Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

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धर्म और संस्कृति
ग्रुप की सादर प्रस्तुति

हँस जैन खण्डवा
98272 14427
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प्रभु की लीला
अपरम्पार
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एक दिन बालकृष्ण ने फल वाली पर भी कृपा की है। भगवान ने देखा की उसके द्वार पर कोई फलवाली फल बेच रही है। और आवाज लगते हुए जा रही है कोई फल ले लो री! कोई फल ले लो री।

भगवान जी ने जैसे ही सुना तो दौड़े दौड़े गए और बोले मैया-मैया मुझे ये फल) दे दे। मैया बोली की ठीक है लाला मैं दे दूंगी पर बदले में कुछ अनाज लेके आ जा।

कन्हैया कहते है ठीक है मैया।

भगवान अंदर गए है और अपने दोनों हाथो की मुट्ठी में अनाज भर कर लाते है। और दौड़े दौड़े नन्द भवन के अंदर से आते है। लेकिन रस्ते में सारा अनाज गिराते भी जा रहे है। जब तक मैया की पास पहुंचे केवल 2- 4 दाने ही बचे हैं।
फल बेचने वाली बोली की लाला क्या लेके आयो है ?

कृष्णा ने कहा मैया तेरे लिए बहुत सारा अनाज लेके आया हूँ। दोनों मुट्ठी में अनाज है मेरे।
मैया बोली अच्छा लाला दिखा मेरे को।

ज्यों ही कृष्ण ने अंजुली खोली तो केवल 2-4 दाने ही बचे थे। फल वाली बोली की लाला तू तो कहवे है की बहुत सारा आनाज लायो है। ये देख थोड़ा सा है।
भगवान बोले वहां से लेके बहुत सारा चला था पर रस्ते में सब गिर गयो मैया। मेरे छोटे छोटे हाथ है तो अंजुली के बीच से गिर गयो मैया।

भगवान की मीठी मीठी बाते सुनकर फल वाली मुस्कराने लगी और भगवान से 2-4 दाने ले लिए और उनको टोकरी में रख लिया। और बदले में मैया ने भगवान को सारे फल दे दिए। और मैया अब ये कहना भूल गई कोई फल ले लो री कोई फल ले लो री
मैया आवाज लगा रही है कोई श्याम ले लो री! कोई श्याम ले लो री।

जब वह फल वाली घर पहुचती है तो क्या देखती है जिस टोकरी में उसने अनाज के 2-4 दाने रखे थे। अनाज के दानों जगह वो टोकरी हीरे और मोतियों से भर गई थी। इस प्रकार भगवन ने फल वाली पर कृपा की है
भगवान कहते है तुम मुझे थोड़ा बहुत भी दोगे मैं तुम्हे बदले में हजार गुना वापिस करूँगा। वैसे मुझे किसी का कुछ लेने की जरुरत नहीं है। मैं भाव देखता हूँ। और उस भाव के बदले मैं सब कुछ अपने भक्त को दे देता हूँ।

बोलिए कृष्ण कन्हैया की जय !!

हँस जैन खण्डवा

धर्म और संस्कृति ग्रुप

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