Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

CAA
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नोट:-
(निम्न टिकिट चेकर का मोटा भाई से कोई लेना देना नहीं है)

कोलकाता से मुंबई की ओर दुरंतो ट्रेन
🚅🚅🚅🚈🚈🚈
अपनी स्प्पीड से चल रही ही थी
रिजर्वेशन कोच में
टिकट चैकर 👮👮👮आया और सबसे आईडी प्रूफ मागा

दो लोगो ने कहा कि
हमारे पास कोई भी आईडी प्रूफ नहीं है .हम उन 30 परसेंट गरीब लोगो से है जिनके पास कोई डॉक्यूमेंट नहीं है.

टिकट चैकर ने पूछा तो आपने टिकट कैसे बनाया ?

आदमी बोला साहब
ये इंडिया है
यहाँ सब कुछ बन सकता है .

टिकट चैकर ने कहा कि आपको आईडी प्रूफ दिखाना पड़ेगा नहीं तो आप आगे की यात्रा नहीं कर पाएंगे .

ट्रेन में अर्बन नक्सल और छद्म जिहादी कुछ लोग इकट्ठा हो गए

बवाल किया की
ये टिकट चेकर सांप्रदायिक है.., ये टिकट चैकर NRC का समर्थक है

टिकट चैकर सोचा
बाकी के यात्री मेरा समर्थन करेगे लेकिन बाकी के लोग खाने में, पीने में, बातों में , मोबाइल में और लैपटॉप में व्यस्त थे .

टिकट चैकर उस डिब्बे से चला गया

सुबह 6 बजे लोग ढूंढते हुए आए की
हमारा मोबाइल , पर्स, और बैग गायब है

टिकट चैकर ने करवट बदली और बोला
अभी तो मोबाइल , पर्स, और बैग गायब है …
अगर तुम नहीं सुधरे तो जैसे पाकिस्तान से तुम गायब हुए हो एक दिन हिंदुस्तान से गायब हो जावागे .

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मन की बात
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एक सब्जी की दुकान पर जहाँ से मैं अक्सर सब्जियाँ लेता हूँ जब मैं पहुँचा तो सब्जी वाली फोन पर बात कर रही थी अत: कुछ क्षण रुकना 😢ठीक समझा और उसने रुकने का संकेत भी किया तो रुक गया और उसकी बात मेरे कान में भी पड़ रही थी।

वह अपनी उस बेटी से बात कर रही थी जिसकी शादी तीन चार दिन पहले हुई थी।

वह कह रही थी “देखो बेटी घर की याद आती है ठीक है लेकिन वह घर अब तुम्हारा है।तुम्हें अब अपना सारा ध्यान अपने घर के लिया लगाना है और बार बार फोन मत किया करो और छिपकर तो बिलकुल भी नहीं।

जब भी यहाँ फोन करना तो सास या पति के सामने करना।

तुम अपने फोन पर मेरे फोन का इंतजार कभी मत करना। मुझे जब बात करना होगा तो मैं तुम्हारी सास के नंबर पर लगाऊँगी।तब तुम भी बात करना और बेटी अब ससुराल में हो जरा जरा सी बात पर तुनकना छोड़ दो सहनशक्ति रखो।

अपना घर कैसे चलाना है ये सब अपनी सास से सीखो।

एक बात ध्यान रखो इज्जत दोगी इज्जत पाओगी।ठीक है । सुखी रहो

मैंने प्रशंसा के भाव में कहा “बहुत सुंदर समझाया आपने

उसने कहा बहन माँ को बेटी के परिवार में अनावश्यक दखल नहीं देनी चाहिये। उन्हें अपने घर की बातों को भी बिना मतलब इधर उधर नहीं करना चाहिये। वहाँ हो तो समस्या का हल खुद ढूँढ़ो

मैं उस देवी का मुँह देखती रह गया। सभी माँ को इसी तरह से सोचना चाहिए ताकि बेटी अपने घर को खुद का घर समझे।

