Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

वास्तविक__दर्द…

स्कूल प्रिंसिपल ने बहुत ही कड़े शब्दों मे जब किसान की बेटी ख़ुशी से पिछले एक साल की स्कूल फीस मांगी, तो ख़ुशी ने कहा मैडम मे घर जाकर आज पिता जी से कह दूंगी , घर जाते ही बेटी ने माँ से पूछा पिता जी कहाँ है ? तो माँ ने कहा तुम्हारे पिता जी तो रात से ही खेत मे है बेटी दौड़ती हुई खेत मे जाती है और सारी बात अपने पिता को बताती है ! ख़ुशी का पिता बेटी को गोद मे उठाकर प्यार करते हुए कहता है की इस बार हमारी फसल बहुत अच्छी हुई है अपनी मैडम को कहना अगले हफ्ता सारी फीस आजाएगी,
क्या हम मेला भी जाएंगे ?? ख़ुशी पूछती है
हाँ हम मेला भी जाएंगे और पकोड़े, बर्फी भी खाएंगे ख़ुशी के पिता कहते है
ख़ुशी इस बात को सुनकर नाचने लगती है और घर आते वक्त रस्ते मे अपनी सहेलियों को बताती है की मै अपने माँ पापा के साथ मेला देखने जाउंगी,पकोड़े बर्फी भी खाउंगी ये बात सुनकर पास ही खड़ी एक बजुर्ग कहती है ,बेटा ख़ुशी मेरे लिए क्या लाओगी मेले से ??
काकी हमारी फसल बहुत अच्छी हुई है मे आपके लिए नए कपडे लाऊंगी ख़ुशी कहती हुई घर दौड़ जाती है !

अगली सुबह ख़ुशी स्कूल जाकर अपनी मैडम को बताती है की मैडम इस बार हमारी फसल बहुत अच्छी हुई है ,अगले हफ्ते सब फसल बिक जाएगी और पिता जी आकर सारी फीस भर देंगें
प्रिंसिपल : चुप करो तुम, एक साल से तुम बहाने बाजी कर रही हो
ख़ुशी चुप चाप क्लास मे जाकर बैठ जाती है और मेला घूमने के सपने देखने लगती है तभी
ओले पड़ने लगते है
तेज बारिश आने लगती है बिजली कड़कने लगती है पेड़ ऐसे हिलते है मानो अभी गिर जाएंगे
ख़ुशी एकदम घबरा जाती है
ख़ुशी की आँखों मे आंसू आने लगते है वोही डर फिर सताने लगता है डर सब खत्म होने का, डर फसल बर्बाद होने का, डर फीस ना दे पाने का, स्कूल खत्म होने के बाद वो धीरे धीरे कांपती हुई घर की तरफ बढ़ने लगती है। हुआ भी ऐसा कि सभी फसल बर्बाद हो गई और खुशी स्कूल में फीस जमा नही करने के कारण ताना सुनने लगी।
उस छोटी सी बच्ची को मेला घुमने और बर्फी खाने का शौक मन में ही रह गया।
छोटे किसान और मजदूरों के परिवार में जो दर्द है उसे समझने में पूरी उम्र भी गुजर जाएगी तो भी शायद वास्तविक दर्द को महसूस नही कर सकते आप।

“भारत के आम किसान का वास्तविक दर्द यह है।”

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एक शौहर ने दो निकाह किये…

और दोनो बीवीयों से बहुत प्यार करता था
दोनों ही के साथ बड़ा इंसाफ़ का मामला भी रखता था.
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तक़दीर का फ़ैसला देखिए…
दोनों ही बीवियों का एक ही वक़्त में इंतेक़ाल हो गया.
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शौहर ने इंसाफ़ के तक़ाज़े से ये चाहा…
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कि दोनों को एक ही वक़्त
और एक ही साथ ग़ुस्ल दिया जाए.(नेहलाया जाये )
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इसलिए उसने ग़ुस्ल देने वालियाँ दो बुलवाईं…

ताकि एक ही वक़्त में दोनों को एक साथ ग़ुस्ल दी जाए.
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फिर दफ़न के लिये घर से एक ही वक़्त में
एक साथ निकालने का तय किया.
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इत्तिफ़ाक़ से उस घर में एक ही दरवाज़ा था…
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शौहर ने
क्योंकि एक ही वक़्त में दोनों बीवियों का जनाज़ा
निकालने का तय किया हुआ था…

इसलिए आनन फानन में तुरन्त ही एक और नया
दरवाज़ा बनवाने का फ़ैसला किया.

दरवाज़ा बनाने वाला बुलाया गया,

और दूसरा दरवाज़ा बनवा कर
एक ही वक़्त में दोनों के जनाजो को घर से निकाला.

