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वसंत पंचमी के 5 रहस्य
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बसंत ऋतु में होली, धुलेंडी, रंगपंचमी, बसंत पंचमी, नवरात्रि, रामनवमी, नव-संवत्सर, हनुमान जयंती और गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाए जाते हैं। इनमें से रंगपंचमी और बसंत पंचमी जहां मौसम परिवर्तन की सूचना देते हैं वहीं नव-संवत्सर से नए वर्ष की शुरुआत होती है। इसके अलावा होली-धुलेंडी जहां भक्त प्रहलाद की याद में मनाई जाती हैं वहीं नवरात्रि मां दुर्गा का उत्सव है तो दूसरी ओर रामनवमी, हनुमान जयंती और बुद्ध पूर्णिमा के दिन दोनों ही महापुरुषों का जन्म हुआ था।

🦚1. श्रीकृष्ण ने कहा था ऋ‍तुतों में मैं वसंत हूं : क्यों कहा ऐसा कृष्ण ने? क्योंकि प्रकृति का कण-कण वसंत ऋतु के आगमन में आनंद और उल्लास से गा उठता है। मौसम भी अंगड़ाई लेता हुआ अपनी चाल बदलकर मद-मस्त हो जाता है। प्रेमी-प्रेमिकाओं के दिल भी धड़कने लगते हैं। जो लोग ‘जागरण’ का अभ्यास कर रहे हैं उनके लिए वसंत ऋतु उत्तम है।

🙏2.प्रेम दिवस : वसंत पंचमी को मदनोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। कामदेव का ही दूसरा नाम है मदन। इस अवसर पर ब्रजभूमि में भगवान श्रीकृष्ण और राधा के रास उत्सव को मुख्य रूप से मनाया जाता है। औषध ग्रंथ चरक संहिता में उल्लेखित है कि इस दिन कामिनी और कानन में अपने आप यौवन फूट पड़ता है। ऐसे में कहना होगा कि यह प्रेमी-प्रेमिकाओं के लिए इजहारे इश्क दिवस भी होता है।

🌈3.प्रकृति का परिवर्तन : इस दिन से जो-जो पुराना है सब झड़ जाता है। प्रकृति फिर से नया श्रृंगार करती है। टेसू के दिलों में फिर से अंगारे दहक उठते हैं। सरसों के फूल फिर से झूमकर किसान का गीत गाने लगते हैं। कोयल की कुहू-कुहू की आवाज भंवरों के प्राणों को उद्वेलित करने लगती है। गूंज उठता मादकता से युक्त वातावरण विशेष स्फूर्ति से और प्रकृति लेती हैं फिर से अंगड़ाइयां।

✍️4.देवी सरस्वती का जन्मदिन : मूलत: यह पर्व ज्ञान की देवी सरस्वती के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। कवि, कथाकार, चित्रकार, गायक, संगीतकार और विचारकों के लिए इस दिन का महत्व है। सरस्वती देवी का ध्यान और पूजन ज्ञान और कला की शक्ति को बढ़ाता है।

🕉️5.प्राणायाम और ध्यान : जिन्हें प्राणायाम का ज्ञान है वे जानते हैं कि इस मौसम में प्राणायाम करने का महत्व क्या है। इस मौसम में शुद्ध और ताजा वायु हमारे रक्त संचार को सुचारु रूप से चलाने में सहायक सिद्ध होती है। मन के परिवर्तन को समझते हुए ध्यान करने के लिए सबसे उपयोगी ऋतु सिद्ध हो सकती है।

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-: ટીપ :-

ટેબલ ઉપર વાનગીની ટ્રે લઈને આવેલો સુખદેવ ટેબલ પરના મહેમાનો જોઈને હેબતાઈ ગયો.

સહેજે પચીસ વર્ષ પછી આ ચહેરાઓને જોઈ રહ્યો હતો. પેલા ચાર જણાએ કદાચ એને ઓળખ્યો ન હતો કે પછી ઓળખવા માંગતા ન હતા.

ચારમાંથી બે મોબાઈલ પર વ્યસ્ત હતા .. અને બાકીના બે લેપટોપ પર.

