Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🌹🌷जय श्री राधे कृष्णा 🌷🌹

राहुल शिवहरे जिला छतरपुर भोपाल

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“झूठे रिश्ते (एक प्रसंग)” एक बार एक संत के पास एक युवक सत्संग सुनने के लिए आया। संत ने उससे हाल-चाल पूछा, तो उसने स्वयं को अत्यंत सुखी बताया। वह बोला, ''मुझे अपने परिवार के सभी सदस्यों पर बड़ा गर्व है। मैं उनके व्यवहार से संतुष्ट हूँ।'' संत बोले, ''तुम्हें अपने परिवार के बारे में ऐसी धारणा नहीं बनानी चाहिए। इस दुनिया में अपना कोई नहीं होता। जहाँ तक माता-पिता की सेवा और पत्नी-बच्चों के पालन-पोषण का संबंध है, उसे तो कर्तव्य समझकर ही करना चाहिए। उनके प्रति मोह या आसक्ति रखना उचित नहीं।" युवक को संत की बात ठीक नहीं लगी। उसने कहा, ''आपको विश्वास नहीं कि मेरे परिवार के लोग मुझसे अत्यधिक स्नेह करते हैं। यदि मैं एक दिन घर न जाऊं, तो उनकी भूख-प्यास, नींद सब उड़ जाती है और पत्नी तो मेरे बिना जीवित भी नहीं रह सकती है।" संत बोले, "तुम्हें प्राणायाम तो आता ही है। कल सुबह उठने के बजाए प्राणवायु मस्तक में खींचकर निश्चेत पड़े रहना। मैं आकर सब कुछ देख लूँगा।'' दूसरे दिन युवक ने जैसा संत ने बताया था वैसा ही किया। युवक को मृत जानकर उसके सभी घर के लोग विलाप करने लगे। तभी संत वहाँ पहुँचे। घर के सभी सदस्य संत के चरणों में गिर गए। संत बोले, ''आप चिंता मत करें मैं मंत्र से प्रयत्न कर इसे जिंदा कर देता हूँ। लेकिन कटोरी भर पानी परिवार के किसी अन्य सदस्य को पीना पड़ेगा। उस पानी में ऐसी शक्ति है कि यह तो जीवित हो उठेंगे, लेकिन उस पानी को पीने वाला मर जाएगा।" यह सुनने के बाद घर के सभी सदस्य एक दूसरे का मुँह देखने लगे। किसी को भी पानी पीने के लिए तैयार होता न देखकर संत ने कहा कि मैं ही इस पानी को पी लेता हूँ। इस पर घर के सभी सदस्य बोले कि, ''आप धन्य हैं। आप जैसे परोपकारी लोग बहुत कम पैदा होते हैं।" युवक इस पूरे घटनाक्रम को चुपचाप सुन रहा था। उसे संत की बातों पर विश्वास हो गया। प्राणायाम कर वह उठ गया। यह देखकर घर के सभी सदस्य चौंक गए। युवक संत से बोला कि, "आपने मुझे नया जीवन दिया है। इस नश्वर संसार में कोई भी अपना नहीं है। अब मैं हरि भजन करूँगा। संसार में आसक्ति नहीं रखूँगा, अपना कर्तव्य समझकर माता-पिता, पत्नी और बच्चों का पालन करूँगा।"

🌹🌷जय श्री राधे कृष्णा 🌹🌷

राहुल शिवहरे जिला छतरपुर भोपाल

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