Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

ये दिवान टोडरमलजी की हवेली है
जिन्होंने ७८,000 मोहरें बिछाकर गुरुगोविंद सिंह जी के साहबजादों और माता गुजरी देवी जी के संस्कार के लिए ४ गज जगह खरीदी थी …!
मुगल के क्रूर राजा ने मां गुजरी और बच्चों के संस्कार के लिए जमीन देने से मना कर दिया था तब टोडरमल जी सामने आए उन्होंने मुगल क्रूर राजा को कहा राजा ने जमीन की कीमत मांगी थी सोने की मोहरों से जितनी जमीन नापी जा सके उस समय टोडरमल ने अंतिम संस्कार के लिए सोने की मोहरे बिछाकर संस्कार हो सके इतनी जमीन खरीदकर संस्कार किया …!
इतने क्रूर अत्याचार करके जो इस्लाम पनपा उसमें मानवता किस कोने में ढूंढ रहे हो …?
और आज स्थिति ये है कि खुद दिवान टोडरमल जी की हवेली को देखने वाला कोई नही …..!
इस हवेली को संगमरमर के पत्थर से दुबारा बनवाना चाहिए, ताकि उनकी चेतना उनकी स्मृतियों को सदैव याद रखा जाए …!
सरहिंद_पंजाब मैं यह हवेली है …!
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16जनवरी2020
भाग-16
ज्योति जला निज प्राण की
गढ़ आला पण सिंह गेला
सन 1947 का मार्च महीना अपने दामन में दंगों का दुर्भाग्य छिपाकर लाया। शाहआलमी दरवाजा लाहौर का प्रसिद्ध दरवाजा था। पुराने शहर से हिंदुओं के आने-जाने का वही तो एकमात्र सुरक्षित रास्ता था। इस क्षेत्र की तंग गलियोंवाली बसावट तथा दोनों ओर लगे लोहे के फाटकों ने इसे एक दुर्ग का रूप प्रदान कर दिया था। इस मोहल्ले में संघ की अच्छी शाखा थी। समाज उसके नेतृत्व में संगठित था। इस कारण इस मोहल्ले की ओर कोई तिरछी नजरों से देखने का साहस नहीं करता था। परंतु यह क्षेत्र लीगी गुंडों की नजर में खटकता था। एक दिन दोपहर मुसलमानों की भारी भीड़ दरवाजे के बाहर एकत्रित हो गई। भीड़ का नेतृत्व कुख्यात बारूदखाना मोहल्ले के छंटेछटाये खूंखार अपराधी कर रहे थे। वे हमला करने की नीयत से जमा हो गए थे। परंतु वे अभी तैयारी कर ही रहे थे कि संघ के स्वयंसेवकों की अगुआई में हिंदू नौजवानों ने पहले ही परी मोहल्ले की ओर से हमला कर दिया। नेतृत्व कर रहा था महेंद्र। इन नौजवानों के पास केवल लाठियां ही थीं। परंतु हमला अचानक था इस कारण भीड़ में भगदड़ मच गई। कई घायलों को पीछे छोड़कर भीड़ भाग खड़ी हुई। उनके हौसले पस्त हो गए।
अब अपने कारनामों के लिए कुख्यात मजिस्ट्रेट चीमा हमलावरों की मदद को आ गया। वह अपने साथ पुलिस भी लाया था। 24 घंटे के कर्फ्यू का ऐलान कर दिया गया। रात हो चुकी थी। आशंका पूरी थी कि यहां भी यह मजिस्ट्रेट सरीन मोहल्ले के समान सर्वनाश कराएगा। वही हुआ। गुंडों ने पुलिस के संरक्षण में पेट्रोल छिड़ककर आग लगानी शुरू कर दी। सारा इलाका धूं-धूं कर जलने लगा। इस क्षेत्र में घी, तेल, कपड़े के समान तुरंत आग पकड़ने वाली वस्तुओं की दुकानें थी। परिणामस्वरूप आग ने आनन-फानन में ही रौद्र रूप धारण कर लिया और इधर बिजली और फोन ही नहीं, पानी की आपूर्ति करने वाले नल भी पुलिस ने कटवा दिए थे। सर्वत्र मौत नृत्य कर रही थी। सबमें भारी घबराहट थी परंतु ऐसे विकट समय में भी संघ के स्वयंसेवक बिना घबराए दृढ़तापूर्वक, अनुशासन व धैर्य से परिस्थिति का सामना करने हेतु मैदान में उतर आए, मोहल्ले के अन्य नौजवान भी उनके साथ हो लिए। छोटे बड़े बर्तनों में कुओं से पानी खींचकर बड़े अनुशासित ढंग से आग बुझाने का काम प्रारंभ हो गया। तभी ध्यान में आया कि गांधी स्क्वेयर में पानी खींचने का इंजन है। पर वहां तक जाया कैसे जाए? पुलिस की गोलियों का खतरा था। लेकिन स्वयंसेवकों ने भय तो सीखा ही नहीं था। जुझारू कार्यकर्ता महेंद्र के नेतृत्व में उनकी टोली चल पड़ी और ले आई इंजन को। आग पर पानी फेंकने का वेग और बढ़ गया। यह भी एक अनूठा अभियान था। परंतु पूरी आग पर काबू नहीं पाया जा रहा था। तय यह हुआ कि जिन दुकानों व घरों ने आग पकड़ ली है उन्हें ध्वस्त कर आग को सीमित कर दिया जाए। ऐसा ही किया गया और शेष मोहल्ले को आग की लपटों से बचा लिया गया।
इस प्रकार उन नौजवानों के साहस, सूझबूझ व बहादुरी ने एक बार तो आपत्ति को टाल दिया। वे अपने लक्ष्य में सफल रहे। हिंदुओं की रक्षा हो गई। परंतु इस विजय का प्रमुख श्रेय जिस होनहार युवक को जाता है वह महेंद्र वीरगति को प्राप्त हो गया। जलते मकानों में घुस-घुसकर कर फंसे लोगों को निकालने में वह अन्य कई कार्यकर्ताओं की तरह बुरी तरह झुलस गया था। 3 दिन तक उपचार चला, परंतु उस वीर देशभक्त को बचाया नहीं जा सका। तीसरे दिन विजय की आभा से दमकता चेहरा लिए वह वीर चिरनिद्रा में लीन हो गया। ‘गढ़ आला पण सिंह गेला’ वाला शिवाजी का कथन यहां भी सबकी जुबान पर था। मध्यमवर्गीय परिवार का 18 वर्षीय महेंद्र बी.ए. का छात्र था। अत्यंत होनहार युवक था। पूरे क्षेत्र में छोटे-बड़े सभी उसे प्यार व सम्मान में महेंद्रजी कहते थे। संघ का वह वरिष्ठ कार्यकर्ता था।
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#यशवंतीजिसेतानाजीमेंभुला_दिया

