी माता कहते थे और वैज्ञानिक लोग चेचक। चेचक होते ही 10 में से 4 लोगो को मरना ही होता था। समय बीत रहा था विश्व भर में बेहिसाब लोग चेचक से मर रहे थे किन्तु भारत मे लोगो का एक समूह था जिनको चेचक होता ही नही था और यह था भारत के गौ पालक ग्वालों का समूह।

ये ग्वाले दिन भर गौमाता के सानिध्य में रहते, उनको चराते, नहलाते दुहते। इस समूह से बाहर जब लोग बड़ी माता से मर रहे होते, इन ग्वालों को बस थोड़ा था बुखार होता, दो चार पिम्पल्स और वो ठीक हो जाते।

लंबी कथा को शार्ट करता हूँ, ग्वालों की इस महामारी बड़ी माता से रक्षा और कोई नही, गाय माता ही कर रही थी। होता यह था कि बड़ी माता का यह खतरनाक वायरस गाय के शरीर में रहने वाले गाय के वरिओला नामक वायरस के समक्ष घुटने टेक देता था और गाय को तो बड़ी माता से कुछ होता ही नही था, वरन गाय के सानिध्य में रहने वाले मनुष्य भी बड़ी माता से सुरक्षित हो जाते थे।

भारत के ग्वालों के इस अनुभव को एडवर्ड जेनर नाम के एक अंग्रेज वैज्ञानिक ने कैश किया और गाय के शरीर से इसी वैरियोला वायरस के पीप को निकाल कर इसी पीप को मनुष्यों में देना शुरू कर दिया ताकि वो लोग जो गाय के सानिध्य में नही रहते उनको भी गाय के इस चमत्कारी श्राव के द्वारा बड़ी माता से बचाया जा सके। हजारों वर्षों से धरती पर त्राहिमाम मचाती चेचक अर्थात बड़ी माता का निदान विश्व को मिल गया था। यही चेचक की वैक्सीन थी और विश्व की प्रथम वैक्सीन भी। इस वैक्सीन को खोजने का श्रेय मिला अंग्रेज एडवर्ड जेनर को, लोग भारत के ग्वालों को भी भूल गए और गाय को भी। यह कथा फिर कभी, किन्तु कथा का सारांश यह है कि हजारो वर्षो की महामारी का इलाज मिला गौं माता से।

अब दूसरी कथा। यह कथा बस कुछ वर्ष पहले की है। मात्र 3 वर्ष पहले की। गूगल कर लीजिए तथ्य और डेट मिल जाएंगी।

वैज्ञानिको के एक समूह ने सोचा कि अगर खतरनाक HIV अर्थात एड्स के वायरस को गाय को दिया जाए तो क्या होगा?? वैज्ञानिको ने HIV का वायरस गाय के शरीर में प्रविष्ट कराया और यह क्या! गाय को एड्स होने के बजाय एड्स का वह वायरस गाय माता के शरीर में नष्ट हो गया। नष्ट ही नही हुआ वरन उंसके खिलाफ गाय के खून में एक विशेष एंटीबाडी भी बन गयी जो HiV वायरस को मार डालने में सक्षम थी। विश्व के सबके बड़े विज्ञान के जर्नल नेचर में दो वर्ष पहले यह खोज छपी कि HIV की वैक्सीन सम्भव है तो सिर्फ गाय के सहारे। ज्ञात हो कि दो तीन दशकों तक हजारो करोड़ खर्च करने के बाद भी आज तक विश्व का कोई भी वैज्ञानिक HiV की वैक्सीन नही बना पाया था। अब गाय माता के कारण यह सम्भव होने के कगार पर है।

अब तीसरी कथा। यह कथा है गाय के माध्यम से वर्तमान महामारी कोरोना का इलाज। यह फेसबुक पोस्ट है कोई किताब या विज्ञान का जर्नल नही। वैज्ञानिक लोग गूगल कर लेना पता चल जाएगा।

South Dakota की SAb Biotherapeutics नामक कंपनी ने गाय के माध्यम से को रो ना की वैक्सीन बनाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। बड़ी सफलता भी मिली है। देखना यह है कि दुनिया के ठेकेदार इस अद्भुत खोज को मान्यता देते हैं कि नही। इतिहास तो कहता है कि ये ढोंगी मर जायेंगे, किन्तु गौ माता को मान्यता नही देंगे।

यूँ ही माता नही कहा जाता गाय को। आज धरती के ऊपर संकट आया है तो माता के पास जाकर तो देखो। माता का सानिध्य पाकर तो देखो। माता को सिर से पैर तक छूकर नमन करके तो देखो, माता को प्यार से चूमो तो सही, कौन सा संकट होगा जो तुमको छू सकेगा !!