કદાચ હમણાં જ થયેલી ડીલના આંકડા ગણી રહ્યા હતા.

સ્કૂલના મિત્રો ઘણા આગળ વધી ગયા હતા અને પોતે કોલેજ સુધી પણ પહોંચ્યો ન હતો.

વચ્ચે બે – ત્રણ વાર ટેબલ પર જવાનું થયું, પણ સુખદેવે સિફતથી પોતાની નેમ પ્લેટ છુપાવીને વાનગી સર્વ કરી.

ચારે બિઝનેસમેન ડિનર પતાવીને નીકળી ગયા.

હવે પાછા અહીં ક્યારેય ન આવે તો સારું.
પોતાની નિષ્ફળતાને કારણે શાળાકાળના મિત્રો સાથે ઓળખાણ તાજી કરતાં સુખદેવને ભારે સંકોચ થયો હતો.

સુખદેવ, ટેબલ ક્લીન કરી નાખ. ત્રણ હજારનું બિલ અને સાલાઓએ એક પૈસો પણ ટીપમાં નથી મૂક્યો.
મેનેજર બબડતો હતો.

ટેબલ સાફ કરતા સુખદેવે ટેબલ પર પડેલો પેપર નેપ્કિન ઉપાડ્યો.

બિઝનેસ ચલાવતા લોકોએ પેનથી કદાચ પેપર નેપ્કિન પર પણ આંકડા માંડ્યા હતા.

ફેંકી દેતા પહેલાં એનાથી પેપર નેપ્કિન તરફ જોવાઈ ગયું.

તેમાં લખેલું હતું …….

તને ટીપ આપતાં જીવ ચાલ્યો નહીં સુખા, આ હોટેલ પાસે જ ફેક્ટરી લીધી છે,
એટલે
અહીં આવવા જવાનું તો થતું રહેશે,

તું અમારી સાથે જમતો ન હોય અને અમારે માટે, જમવાનું લાવતો હોય એ કેવું લાગે ?

આપણે તો નાસ્તાના એક જ ડબ્બામાંથી ભાગ પડાવતા.

આજે આ નોકરીનો તારો છેલ્લો દિવસ,

ફેક્ટરીનો કાફેટેરિયા કોઈએ તો ચલાવવો પડશેને ?

લિ.નવચેતન સ્કૂલના તારા નામચીન દોસ્તો.

નીચે ફેક્ટરીનું નામ અને ફોન નંબર લખેલા હતા.

અત્યાર સુધીમાં મળેલી સૌથી મોટી ટીપને સુખદેવે ચૂમીને છાતી સરસી ચાંપીને ખિસ્સામાં મૂકી દીધી.

This is the Quality of Real Freinds !!

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प्रेरणादायक कहानी

एक बच्चे ने 10th बोर्ड परीक्षा में 95% अंक अर्जित किये ।

प्राचार्य उसे स्कूल के मंच पर लेकर गये और कहा कि बेटा इन बच्चों को बताओ कि तुमने इतनी सफलता कैसे प्राप्त की ।

छात्र बोला – जब मैंने 9th कक्षा पास की उस दिन मेरे पिताजी दो स्मार्ट फोन लेकर आये

एक खुद रखा और एक मम्मी को दिया ।

उसके बाद दोनों WhatsApp और facebook में लगे रहते थे जिससे मेरे घर शांति पूर्ण वातावरण रहने लगा और मैं अच्छी तरह से पढ़ाई कर सका ।

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एक संत के पास 30 सेवक रहते थे । एक सेवक ने गुरुजी के आगे अरदास की महाराजजी 🙏🏻 मेरी बहन की शादी है तो आज एक महीना रह गया है तो मैं दस दिन के लिए वहां जाऊंगा. कृपा करें. आप भी साथ चले तो अच्छी बात है. गुरुजी ने कहा बेटा देखो टाइम बताएगा. नहीं तो तेरे को तो हम जानें ही देंगे उस सेवक ने बीच-बीच में इशारा गुरुजी की तरफ किया कि गुरुजी मुझे कुछ की जरुरत हैं, और आखिर वह दिन नजदीक आ गया सेवक ने कहा गुरुजी कल सुबह जाऊंगा मैं गुरुजी ने कहा ठीक है बेटा.