कोंडाणा के किले में चढ़ने के लिए तानाजी ने यशवंती नामक गोह प्रजाति की छिपकली का प्रयोग किया था जिसको फ़िल्म में नही दिखाया गया

वर्णन है, चढ़ाई के लिए तानाजी ने अपने बक्से से यशवंती को निकाला, उसे कुमकुम और अक्षत से तिलक किया और किले की दीवार की तरफ उछाल दिया किन्तु यशवंती किले की दीवार पर पकड़ न बना पायी
फिर दूसरा प्रयास किया गया लेकिन यशवंती दुबारा नीचे आ गयी, भाई सूर्याजी व शेलार मामा ने इसे अपशकुन समझा, तब तानाजी ने कहा कि अगर यशवंती इस बार भी लौट आयी तो उसका वध कर देंगे और यह कहकर दुबारा उसे दुर्ग की तरफ उछाल दिया, इस बार यशवंती ने जबरदस्त पकड़ बनाई और उससे बंधी रस्सी से एक टुकड़ी दुर्ग पर चढ़ गई
अंत मे जब यशवंती को मुक्त करना चाहा तो पाया कि यशवंती भी भारी वजन के कारण वीरगति को प्राप्त हो चुकी थी किन्तु उसने अपनी पकड़ नही छोड़ी थी
तो हमारे देश मे होने को तो चेटक और यशवंती जैसे देशभक्त जानवर भी हुए है
इस पोस्ट द्वारा यशवंती को नमन