और

दफ़न कर के जब घर आया तो सबने उसके बीवीयों के साथ रहन सहन की तारीफ की .और उसने
अपने इंसाफ़ पर अल्लाह का शुक्र अदा किया
कि उसने मुझे सही इंसाफ़ करने की तौफ़ीक़ दी.

रात में एक बीवी को शौहर ने अचानक ख़्वाब में देखा.

वो बड़ी ही ग़मज़दा आवाज़ में कह रही थी :—

मैं आप से नाराज़ हूँ…!
अल्लाह आप को माफ़ न करेगा…!

शौहर ने कहा :—
लेकिन क्यों…?
ख़ुदा की बंदी आखिर क्यों…?

इस पर, उस बीवी ने जवाब दिया :—
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आपने
अपनी दूसरी बीवी को
नये दरवाज़े से निकाला
और मुझे पुराने दरवाज़े से…!

(बीबी को खुश रखना…
मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है.)
😂😂😂😂😂😂😂😂

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एक नाग मस्जिद में एक बिल में रहता था।
प्रतिदिन 5 बार नमाज सुनता,
प्रतिदिन की तक़रीर भी ध्यान लगाकर सुनता रहता था।

एक दिन उसका मन हुआ
नमाज की इतनी महिमा है तो एक दिन नमाज पढ़ ही लेता हूँ,
शायद मुझे भी जन्नत मिल जाय।

बस क्या था,
बेचारा एक दिन ठीक नमाज के समय बाहर निकल के नमाजियों की लाईन में लगने चल पड़ा।

नमाजियों ने नाग देखा तो लाठी डंडा लेकर दौड़ा लिया,
अब नाग आगे आगे भागे,
नमाजी पीछे पीछे डंडा लेकर।

भागते भागते नाग को एक पुराना सा मंदिर दिख गया।
बेचारा वहीं घुस कर शिवलिंग से लिपट गया,
जान बच गयी।

हिन्दुओं ने जब शिवलिंग पर नाग लिपटा देखा शोर मच गया,
भीड़ जमा हो गयी,
आरती पूजा शुरू हो गयी,
लोग दूध पिलाने लगे।

नाग सोच रहा था,
यार
मैं भी कहाँ फंसा पड़ा था,

मैं तो नमाज पढ़ना चाहता था,
उन्होंने लट्ठ लेकर दौड़ा लिया,
पत्थर मारने लगे।

यहाँ तो पत्थर के भोलेनाथ की शरण में दो घड़ी क्या आया,
स्वयं ही नाग से शेषनाग हो गया।
यही अँतर है इस्लाम और सनातन मे💐🙏⛳

#घरवापसीका_सकून

वैदिक सनातन धर्म की जय 🚩🚩

हर हर महादेव 🙏 🌹 🌿 🌾 🚩

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Height of misunderstanding
😛😛😛😛😛😛

अवसर था
चर्च में एक विवाह का…

काफ़ी बड़ी
संख्या में मेहमान आये हुए थे.

दूल्हा-दुल्हन
ख़ुशी से फूले नहीं समा रहे थे…

पादरी महोदय ने
जैसे ही विवाह की रस्म शुरू की…

उन्होंने
औपचारिक शुरुआत की
और सम्बोधित करते हुए कहा :—

अगर
यहाँ मौजूद किसी भी
महिला या पुरुष को इस विवाह पर आपत्ति है तो वह कृपया आपत्ति के कारण सहित सामने आये…!

सभी लोग
चुपचाप अपने स्थान पर बैठे रहे..

अचानक…
एक सुन्दर सी महिला
जिसकी गोद में एक छोटा सा बच्चा था, पीछे की पंक्ति से उठी और पादरी की ओर तेज़ी से बढ़ी…

दुल्हन ने जब
उस औरत को बच्चे के साथ
पादरी की ओर आते हुए देखा
तो दूल्हे को कसकर एक झापड़ रसीद कर दिया…

दूल्हा अपना गाल
सहला ही रहा था इसी बीच
उसकी माँ बेहोश हो के गिर पड़ी…

दूल्हे के पिता
स्थिति को समझते हुए
तुरन्त दूल्हे की माँ की ओर बढ़े..

घराती और बराती
सब सन्न हो के रह गये,
सारे मेहमानों में भगदड़ मच गई…

पादरी महोदय ने
स्थिति को सम्भालते हुए
उस बच्चे वाली महिला से कहा :—

बेटी…!
साफ़-साफ़ बताओ कि
आपको दूल्हे से क्या शिकायत है…?

महिला बोली :—
जी…!
मैं तो दूल्हे को
जानती तक नहीं हूँ…!
मुझे पीछे
कुछ सुनाई नहीं दे रहा था…
इसलिए
आगे की कुर्सी पर
बैठने के लिए आगे आ रही हूँ…!
यही हालत देश मे सी.ए.ए और एन. आर. सी को लेकर हो रखी है।
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