पहले दिन से जब मैंने हल्दी का निदान आप सभी को बताया था (जो आज भी सार्थक और कारगर है) उसी दिन से सभी को संकेत दे रहा हूँ कि गाय का सानिध्य करो। गाय को रोटी दो। प्यासी हो तो पानी पिला दो । इस बहाने दो पल आपको गाय का सानिध्य तो प्राप्त होगा। इसी पल भर के सानिध्य से तुम्हारा कल्याण हो जाएगा।

समझदार को इशारा काफी। वर्तमान महामारी से बचना है तो सौ साल पुराने चेचक के इतिहास और निदान से सीख लेनी होगी। गाय को आप लोग भूल गए हैं, यह विस्मृति ही वर्तमान कष्टों का कारण है। कभी इन आवारा घूमती भूखी प्यासी कटती गायों की आंखों को पढ़ना, कहती मिलेंगी कि हे मेरे पुत्रो, तुम व्यथित क्यों हो, मेरे पास आओ, मुझे काट लेना, खा जाना, मुझी को खाकर कर लेना अपनी भूख शांत, किन्तु उससे पहले बस दो पल मेरे साथ बिताओ तो सही व्यथित क्यों हो, मैं हूँ ना 🚩🚩।।

मेरा कार्य पूर्ण हुआ। गाय सबकी है। किंतु पल दो पल का सानिध्य आपको स्वयं तलाशना होगा। आगे आपका भागय।

ॐ श्री हरि। जय गऊ माता। जय माँ गायत्री 🍁

~ साभार सुनील कुमार वर्मा

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‼️”पालनहार मोर मुकुट मुरलीवाला”‼️

हर समय कण्ठी माला लेकर बैठे रहते हो । कभी कुछ दो पैसे का इंतजाम करो लड़की के लिए लड़का नहीं देखना। आज फिर निर्मला ने रोज की तरह सुबह से ही बड़बड़ाना शुरु कर दिया।

अरे भाग्य वान ईश्वर पर विश्वास रखो , समय पर सब हो जाएगा । चौबे जी ने अपना गमछा संभालते हुए कहा।

इन चरणों में जो भी आये,
उसका जन्म सफल हो जाये।

हाँ हाँ ईश्वर तो जैसे घर बैठे ही लड़का भेज देंगे। भगवान के पास तो कोई काम है नहीं सिर्फ आपका ध्यान रखने के अलावा ।

अरे क्यों पूरा दिन चकचक करती रहती हो ? बैसे चौबेजी कभी गुस्सा नहीं होते। वो तो बिमारी के चलते नोकरी छोड दी थी।
अब बस पूरा दिन बस गोपालजी की सेवा करते और उन्ही के बारे में ही सोचते हैं ।

निर्मला बोली जयपुर वाली मौसी बता रही थी , उनके रिश्तेदारी में एक लड़का है ।

पर देखने तो जब आओगे ,

जब जेब में1000-2000 रुपए होंगे । जो दस बीस रुपए बचते हैं ,उन्हें भी अपने दोस्तों को उधार दे देते हो। आज तक लौटाए हैं किसी दोस्त ने।

पर आज तक कभी किसी चीज की कोई कमी हुई है । नहीं ना,
आगे भी नहीं होगी ईश्वर की कृपा से।
तुम तो मुझे भजन भी नहीं करने देती ।

भजन ही करना था तो शादी क्यों की ? अब क्या वो बैठे-बिठाए तुम्हारी लड़की की शादी भी कर जाएंगे।

हाँ रहने दो बस । यह लो थैला पकड़ो और जाओ बाजार से रसोई के लिए सामान ले आओ और हां , जिस लडके के बारे में मैंने बात की है । उसके बारे में जरा सोचना परसों जाना है तुम्हें। अब थोड़े बहुत पैसों के लिए हम एफडी तो तुडवाओगे नहीं सो जो यार दोस्तों को उधार दे रखे हैं उनसे जरा मांग लो।

थैला लेकर चौबेजी निकल तो गए लेकिन विचार यही है मन में। पैसों का इंतजाम कैसे होगा ? सब्जी लेने से पहले जरा अपने एक दोस्त से अपने पैसों की बात कर ली जाए । जिस दुकान में काम करता है , वो भी पास ही है ।

मोहनलाल ने अपने मित्र को देखा तो गले लगा लिया । अरे चौबेजी कैसे आना हुआ ?