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माघी संकष्टी (तिल चतुर्थी) विशेष
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संकष्टी चतुर्थी माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को कहा जाता है। वर्ष 2020 में 13 जनवरी को संकष्टी चतुर्थी पड़ रही है। इसे माघी चतुर्थी, सकट चौथ या तिल चौथ भी कहते हैं। बारह मास के अनुक्रम में यह सबसे बड़ी चतुर्थी मानी गई है। इस दिन भगवान श्री गणेश की आराधना सुख-सौभाग्य प्रदान करने होती है और कष्टों को दूर करने वाली होती है। इस चतुर्थी पर व्रत करके गणेशजी का पूजन करने से सारी विपदाएं दूर होती हैं।

वस्तुतः संकट चतुर्थी संतान की दीर्घायु हेतु भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा है। इस दिन पूजा करने से संतान के ऊपर आने वाले सभी कष्ट शीघ्रातिशीघ्र दूर हो जाते हैं। धर्मराज युधिष्ठिर न भीे भगवान श्री कृष्ण की सलाह पर इस व्रत को किया था।

गणेश भगवान का जन्मदिन
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शिव रहस्य ग्रंथ के अनुसार आदिदेव भगवान गणेश का जन्म माघ कृष्ण चतुर्थी को ही हुआ था। पूर्वांचल में इस दिन गणेश जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन से गणेश दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है। संकष्टी व्रत करने वाले भक्तों पर श्रीगणेश की कृपा बनी रहती है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने वाले श्रद्धालुओं के जीवन के सभी कष्टों का भगवान श्री गणेश निवारण करते हैं।

षोडशोपचार पूजा विधि
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इस व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पूर्व या सूर्योदय काल से ही करनी चाहिए। सूर्यास्त से पहले ही गणेश संकट चतुर्थी व्रत कथा-पूजा होती है। पूजा में तिल का प्रयोग अनिवार्य है। तिल के साथ गुड़, गन्ने और मूली का उपयोग करना चाहिए। इस दिन मूली भूलकर भी नहीं खानी चाहिए कहा जाता है कि मूली खाने धन -धान्य की हानि होती है। इस व्रत में चंद्रोदय के समय चन्द्रमा को तिल, गुड़ आदि का अर्घ्य देना चाहिए। साथ ही संकटहारी गणेश एवं चतुर्थी माता को तिल, गुड़, मूली आदि से अर्घ्य देना चाहिए।

अर्घ्य देने के उपरांत ही व्रत समाप्त करना चाहिए। इस दिन निर्जला व्रत का भी विधान है माताएं निर्जला व्रत अपने पुत्र के दीर्घायु के लिए अवश्य ही करती है। इस दिन तिल का प्रसाद खाना चाहिए। गणेश जी को दूर्वा तथा लड्डू अत्यंत प्रिय है अत: गणेश जी पूजा में दूर्वा और लड्डू जरूर चढ़ाना चाहिए।

पूजन सामग्री👉 (वृहद् पूजन के लिए ) -शुद्ध जल,दूध,दही,शहद,घी,चीनी,पंचामृत,वस्त्र,जनेऊ,मधुपर्क,सुगंध,लाल चन्दन,रोली,सिन्दूर,अक्षत(चावल),फूल,माला,बेलपत्र,दूब,शमीपत्र,गुलाल,आभूषण,सुगन्धित तेल,धूपबत्ती,दीपक,प्रसाद,फल,गंगाजल,पान,सुपारी,रूई,कपूर |

विधि- गणेश जी की मूर्ती सामने रखकर और श्रद्धा पूर्वक उस पर पुष्प छोड़े यदि मूर्ती न हो तो सुपारी पर मौली लपेटकर चावल पर स्थापित करें -और आवाहन करें –

गजाननं भूतगणादिसेवितम कपित्थजम्बू फल चारू भक्षणं |
उमासुतम शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम ||
आगच्छ भगवन्देव स्थाने चात्र स्थिरो भव |
यावत्पूजा करिष्यामि तावत्वं सन्निधौ भव ||

