Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

हमारे चिकित्सा पुरोधा


सत्य प्रकाश शर्मा

हमारे चिकित्सा पुरोधा (1 )
अति प्राचीन काल से हमारे देश में वेदों पर आधारित चिकित्सा विज्ञान अपनी चरम सीमा पर रहा है | हमारे ऋषिओं मनीषियों ने चिकित्सा विज्ञान को उन्नत और प्रतिष्ठित किया किया , इनका मूलमंत्र परोपकाय शतां विभूतयः रहा | पूरा विश्व जब निष्क्रिय था तव हम चिकित्सा क्षेत्र में शिखर पर रहे हैं |
प्रजापति :- – सभी जीवों के देव ने आयुर्वैदिक विद्या प्रदान की |
अश्विनी कुमार :- – ये दोनों जुड़वां भाई थे , जो देवताओं का उपचार करते थे | शल्य चिकित्सा में इनका कोई मुकाबला नहीं था | इन्होंने दधीच ऋषि से मृत व्यक्ति को भी जीवित करने की मधु – विद्या सीखी थी | इनके ग्रन्थ ‘ चिकित्सा सारतंत्र ‘ , ‘ अश्विनी संहिता ‘ , ‘धातुरत्नमाला ‘ , नाड़िनिदानं ‘ प्रमुख रहे |
धन्वंतरि :- – भारतीय चिकित्सा क्षेत्र में बहुत जाना माना नाम है , इन्होंने अमृतमय औषिधिओं की खोज की थी | आयुर्वेद में इनका महान कार्य रहा |
निमि :- – सीता के परदादा निमि को नेत्र विशेषज्ञ कहा जाता है , ये अनेकों प्रकार के नेत्र ऑपरेशनों के विशेषज्ञ भी थे | इन्होने ‘वैद्य संदेह भंजनि ‘ , और ‘जनकतंत्र ‘ग्रन्थ लिखे |
अत्रेय :- – इनको जीवन विज्ञान का प्रमुख शिक्षक माना जाता है | किस रोग में कौनसी दवा काम करती है के विषय पर इन्होने छः शास्त्र लिखे | इनके मेधावी छात्र अग्निवेश ने अपना ‘अग्निवेश तंत्र ‘ लिखा | धनुर्विद्या में पारंगत अग्निवेश ने महाभारत के द्रोणाचार्य को धनुर्विद्या सिखाई थी | – – – – – – क्रमशः

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