Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

निराशा से आशा की और
ग्रुप की सादर भेंट
🌿🌿🌿🌟🌿🌿🌿

हंस जैन रामनगर खंडवा
9827214427
❄️❄️❄️❄️❄️❄️❄️

मतलबी संसार में अपना कौन❓❓❓
👆🏻👆🏻👆🏻👆🏻👆🏻👆🏻👆🏻

आज का लेख समर्पित मतलबी और स्वार्थी इंसानों को सादर नमन के साथ जिनके कारण आज भी अपनापन संसार में जागृत है।
👆🏻👆🏻👆🏻👆🏻👆🏻👆🏻👆🏻 करीब एक वर्ष पुरानी घटना का जिक्र कर रहा हूं। सुबह के करीब 9 बज रहे थे। एक महाशय घर का पता पूछते हुए घर पर आए की हंस जैन जी का घर यही है।

जी हां । यही घर है। श्रीमती जी ने दरवाजा खोला। जी उनसे कहिए कि राहुल सक्सेना आए है। उस शख्स ने कहा। खैर वो मेरे कमरे के भीतर आए। पहचाना मुझे में राहुल कालेज का तुम्हारा दोस्त। में नहीं पहचान पाया। चश्मे की धूल साफ की फिर लगाकर देखा । धुंधली याद सी आई। करीब 22 वर्ष पुरानी कालेज के समय की

शायद वही था। उसने फिर अपनी बात शुरू की क्या हंस भाई कितने दुबले हो गए। क्या भाभीजी ख्याल नहीं रखती। भाभीजी क्या हाल बना दिया इसका। उसने श्रीमती जो कहा। भाई साहब हजार बार कहती की समय पर भोजन किया कीजिए। गोली लिया कीजिए पर सुनते कब है मेरी। श्रीमती जी के मन का गुबार भी निकल गया। श्रीमान राहुल जी पुराने किस्से बताने लगे। एक पल को लगा कि जैसे दो बिछड़े दोस्तो का पुनर्मिलन हो गया हो। खैर इस बीच उसको बार बार कहीं से फोन आ रहा था,और वो फोन काट रहा था। फिर उठा और बोला चलता हूं यार बहुत अच्छा लगा मिलकर अपना ध्यान रखना मेरा मोबाइल नंबर दे जाता हूं कभी भी जरूरी हो अपना भाई समझकर रात में भी फोन कर देना। एक पल को ऐसा लगा कि मेरे हृदय की सूखी झील में पानी की लहर आ गई कितना अपनापन। जाते जाते उसने कहा कि यार इधर के atm बन्द पड़े है क्या। अभी रुपए निकालने गया था। Atm में रुपए ही नहीं है। एक को अर्जेंट में देना है। अब वापस घर जाकर लाना पड़ेगा। क्या तुम्हारे पास 25000 रुपए है। अभी एक घंटे में वापस करता हूं। अब इतना प्यार देख कर मेरी सोई आत्मा के भीतर भी कृष्ण सुदामा सा प्यार जाग उठा। श्रीमती जी को बोला की बैंक की किस्त में से अभी इसे 5000 रुपए दे दो। एक घंटे बाद वापस दे जायगा। श्रीमती जी ने पत्नी धर्म निभाते हुए पति आज्ञा मानकर दे दिए। उसने जाते हुए कहा बस 1 घंटे बाद किसी के हाथ रुपए भेजता या में खुद आ जाऊंगा। मैने फॉर्मेलिटी बतौर कहा कोई बात नहीं आ जायेगे। बस फिर 1 घंटा 2 घंटा 1 दिन 2 दिन 1 सप्ताह गुजरते गए। न वो आया या फोन आया। जो मोबाईल नंबर उसने दिया वो भी किसी और का था। बाद में पता चला कि वो इस शहर में रहता ही नहीं। कई लोगो को बेवकूफ बना गया।

अब आते हम मुद्दे की बात पर संसार में ऐसे कई हजारों इंसान मिल जायेगे जो मतलब के लिए आपको अपना बना लेंगे लेकिन मतलब निकलता तो आपको पहचानेगे भी नहीं।

कहा जाता है की रिश्ते ऊपर वाला बनाता है| हर रिश्ता ख़ास होता है| चाहे दोस्त का, चाहे माँ और पिता का या फिर पति पत्नी का| हर रिश्ते का हमारे जीवन में अलग अलग महत्व होता है| हर रिश्ता निभाना आसान नहीं होता है| कुछ रिश्ते ऐसे होते है जो की सिर्फ मतलब के लिए ही बने होते है| जब उनका मतलब निकल जाता है वो आपसे रिश्ता तोड़ देते है|कहते है कि अच्छे दोस्त कभी मतलबी नहीं होता हैं,

मतलबी लोग कभी अच्छे दोस्त नहीं होते हैं.

मतलबी दुनिया में लोग अफ़सोस से कहते है कि,
कोई किसी का नहीं…
लेकिन कोई यह नहीं सोचता कि हम किसके हुए…!!! दोस्त की पहचान बुरे वक्त में होती है क्योंकि बुरे वक्त की सबसे अच्छी बात यह है कि जब ये आता है तब मतलबी दोस्त दूर हो जाते है। आप, में या कोई न कोई मतलबी रिश्तों का शिकार हुआ होगा। अब दोस्ती ही नहीं रिश्ते भी मतलबी हो गए है। कभी किसी रिश्ते की आप जिंदगी भर मदद करते रहो वो स्वार्थवश आपसे जुड़ा रहेगा। लेकिन कभी आपने आजमा लेना की आप पर कोई मुसीबत आती दिखी सबसे पहले वो भाग जायगा। आपने कभी सोचा है कि रिश्तों का असली मतलब क्या होता है?

मेरी राय में जो रिश्ते किसी मतलब के लिए बनाये जाते हों…
वो रिश्ते ही नहीं होते है!!

दरअसल रिश्तों की सिलाई अगर भावनाओ से हुई है तो टूटना मुश्किल है
और अगर स्वार्थ से हुई है तो टिकना मुश्किल है। लेख बढ़ा हो गया है मेरा अभिप्राय आप समझ गए होंगे। जाते जाते एक कविता कही से मिली जो पड़िए।

क्यू पन्नों की तरह पलट जाते हैं लोग,
बस मतलब का रिश्ता निभाते हैं लोग।

तंग दिल के मालिक, पत्थर जैसे होते हैं,
जाने लोगो के दिल, क्यू ऐसे होते हैं।

दुखती-चुभती सी बाते कर जाते हैं,
मुस्कुराती ज़िन्दगी को ख़ामोश कर जाते हैं।

इन ख़ामोश चीख़ो की सदा सुनाई नहीं आती,
कुछ ज़ख्मों की कभी कोई दवाई नहीं आती।

बस ऐसे ज़ख़्म नासूर से बन जाते हैं ज़िन्दगी के,
ये मतलब के रिश्ते, मतलब ही बदल जाते हैं ज़िन्दगी के।

हंस जैन रामनगर खंडवा
9827214427

निराशा से आशा की और
ग्रुप की भेंट
❄️❄️❓❄️❄️❓👍🏻

Author:

Buy, sell, exchange books

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s