और अब प्रतिष्ठा (प्राण प्रतिष्ठा) करें –

अस्यैप्राणाः प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणा क्षरन्तु च |
अस्यै देवत्वमर्चार्यम मामेहती च कश्चन ||
आसन-रम्यं सुशोभनं दिव्यं सर्व सौख्यंकर शुभम |
आसनं च मया दत्तं गृहाण परमेश्वरः ||

पाद्य (पैर धुलना)

उष्णोदकं निर्मलं च सर्व सौगंध्य संयुत्तम |
पादप्रक्षालनार्थाय दत्तं ते प्रतिगह्यताम ||

अर्घ्य(हाथ धुलना )-

अर्घ्य गृहाण देवेश गंध पुष्पाक्षतै 😐
करुणाम कुरु में देव गृहणार्ध्य नमोस्तुते ||

आचमन

सर्वतीर्थ समायुक्तं सुगन्धि निर्मलं जलं |
आचम्यताम मया दत्तं गृहीत्वा परमेश्वरः ||

स्नान

गंगा सरस्वती रेवा पयोष्णी नर्मदाजलै:|
स्नापितोSसी मया देव तथा शांति कुरुश्वमे ||

दूध् से स्नान

कामधेनुसमुत्पन्नं सर्वेषां जीवन परम |
पावनं यज्ञ हेतुश्च पयः स्नानार्थं समर्पितं ||

दही से स्नान

पयस्तु समुदभूतं मधुराम्लं शक्तिप्रभं |
दध्यानीतं मया देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यतां ||

घी से स्नान

नवनीत समुत्पन्नं सर्व संतोषकारकं |
घृतं तुभ्यं प्रदास्यामि स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम ||

शहद से स्नान

तरु पुष्प समुदभूतं सुस्वादु मधुरं मधुः |
तेजः पुष्टिकरं दिव्यं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम ||

शर्करा (चीनी) से स्नान

इक्षुसार समुदभूता शंकरा पुष्टिकार्कम |
मलापहारिका दिव्या स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम ||

पंचामृत से स्नान

पयोदधिघृतं चैव मधु च शर्करायुतं |
पंचामृतं मयानीतं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम ||

शुध्दोदक (शुद्ध जल ) से स्नान

मंदाकिन्यास्त यध्दारि सर्वपापहरं शुभम |
तदिधं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम ||

वस्त्र

सर्वभूषाधिके सौम्ये लोक लज्जा निवारणे |
मयोपपादिते तुभ्यं वाससी प्रतिगृह्यतां ||

उपवस्त्र (कपडे का टुकड़ा )

सुजातो ज्योतिषा सह्शर्म वरुथमासदत्सव : |
वासोअस्तेविश्वरूपवं संव्ययस्वविभावसो ||

यज्ञोपवीत

नवभिस्तन्तुभिर्युक्त त्रिगुण देवतामयम |
उपवीतं मया दत्तं गृहाणं परमेश्वर : ||

मधुपर्क

कस्य कन्स्येनपिहितो दधिमध्वा ज्यसन्युतः |
मधुपर्को मयानीतः पूजार्थ् प्रतिगृह्यतां ||

गन्ध

श्रीखण्डचन्दनं दिव्यँ गन्धाढयं सुमनोहरम |
विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रतिगृह्यतां ||

रक्त(लाल )चन्दन

रक्त चन्दन समिश्रं पारिजातसमुदभवम |
मया दत्तं गृहाणाश चन्दनं गन्धसंयुम ||

रोली

कुमकुम कामनादिव्यं कामनाकामसंभवाम |
कुम्कुमेनार्चितो देव गृहाण परमेश्वर्: ||

सिन्दूर

सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम् ||
शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यतां ||

अक्षत

अक्षताश्च सुरश्रेष्ठं कुम्कुमाक्तः सुशोभितः |
माया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वरः ||

पुष्प

पुष्पैर्नांनाविधेर्दिव्यै: कुमुदैरथ चम्पकै: |
पूजार्थ नीयते तुभ्यं पुष्पाणि प्रतिगृह्यतां ||

पुष्प माला

माल्यादीनि सुगन्धिनी मालत्यादीनि वै प्रभो |
मयानीतानि पुष्पाणि गृहाण परमेश्वर: ||

