Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

आज सुबह जब पहली चाय पी रहा था तो घर वाली


आज सुबह जब पहली चाय पी रहा था तो घर वाली ने मेन गेट से आवाज़ लगाई बोले- बाहर आओ..आपके देखने लायक सीन है…मैंने कहा क्या हुआ..?? बोले आओ तो सही देखो वेगन आर में आम बिक रहे हैं…

मैं उठ कर गया तो देखा एक वेगनआर में एक बंदा पीछे की सीट और डिक्की में लगभग 10-15 कैरेट आम के रखकर लाया था..एक तराजू गाड़ी में ..उसके साथ उसका एक साथी था जो आवाज़ लगा रहा था…आम ले लो आम 100 के 2 किलो….अभी सबके चेहरे पर मास्क है तो अचानक कोई पहचान में नही आता…लेकिन उस आम विक्रेता ने मुझे पहचान लिया…

अरे कमल भैया आप यहां रहते है क्या..?? मैंने कहा हाँ… उसने थोड़ा मास्क नीचे किया तो तो मैं भी उसे पहचान गया…वो राजीव था…मैंने कहा अरे तू कबसे आम बेचने लगा…तेरा तो चश्मे का होलसेल का काम है…

बोला भैया इसी गाड़ी में चश्मे भरकर आस पास के गांवो में सप्लाई करने जाता था लेकिन लॉकडाउन की वजह से सारे गांव सील, शहर सील… अचानक हुए इस घटनाक्रम और लोकडाउन के बाद टेंशन सताने लगी कि कार की किश्त कैसे जाएगी, मकान भाड़ा कैसे दूंगा, घर का रोज़ मर्रा का खर्च कैसे चलेगा…हम तो रोज़ कमा कर रोज़ खाने वाले आदमी है…कोई बचत- सेविंग भी नही कैसे चलेगा..मैन कहा फिर..??

बोले कमल भैया सिर्फ 3 दिन घर खाली बैठा.और उसके बाद सोच लिया कि ऐसे नही चल पाएंगे…उसके बाद कृषि मंडी जाकर आम के 5 कैरेट लाया और पहले दिन 50 किलो आम बेच दिए…600/- मुनाफा हुआ…100-150 की गैस जल गई गाड़ी में…फिर भी 400-450 बच गए…फिर धीरे धीरे क्वांटिटी बढ़ाता गया…अब लगभग 10 कैरेट मतलब 100 किलो आम रोज़ बेच लेता हूँ…आम 36-37 रु किलो मंडी से मिल जाता है..50/- किलो बेचता हूँ…1200-1300 मुनाफा हो जाता है रोज़ का…

अकेला गाड़ी चलाना , फिर उतारना फिर तोल के देना , आवाज़ लगाना , दिक्कत हो रही थी तो मासी के लड़के प्रकाश को साथ ले लिया 200/- रोज़ उसको देता हूँ और लगभग 200 की गैस जल जाती है…800/- नेट बच जाते है रोज़ भैया…

वो बोलता जा रहा था मेरी आँखें फटी की फटी. इस लड़के ने मात्र 3 दिन में खुद को मानसिक रुप से मजबूत करके बिज़नेस कन्वर्शन कर लिया और 50 दिन में 40 हज़ार कमा चुका..और खुद के साथ एक बंदे को रोजगार दे दिया…और इधर मैं और मेरे जैसे देश के असंख्य मिडिल क्लास लोग बस अपने भविष्य की चिंता में घुले जा रहे है, आगे क्या होगा..लेकिन हम सिर्फ चिंता कर रहे है एक्शन नही..

ऐसे विकट काल मे भी राजीव अपनी ज़िम्मेदारियाँ अपनी कमाई से पूरी कर रहा है , कर्ज़े से नही…कोई शर्म नही की इसने की मैं चश्मे का होलसेलर हूँ मैं , गली गली आम कैसे बेचूंगा…

ये एक छोटा सा उदाहरण था..अब आप और हम भी समझ लें पक्के से..हमे तैयार रहना ही होगा एक बड़े बदलाव के लिए…

इस लॉकडाउन के बाद कई बिज़नेस बिल्कुल खतम हो जाएंगे तो कई नए जन्म लेंगे..लक्ज़री से जुड़े सारे बिज़नेस ठप्प होंगे या धीमे हो जाएंगे..रूटीन खर्च निकालना मुश्किल होगा…लेकिन बेसिक्स नीड्स और हाइजीन से जुड़े कई नए बिज़नेस डेवेलप होंगे…

मैंने कुछ दिन पहले एक आर्टिकल लिखा भी था कि ‘व्यापार मरता नही बस रूप बदलता है’…हमको भी राजीव की तरह निर्णय लेंगे और त्वरित लेने होंगे क्यों कि खर्चा कोई भी नही रुका है..लेकिन कमाई का चक्का जाम है..

जरूरी नही की सब कार लेकर आम बेचने निकल पड़े…लेकिन अब आप अपने बिजनेस को कैसे कन्वर्ट करेंगे ये आपको सोचना है..या हो सकता है जहां आप नौकरी करते थे वहां आपकी जरूरत ही नही रहे… वो संस्थान ही अपना व्यापार बदल लें तो फिर आपकी स्किल कहाँ काम आएगी..?? आप पर नौकरी जाने का खतरा आ जायेगा

आप खुद को नई परिस्थितयो के मानसिक रूप से तैयार अभी से तैयार कर लें..क्यों कि लॉकडाउन खतम होगा और परेशानियां शुरू होंगी…अभी तक सब इसलिए आराम से है क्यों कि सब रुका हुआ है….

बहुत बदलाव आएंगे जैसा पहले था वैसा अब कुछ नही रहने वाला…

जुड़े रहिये, पढ़ते रहिये..पोस्ट अच्छी लगे तो मित्रो के साथ फेसबुक व्हाट्स एप्प पर शेयर भी कीजिये. शायद किसी की ज़िंदगी मे बदलाव आ जाये…

कमल रामवानी सारांश की पोस्ट

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