कुछ ना भैया कुछ समस्या आन पड़ी है । पैसो की सख्त जरुरत है ? अपने ही पैसे चौबेजी ऐसे मांग रहे हैं , जैसे उधार मांग रहे हो।

देखता हूँ साहब तो बिमार है चार दिन पहले ही दिल का दौरा पड़ा था। अभी दस दिन पहले ही विदेश से आए हैं। बैसे तो ऐसे 6 शोरूम है उनके पास। पर चलो एक दो दिन में आएंगे तो मांग करके तुम्हें दे दूंगा।

और बताओ बिटिया ठीक है ? कैसा चल रहा है उसका योगा क्लास ?

बढ़िया चल रहा है सुबह 5:00 बजे जाती है ,पूरा 5000 कमाती है। चौबेजी ने बड़े गर्व से कहा।

सर्वगुण संपन्न है जी हमारी लाली। कैबिन से बाहर निकले ही थे , एक जगह नज़र टिकी गई। इतनी सुंदर मूर्ति गोपाल की। चौबे जी अपलक देख रहे थे जैसे अभी बात करने लगेगी।

तभी मोहनलाल ने ध्यान भंग करते हुए कहा ,” बडे साहब ने आर्डर पर बनवाई है। बाहर से बनकर आई है । ऐसी दो बनवाई हैं ।”

रास्ते भर मूर्ति की छवि उनकी नजरों से ओझल नहीं हो रही थी । काश वो मूर्ति उनके पास होती। भूल नहीं पा रहे हैं काश अगर उनके पास होती कैसे दिनभर निहारते रहते , क्या क्या सेवा करते सोचते सोचते ,घर कब आया पता ही नहीं चला।

लेकिन घर के सामने इतनी भीड़ क्यों है ? यह गाड़ी किसकी गाड़ी तो काफी महंगी लग रही है ? अपने घर के दरवाजे में घुसने ही वाले थे कि थैला हाथ से छीनकर निर्मला ने मुस्कुराकर उनका स्वागत किया।

कौन आया है ? अंदर सूट बूट में एक आदमी बैठा है। चौबेजी को देखते ही वो हाथ जोड़कर खड़ा हो गया।

राधे राधे चौबे जी ने कहा। बैठिए पर क्षमा कीजिए मैंने आपको पहचाना नहीं।

अरे आप कैसे पहचानेंगे ? हम पहली बार मिल रहे हैं । उसने बड़ी शालीनता के साथ जवाब दिया।

जी कहिए , मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ ?

दरअसल मैं आपसे कुछ मांगने आया हूँ ।

सीधा-सीधा बताइए चौबे जी सोच में पडे थे जाने वह क्या मांग ले?
और इतने बड़े आदमी को मुझसे क्या चाहिए ?

आज से चार दिन पहले मैं सुबह की सैर के लिए गया था। लेकिन उस दिन मेरे साथ एक दुर्घटना हुई। अचानक मुझे हार्टअटैक आ गया। आसपास कोई नहीं था मदद के लिए। ना मैं कुछ बोल पा रहा था । तभी एक लड़की स्कूटी पर आती दिखी। मुझे सडक पर पड़े हुए देखकर उसने अपनी स्कूटी रोकी।

अकेली वो मुझे उठा नहीं सकती थी। फिर अपनी स्कूटी से दूर से दुकान पर जाकर एक आदमी को बुलाकर लाई । उसकी मदद से उसने मुझे अपनी स्कूटी पर बिठाया और मुझे हॉस्पिटल लेकर गई। अगर थोड़ी सी भी देर हो जाती शायद मेरा अन्त निश्चित था। और वो लड़की कोई और नहीं , आपकी बेटी थी।

उस आदमी ने हाथ जोड़ते हुए कहा , अगर आप लायक समझे ,
तो मैं अपने बेटे के लिए आपकी बेटी का हाथ मांगता हूं । ओर जो अनजान की मदद कर सकती है । वो अपने परिवार का कितना ध्यान रखेगी।”

चौबेजी एक दम जड़ हो गए । वह विश्वास नहीं कर पा रहे थे,
हे ईश्वर क्या यह सब सच में ये हो रहा है कि मुझे किसी के दरवाजे पर ना जाना पड़े। इस स्थिति से बाहर निकले भी नहीं थे कि

तभी उन्होंने अपने पास रखे हुए बैग में से एक बाक्स निकाला।
उन्हें देते हुए कहा कि शगुन का एक छोटा सा उपहार है।
मना मत करना.. चौबेजी ने खोलते हुए देखा