बेल का पत्र

त्रिशाखैर्विल्वपत्रैश्च अच्छिद्रै: कोमलै :शुभै : |
तव पूजां करिष्यामि गृहाण परमेश्वर : ||

दूर्वा

त्वं दूर्वेSमृतजन्मानि वन्दितासि सुरैरपि |
सौभाग्यं संततिं देहि सर्वकार्यकरो भव ||

दूर्वाकर

दूर्वाकुरान सुहरिता नमृतान मंगलप्रदाम |
आनीतांस्तव पूजार्थ गृहाण गणनायक:||

शमीपत्र

शमी शमय ये पापं शमी लाहित कष्टका |
धारिण्यर्जुनवाणानां रामस्य प्रियवादिनी ||

अबीर गुलाल

अबीरं च गुलालं च चोवा चन्दन्मेव च |
अबीरेणर्चितो देव क्षत: शान्ति प्रयच्छमे ||

आभूषण

अलंकारान्महा दव्यान्नानारत्न विनिर्मितान |
गृहाण देवदेवेश प्रसीद परमेश्वर: ||

सुगंध तेल

चम्पकाशोक वकु ल मालती मीगरादिभि: |
वासितं स्निग्धता हेतु तेलं चारु प्रगृह्यतां ||

धूप

वनस्पतिरसोदभूतो गन्धढयो गंध उत्तम : |
आघ्रेय सर्वदेवानां धूपोSयं प्रतिगृह्यतां ||

दीप

आज्यं च वर्तिसंयुक्तं वहिन्ना योजितं मया |
दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम ||

नैवेद्य

शर्कराघृत संयुक्तं मधुरं स्वादुचोत्तमम |
उपहार समायुक्तं नैवेद्यं प्रतिगृह्यतां ||

मध्येपानीय

अतितृप्तिकरं तोयं सुगन्धि च पिबेच्छ्या |
त्वयि तृप्ते जगतृप्तं नित्यतृप्ते महात्मनि ||

ऋतुफल

नारिकेलफलं जम्बूफलं नारंगमुत्तमम |
कुष्माण्डं पुरतो भक्त्या कल्पितं
प्रतिगृह्यतां ||

आचमन

गंगाजलं समानीतां सुवर्णकलशे स्थितन |
आचमम्यतां सुरश्रेष्ठ शुद्धमाचनीयकम ||

अखंड ऋतुफल

इदं फलं मयादेव स्थापितं पुरतस्तव |
तेन मे सफलावाप्तिर्भवेज्जन्मनि जन्मनि ||

ताम्बूल पूंगीफलं

पूंगीफलम महद्दिश्यं नागवल्लीदलैर्युतम |
एलादि चूर्णादि संयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यतां ||

दक्षिणा(दान)

हिरण्यगर्भ गर्भस्थं हेमबीजं विभावसो: |
अनन्तपुण्यफलदमत : शान्ति प्रयच्छ मे ||

आरती

चंद्रादित्यो च धरणी विद्युद्ग्निंस्तर्थव च |
त्वमेव सर्वज्योतीष आर्तिक्यं प्रतिगृह्यताम ||

पुष्पांजलि

नानासुगन्धिपुष्पाणि यथाकालोदभवानि च |
पुष्पांजलिर्मया दत्तो गृहाण परमेश्वर: ||

प्रार्थना

रक्ष रक्ष गणाध्यक्ष रक्ष त्रैलोक्य रक्षक:
भक्तानामभयं कर्ता त्राता भव भवार्णवात ||
अनया पूजया गणपति: प्रीयतां न मम कहकर प्रणाम कर आरती के लिए खड़े हो जाये।

श्री गणेश जी की आरती

जय गणेश,जय गणेश,जय गणेश देवा |
माता जाकी पारवती,पिता महादेवा ||
एक दन्त दयावंत,चार भुजा धारी |
मस्तक पर सिन्दूर सोहे,मूसे की सवारी || जय …

