Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

मैं वही मेंढक हूं


नमस्ते इंसानों, 
मैं वही मेंढक हूं, जिसकी तुम लोगों ने अपने फायदे के लिए जबरन शादी करा दी थी। मैं बस ये पूछना चाहता हूं कि जब अपने फायदे के लिए अपने बच्चों की जबरन शादी कराने का ऑप्शन तुम्हारे पास था, तो मुझे बलि का मेंढक क्यों बनाया? इंसानों ने मेरी शादी कराई क्योंकि उन्हें लगा इससे काले बादल आएंगे और पानी बरसा जाएंगे। इंसानों तुम बिल्कुल भी नहीं बदले हो, तुम वही हो जो एक नेता हटाकर दूसरा नेता ले आते हो और ये सोचते हो कि इससे कालाधन आ जाएगा। 


यकीन मानो अगर हमारी शादी से पानी बरसता तो हमारे घर वाले इतनी ‘अरेंज मैरिजें’ करवाते कि साल भर पानी बरसता, बाढ़ आती और दुनिया में सिर्फ मेंढक बच पाते। पर गलती तुम्हारी नहीं है, तुमने इंसान होकर बस यही सीखा है। कोई भी समस्या हो तुम्हारे पास दो ही उपाय होते हैं, ‘सुबह जल्दी उठो’ या ‘शादी कर लो’। लोग कहते हैं मेंढक टर्र-टर्र करते हैं, जबकि हमने तो टर्र-टर्र करना भी तुम्हारे ‘शादी कर लो-शादी कर लो’ वाली टेर को सुनकर सीखा है। 


इंसानों मुझे शिकायत है तुमसे, इसलिए कि तुम मतलबी हो, इसलिए कि तुम अंधविश्वासी हो, इसलिए कि तुमने एक मेंढक की मर्ज़ी पूछे बिना उसकी शादी करा दी और सबसे बड़ी बात इसलिए कि तुमने कभी मेंढकों को मेंढकोचित सम्मान नहीं दिया। वो क्या कहते हो तुम? ‘घोड़े की नाल ठुकी तो मेंढक ने भी पैर उठा दिए।’ ये सोच है तुम्हारी हम मेंढकों के बारे में और उम्मीद ये रखते हो कि हमारे पाणिग्रहण से तुम्हारे पानी का ग्रहण खत्म होगा? जब हम अपना काम कर रहे थे, जब हम खुश थे, जब पानी बरस रहा था तब तो तुमने हमारी परवाह नहीं की। जब पानी बरसता और हम बोलते तो हमारी आवाज तुमसे नहीं सही जाती थी। हमारी आदतों को तुम दूसरे को नीचा दिखाने के लिए इस्तेमाल करते थे, कहते थे ‘बरसाती मेंढक बोलने लगे।’ अब जाओ, न हम बोलेंगे न बरसात होगी। 


याद रखना, संघर्ष करना भी तुमने हमसे ही सीखा है, याद करो वो कहानी जिसमें दो मेंढक दूध में गिर गए थे, लेकिन एक मेंढक हाथ-पैर चलाता रहा और मक्खन जमने पर बाहर आ गया था, लेकिन अब क्या ही कहूं तुम्हारे लालच को, आजकल तो दूध में भी इतना पानी मिलाने लगे हो तुम इंसान कि भलाई और मलाई का जमाना ही नहीं रह गया। 


2018 लग चुका है, इंसान मंगल तक पहुंचने की कोशिश में लगा है। मैं मंगल ग्रह नहीं, मंगलवार की बात कर रहा हूं, जैसे-तैसे सोमवार का ऑफिस झेलने के बाद मंगल को ऑफिस पहुंचने की कोशिश में लगा है। और तुम इतने अंधविश्वासी हो कि हमारी शादी से पानी बरसाना चाहते हो। हमें कूप मंडूक कहने वालों तुम क्या जानो 2बीएचके कुआं आजकल कितना महंगा आता है, गृहस्थी जमाने के लिए कुआं चाहिए होता है। जब से शादी करके लौटा हूं, घर वाले ‘गेट वेल (कुआं) सून’ कहने लगे हैं। 

तुमसे प्रताड़ित, 
नवविवाहत मेंढक।  

Sep 14, 2018 DainikBhaskar

Author:

Buy, sell, exchange books

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s