इसमें वही बालगोपाल की मूर्ति थी , जिसे अभी शोरूम में देखकर आए थे। जो आंखो के सामने से ओझल नहीं हो रही थी । जिसे देखते ही मन में ये ख्याल आयाथा कि काश मेरे मंदिर में होती ।

आज ऊपरवाले ने प्रमाणित कर दिया की मुझे उसका जितना ख्याल है उससे कहीं ज्यादा उसे मेरा ख्याल है ।

‼️।। राधे राधे।।💞💞
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जय श्री कृष्ण जी,जय गऊ माता जी
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धर्म प्रचार हेतु शेयर करें जी

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परिवार और दोस्त

जंगली भैंसों का एक झुण्ड जंगल में घूम रहा था।
तभी एक बछड़े ने पुछा… पिता जी, क्या इस जंगल में ऐ सी कोई चीज है जिससे डरने की ज़रुरत है ?

बस शेरों से सावधान रहना.. भैंसा बोला।

हाँ , मैंने भी सुना है कि शेर बड़े खतरनाक होते हैं…।

अगर कभी मुझे शेर दिखा तो मैं जितना हो सके उतनी तेजी से दौड़ता हुआ भाग जाऊँगा… बछड़ा बोला।

नहीं.. इससे बुरा तो तुम कुछ कर ही नहीं सकते.. भैंसा बोला।

बछड़े को ये बात कुछ अजीब लगी..वह बोला।

क्यों ? वे खतरनाक होते हैं… मुझे मार सकते हैं तो भला… मैं भाग कर अपनी जान क्यों ना बचाऊं ?

भैंसा समझाने लगा…. अगर तुम भागोगे तो शेर तुम्हारा पीछा करेंगे।

भागते समय वे तुम्हारी पीठ पर आसानी से हमला कर सकते हैं और तुम्हे नीचे गिरा सकते है।

और एक बार तुम गिर गए तो मौत पक्की समझो।

तो.. तो। .. ऐसी स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए ? बछड़े ने घबराहट में पुछा।

अगर तुम कभी भी शेर को देखो… तो अपनी जगह डट कर खड़े हो जाओ और ये दिखाओ की तुम जरा भी डरे हुए नहीं हो।
अगर वो ना जाएं तो…।

उसे अपनी तेज सींघें दिखाओ और खुरों को जमीन पर पटको।
अगर तब भी शेर ना जाएं तो धीरे -धीरे उसकी तरफ बढ़ो… और अंत में तेजी से अपनी पूरी ताकत के साथ उस पर हमला कर दो।

भैंसे ने गंभीरता से समझाया।
ये तो पागलपन है…. ऐसा करने में तो बहुत खतरा है।

अगर शेर ने पलट कर मुझ पर हमला कर दिया तो ?? बछड़ा नाराज होते हुए बोला।
बेटे… अपने चारों तरफ देखो.. क्या दिखाई देता है ? भैंसे ने कहा।
बछड़ा घूम -घूम कर देखने लगा ..।
उसके चारों तरफ ताकत वर भैंसों का बड़ा सा झुण्ड था।
अगर कभी भी तुम्हे डर लगे.. तो ये याद रखो कि हम सब तुम्हारे साथ हैं….।

अगर तुम मुसीबत का सामना करने की बजाये , भाग खड़े होते हो…. तो हम तुम्हे नहीं बचा पाएंगे….।

लेकिन अगर तुम साहस दिखाते हो और मुसीबत से लड़ते हो तो हम मदद के लिए ठीक तुम्हारे पीछे खड़े होंगे।

बछड़े ने गहरी सांस ली और अपने पिता को इस सीख के लिए धन्यवाद दिया।

हम सभी की ज़िन्दगी में भी शेर हैं … कुछ ऐसी समस्याएं हैं जिनसे हम डरते हैं… जो हमें भागने पर…. हार मानने पर मजबूर करना चाहती हैं।

लेकिन अगर हम भागते हैं तो वे हमारा पीछा करती हैं और हमारा जीना मुश्किल कर देती हैं।

इसलिए उन मुसीबतों का सामना करिये….!!

उन्हें दिखाइए कि आप उनसे डरते नहीं हैं……!!

दिखाइए की आप सचमुच कितने ताकतवर हैं..और पूरे साहस और हिम्मत के साथ उल्टा उनकी तरफ टूट पड़िये..!!

और जब आप ऐसा करेंगे तो आप पाएंगे कि आपके परिवार और दोस्त पूरी ताकत से आपके पीछे खड़े हैं ….!!