Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

जब विश्वास खत्म होता है


 जब विश्वास खत्म होता है*

दादी ने कहानी यूँ शुरू की थी कि एक जंगल में एक बाबा जी रहते थे एक बार तेरे दादाजी घूमते घूमते बाबाजी की कुटिया में चले गए बाबा जी ने तेरे दादा जी से पूछा तुम यहां क्या कर रहे हो भाई इस जंगल में शेर रहता है जो तुझे मार सकता है तुम्हें यहां नहीं आना चाहिए था चले जाओ आइंदा मत आना, तेरे दादाजी वापस आ गए,

एक हफ्ते बाद दोबारा वहीं चले गए वहां न बाबाजी थे ने बाबाजी की कुटिया थी कुछ भी नहीं था जंगल पसरा हुआ था, दादाजी ने खूब ढूंढा कोई नहीं मिला फिर वह घर आ गए

उन्होंने मुझे सारी बात बताई कि पिछली बार मैं जंगल में गया और वहां बाबा जी को मिला था जिन्होंने कहा था कि यहां दोबारा मत आना आज तो मैं तुम्हें बचा रहा हूं यहां शेर है तुम्हें खा जाएगा मैं वहां से वापस आ गया लेकिन मैं आज वहां गया तो वहां ने बाबा जी थे और न ही वहां कुटिया थी, दादी ने दादा जी से कहा की वह बाबाजी नहीं था वह शेर था जो बाबाजी के रूप में आपको सावधान करने आया था,

दादी ने मुझसे कहा कि पुराने समय में शतयुग था महात्मा लोग कोई भी रूप बदल सकते थे महात्माओं में सत था आजकल कलयुग है अब वो बात नहीं है

मैंने कहा दादी न तो शेर कोई साधु बन सकता है और ना ही साधु कोई शेर बन सकता है यह पुराने समय के लोगों का कहानियां सुना कर टाइम पास करने का जरिए मात्र हैं !

दादी ने कहा “सतयुग की बातें तू क्या जाने बेटा”

मैंने कहा मैं सब जानता हूं पुराने लोग अनपढ़ होते थे बेचारे भोले-भाले लोग सुनी सुनाई बातों को सही मान लेते थे, अब सब लोग पढ़े लिखे हैं हर किस्से कहानी को सबूतों तथ्यों परिस्थितियों के आधार पर रखते हैं और फैसला करते हैं अब उनकी मदद करने के लिए गूगल है व्हाट्सएप है हर चीज की जानकारी मिल जाती है आजकल कोई भी आदमी इन किस्से कहानियों पर विश्वास नहीं करता,

दादी ने कहा बेटा वही तो मैं कह रही हूँ कलियुग किसे कहते हैं इसी को तो कलयुग कहते हैं लोग इतना ज्यादा पढ़ लिख गए हैं कि अब अपनों का भी विश्वास करना छोड़ दिया जब विश्वास खत्म होता है तब कलियुग शुरू होता है

बुजुर्गों का हम पर विश्वास बना रहे इसलिए हार मान लेना ही अच्छा रहता है

मैंने कहा “दादी तुम्हारी बात सही है”

सुरेंद्र शर्मा सत्यम

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