सुबह हो गई जब सेवक जाने लगा तो गुरुजी ने उसे 5 किलो अनार दिए और कहा ले जा बेटा भगवान तेरी बहन की शादी खूब धूमधाम से करें दुनिया याद करें कि ऐसी शादी तो हमने कभी देखी ही नहीं और साथ में दो सेवक भेज दिये जाओ तुम शादी पूरी करके आ जाना, जब सेवक घर से निकले 100 किलोमीटर गए तो उसके मन में आया जिसकी बहन की शादी थी वह दुसरे सेवक से बोला गुरुजी को पता ही था कि मेरी बहन की शादी है और हमारे पास कुछ भी नहीं है फिर भी गुरुजी ने मेरी मदद नहीं की, दो-तीन दिन के बाद वह अपने घर पहुंच गया. उसका घर राजस्थान रेतीली इलाके में था वहां कोई फसल नहीं होती थी. वहां के राजा की लड़की बीमार हो गई तो वैद्यजी ने बताया कि इस लड़की को अनार के साथ यह दवाई दी जाएगी तो यह लड़की ठीक हो जाएगी. राजा ने मुनादी करवा दी थी अगर किसी के पास आनार है तो राजा उसे बहुत ही इनाम देंगे. इधर मुनादी वाले ने आवाज लगाई अगर किसी के पास आनार है तो जल्दी आ जाओ, राजा को अनारों की सख्त जरूरत है, जब यह आवाज उन सेवकों के कानों में पड़ी तो वह सेवक उस मुनादी वाले के पास गए और कहा कि हमारे पास आनार है, चलो राजा जी के पास, राजाजी को अनार दिए गए अनार का जूस निकाला गया और लड़की को दवाई दी गई तो लड़की ठीक-ठाक हो गई. राजा ने पूछा तुम कहां से आए हो, तो उसने सारी हकीकत बता दी तो राजा ने कहा ठीक है तुम्हारी बहन की शादी मैं करूंगा, राजा जी ने हुकुम दिया ऐसी शादी होनी चाहिए कि लोग यह कहे कि यह राजा की लड़की की शादी है सब बारातियों को सोने चांदी गहने के उपहार दिए गए बरात की सेवा बहुत अच्छी हुई लड़की को बहुत सारा धन दिया गया. लड़की के मां-बाप को बहुत ही जमीन जायदाद व आलीशान मकान और बहुत सारे रुपए पैसे दिए गए, लड़की भी राजी खुशी विदा होकर चली गई, अब सेवक सोच रहे हैं कि गुरु की महिमा गुरु ही जाने. हम ना जाने क्या-क्या सोच रहे थे गुरुजी के बारे में, और गुरुजी के वचन थे जा बेटा तेरी बहन की शादी ऐसी होगी कि दुनियां देखेगी. *_गुरु के वचन हमेशा सच होते हैं...❗_*

शिक्षा……
गुरु के वचन के अंदर ताकत होती है लेकिन हम नहीं समझते जो भी वह वचन निकालते हैं वह सिद्ध हो जाता है, हमें गुरुदेव के वचनों के ऊपर अमल करना चाहिए और विश्वास करना चाहिए ना जाने गुरु कब क्या दे दे और रंक से राजा बना दे…❗

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धार्मिक या वैज्ञानिक ? ? ?

एक माँ अपने पूजा-पाठ से फुर्सत पाकर अपने विदेश में रहने वाले बेटे से फोन पर बात करते समय पूँछ बैठी: … बेटा! कुछ पूजा-पाठ भी करते हो या फुर्सत ही नहीं मिलती?

बेटे ने माँ को बताया – “माँ, मैं एक आनुवंशिक वैज्ञानिक हूँ …
मैं अमेरिका में मानव के विकास पर काम कर रहा हूँ …
विकास का सिद्धांत, चार्ल्स डार्विन… क्या आपने उसके बारे में सुना है ?”

