Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

मोदी की मोमबत्ती और मेरा मन-

एक बार कबीरदास जी का पड़ोसी कबीरदास जी के घर आया।।
दिन का समय था,तेज़ धुप थी। पड़ोसी बैठा बोला- एक बात पुछनी थी गुरू!!

कबीर बोले,पुछ

आप और भाभी जी में कभी झगड़ा नहीं होता और मेरा हर वक़्त अपनी पत्नी से झगड़ा होता रहता है।। ऐसा क्यों ।।मुझे बताएँ

कबीर ने पड़ोसी को जवाब दिये बिना अपनी पत्नी को आवाज़ दी-
अरे सुनना,ज़रा मोमबत्ती जलाकर लाना !!

पत्नी बोली- जी हुकम..और मोमबत्ती जलाकर ले आई ।।

पड़ोसी परेशान,बेचैन…
कबीर से बोला-इतना उजाला, तेज़ धुप आपने मोमबत्ती क्यों जलवाई और क्यों मँगवाई ??

कबीर बोले- मेरी मर्ज़ी,तुझे क्या
अब पड़ोसी ने कबीर की पत्नी से पुछा-भाभी जी आप तो समझदार है आपने इतने उजाले मे तेज़ धुप मे इनकी बात मानकर मोमबत्ती जलाकर क्यों लाई।

कबीर की पत्नी बोली- तुझे क्या ।।

हुकम बोले… जो(वो)आदेश।।

अब कबीर बोले- बेटा- बात मोमबत्ती की नहीं है ।बात मन की है। मैंने कह दिया,उसने मान लिया ।। उसने मुझे मन से मान लिया है।।
इसलिए if,but क्यों,क्या,कैसे ।। हम आपस मे नहीं करते।।
हम दोनों का आपस में समर्पण भाव है । एक दूसरे के लिए।।

फिर कबीर बोलें-अब ये मोमबत्ती अपने घर ले जा ।। और इसे इस रविवार 5 अप्रेल को रात 9 बजे 9 मिनट के लिए घर की सारी लाईटे बंद करके घर के दरवाज़े पर जला लेना।।

लाकडाउन है।। बाहर मोमबत्ती मिले ना मिलें।।

पड़ोसी को जवाब मिल चुका था। वो कबीरदास जी को प्रणाम कर, मोमबत्ती लेकर ख़ुशी ख़ुशी घर लौट गया।।

आपका: राजेश श्रीमाली

मोदी #मोमबत्ती #5April

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