Posted in यत्र ना्यरस्तुपूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:

Copied1972 में आयरलैंड-ब्रिटिश युद्ध के दौरान ली गई यह तस्वीर एक आयरिश लड़की की है. वह अपने मंगेतर की बंदूक से गोली चला रही है जो ब्रिटिश आर्मी से युद्ध के दौरान घायल हो गया था.
इसका घायल मंगेतर एक कार द्वारा सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिए जाने के कारण बच गया जबकि प्रेमिका ब्रिटिश सैनिकों से मुठभेड़ के दौरान मारी गई.
जब इंग्लिश सेना के बटालियन कमांडर को यह पता लगा कि वे एक महिला से लड़ रहे थे तब उन्होंने अपने सैनिकों को आदेश दिया
कि वे महिला के शव को हाथ न लगाएं और आयरिश लोगों को उसका शव दफ़नाने की अनुमति दे दी. तब उन लोगों ने कमांडर को यह कहते भी सुना कि-
“We defend a queen who doesn’t care about us. And this woman cares about her lover and her land.”
“हम एक रानी की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं जिसे हमारी परवाह नहीं, और यह महिला अपने प्रेमी और मातृभूमि की परवाह करती है”
यह तस्वीर आयरलैंड में महिला दिवस पर सर्वश्रेष्ठ चुनी गई और लिखा गया –
“Don’t be afraid to be associated with a strong woman the day may come and she’ll be your only army”.
“एक मजबूत महिला को अपनाने से मत डरिये, जब वक़्त आएगा वह तुम्हारा इकलौता हथियार होगी”
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!!!एक रोचक तथ्य!!!

जानिए स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस में झंडा फहराने में क्या है अंतर ?

पहला अंतर

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर *झंडे को नीचे से रस्सी द्वारा खींच कर ऊपर ले जाया जाता है, फिर खोल कर फहराया जाता है, जिसे *ध्वजारोहण* कहा जाता है क्योंकि यह 15 अगस्त 1947 की ऐतिहासिक घटना को सम्मान देने हेतु किया जाता है जब प्रधानमंत्री जी ने ऐसा किया था। संविधान में इसे अंग्रेजी में Flag Hoisting (ध्वजारोहण) कहा जाता है।

जबकि

26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर झंडा ऊपर ही बंधा रहता है, जिसे खोल कर फहराया जाता है, संविधान में इसे Flag Unfurling (झंडा फहराना) कहा जाता है।
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दूसरा अंतर

15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री जो कि केंद्र सरकार के प्रमुख होते हैं वो ध्वजारोहण करते हैं, क्योंकि स्वतंत्रता के दिन भारत का संविधान लागू नहीं हुआ था और राष्ट्रपति जो कि राष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख होते है, उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया था। इस दिन शाम को राष्ट्रपति अपना सन्देश राष्ट्र के नाम देते हैं।

जबकि

26 जनवरी जो कि देश में संविधान लागू होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, इस दिन संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं
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तीसरा अंतर

स्वतंत्रता दिवस के दिन लाल किले से ध्वजारोहण किया जाता है।

जबकि

गणतंत्र दिवस के दिन राजपथ पर झंडा फहराया जाता है।

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ये कथा रात को सोने से पहले घर मे सबको सुनायें
एक बार एक राजा नगर भ्रमण को गया तो रास्ते में क्या देखता है कि एक छोटा बच्चा माटी के खिलौनो को कान में कुछ कहता फिर तोड कर माटी में मिला रहा है। *राजा को बडा अचरज हुआ तो उसने बच्चे से पूछा कि तुम ये सब क्या कर रहे हो?* *तो बच्चे ने जवाब दिया कि मैं इन से पूछता हूं कि कभी राम नाम जपा ? और माटी को माटी में मिला रहा हूँ।* *तो राजा ने सोचा इतना छोटा सा बच्चा इतनी ज्ञान की बात।* *राजा ने बच्चे से पूछा, कि तुम मेरे साथ मेरे राजमहल में रहोगे?* *तो बच्चे ने कहा- कि जरुर रहूंगा पर मेरी चार शर्त है।*

1- जब मैं सोऊं तब तुम्हें जागना पड़ेगा।

2- मैं भोजन खाऊगा तुम्हें भूखा रहना पड़ेगा।

3- मैं कपड़े पहनूंगा मगर तुम्हें नग्न रहना पड़ेगा।

4 – जब मैं कभी मुसीबत में होऊ तो तुम्हें अपने सारे काम छोड़ कर मेरे पास आना पड़ेगा। *अगर आपको ये शर्तें मंजूर हैं तो मैं आपके राजमहल में चलने को तैयार हूं।* *राजा ने कहा - कि ये तो असम्भव है।* *तो बच्चे ने कहा, राजन तो मैं उस परमात्मा का आसरा छोड़ कर आपके आसरे क्यूं रहूं, जो खुद नग्न रह कर मुझे पहनाता है, खुद भूखा रह कर मुझे खिलाता है, खुद जागता है और मैं निश्चिंत सोता हूँ, और जब मैं किसी मुश्किल में होता हूँ तो वो बिना बुलाए, मेरे लिए अपने सारे काम छोड़ कर दौडा आता है।*

💥 कथासार 💥
भाव केवल इतना ही है कि हम लोग सब कुछ जानते समझते हुए भी बेकार के विषय- विकारो में उलझ कर परमात्मा को भुलाए बैठे हैं, जो हमारी पल पल सम्भाल कर रहे हैं उस प्यारे के नाम को भुलाए बैठे हैं।

!! ॐ नमो श्रीचंद्राय !!