उसकी माँ मुस्कुरा कर बोली – “मैं डार्विन के बारे में जानती हूँ, बेटा … मैं यह भी जानती हूँ कि तुम जो सोचते हो कि उसने जो भी खोज की, वह वास्तव में सनातन-धर्म के लिए बहुत पुरानी खबर है…“

“हो सकता है माँ !” बेटे ने भी व्यंग्यपूर्वक कहा …

“यदि तुम कुछ होशियार हो, तो इसे सुनो,” उसकी माँ ने प्रतिकार किया…
… “क्या तुमने दशावतार के बारे में सुना है ? विष्णु के दस अवतार ?”

बेटे ने सहमति में कहा “हाँ! पर दशावतार का मेरी रिसर्च से क्या लेना-देना?”

माँ फिर बोली: लेना-देना है मेरे लाल… मैं तुम्हें बताती हूँ कि तुम और मि. डार्विन क्या नहीं जानते हैं ?

पहला अवतार था मत्स्य अवतार, यानि मछली | ऐसा इसलिए कि जीवन पानी में आरम्भ हुआ | यह बात सही है या नहीं ?”

बेटा अब और अधिक ध्यानपूर्वक सुनने लगा |

उसके बाद आया दूसरा कूर्म अवतार, जिसका अर्थ है कछुआ, क्योंकि जीवन पानी से जमीन की ओर चला गया ‘उभयचर (Amphibian)’ | तो कछुए ने समुद्र से जमीन की ओर विकास को दर्शाया |

तीसरा था वराह अवतार, जंगली सूअर, जिसका मतलब जंगली जानवर जिनमें बहुत अधिक बुद्धि नहीं होती है | तुम उन्हें डायनासोर कहते हो, सही है ? बेटे ने आंखें फैलाते हुए सहमति जताई |

चौथा अवतार था नृसिंह अवतार, आधा मानव, आधा पशु, जंगली जानवरों से बुद्धिमान जीवों तक विकास |

पांचवें वामन अवतार था, बौना जो वास्तव में लंबा बढ़ सकता था | क्या तुम जानते हो ऐसा क्यों है ? क्योंकि मनुष्य दो प्रकार के होते थे, होमो इरेक्टस और होमो सेपिअंस, और होमो सेपिअंस ने लड़ाई जीत ली |”

बेटा दशावतार की प्रासंगिकता पर स्तब्ध हो रहा था जबकि उसकी माँ पूर्ण प्रवाह में थी…

छठा अवतार था परशुराम – वे, जिनके पास कुल्हाड़ी की ताकत थी, वो मानव जो गुफा और वन में रहने वाला था | गुस्सैल, और सामाजिक नहीं |

सातवां अवतार था मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम, सोच युक्त प्रथम सामाजिक व्यक्ति, जिन्होंने समाज के नियम बनाए और समस्त रिश्तों का आधार |

आठवां अवतार था जगद्गुरु श्री कृष्ण, राजनेता, राजनीतिज्ञ, प्रेमी जिन्होंने ने समाज के नियमों का आनन्द लेते हुए यह सिखाया कि सामाजिक ढांचे में कैसे रहकर फला-फूला जा सकता है |

नवां अवतार था भगवान बुद्ध, वे व्यक्ति जो नृसिंह से उठे और मानव के सही स्वभाव को खोजा | उन्होंने मानव द्वारा ज्ञान की अंतिम खोज की पहचान की |

और अंत में दसवां अवतार कल्कि आएगा, वह मानव जिस पर तुम काम कर रहे हो | वह मानव जो आनुवंशिक रूप से अति-श्रेष्ठ होगा |

बेटा अपनी माँ को अवाक होकर सुनता रहा |
अंत में बोल पड़ा “यह अद्भुत है माँ, भारतीय दर्शन वास्तव में अर्थपूर्ण है |”

…पुराण अर्थपूर्ण हैं | सिर्फ आपका देखने का नज़रिया होना चाहिए धार्मिक या वैज्ञानिक….🙏🏻