अंधन को आँख देत,कोढ़िन को काया |
बांझन को पुत्र देत,निर्धन को माया || जय …

हार चढ़े,फूल चढ़े और चढ़े मेवा |
लड्डुअन का भोग लगे,संत करें सेवा || जय …

दीनन की लाज राखो,शम्भु सुतवारी |
कामना को पूरा करो जग बलिहारी || जय …

पौराणिक कथा
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भगवान शिव और माता पार्वती एक बार नदी किनारे बैठे हुए थे। उसी दौरान माता पार्वती को चौपड़ खेलने का मन हुआ। लेकिन उस समय वहां माता और भगवान शिव के अलाना कोई और मौजूद नहीं था, लेकिन खेल में हार-जीत का फैसला करने के लिए एक व्यक्ति की जरुरत थी। इस विचार के बाद दोनों ने एक मिट्टी की मूर्ति बनाकर उसमें जान डाल दी और उससे कहा कि खेल में कौन जीता इसका फैसला तुम करना। खेल के शुरु होते ही माता पार्वती विजय हुई और इस प्रकार तीन से चार बार उन्हीं की जीत हुई। लेकिन एक बार गलती से बालक ने भगवान शिव का विजयी के रुप में नाम ले लिया। जिसके कारण माता पार्वती क्रोधित हो गई और उस बालक को लंगड़ा बना दिया। बालक उनसे क्षमा मांगता है और कहता है कि उससे भूल हो गई उसे माफ कर दें। माता कहती हैं कि श्राप वापस नहीं हो सकता लेकिन एक उपाय करके इससे मुक्ति पा सकते हो। माता पार्वती कहती हैं कि इस स्थान पर संकष्टी के दिन कुछ कन्याएं पूजा करने आती हैं, तुम उनसे व्रत की विधि पूछना और उस व्रत को श्रद्धापूर्वक करना।

संकष्टी के दिन कन्याएं वहां आती हैं और बालक उनसे व्रत की विधि पूछता और उसके बाद विधिवत व्रत करने से वो भगवान गणेश को प्रसन्न कर लेता है। भगवान गणेश उसे दर्शन देकर उससे इच्छा पूछते हैं तो वो कहता है कि वो भगवान शिव और माता पार्वती के पास जाना चाहता है। भगवान गणेश उसकी इच्छा पूरी करते हैं और वो बालक भगवान शिव के पास पहुंच जाता है। लेकिन वहां सिर्फ भगवान शिव होते हैं क्योंकि माता पार्वती भगवान शिव से रुठ कर कैलाश छोड़कर चली जाती हैं। भगवान शिव उससे पूछते हैं कि वो यहां कैसे आया तो बालक बताता है कि भगवान गणेश के पूजन से उसे ये वरदान प्राप्त हुआ है। इसके बाद भगवान शिव भी माता पार्वती को मनाने के लिए ये व्रत रखते हैं। इसके बाद माता पार्वती का मन अचानक बदल जाता है और वो वापस कैलाश लौट आती हैं। इस कथा के अनुसार भगवान गणेश का संकष्टी के दिन व्रत करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है और संकट दूर होते हैं।

संकष्टी (सकट)चतुर्थी पूजा मुहूर्त
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चौथ के दिन चन्द्रोदय समय – रात्रि 09:05
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – जनवरी 13, 2020 को सायं 05:32 बजे से
चतुर्थी तिथि समाप्त – जनवरी 14, 2020 को दिन 02:49 बजे तक

चर और लाभ की चौघडी में पूजन श्रेष्ठ है।
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. ध्यान से पढ़ना बहुत कुछ सीखने को मिलेगा
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“वसीयत और नसीहत”

एक दौलतमंद इंसान ने अपने बेटे को वसीयत देते हुए कहा,

“बेटा मेरे मरने के बाद मेरे पैरों में ये फटे हुऐ मोज़े (जुराबें) पहना देना, मेरी यह इक्छा जरूर पूरी करना ।

पिता के मरते ही नहलाने के बाद, बेटे ने पंडितजी से पिता की आखरी इक्छा बताई ।

पंडितजी ने कहा: हमारे धर्म में कुछ भी पहनाने की इज़ाज़त नही है।

पर बेटे की ज़िद थी कि पिता की आखरी इक्छ पूरी हो ।

बहस इतनी बढ़ गई की शहर के पंडितों को जमा किया गया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला ।

