Posted in सुभाषित - Subhasit

” पश्य देवस्य काव्यम् न ममार न जीर्यति “अथर्ववेद १०-८-३२
इस प्रकृति को देखिये ये देवताओं का काव्य है ये अमूल्य पुस्तक है जो कभी नष्ट नही होती है न पुरानी इसे पढ़िए ।
पुस्तक दिवस की शुभकामनाएं

Posted in हास्यमेव जयते

” मैं तुम्हारी कुछ हेल्प करूँ क्या डियर “*

पति : ” कुछ काम हो तो बताओ, करता हूँ मैं। “
पत्नी : ” पूजा कर लो। “
पति : ” पूजा-वूजा तो मैं नहीं करूँगा। “

पत्नी : ” ठीक है, बेडशीट चेंज कर दो। “
पति : ” अच्छी, साफ सुथरी तो है, अब उसको क्या बदलना। “

पत्नी : ” अच्छा तो तरबूज ही काट लो। “
पति : ” तुम्हारे किचन के भोथड़े चाकू से उबले आलू तो कटते नहीं और तुम चाहती हो कि, उस चाकू से मैं तरबूज काटूँ ? तुम्हारी भी मुझसे गजब की अपेक्षाएँ हैं भई। “

पत्नी : ” चाय बना लो। “
पति : ” अरे! तुम्हारे हाथों से बनी चाय के बिना, मेरा दिन शुरू नहीं होता डियर। “

पत्नी : ” ओ के, मैं चाय बनाती हूँ तब तक तुम मशीन में धोने के लिए कपड़े डाल दो। “
पति : ” अब मुझे कैसे समझ आएगा कि, कौन कौन से कपड़े धोने हैं ? ये सब तो तुम्हीं देखो । “

पत्नी : ” ठीक है, बर्तनों के रैक पर बर्तन ही जमा दो। “
पति : ” अरे यार, अगर मैंने बर्तन जमाए तो जरूरत पर तुम्हें ढूँढे नहीं मिलेंगे। तुम ही अपने हिसाब से जमा लो। “

पत्नी : ” फर्नीचर पोछोगे क्या ? “
पति : ” अरे, साफ तो हैं फर्नीचर। तुमको भी न, बड़ा शौक है काम करने का। अभी और भी तो काम पड़े हैं, इसीलिए तो तुम्हारी हेल्प हो जाए सोचकर प्यार से तुमसे पूछा कि, कुछ काम हो तो बताओ। बोलो न, क्या हेल्प करूँ ? “

पत्नी : ” तो, तुम ही बोलो, क्या करोगे अब ? “
पति : ” अरे, यूँ अजीब तरीके से क्यों बोल रही हो ? तुम्हारे लिए तो मैं सब कुछ करने को तैयार हूँ। “

पत्नी : ” अलग तरीके से नहीं बोल रही हूँ। लेकिन क्या कहूँ, अब तो कुछ काम ही नहीं है। “
पति : ” वही तो। देख लो, हम दोनों मिलकर करते हैं तो, अपने घर का, सारा काम, कैसे फटाफट पूरा हो जाता है….. “

😀😀😀😀😀😀