Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

पत्नी का लाकडाउन
😬😲😳🙃☹️😣😌😒🙄😮👏👏
🌞सुबह का नौ बज चुका था। पत्नी बिस्तर पर ही थी मैने अंगड़ाई लेते हुए पूछा,’ क्या बात है?आज चाय वाय नहीं मिलेगी क्या?
पत्नी बोली,”सही पकड़े है,आज से सब बन्द”।🤷🏻‍♀
मैं तुम और तुम्हारे इन दोनों बच्चों से तंग आ चुकी हूं,दिन भर में थक जाती हूँ।🤦🏻‍♀️
कमबख्त ये लाकडाउन नहीं हुआ,दिमाग का दही हो गया है।
🤝🏻आवाज़ में दल बदलुओं की तरह परिवर्तन को भांपते हुए मैने गले मे हाथ डालते हुए कहा,’ क्यों नाराज़ हो!हम सब तो तुम्हारे गुलाम है।’
हाथ छिटकते हुए पत्नी बोली रहने दो,मैं आज आप सब से रात आठ बजे बात करूंगी,मैं नारी हूँ,अबला हूं।😣
आप लोगों ने गुलाम बना रखा है।अपना हक मैं लेके रहूंगी।
भूलो मत,भूलो मत।☝️
कहते हुए वह उठकर चली गई और मैं ‘कारवां गुज़र गया,गुबार देखते रहे‘ वाली स्टाइल में चुपचाप चाय बनाने किचन में चल दिया।
दिन भर बड़ा खुटका रहा,पत्नी न जाने क्या क्या कागज़ों में लिखती रही।रात आठ बजे की तैयारी थी, शायद खैर,आठ भी बजे।
हम सब के लिए दरी बिछा दी गई थी,सामने सोफे पर साफ कवर लगा था,टेबल पर पानी की बोतल थी।ज़ाहिर था पत्नी वहां बैठेगी,मैडम ठीक आठ बजे अवतरित हुई।सोफे पर धीर गम्भीर मुद्रा में बैठ गई।☺️इतना गम्भीर मैने शायद उन्हें पहले कभी नहीं देखा था।
फिर बोली,मेरे प्यारों मैं आप सबकी चौबीस घण्टे की चाकरी करते करते थक गई हूं।आप सब लाकडाउन के चलते घर मे बैठे हैं ट्रैन के डिब्बे की भांति आप सब सिर्फ खाए जा रहे है और सो रहे है,थोड़ी थोड़ी देर में टॉयलेट जाते रहते है बस।
मोबाइल लिए बैठे रहते हैं,टी वी के प्रोग्राम और न्यूज देखते रहते हैं।
लेकिन मैं अटेंडर की तरह इधर से उधर दौड़ती रहती हूं,बहुत नाइंसाफी है। इसलिए मैंने बहुत सोच समझकर ये फैसला लिया है कि🤔
आज रात बारह बजे से….
कहते हुए उन्होंने थोड़ा पॉज़ लिया,ध्यान से सुनिएगा।आज रात बारह बजे से…..।
फिर पॉज़….।
🙄हमारी सबकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी। पता नहीं क्या कहेंगी। फिर बोली,
😱आज रात बारह बजे से इस घर में मेरा लॉक डाउन रहेगा।आप सबको अपनी अपनी व्यवस्था स्वयं करनी होगी,यदि आप चाहते है कि सब कुछ सकुशल चलता रहे तो आपको मेरे द्वारा बनाई गई आचार संहिता का पालन करना ही होगा।
पहली धारा के अनुसार किचन इमरजेंसी में ही खुलेगा,वो भी मेरी मर्ज़ी से। इमरजेंसी का मतलब है सिर्फ ब्रेकफास्ट,लंच,डिनर और वो भी सीमित मात्रा में। शाम चार बजे का स्नैक का प्रोग्राम निरस्त किया जाता है,चाय या काफी सिर्फ सुबह और शाम को ही मिलेगी।चाय का चाला दिन भर नहीं चलेगा। खाने के स्वाद,मात्रा और गुणवत्ता पर किसी को कुछ भी बोलने का हक नहीं होगा और सुन लीजिए यदि लॉक डाउन लम्बा चला तो सेवाओं में कटौती भी की जा सकती है।कटौती कितनी होगी,अभी कहा नहीं जा सकता।आप सबको इन बातों को मानना ही होगा। यह सूचना निर्विवाद रूप से आज रात बारह बजे से अस्तित्व में आ जाएगी।
फिर उंगली दिखाते हुए बोली,☝️
यदि घर में सुरक्षित व ठीक ढंग से रहना है तो इन नियमों का पालन करना ही होगा अन्यथा बाहर सड़क पर पुलिस वालों से सुजवाने के लिए तैयार रहना।🤷🏻‍♀
इतने प्रभावी भाषण के सामने हम सब हतप्रभ थे।कोई दूसरा चारा भी न था। जान बचाने के लिए हम सबने एक मत से वन्दे मातरम कहते हुए नियमावली पर हस्ताक्षर कर दिए।✍🏻✍🏻
🙏🏻🙏

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