Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

लष्मीकांत विजयगढ़िया

इस पंक्ति को एक बार जरूर पढ़े

🌹 भावनाएं 🌹 *काम,क्रोध,लोभ,मोह,*

ईर्ष्या,प्रेम,अहंकार आदि सभी भावनाएं एक साथ एक द्वीप पर रहतीे थी;
एक दिन समुद्र में एक तूफान आया और द्वीप डूबने लगा;
हर भावना डर ​​गई और अपने अपने बचाव का रास्ता ढूंढने लगी;
लेकिन प्रेम ने सभी को बचाने के लिए एक नाव बनायी;
सभी भावनाओं ने प्रेम का आभार जताते हुए; शीघ्रातिशीघ्र नाव में बैठने का प्रयास किया;
प्रेम ने अपनी मीठी नज़र से सभी को देखा कोई छूट न जाये;
सभी भावनाएँ तो नाव मे सवार थी लेकिन अहंकार कहीं नज़र नहीं आया;
प्रेम ने खोजा तो पाया कि, अहंकार नीचे ही था; …
नीचे जाकर प्रेम ने अहंकार को ऊपर लाने की बहुत कोशिश की,लेकिन अहंकार नहीं माना;
ऊपर सभी भावनाएं प्रेम को पुकार रहीं थी;,”जल्दी आओ प्रेम तूफान तेज़ हो रहा है;,यह द्वीप तो निश्चय ही डूबेगा और इसके साथ साथ हम सभी की भी यंही जल समाधि बन जाएगी;। प्लीज़ जल्दी करो;”
“अरे अहंकार को लाने की कोशिश कर रहा हूँ; यदि तूफान तेज़ हो जाय तो तुम सभी निकल लेना; मैं तो अहंकार को लेकर ही निकलूँगा” प्रेम ने नीचे से ही जवाब दिया; और फिर से अहंकार को मनाने की कोशिश करने लगा;
लेकिन अहंकार कब मानने वाला था यहां तक कि वह अपनी जगह से हिला ही नहीं;
अब सभी भावनाओं ने एक बार फिर प्रेम को समझाया कि अहंकार को जाने दो क्योंकि वह सदा से जिद्दी रहा है;
लेकिन प्रेम ने आशा जताई,बोला, “मैं अहंकार को समझाकर राजी कर लूंगा तभी आऊगा;..!!”
तभी अचानक तूफान तेज हो गया और नाव आगे बढ़ गई;
अन्य सभी भावनाएं तो जीवित रह गईं;
लेकिन……..
अन्त में उस अहंकार के कारण प्रेम मर गया;
अहंकार के चलते हमेशा प्रेम का ही अंत होता है;
आईये अहंकार का त्याग करते हुए प्रेम को अपने से जुदा न होने दें…!!!
हम सब मिलकर जरूर जरूर विचार करें इसी मंगल में भावना के साथ

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