हँस जैन रामनगर खण्डवा

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🙏 🙏 सत् साहेब जी 🙏🏻 🙏🏻
जगत की रीत –

एक बार एक गाँव में पंचायत लगी थी | वहीं थोड़ी दुरी पर एक संत ने अपना बसेरा किया हुआ था|जब पंचायत किसी निर्णय पर नहीं पहुच सकी तो किसी ने कहा कि क्यों न हम महात्मा जी के पास अपनी समस्या को लेकर चलें अतः सभी संत के पास पहुंचे | जब संत ने गांव के लोगों को देखा तो पुछा कि कैसे आना हुआ? तो लोगों ने कहा ‘महात्मा जी गाँव भर में एक ही कुआँ हैं और कुँए का पानी हम नहीं पी सकते, बदबू आ रही है । मन भी नहीं होता पानी पीने को।

संत ने पुछा–हुआ क्या?पानी क्यों नहीं पी सक रहे हो?

लोग बोले–तीन कुत्ते लड़ते लड़ते उसमें गिर गये थे । बाहर नहीं निकले, मर गये उसी में । अब जिसमें कुत्ते मर गए हों, उसका पानी कौन पिये महात्मा जी ?
संत ने कहा — ‘एक काम करो ,उसमें गंगाजल डलवाओ,
तो कुएं में गंगाजल भी आठ दस बाल्टी छोड़ दिया गया ।
फिर भी समस्या जस की तस !
लोग फिर से संत के पास पहुंचे,अब संत ने कहा”
भगवान की कथा कराओ”।

लोगों ने कहा ••••ठीक है ।

कथा हुई , फिर भी समस्या जस की तस
लोग फिर संत के पास पहुंचे !
अब संत ने कहा
उसमें सुगंधित द्रव्य डलवाओ।

लोगों ने फिर कहा ••••• हाँ, अवश्य ।
सुगंधित द्रव्य डाला गया|
नतीजा फिर वही…ढाक के तीन पात
लोग फिर संत के पास
अब संत खुद चलकर आये ।
लोगों ने कहा– महाराज ! वही हालत है, हमने सब करके देख लिया । गंगाजल भी डलवाया, कथा भी करवायी, प्रसाद भी बाँटा और उसमें सुगन्धित पुष्प और बहुत चीजें डालीं; लेकिन महाराज ! हालत वहीं की वहीं ।अब संत आश्चर्यचकित हुए कि अभी भी इनका मन कैसे नहीं बदला।
तो संत ने पुछा– कि तुमने और सब तो किया, वे तीन कुत्ते मरे पड़े थे, उन्हें निकाला कि नहीं?
लोग बोले — उनके लिए न आपने कहा था न हमने निकाला, बाकी सब किया । वे तो वहीं के वहीं पड़े हैं ।
संत बोले — जब तक उन्हें नहीं निकालोगे, इन उपायों का कोई प्रभाव नहीं होगा।
👉सही बात यह है कि हमारे आपके जीवन की यह कहानी है । इस शरीर नामक गाँव के अंतःकरण के कुएँ में ये काम, क्रोध और लोभ के तीन कुत्ते लड़ते झगड़ते गिर गये हैं । इन्हीं की सारी बदबू है ।
हम उपाय पूछते हैं तो लोग बताते हैं– तिर्थयात्रा कर लो, थोड़ा यह कर लो, थोड़ा पूजा करो, थोड़ा पाठ। सब करते हैं, पर बदबू उन्हीं दुर्गुणों की आती रहती है ।
तो पहले इन्हें निकाल कर बाहर करें तभी जीवन उपयोगी होगा।
इसके लिए पढे पुस्तक। #ज्ञान गंगा ।जीने की राह#। गीता तेरा ज्ञान अमृत। #अंध श्रद्धा भक्ति खतराए जान
और देखे साधना चैनल 7.30 pm
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