Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 479वी जयंती पर पढ़िए उनका संक्षिप्त जीवनकाल”

9 मई, 1540 ई. :- कुंभलगढ़ में जन्म
1552 ई. :- कुंभलगढ़ से चित्तौड़गढ़ प्रस्थान
1555 ई. :- 15 वर्ष की उम्र में जैताणा के युद्ध में करण सिंह को मारकर डूंगरपुर रावल आसकरण की फौज को पराजित किया
1556 ई. :- छप्पन के इलाके पर कब्जा किया
1557 ई. :- बिजोलिया की राजकुमारी अजबदे बाई सा से विवाह
1563 ई. :- राठौड़ राजपूतों को पराजित कर भोमठ पर कब्जा किया
1565 ई. :- गोडवाड़ पर आक्रमण व विजय
अक्टूबर, 1567 ई. :- कुंभलगढ़ पर हुसैन कुली खां के आक्रमण को विफल किया
1572 ई. :- मेवाड़ के महाराणा बने व सिरोही पर कब्जा किया | कुछ समय बाद सिरोही राव सुरताण से मित्रता कर ली |
1572 ई. :- महाराणा द्वारा मंदसौर के मुगल थानों पर हमले व विजय
1573 ई. :- गुजरात से आगरा जाती हुई मुगल फौज पर हमला किया व खजाना लूट लिया
1572 ई. से 1573 ई. के बीच अकबर द्वारा भेजे गए 4 सन्धि प्रस्तावों को खारिज किया :- 1) जलाल खां 2) मानसिंह 3) भगवानदास 4) टोडरमल
1574 ई. :- सिन्हा राठौड़ को पराजित कर सलूम्बर पर अधिकार
1576 ई. :- हल्दीघाटी का विश्व प्रसिद्ध युद्ध हुआ, जो कि अनिर्णित रहा
23 जून, 1576 ई. :- गोगुन्दा की लड़ाई। आमेर के मानसिंह द्वारा गोगुन्दा पर कब्ज़ा।
अगस्त, 1576 ई. :- महाराणा प्रताप द्वारा अजमेर, गोडवाड़, उदयपुर की मुगल छावनियों में लूटमार
सितम्बर, 1576 ई. :- महाराणा प्रताप ने गोगुन्दा पर हमला किया व कईं मुगलों को मारकर गोगुन्दा पर कब्जा किया
अक्टूबर, 1576 ई. :- मुगल बादशाह अकबर का 60,000 जंगी सवारों समेत मेवाड़ पर हमला
अकबर एक वर्ष तक मेवाड़ में ही रहा व महाराणा प्रताप पर कईं हमले किए, पर हर बार नाकामयाबी मिली
महाराणा प्रताप ने कुतुबुद्दीन, भगवानदास, मानसिंह को पराजित करते हुए गोगुन्दा पर दोबारा अधिकार किया
महाराणा प्रताप के खौफ से हज यात्रियों के जुलूस की हिफाजत में अकबर द्वारा 2 फौजें भेजी गईं
महाराणा प्रताप ने दूदा हाडा को बूंदी जीतने में मदद की
1577 ई. :- महाराणा प्रताप द्वारा दिबल दुर्ग पर अधिकार
23 फरवरी, 1577 ई. :- ईडर के युद्ध में महाराणा प्रताप व ईडर के राय नारायणदास ने मुगलों का सामना किया
1577 ई. :- ईडर के दूसरे युद्ध में मुगलों की रसद व खजाना लूट लिया
मई-सितम्बर, 1577 ई. :- महाराणा प्रताप ने गोगुन्दा, उदयपुर समेत कईं मुगल थानों पर कब्जा किया
अक्टूबर, 1577 ई. :- महाराणा प्रताप ने मेवाड़ के सबसे बड़े मुगल थाने मोही पर हमला किया | थानेदार मुजाहिद बेग कत्ल हुआ व मोही पर महाराणा का अधिकार हुआ |
अक्टूबर, 1577 ई. :- अकबर ने शाहबाज खां को फौज समेत मेवाड़ भेजा
नवम्बर, 1577 ई. :- महाराणा प्रताप द्वारा केलवाड़ा मुगल थाने पर लूटमार, 4 मुगल हाथी लूटे
1578 ई. :- कुम्भलगढ़ का युद्ध :- शाहबाज खां ने कुम्भलगढ़ पर अधिकार किया