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एक वृद्ध माँ रात को 11:30 बजे रसोई में बर्तन साफ कर रही है, घर में दो बहुएँ हैं, जो बर्तनों की आवाज से परेशान होकर अपने पतियों को सास को उल्हाना देने को कहती हैं

वो कहती है आपकी माँ को मना करो इतनी रात को बर्तन धोने के लिये हमारी नींद खराब होती है साथ ही सुबह 4 बजे उठकर फिर खट्टर पट्टर शुरू कर देती है सुबह 5 बजे पूजा

आरती करके हमे सोने नही देती ना रात को ना ही सुबह जाओ सोच क्या रहे हो जाकर माँ को मना करो

बड़ा बेटा खड़ा होता है और रसोई की तरफ जाता है रास्ते मे छोटे भाई के कमरे में से भी वो ही बाते सुनाई पड़ती जो उसके कमरे हो रही थी वो छोटे भाई के कमरे को खटखटा देता है छोटा भाई बाहर आता है

दोनो भाई रसोई में जाते हैं, और माँ को बर्तन साफ करने में मदद करने लगते है , माँ मना करती पर वो नही मानते, बर्तन साफ हो जाने के बाद दोनों भाई माँ को बड़े प्यार से उसके कमरे में ले जाते है , तो देखते हैं पिताजी भी जागे हुए हैं

दोनो भाई माँ को बिस्तर पर बैठा कर कहते हैं, माँ सुबह जल्दी उठा देना, हमें भी पूजा करनी है, और सुबह पिताजी के साथ योगा भी करेंगे

माँ बोली ठीक है बच्चों, दोनो बेटे सुबह जल्दी उठने लगे, रात को 9:30 पर ही बर्तन मांजने लगे, तो पत्नियां बोलीं माता जी करती तो हैं आप क्यों कर रहे हो बर्तन साफ, तो बेटे बोले हम लोगो की शादी करने के पीछे एक कारण यह भी था कि माँ की सहायता हो जायेगी पर तुम लोग ये कार्य नही कर रही हो कोई बात नही हम अपनी माँ की सहायता कर देते है

हमारी तो माँ है इसमें क्या बुराई है , अगले तीन दिनों में घर मे पूरा बदलाव आ गया बहुएँ जल्दी बर्तन इसलिये साफ करने लगी की नही तो उनके पति बर्तन साफ करने लगेंगे साथ ही सुबह भी वो भी पतियों के साथ ही उठने लगी और पूजा आरती में शामिल होने लगी

कुछ दिनों में पूरे घर के वातावरण में पूरा बदलाव आ गया बहुएँ सास ससुर को पूरा सम्मान देने लगी । कहानी का सार।
माँ का सम्मान तब कम नही होता जब बहुवे उनका सम्मान नही करती , माँ का सम्मान तब कम होता है जब बेटे माँ का सम्मान नही करे या माँ के कार्य मे सहयोग ना करे ।
जन्म का रिश्ता हैं
माता पिता पहले आपके हैं ●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬●

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मातु पिता गुर प्रभु की वानी।
बिनहिं विचार करहिं शुभ जानी।।
।।जय जय श्री राम।।
।।हर हर महादेव।।

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🙏🏻 दिल को छू लेने वाली एक लघुकथा 🙏🏻

हनुमान जी के मन्दिर में सवा मन का लड्डू चढ़ा कर लौटते हुए एक भक्त से उसके बेटे ने गुब्बारे दिलवाने की जिद की।

बच्चा पिट गया।

वजह शायद बच्चे की जिद रही होगी या सवा मन लड्डू के पुण्य का दम्भ इतना बढ़ गया होगा कि भक्त सिर्फ उसी में बौराया था और उसका बच्चे की माँग से तारतम्य टूट गया हो।

गुब्बारे वाले के पास बहुत भीड थी, और भीड़ में से भी उसकी नजर पिटते बच्चे पर जा पड़ी।
बच्चा रो रहा था और भक्त पिता बच्चे को डांटे जा रहा था।

गुब्बारे वाला उस बच्चे की ओर आया और एक गुब्बारा बच्चे के हाथ में पकड़ा दिया।

भक्त गुस्से में तो था ही वह गुब्बारे वाले से उलझ पड़ा ।

“तुम मौके की ताड मे रहा करो बस, कोई बच्चा तुम्हे जिद करता दिख जाए बस। झट से पीछे लग जाते हो। नही लेना गुब्बारा।”

इस तरह भक्त ने गुब्बारे वाले को बुरी तरह झिडक दिया।

गुब्बारे वाला बच्चे के हाथ में गुब्बारा पकड़ाते हुए बोला-
मैं यहाँ गुब्बारे बेचने नही आता, बाँटने आता हूँ कारण किसी दिन मुझे किसी ने बोध करवाया कि ईश्वर तो बच्चों मे है।

इसलिये ही मैं हर मंगलवार सौ रूपये के गुब्बारे लाता हूँ। इनमे खुद ही हवा भरता हूँ। एक गुब्बारा मंदिर मे बाँध आता हूँ और बाकि सब यहाँ बच्चों मे बाँट देता हूँ। मेरा तो यही प्रसाद हैं। हनुमान जी स्वीकार करते होंगे ना।

सवा मन लड्डू का बड़ा पुण्य भक्त को एकाएक छोटा लगने लगा। *खुशियां बांटने से बढ़ती है।* *👍👌👍*