Posted in Love Jihad

लव #जिहाद

राजस्थान के जैसलमेर जिले के मुस्लिम गाँव सनावाडा में १९६६ में हुई एक घटना का वर्णन कर रहा हूँ .
मुस्लिम बहुल गाँव ,जहाँ का सरपंच मुस्लिम ,था ,सरपंच का पुत्र जोधपुर में पढाई कर रहा था ,गर्मी के अवकाश में लड़का अपने गाँव आया हुआ था .पास के गाँव के एकमात्र श्रीमाली ब्राह्मण परिवार की कन्या सरपंच के पुत्र को भा गई .पहले तो पिता ने पुत्र को समझाया ,धर्म और मजहब में अंतर बताया ,किन्तु जब पुत्र जिद्द पर अड़ गया तो सरपंच 10 मुसलमानों को साथ लेकर ब्राह्मण के घर गया और कन्या का हाथ अपने पुत्र के लिए माँगा /
ब्राह्मण परिवार पर तो मानो ब्रजपात हो गया हों .
किन्तु सोचकर ब्राह्मण ने दो माह का समय माँगा ,/
दुसरे दिन हतास ब्राह्मण पास के राजपूत गाँव में वहां के ठाकुर के निवास पर गया ,और निवास के मुख्य द्वार के सामने फावड़े से मिटटी खोदने लगा /
ठाकुर साहब उस समय घर पर नहीं थे .17 वर्षीय कुंवर और उनकी पता जी घर में थे ./जब ब्राह्मण द्वारा मिटटी खोदने की सुचना उन्हें मिली तो कुंवर ब्राम्हण के पास गए और मिटटी खोदने का कारन पूछा ./ब्राह्मण ने उत्तर दिया ,कुंवर जी मेने सुना है धरती माता कभी बीज नहीं गंवाती .खोद कर देख रहा हूँ कि क्षत्रिय समाज का बीज आज भी है या नष्ट हो चूका है .
कुंवर बात को समाज गए ,उन्होंने ब्राह्मण को वचन दिया कि आप निंचित रहे आपकी बात के लिए प्राण दे दूंगा किन्तु पीछे नहीं हटूंगा .आप अतिथि घर में पधारिये /स्नान आदि करके भोजन करिए .तब तक पिताश्री भी आ जायेंगे ./आपको निराश नहीं करेंगे /
जब ठाकुर साहब वापिस आये तो कुंवर ने पूरी बात बताई और वचन देने वाली बात भी बताई /
ठाकुर साहब ने ब्राह्मण से कहा कि मैं आपको धन देता हूँ ,आप कोई योग्य ब्राह्मण लड़का देख कर अपनी कन्या का रिश्ता तय कर लें .साथ ही मुसलमान सरपंच को दो माह बाद बारात लेकर आपके घर अमन्त्र्ण करें .बाकी का कार्य हम पूरा करेंगे /
बताये समय पर मुसलमान सरपंच भारी दलबल के साथ ब्राह्मण के घर बारात लेकर पहुँच गया ./ तिलक के समय ठाकुर के तरुण कुंवर ने अपने दो चाचा के साथ मिल कर पहले वर का सर काटा और उसके बाद कार्बाइन से गोली चला कर 17 बाराती सरपंच और मुल्ला को जहन्नुम पहुंचा दिया /
उस दिन का दिन और आज का दिन जैसलमेर में आज तक कोई लव जिहाद जेसी घटना नहीं हुई / कुंवर आज भी जीवित है .और मुसलमान उनको देख कर आज भी भय से कम्पते है /
मेरे सहपाठी भाई भीमसिंह ने मुझे कुंवर साहब से मिलवाया था
जय सनातन जय राजपुताना

सौजन्य:
तेजस अशोक भारती

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