Posted in मंत्र और स्तोत्र

#महामृत्युंजय_मंत्र सिर्फ धार्मिक मंत्र नहीं, संपूर्ण विज्ञान ह।*

भगवान शिव के सबसे प्रमुख मंत्रों में से एक मंत्र महामृत्युंजय मंत्र का सिर्फ धार्मिक महत्व नहीं है, अपितु श्वर विज्ञान के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र के अक्षरों का उच्चारण करने से शरीर में जो कंपन होता है, उससे हमारे शरीर की नाड़ियों को शुद्ध करने और तेज करने में मदद करता है।

शिवपुराण के अनुसार शिव को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का जाप नितांत आवश्यक है। कोई बीमार, घायल हो तो उनकी रक्षा के लिए इस मंत्र का संकल्प के साथ जाप बहुत असरदार माना गया है। ग्रंथों के अनुसार इस मंत्र के जाप से अकाल मृत्यु का योग तक टाला जा सकता है। टाले जा सकते हैं।

इसके पीछे सिर्फ धर्म नहीं है बल्कि पूरा स्वर सिद्धांत है। इसलिए इसे संगीत का विज्ञान भी कहा जाता है। महामृत्युंजय मंत्र की शुरुआत ऊँ अक्षर से होती है। इसका लंबे स्वर और गहरी साँस के साथ उच्चारण किया जाता है। इससे शरीर में मौजूद सूर्य और चंद्र नाड़ियों में कंपन उत्पन्न होता है। हमारे शरीर में मौजूद सप्तचक्रों के आसपास एनर्जी का संचार होता है। यह संचार ही मंत्र पढ़ने वाले और सुनने वाले के भी शरीर पर होता है। नाड़ियों और चक्रों में जो ऊर्जा का संचार होता है। इन चक्रों के कंपन से शरीर में शक्ति आती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसे लंबे श्वरऔर गहरी सांस के साथ जाप करने से बीमारियों से जल्दी मुक्ति मिलती है।

जहाँ महामृत्युंजय मंत्र जप करने से अकाल मृत्यु टलती है, वहीं आरोग्यता की भी प्राप्ति होती है। यदि स्नान करते समय शरीर पर लोटे से पानी डालते वक्त इस मंत्र का जप करने से स्वास्थ्य – लाभ होता है।
दूध में निहारते हुए इस मंत्र का जप किया जाए और फिर वह दूध पी लिया जाए तो यौवन की सुरक्षा में भी सहायता मिलती है। साथ ही इस मंत्र का जप करने से बहुत सी बाधाएं दूर होती हैं, अतः इस मंत्र का यथासंभव जप करना चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र से शिव पर अभिषेक करने से जीवन में कभी सेहत की समस्या नहीं आती।
निम्नलिखित स्थितियों में इस मंत्र जाप का विधान है——

(1) ज्योतिष के अनुसार यदि जन्म, मास, गोचर और दशा, अंतर्दशा, स्थूलदशा आदि में ग्रहपीड़ा होने का योग हो।

(2) किसी महारोग से कोई पीड़ित होने पर।

(3) जमीन-जायदाद के बंटवारे की संभावना हो।

(4) हैजा-प्लेग आदि महामारी से लोग मर रहे हों।

(5) राज्य या संपदा के जाने का अंदेशा हो।

(6) धन-हानि हो रही हो।

(7) मेलापक में नाड़ीदोष, षडाष्टक आदि आता हो।
(8) राजभय हो।
(9) मन धार्मिक कार्यों से विमुख हो गया हो।
(10) राष्ट्र का विभाजन हो गया हो।
(11) मनुष्यों में परस्पर घोर क्लेश हो रहा हो।
(12) त्रिदोषवश रोग हो रहे हों।

महामृत्युंजय मंत्र जप में जरूरी सावधानियां

महामृत्युंजय मंत्र का जप करना परम फलदायी है, लेकिन इस मंत्र के जप में कुछ सावधानियां रखना चाहिए जिससे कि इसका संपूर्ण लाभ प्राप्त हो सके और किसी भी प्रकार के अनिष्ट की संभावना न रहे।

  1. मंत्र जप का उच्चारण शुद्धता से करें।
  2. एक निश्चित संख्या में जप करें। पूर्व दिवस में जपे गए मंत्रों से, आगामी दिनों में कम मंत्रों का जप न करें। यदि चाहें तो अधिक जप सकते हैं।

  3. मंत्र का उच्चारण होठों से बाहर नहीं आना चाहिए। यदि अभ्यास न हो तो धीमे स्वर में जप करें।

  4. जप काल में धूप-दीप जलते रहना चाहिए।

  5. रुद्राक्ष की माला पर ही जप करें।

  6. माला को गौमुखी में रखें। जब तक जप की संख्या पूर्ण न हो, माला को गौमुखी से बाहर न निकालें।

  7. जप काल में शिवजी की प्रतिमा, तस्वीर, शिवलिंग या महामृत्युंजय यंत्र पास में रखना अनिवार्य है।

  8. महामृत्युंजय के सभी जप कुशा के आसन के ऊपर बैठकर करें।

  9. जप काल में दुग्ध मिले जल से शिवजी का अभिषेक करते रहें या शिवलिंग पर चढ़ाते रहें।

  10. महामृत्युंजय मंत्र के सभी प्रयोग पूर्व दिशा की तरफ मुख करके ही करें।

  11. जिस स्थान पर जपादि का शुभारंभ हो, वहीं पर आगामी दिनों में भी जप करना चाहिए।

  12. जपकाल में ध्यान पूरी तरह मंत्र में ही रहना चाहिए, मन को इधर-उधर न भटकाएं।

  13. जपकाल में आलस्य व उबासी को ना आने दें।

  14. मिथ्या बातें न करें।

  15. जपकाल में स्त्री सेवन न करें।

  16. जपकाल में मांसाहार त्याग दें।


गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के बचाव के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप लोग कराते रहे हैं, लेकिन इसे महज उनकी आस्था ही माना जाता रहा है। लेकिन अब दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में इसके प्रभाव को जानने के लिए स्टडी की जा रही है। इस मंत्र के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास को साइंटिफिक तरीके से प्रमाणित करने के लिए स्टडी की जा रही है। हेड इंजरी के मरीजों पर इस मंत्र को सुनाने का प्रयोग देश में पहली बार राम मनोहर लोहिया अस्पताल में किया गया है, जिसके अच्छे संकेत भी मिल रहे हैं।

रिसर्च करने वाले डॉक्टर का दावा है कि एक-दो साल के अंदर फाइनल रिपोर्ट आ जाएगी। अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉक्टर अजय चौधरी और उनकी टीम इस पर स्टडी कर रही है। उन्होंने बताया कि समय-समय पर उपवास (पीरियॉडिक फास्टिंग) का चलन अपने देश में हजारों साल से है। श्रद्धालु चतुर्दशी, एकादशी जैसे व्रत रखते हैं, लेकिन देश में इस पर कोई स्टडी नहीं हुई है। 2016 में मेडिसिन का नोबेल प्राइज जिस जापानी डॉक्टर को मिला, उन्होंने पीरियॉडिक फास्टिंग पर ही स्टडी की थी। जापानी डॉक्टर ने अपनी स्टडी में बताया कि पीरियॉडिक फास्ट करने वालों के अंदर बीमारी वाले सेल्स खत्म हो जाते हैं। खासकर कैंसर सेल्स मर जाते हैं।

देखें लिंक :-

https://youtu.be/KbKY9stKxAg

  • via #MMSSamvaad, download goo.gl/W2Wugj

Author:

Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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