Posted in सुभाषित - Subhasit

शुभकामना मन्त्र:

यह शुभकामना मन्त्र सबके कल्याण की अभिव्यक्ति के लिए है। हमारे मन में किसी के प्रति द्वेष न हो, अशुभ चिन्तन किसी के लिए भी न करें। जिनसे संबंध कटु हो गये हों, उनके लिए भी हमें मङ्गल कामना ही करनी चाहिए। द्वेष-दुर्भाव किसी के लिए भी नहीं करना चाहिए। सबके कल्याण में अपना कल्याण समाया हुआ है। परमार्थ में स्वार्थ जुड़ा हुआ है, यह मान्यता रखते हुए हमें सर्वमङ्गल की व लोककल्याण की आकांक्षा रखनी चाहिए। शुभ कामनाएँ इसी की अभिव्यक्ति के लिए हैं।

सब लोग दोनों हाथ पसारें, इन्हें याचना मुद्रा में मिला हुआ रखें। निम्नलिखित मन्त्रोच्चार के साथ-साथ इन्हीं भावनाओं से मन को भरे रहें।

ॐ स्वस्ति प्रजाभ्यः परिपालयन्तां, न्याय्येन मार्गेण महीं महीशाः ।
गोब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं, लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु॥१॥

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखमाप्नुयात्॥२॥

श्रद्धां मेधां यशः प्रज्ञां, विद्यां पुष्टिं श्रियं बलम् ।
तेज आयुष्यमारोग्यं, देहि मे हव्यवाहन॥३॥

======================

श्रद्धां मेधां यशः प्रज्ञां विद्यां बुद्धिं श्रियं बलम् ।
आयुष्यं तेज आरोग्यं देहि मे हव्यवाहन ॥

Meaning:
Oh! Messenger (Agni) give me faith, wisdom, glory, understanding, ing, intellect, wealth, power, longetivity, lusture, and health.

======================Word meanings:
श्रद्धां = faith; dedication; belief;
मेधां = intellect; intelligence; also Sarasvati the goddess of ing;
यशः = fame; reputation;
प्रज्ञां = conscipusness;
विद्यां = knowledge;
बुद्धिं = intellect; intelligence;
श्रियं = Goddess LakShmi; wealth; prosperity;
बलं = A lad or son;
आयुष्यं = promoting longevity;
तेज = power; strength; body’s lustre or shine; firepower; sharpness;
आरोग्यं = good health;
देहि = Give;
मे = to me or my;
ॐ = same as `OM’ i.e. the praNava or `o.nkAra’ mantra;
नम = mine; my;
इति = thusthus;

=====================

क्रियासिद्धिस्सत्वे भवति महतां नोपकरणे ।
सेवादीक्षित ! चिरप्रतिज्ञ ! मा विस्मर भोस्सृक्तिम् ॥

न धनं न बलं नापि सम्पदा न स्याज्जनानुकम्पा
सिद्धा न स्यात् कार्यभूमिका न स्यादपि प्रोत्साहः
आवृणोतु वा विघ्नवारिधिस्त्वं मा विस्मर सूक्तिम् । क्रियासिद्धि: ॥

आत्मबलं स्मर बाहुबलं धर परमुखप्रेक्षी मा भू:
क्वचिदपि मा भूदात्मविस्मृतिः न स्याल्लक्ष्याच्च्यवनम् ।
आसादय जनमानसतप्रीतिं सुचिरं संस्मर सूक्तिम्। क्रियासिद्धिः ॥

अरुणसारथिं विकलसाधनं सूर्यं संस्मर नित्यम्
शूरपूरुषान् दृढानजेयान् पदात्पदं स्मर गच्छन्
सामान्येतरदृग्भ्यस्सोदर, सिध्यति कार्यमपूर्वम्। क्रियासिद्धिः ॥

Author:

Buy, sell, exchange books

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s