महाराणा प्रताप ने कुम्भलगढ़ की पराजय के प्रतिशोध स्वरुप जालौर व सिरोंज के सभी मुगल थाने जलाकर खाक किये

1578 ई. :- महाराणा प्रताप की डूंगरपुर-बांसवाड़ा विजय
15 दिसम्बर, 1578 ई. :- शाहबाज खां का दूसरा असफल मेवाड़ अभियान
1578 ई. :- भामाशाह को फौज देकर मालवा पर हमला करने भेजना
15 नवम्बर, 1579 ई. :- शाहबाज खां का तीसरा असफल मेवाड़ अभियान
1580 ई. :- अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना का असफल मेवाड़ अभियान, महाराणा ने रहीम की बेगमों को मुक्त कर क्षात्र धर्म का पालन किया
1580 ई. :- मालवा में भामाशाह के भाई ताराचंद के ज़ख़्मी होने पर महाराणा प्रताप द्वारा मालवा से ताराचंद को सुरक्षित चावण्ड लाना व रास्ते में आने वाली मुगल चौकियों को तहस-नहस करना, साथ ही मंदसौर के सबसे बड़े मुगल थाने पर हमला व विजय
अक्टूबर, 1582 ई. :- दिवेर का युद्ध :- महाराणा प्रताप द्वारा अकबर के काका सुल्तान खां की पराजय
1583 ई. :- हमीरपाल झील पर तैनात मुगल छावनी हटाई
1583 ई. :- कुम्भलगढ़ का दूसरा युद्ध :- महाराणा प्रताप ने दुर्ग पर अधिकार किया | मुगल सेनापति अब्दुल्ला खां कत्ल हुआ |
1583 ई. :- महाराणा प्रताप ने मांडल के थाने पर हमला किया | इस थाने के मुख्तार राव खंगार कछवाहा व नाथा कछवाहा कत्ल हुए | ये दोनों मानसिंह के काका थे | दोनों ही क्रमश: खंगार राजपूतों व नाथावत राजपूतों के मूलपुरुष थे |
1583 ई. :- बांसवाड़ा में मानसिंह चौहान से युद्ध
1584 ई. :- उदयपुर के राजमहलों में तैनात मुगलों पर महाराणा प्रताप का हमला व विजय | अकबर द्वारा 1576 ई. में उदयपुर का नाम ‘मुहम्मदाबाद’ रखने पर महाराणा द्वारा फिर से नाम बदलकर उदयपुर रखना |
1584 ई. :- अकबर ने जगन्नाथ कछवाहा को फौज समेत मेवाड़ भेजा, पर ये अभियान भी महाराणा प्रताप को पराजित नहीं कर सका
1584 ई. :- अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना का दोबारा असफल मेवाड़ अभियान
1585 ई. :- लूणा चावण्डिया को पराजित कर चावण्ड पर अधिकार व चावण्ड को राजधानी बनाना
1586 ई. :- नवाब अली खां को पराजित करना
1586 ई. :- अकबर द्वारा 1568 ई. में चित्तौड़गढ़ का नाम “अकबराबाद” रखने के कारण महाराणा प्रताप द्वारा चित्तौड़ के एक शाही थाने पर हमला व विजय, गढ़ नहीं जीतने के बावजूद महाराणा ने नाम बदलकर पुनः चित्तौड़गढ़ रखा
1585 – 87 ई. :- महाराणा प्रताप द्वारा मोही, मदारिया समेत कुल 36 मुगल थानों पर हमले व विजय
1588 ई. :- महाराणा प्रताप की जहांजपुर विजय
1589 ई. महाराणा प्रताप द्वारा सूरत के शाही थानों में लूटमार व हाथी पर सवार सूरत के मुगल सूबेदार को भाले से मारना
1591 ई. :- राजनगर के युद्ध में महाराणा की फौज द्वारा दलेल खां की पराजय
1591 ई. :- दिलावर खां से कनेचण का युद्ध
29 जनवरी, 1597 ई. :- वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप—–🙏
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