इसी माहौल में एक व्यक्ति आया, और आकर बेटे के हाथ में पिता का लिखा हुआ खत दिया, जिस में पिता की नसीहत लिखी थी

“मेरे प्यारे बेटे”

देख रहे हो..? दौलत, बंगला, गाड़ी और बड़ी-बड़ी फैक्ट्री और फॉर्म हाउस के बाद भी, मैं एक फटा हुआ मोजा तक नहीं ले जा सकता ।

एक रोज़ तुम्हें भी मृत्यु आएगी, आगाह हो जाओ, तुम्हें भी एक सफ़ेद कपडे में ही जाना पड़ेगा ।

लिहाज़ा कोशिश करना,पैसों के लिए किसी को दुःख मत देना, ग़लत तरीक़े से पैसा ना कमाना, धन को धर्म के कार्य में ही लगाना ।

सबको यह जानने का हक है कि शरीर छूटने के बाद सिर्फ कर्म ही साथ जाएंगे”। लेकिन फिर भी आदमी तब तक धन के पीछे भागता रहता है जब तक उसका निधन नहीं हो जाता।
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😀 ख़ुशख़बरी ख़ुशख़बरी 😀
💻🖥📱📲📱📲💻🖥
देखें अब परमात्मा की
सभी कथाएँ एक साथ
😊🙏🙏🙏🙏🙏🙏😊

1. कथा: भगत गोपीचंद व राजा भरथरी || कैसे बने भगत || कैसे मिला राजा भरथरी को अपनी जान से प्यारी रानी से धोखा ||
https://youtu.be/lBWQUkOvm-Y

2. कथा: सेठ दामोदर दास ||
https://youtu.be/qY7WD1hP8B4

3. कथा: संत रविदास जी महाराज ||
https://youtu.be/dTtgaN4ENLw

4. कथा: भगत अजामेल व वेश्या ||
https://youtu.be/bT0iGB2j0XI

5. कथा: भगतमति राबिया || कैसे राबिया ने अपने बाल उखाड़ कर कुतिया की प्यास बुझाई कैसे जीव दया दर्शाई ||
https://youtu.be/mkqRTse6b68

6. कथा: किसान और चोर || कैसे चोर बना भगत ||
https://youtu.be/hSl2ubReMgs

7. कथा: भगतमति पुल्लोबाई || कैसे ब्रह्मा, विष्णु,महेश भी नतमस्तक हुये।।
https://youtu.be/zBiIrpysYRc

8. कथा: किसान भगत व पीर मजार ||
https://youtu.be/b2h_W6nMZbA

9. कथा: सूली की सजा काँटे में || कैसे हुई सतगुरु शरण में आने से भगत की रक्षा ||
https://youtu.be/bCsrfw7aGJ4

10. कथा: ऋषि दुर्वासा का श्राप || कौरवो का विनाश ||
https://youtu.be/5RfJypeUqfI

11. कथा: पारासर ऋषि || कैसे ऋषि होकर काल रूपी मन से प्रेरित होकर अपनी ही बेटी से कुकर्म किया || कैसे बचे काल रूपी मन से ||
https://youtu.be/Y4CvjbSWWHw

12. कथा: राजा बीरसिंह भगेल || कैसे हुई सारनाम की परीक्षा ||
https://youtu.be/5O_ST-f0i3M

13. कथा: भगत वाजिद बादशाह ||
https://youtu.be/L-jXqbkc7Mk

14. कथा: भगत भूमड़ सैनी || कैसे सतगुरु दर्शन की प्यास 6 महीने तक रोटा रहा भूमड़ भगत।।
https://youtu.be/Qgvq_R8YaOU

15. कथा: संत जयदेव व लुटेरे || कैसे किया परमात्मा ने भगत का न्याय ||
https://youtu.be/YMi2u0hDkxs

16. कथा: किसान व झूठा संत || कैसे किसान बनकर चुकाया कर्ज ||
https://youtu.be/w5ImxGEa7Vo

