Posted in हिन्दू पतन

देवी सिंग तोमर

एक जमाना था कानपुर की कपड़ा मिल विश्व प्रसिद्ध थीं
कानपुर को ईस्ट का मैन्चेस्टर बोला जाता था. लाल इमली जैसी फ़ैक्टरी के कपड़े प्रेस्टीज सिम्बल होते थे. वह सब कुछथा जो एक औ द्योगिक शहर में होना चाहिए. मिल का साइरन बजते ही लाखों मज़दूर साइकिल पर सवार टिफ़िन लेकर फ़ैक्टरी की ड्रेस में मिल जाते.
बच्चे स्कूल जाते. पत्नियाँ घरेलू कार्य करतीं. और इन लाखों मज़दूरों के साथ ही लाखों सेल्स man, मैनेजर, क्लर्क सबकी रोज़ी रोटी चल रही थी.

फ़िर कॉम्युनिस्ट की कुत्सित निगाहें कानपुर पर पड़ीं. आठ घंटे मेहनत मज़दूर करे और गाड़ी से मालिक चले. ढेरों हिंसक घटनाएँ हुईं
मिल मालिकों को मारा पीटा भी गया. नारा दिया गया काम के घंटे चार करो, बेरोज़गारी को दूर करो
. अलाली किसे नहीं अच्छी लगती है. ढेरों मिडल क्लास भी कॉम्युनिस्ट समर्थक हो गया. मज़दूरों को आराम मिलना चाहिए, ये उद्योग खून चूसते हैं.
कानपुर में कॉम्युनिस्ट सांसद बनी सुभाशिनी अली

अंततः वह दिन आ ही गया जब कानपुर के मिल मज़दूरों को मेहनत करने से छुट्टी मिल गई. मिलों पर ताला डाल दिया गया.
मिल मालिक आज पहले से शानदार गाड़ियों में घूमते हैं, उन्होंने अहमदाबाद में कारख़ाने खोल दिए. कानपुर की मिल बंद होकर भी ज़मीन के रूप में उन्हें अरबों देगी.
वो 8 घंटे यूनफ़ॉर्म में काम करने वाला मज़दूर बारह घंटे रिक्शा चलाने पर विवश हुआ. वह स्कूल जाने वाले बच्चे कबाड़ी बीनने लगे.
और वो मध्यम वर्ग जिसकी आँखों में खून उतरता था मज़दूर को काम करता देख, अधिसंख्य को जीवन में दुबारा कोई नौकरी ना मिली.
एक बड़ी जन संख्या ने अपना जीवन बेरोज़गार रहते हुवे डिप्रेसन में काटा.

कॉम्युनिस्ट अफ़ीम बहुत घातक होती है
उन्हें ही सबसे पहले मारती है, जो इसके चक्कर में पड़ते हैं
. दो क्लास के बीच पहले अंतर दिखाना, फ़िर इस अंतर की वजह से झगड़ा करवाना और फ़िर दोनों ही क्लास को ख़त्म कर देना कॉम्युनिज़म का बेसिक प्रिन्सिपल है

इन दिनों मज़दूर पलायन विषय पर ढेरों कुतर्क सुन रहा हूँ
प्रायः यह कुतर्क दसकों से चली आ रही सोसलिस्ट व्यवस्था की थिंकिंग की वजह से हैं
यदि आप द्रवित हैं तो उनकी मदद करें, यह मानवता है. बाक़ी जब तक दुनिया चलेगी सदैव क्लासेज़ ओफ़ पीपल रहेगा ही
. वो वामपंथी अजेंडा में फँस हवाई जहाज़ में चलने वाले बनाम कार में चलने वाले बनाम सूटकेस में चलने वाले जैसी बातों के सूतियापे में ना फँसे. यह आप ही के लिए घातक है

Author:

Buy, sell, exchange books

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s