17. कथा: पण्डित मनिराम व चम्पाकली नर्तकी ||
https://youtu.be/Aot6DyLvTtw

18. कथा: मीराबाई || कैसे मीरा का पिया जहर भी अमृत बन गया || कैसे मीरा ने भगति के लिए सिर-धड़ की बाजी लगाई।
https://youtu.be/9t70AHOc-OI

19. कथा: मुलुक दास जी || भगति की परिक्षा ||
https://youtu.be/I9YL0lNeiYU

20. कथा: भगत अर्जुन-सर्जुन || भगति की पिछोड़ || कैसे सतगुरु की एक लीला से डगमग हुए भगतो को पार किया ।।
https://youtu.be/ejHSIC1-sbc

21. कथा: भगत के वश में है भगवान || कथा किसान भगत व परमात्मा ||
https://youtu.be/b5d5NBtEQ9I

22. कथा: काना करण तपस्वी व राजा प्रियवर्त ।।
https://youtu.be/Tob3uy__Rn8

23. कथा: नारद मुनि का अभिमान ||
https://youtu.be/NxYL2gYKuUw

24. कथा: सर्वानंद पण्डित || कैसे टुटा सर्वानंद पण्डित का अपनी विधुता का अभिमान ||
https://youtu.be/KDC5vDvoeTM

25. कथा: बैल के जीवन की दर्दनाक घटना || कैसे बिन भगति होती है दुर्गति ||
https://youtu.be/cdybJDuow-I

26. कथा: भगत हाहा-हुहु की कथा || भगति का अभिमान ||
https://youtu.be/JUPXrnTpml0

27. कथा: भगत सदन कसाई || कैसे बकरे काटने वाला कसाई सदना भगत बना कैसे रखी परमात्मा ने अपने भगत की लाज ।।
https://youtu.be/UDQ_tykfuVY

28. कथा: परमात्मा पर विश्वास || 4 साल व 20 साल से भगति करने वाले भगतों की परीक्षा ||
https://youtu.be/K5H1EQ-9Efg

29. कथा: भगत काग भूषण्ड की कथा || कैसे काग भूषण्ड को श्राप मिला व कैसे मिली परमात्मा की शरण ||
https://youtu.be/iVEub1krOMc

30. कथा: अगस्त ऋषि || कैसे काल जाल में फ़सकर किया कुकर्म ||
https://youtu.be/9iBJSrctDVU

31. कथा: गुरुद्रोही कमाल भगत की कथा ||
https://youtu.be/L5uzPPzdppo

32. कथा: कुत्ता और बंजारा || कैसे बंजारा धोख़े से अपने कुत्ते को मारकर रोया ||
https://youtu.be/WGPhqk99Gzs

33. कथा: सेऊ,समन व नेकी || सच्चे भगतों की परीक्षा ||
https://youtu.be/442vYX0xUN4

34. कथा: मीराबाई का भगति के लिए संघर्ष
https://youtu.be/QLFt1RLPxNM

35. कथा: संत मुलुक दास जी || थारे गुरु जी तो मार-मार खीर खिलाते है ||
https://youtu.be/eHVZUrvu9QA

36. कथा: द्रोपती चीर हरण || जै मेरा भगत पिछोड़ी होइ,हमरा नाम ना लेवे कोई ||
https://youtu.be/1GJF1ghn-OI

37. भगत तैमूरलंग(लौहार) की कथा(कैसे परमात्मा ने सात पीढ़ी का राज दिया)
https://youtu.be/Z-IyRo_CIvw

38. कथा: भगत मन्सूर व शिमली || भगति परीक्षा ||
https://youtu.be/ZFqoUSoLkfY

39. बैल के जीवन की कथा || भगति बिन जीव आत्मा की होती है बहुत दुर्गति ||
https://youtu.be/d7DMoNLf1io

40. कथा: अंतर दोष || मन का दोष ||
https://youtu.be/y7OqvvCZRlI

41. कथा : धनवान सेठ की कथा
https://youtu.be/pOoLl7l1Nco

42. कथा: परमात्मा पर विश्वास || भगत की परीक्षा ||
https://youtu.be/nisuXLpZpIY

43. कथा: संत वचन शक्ति || संत और राजा ||
https://youtu.be/Vou10PalMhA

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